क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि एक 'ग्रेट आइडिया' आपको रातों रात अमीर बना देगा। मुबारक हो, आप अपनी मेहनत और पैसा दोनों कुएं में डाल रहे हैं। बिना इन ५ डिसिप्लिन के आपका स्टार्टअप बस एक महंगा शौक बनकर रह जाएगा और आप बस दूसरों की सक्सेस देखते रह जाएंगे।
लेकिन फिक्र मत कीजिए। आज हम कर्टिस कार्लसन की इस बुक से वह राज खोलेंगे जो आपके फेल होने के डर को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे। चलिए जानते हैं वे ३ लेसन जो आपके बिजनेस को जीरो से हीरो बना सकते हैं।
लेसन १ : एन ए बी सी (NABC) का जादू - क्या आपका आइडिया सच में काम का है?
मान लीजिए आपके पास एक बहुत ही "क्रांतिकारी" आइडिया आया है। आपको लगता है कि बस अब तो पैसा ही पैसा होगा। आप अपने दोस्तों को बताते हैं और वे कहते हैं कि भाई तू तो अगला इलोन मस्क है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लोग उस चीज के लिए पैसे देंगे भी या नहीं। कर्टिस कार्लसन कहते हैं कि बिना NABC फ्रेमवर्क के कोई भी इनोवेशन सिर्फ एक ख्याली पुलाव है। अब यह NABC क्या बला है। इसे जरा आसान भाषा में समझते हैं।
सबसे पहले आता है N यानी Need (जरूरत)। हमारे देश में आधे से ज्यादा स्टार्टअप इसलिए फेल होते हैं क्योंकि वे ऐसी समस्या का हल निकाल रहे होते हैं जो असल में है ही नहीं। जैसे कि मान लीजिए आप एक ऐसा छाता बनाते हैं जो आपको धूप से तो बचाएगा लेकिन बारिश में गीला हो जाएगा। अब भाई, धूप से बचने के लिए तो लोग पेड़ के नीचे भी खड़े हो सकते हैं। क्या वाकई किसी को इसकी जरूरत है। लेसन सीधा है - पहले मार्केट की असली तकलीफ ढूंढिए, अपनी कल्पना नहीं।
इसके बाद आता है A यानी Approach (तरीका)। अब आपने जरूरत तो पकड़ ली, लेकिन आपका उसे सुलझाने का तरीका क्या है। अगर आप आज के जमाने में चिट्ठी भेजने के लिए कबूतर पालने की सलाह देंगे, तो लोग आपको पागल ही कहेंगे। आपका तरीका यूनिक होना चाहिए और आज की टेक्नोलॉजी के हिसाब से फिट बैठना चाहिए। यह ऐसा होना चाहिए कि लोग कहें - वाह, पहले ऐसा किसी ने क्यों नहीं सोचा।
तीसरा है B यानी Benefit (फायदा)। यहाँ लोग अक्सर गलती करते हैं। वे फीचर्स गिनाने लगते हैं। कस्टमर को आपके 'फीचर्स' से मतलब नहीं है, उसे अपने 'फायदे' से मतलब है। अगर आप फोन बेच रहे हैं, तो उसे ये मत बताइए कि इसमें इतने मेगाहर्ट्ज का प्रोसेसर है। उसे ये बताइए कि भाई, इसमें गेम नहीं अटकेगा और तेरी फोटो एकदम हीरो जैसी आएगी। अगर फायदा साफ नहीं है, तो आपका इनोवेशन कूड़ेदान में जाएगा।
आखिर में आता है C यानी Competition (कॉम्पिटिशन)। आप अकेले तो हैं नहीं। मार्केट में पहले से ही बड़े बड़े खिलाड़ी बैठे हैं। आपका आइडिया उनके मुकाबले कितना बेहतर है। अगर आप वही दे रहे हैं जो पड़ोस वाली दुकान पर सस्ता मिल रहा है, तो लोग आपके पास क्यों आएंगे। आपको यह साबित करना होगा कि आप दूसरों से अलग और बेहतर कैसे हैं।
एक रियल लाइफ उदाहरण देखिए। मान लीजिए आप एक चाय की दुकान खोलना चाहते हैं।
- Need: लोगों को ऑफिस के पास कड़क और सफाई वाली चाय चाहिए।
- Approach: आप कुल्हड़ चाय के साथ साथ बैठने के लिए अच्छी जगह देते हैं।
- Benefit: कस्टमर को थकान से राहत और अच्छी वाइब मिलती है।
- Competition: नुक्कड़ वाली टपरी पर गंदगी है, लेकिन आपकी दुकान साफ और प्रीमियम है।
अगर आपका आइडिया इन चार कसौटियों पर खरा नहीं उतरता, तो समझ लीजिए आप बस अपना वक्त बर्बाद कर रहे हैं। असल इनोवेशन वही है जो लोगों की जेब से पैसा निकलवा सके और उनके चेहरे पर मुस्कान ला सके।
लेसन २ : इनोवेशन चैंपियन - क्या आपके पास वह पागलपन है?
आपने एन ए बी सी फ्रेमवर्क से अपना आइडिया तो चेक कर लिया। लेकिन क्या आपको लगता है कि सिर्फ एक अच्छे प्लान से काम बन जाएगा। बिल्कुल नहीं। कर्टिस कार्लसन कहते हैं कि बिना एक "इनोवेशन चैंपियन" के दुनिया का सबसे बड़ा आइडिया भी ऑफिस की फाइलों में दबकर मर जाता है। अब यह चैंपियन कोई गोल्ड मेडल जीतने वाला एथलीट नहीं है। यह वह इंसान है जिसके खून में अपने आइडिया को लेकर एक अलग ही लेवल का जुनून दौड़ता है।
हमारे देश में अक्सर क्या होता है। हम एक आइडिया सोचते हैं और फिर कमिटी बिठा देते हैं। दस लोग अपनी राय देते हैं और अंत में वह आइडिया इतना फीका पड़ जाता है कि उसकी आत्मा ही खत्म हो जाती है। चैंपियन वह होता है जो इन दस लोगों की ना सुनने के बाद भी अपने विजन पर अड़ा रहता है। वह उस जिद्दी बच्चे की तरह है जिसे खिलौना चाहिए तो बस चाहिए। फर्क सिर्फ इतना है कि यहाँ खिलौना नहीं, बल्कि कस्टमर की प्रॉब्लम का सॉल्युशन चाहिए।
एक असली चैंपियन का काम सिर्फ आदेश देना नहीं होता। उसका काम होता है अपनी टीम को उस सपने पर यकीन दिलाना जो अभी तक हकीकत बना ही नहीं है। वह बाधाओं को देखता है और कहता है कि चलो इसे तोड़ते हैं। वह हार मानने को तैयार नहीं होता। अगर आपके प्रोजेक्ट में कोई ऐसा इंसान नहीं है जो उस काम के लिए अपनी नींद कुर्बान कर सके, तो समझ लीजिए आपका इनोवेशन वेंटिलेटर पर है।
मान लीजिए आप एक ऑफिस में काम करते हैं और आपने सोचा कि लंच ब्रेक में सबको हेल्दी खाना मिलना चाहिए। आपने प्लान बनाया लेकिन ऑफिस का मैनेजर कहता है कि बजट नहीं है। एचआर कहती है कि वेंडर नहीं मिलेगा। अब अगर आप एक साधारण इंसान हैं, तो आप चुपचाप अपना सैंडविच खाएंगे और सो जाएंगे। लेकिन अगर आप एक "इनोवेशन चैंपियन" हैं, तो आप हार नहीं मानेंगे।
आप खुद वेंडर ढूंढ कर लाएंगे। आप मैनेजर को दिखाएंगे कि कैसे हेल्दी खाने से लोग कम बीमार पड़ेंगे और काम ज्यादा होगा। आप तब तक पीछे पड़े रहेंगे जब तक ऑफिस की कैंटीन में सलाद नहीं आ जाता। यही वह स्पिरिट है जो एक छोटे से स्टार्टअप को बड़ी कंपनी बना देती है। बिना इस जोश के, हर बड़ा प्रोजेक्ट बस मीटिंग्स और पीपीटी तक ही सीमित रह जाता है।
इनोवेशन कोई सरकारी फाइल नहीं है जिसे धक्का मारकर आगे बढ़ाया जाए। यह एक आग है जिसे जलते रहने के लिए एक लीडर चाहिए। एक ऐसा लीडर जो मुश्किल समय में अपनी टीम का ढाल बने और कामयाबी मिलने पर उन्हें आगे कर दे। क्या आप अपनी लाइफ या अपने काम में वह चैंपियन बनने को तैयार हैं। क्योंकि दुनिया को आइडिया देने वाले बहुत मिलते हैं, लेकिन उन्हें सच करने वाले चैंपियन बहुत कम होते हैं।
लेसन ३ : टीम अलाइनमेंट - अकेले आप सिर्फ सपने देख सकते हैं, जीत सिर्फ टीम दिलाती है
अब तक आपने अपना आइडिया भी चेक कर लिया और आपके अंदर का चैंपियन भी जाग गया है। लेकिन क्या आप अकेले पूरी दुनिया बदल देंगे। कर्टिस कार्लसन का तीसरा सबसे बड़ा लेसन है - "टीम अलाइनमेंट"। इसका मतलब है कि आपकी टीम के हर मेंबर का विजन बिल्कुल वैसा ही साफ होना चाहिए जैसा आपका है। अगर आपकी टीम का हर घोड़ा अलग दिशा में भागेगा, तो आपकी सफलता की गाड़ी बीच सड़क पर ही दम तोड़ देगी।
अक्सर हमारे यहाँ ऑफिस में क्या होता है। बॉस कहता है कि हमें चांद पर जाना है। मार्केटिंग वाला कहता है कि बजट नहीं है, इंजीनियर कहता है कि रॉकेट का टायर पंचर है और सेल्स वाला कहता है कि चांद पर जमीन कौन खरीदेगा। यह कोई टीम नहीं है, यह तो बस एक भीड़ है। असली इनोवेशन तब होता है जब पूरी टीम एक ही सुर में गाती है। जब सबको पता हो कि हम यह काम क्यों कर रहे हैं और इससे कस्टमर की जिंदगी कैसे बदलेगी।
हकीकत तो यह है कि टीम में छोटे छोटे झगड़े और ईगो की लड़ाइयां अच्छे अच्छे आइडियाज का कत्ल कर देती हैं। लोग अक्सर भूल जाते हैं कि वे कंपनी को जिताने के लिए आए हैं, अपनी बात ऊपर रखने के लिए नहीं। कर्टिस कार्लसन कहते हैं कि एक सफल टीम वह है जहाँ लोग एक दूसरे को फीडबैक देने से डरे नहीं। जहाँ गलती होने पर एक दूसरे पर उंगली उठाने के बजाय, सब मिलकर उसका समाधान निकालें।
मान लीजिए आप अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक ट्रिप प्लान कर रहे हैं।
- आप चाहते हैं पहाड़ों पर जाना (इनोवेशन का गोल)।
- आपका एक दोस्त कहता है कि उसे सर्दी लगती है (फीडबैक)।
- दूसरा कहता है कि उसकी गाड़ी की सर्विस नहीं हुई (रुकावट)।
- तीसरा कहता है कि उसके पास पैसे कम हैं (बजट)।
अगर आप एक टीम की तरह काम नहीं करेंगे, तो आप पूरा हफ्ता बस बहस करने में निकाल देंगे और अंत में घर पर बैठकर टीवी देखेंगे। लेकिन अगर टीम अलाइन है, तो आप सर्दी वाले के लिए जैकेट ले लेंगे, गाड़ी ठीक करवाएंगे और पैसे शेयर कर लेंगे। नतीजा - आप पहाड़ों की ताजी हवा का मजा लेंगे। बिजनेस में भी यही अलाइनमेंट आपको कॉम्पिटिशन से कोसों आगे ले जाता है।
इनोवेशन कोई वन मैन शो नहीं है। यह एक रिले रेस की तरह है जहाँ हर खिलाड़ी को अपना हिस्सा पूरी ताकत से दौड़ना होता है। जब आपकी पूरी टीम एक ही मकसद के लिए पागल हो जाती है, तो नामुमकिन दिखने वाले लक्ष्य भी आसान लगने लगते हैं। याद रखिए, कस्टमर को आपकी अंदरूनी लड़ाइयों से कोई लेना देना नहीं है, उसे सिर्फ एक बेहतरीन प्रोडक्ट चाहिए। और वह प्रोडक्ट तभी बनेगा जब आपकी टीम एक साथ मिलकर जादू पैदा करेगी।
तो दोस्तों, कर्टिस कार्लसन की यह किताब हमें सिर्फ बिजनेस करना नहीं, बल्कि जीतने का सलीका सिखाती है। चाहे वह NABC से अपने आइडिया को परखना हो, एक चैंपियन की तरह लड़ना हो या अपनी टीम को एक साथ जोड़कर रखना हो। अगर आप इन ५ डिसिप्लिन को अपनी लाइफ में उतार लेते हैं, तो सफलता आपके पीछे नहीं, आप सफलता के आगे चलेंगे। आज ही खुद से पूछिए - क्या आप सिर्फ एक और भीड़ का हिस्सा हैं या आप सच में कुछ नया करने का दम रखते हैं।
उठिए, बदलिए और दुनिया को वह दीजिए जिसकी उसे सच में जरूरत है। क्योंकि कल कभी नहीं आता, जो है बस आज ही है।
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