आप हर रोज सोशल मीडिया पर अपना कचरा कंटेंट डाल रहे हैं और फिर रोते हैं कि सेल्स नहीं आ रही। शायद आपको लगता है कि लोग आपके बोरिंग विज्ञापनों का इंतजार कर रहे हैं। बिना वैल्यू दिए राइट हुक मारना बंद करिए वरना आपका ब्रांड जमीन पर पड़ा मिलेगा।
सोशल मीडिया की दुनिया में अगर आपको बड़ा खिलाड़ी बनना है तो गैरी वी की यह बुक आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। चलिए आज डीवाई बुक्स पर जानते हैं वो ३ बड़े लेसन जो आपके बिजनेस को आसमान पर ले जाएंगे।
लेसन १ : जैब मारना सीखिए वरना मार्केट से बाहर हो जाइए
देखिए भाई साहब बात ऐसी है कि आज के जमाने में हर कोई सोशल मीडिया पर आकर बस चिल्ला रहा है कि मेरा माल खरीद लो। आप भी शायद यही गलती कर रहे हैं। आप अपने फेसबुक या इंस्टाग्राम पर जाते हैं और सीधे अपना प्रोडक्ट चिपका देते हैं। इसे गैरी वी कहते हैं राइट हुक मारना। लेकिन क्या आपको लगता है कि जनता बेवकूफ है जो आपके पहले ही मुक्के पर ढेर हो जाएगी। बिल्कुल नहीं। असल में सोशल मीडिया पर बिजनेस करना एक बॉक्सिंग मैच की तरह है। आपको पहले छोटे छोटे जैब मारने पड़ते हैं। जैब का मतलब है वो कंटेंट जो लोगों की लाइफ में वैल्यू ऐड करे।
सोचिए आप किसी अनजान शादी में घुस गए और बिना किसी को नमस्ते कहे सीधे स्टेज पर चढ़कर अपना चश्मा बेचने लगे। लोग आपको क्या समझेंगे। वही जो अभी आपके फॉलोअर्स आपको समझ रहे हैं यानी एक सिरफिरा सेल्समैन। गैरी वी कहते हैं कि आपको पहले जैब देना होगा। यानी आपको लोगों को हंसाना होगा उनको कुछ सिखाना होगा या उनको एंटरटेन करना होगा। जैब वो फ्री गिफ्ट है जो आप अपनी ऑडियंस को देते हैं बिना किसी उम्मीद के। जब आप बार बार जैब मारते हैं तो आप लोगों का दिल जीत रहे होते हैं। आप उनके दिमाग में एक जगह बना रहे होते हैं।
मान लीजिए आपका जिम का बिजनेस है। अब अगर आप रोज बस यह पोस्ट करेंगे कि आज ही मेंबरशिप लो और डिस्काउंट पाओ तो लोग आपको अनफॉलो करने में एक सेकंड नहीं लगाएंगे। लेकिन अगर आप उनको बताते हैं कि घर पर बिना सामान के सीना कैसे चौड़ा करें या ऑफिस में बैठे बैठे पीठ का दर्द कैसे ठीक करें तो यह हुआ एक तगड़ा जैब। लोग इसे देखेंगे शेयर करेंगे और आपके फैन बन जाएंगे। आप उनको फ्री में वैल्यू दे रहे हैं और उन्हें लग रहा है कि यार यह बंदा तो बड़ा नेक है। बस यही तो खेल है।
ज्यादातर लोग इतने उतावले होते हैं कि उन्हें लगता है आज रील डाली और कल लैम्बोर्गिनी घर के बाहर खड़ी होगी। भाई साहब थोड़ा सबर रखिए। गैरी वी साफ कहते हैं कि जैब जैब जैब और फिर राइट हुक। यानी कम से कम तीन बार निस्वार्थ भाव से वैल्यू दीजिए और उसके बाद ही अपनी बात रखिए। अगर आप सिर्फ राइट हुक मारेंगे तो लोग आपके मुक्के से बचकर निकल जाएंगे और आप हवा में हाथ पैर मारते रह जाएंगे। सोशल मीडिया कोई दुकान नहीं है जहाँ आप लाउडस्पीकर लेकर खड़े हो जाएं। यह एक महफिल है जहाँ आपको पहले अपनी इज्जत बनानी पड़ती है।
आजकल के इन्फ्लुएंसर भी यही गलती करते हैं। एक लाख फॉलोअर क्या हुए खुद को भगवान समझने लगते हैं और हर दूसरी पोस्ट में किसी घटिया तेल का प्रमोशन करने लगते हैं। क्या आपको लगता है कि जनता को समझ नहीं आता। वो बस एक बटन दबाएंगे और आप उनकी दुनिया से गायब। इसलिए अगर मार्केट में टिकना है और अपनी धाक जमानी है तो जैब मारने की कला सीखिए। बिना मतलब की वैल्यू दीजिए। इतना कंटेंट दीजिए कि सामने वाले को शर्म आ जाए कि यार यह बंदा इतना कुछ फ्री में दे रहा है तो इसका पेड कोर्स या प्रोडक्ट कितना गजब होगा।
जब आप सही तरह से जैब मारते हैं तो आप असल में अपनी ऑडियंस के साथ एक रिश्ता बना रहे होते हैं। और याद रखिए बिजनेस ट्रांजेक्शन से नहीं बल्कि ट्रस्ट से चलता है। अगर आपने एक बार भरोसा जीत लिया तो फिर आप मिट्टी भी बेचेंगे तो लोग लाइन लगाकर खड़े रहेंगे। तो क्या आप तैयार हैं अपने ईगो को साइड में रखकर पहले लोगों की मदद करने के लिए। अगर हाँ तो समझ लीजिए कि आपने बॉक्सिंग की रिंग में अपनी जगह पक्की कर ली है। लेकिन रुकिए सिर्फ जैब मारना ही काफी नहीं है। आपको यह भी पता होना चाहिए कि आप किस पिच पर खेल रहे हैं।
लेसन २ : हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की अपनी अलग भाषा है
क्या आप अपनी शादी में बरमूडा पहनकर जाते हैं। या फिर जिम में शेरवानी पहनकर डंबल उठाते हैं। नहीं ना। क्योंकि आपको पता है कि किस जगह पर क्या पहनना है और कैसे बात करनी है। लेकिन जब बात सोशल मीडिया की आती है, तो आप लोग सारा दिमाग घुटनों में रख देते हैं। आप वही सेम रील फेसबुक पर डालते हैं, वही इंस्टाग्राम पर और वही लिंक्डइन पर। गैरी वी कहते हैं कि यह वैसी ही बेवकूफी है जैसे आप किसी मंदिर में जाकर डीजे बजाने लगें। लोग आपको प्रसाद नहीं, लात देंगे। हर प्लेटफॉर्म का अपना एक माहौल होता है, अपना एक कल्चर होता है और आपको उसी के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है।
फेसबुक एक तरह से आपके घर का आंगन है जहाँ बुआ, फूफा और पुराने दोस्त बैठे हैं। वहां लोग इमोशनल बातें सुनना चाहते हैं, लंबे वीडियो देखना पसंद करते हैं। वहां आपको थोड़ा देसी और अपनेपन वाला टच देना पड़ता है। अब वही चीज अगर आप इंस्टाग्राम पर करेंगे तो लोग आपको पुराना मॉडल समझकर छोड़ देंगे। इंस्टाग्राम एक हाई प्रोफाइल पार्टी की तरह है जहाँ हर कोई सुंदर दिखना चाहता है। वहां लोग विजुअल्स के भूखे हैं। वहां आपकी फोटो और वीडियो की क्वालिटी ऐसी होनी चाहिए कि सामने वाले की आंखें चुंधिया जाएं। अगर वहां आपने पिक्सेल फटे हुए वीडियो डाले, तो समझ लीजिए आपने अपनी बेइज्जती खुद ही कर ली है।
और फिर आता है लिंक्डइन, जो एक कड़क सूट वाली ऑफिस मीटिंग की तरह है। वहां अगर आप अपनी बिल्ली के साथ नाचते हुए वीडियो डालेंगे, तो लोग समझेंगे कि आपका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। वहां लोग करियर की बात, बिजनेस की ग्रोथ और प्रोफेशनल टिप्स ढूंढ रहे हैं। गैरी वी का कहना है कि आपको हर प्लेटफॉर्म की भाषा यानी 'नेटिव लैंग्वेज' सीखनी होगी। कंटेंट की आत्मा एक हो सकती है, लेकिन उसका शरीर हर प्लेटफॉर्म के हिसाब से अलग होना चाहिए। जैसे एक ही खबर को एक गंभीर अखबार अलग तरीके से लिखता है और एक गॉसिप मैग्जीन उसे मिर्च मसाला लगाकर छापती है। आपको भी वही एडिटर बनना होगा।
ज्यादातर लोग क्या करते हैं। एक वीडियो बनाया और 'शेयर टू ऑल' का बटन दबा दिया। बधाई हो, आपने अपनी मेहनत पर खुद ही पानी फेर दिया। अगर आप ट्विटर पर हैं, जिसे अब लोग एक्स कहते हैं, तो वहां शब्दों का खेल है। वहां आपको कम शब्दों में गहरी बात कहनी है, थोड़ा करंट अफेयर्स से जुड़ना है। वहां लोग बहस करना और अपनी राय देना पसंद करते हैं। वहां आपका 'ज्ञान' नहीं, आपका 'नजरिया' बिकता है। अगर आप वहां भी इंस्टाग्राम वाली फोटो चिपका रहे हैं, तो आप बस वहां की भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाएंगे, कोई आपको नोटिस नहीं करेगा।
सोचिए आपने एक बहुत बढ़िया रेसिपी सीखी। अब अगर आप उसे अपनी दादी को बता रहे हैं, तो आप अलग लहजा इस्तेमाल करेंगे। लेकिन अगर वही रेसिपी आप अपनी मॉडर्न गर्लफ्रेंड को बता रहे हैं, तो आपकी बातें और उदाहरण बदल जाएंगे। सोशल मीडिया कंटेंट भी बिल्कुल वैसा ही है। कंटेंट सिर्फ किंग नहीं है, कांटेक्स्ट यानी संदर्भ भगवान है। अगर आपने सही बात गलत जगह पर कह दी, तो उसका कोई मोल नहीं है। लोग स्क्रॉल करते हुए आपके कंटेंट को इग्नोर कर देंगे क्योंकि वो उस प्लेटफॉर्म के माहौल से मेल नहीं खा रहा।
गैरी वी समझाते हैं कि जब आप किसी प्लेटफॉर्म पर जाते हैं, तो आप वहां एक गेस्ट की तरह होते हैं। आपको वहां के नियम मानने पड़ेंगे। आपको देखना होगा कि वहां के लोग किस चीज पर ज्यादा रिएक्ट कर रहे हैं। क्या वहां मीम्स चल रहे हैं। क्या वहां लॉन्ग फॉर्म आर्टिकल पढ़े जा रहे हैं। आपको गिरगिट की तरह रंग बदलना सीखना होगा। यह कोई धोखाधड़ी नहीं है, यह समझदारी है। जो ब्रांड यह बात समझ जाता है, वो रातों-रात वायरल हो जाता है और जो जिद्दी बने रहते हैं, वो बस अपने ही पोस्ट को खुद लाइक करके खुश होते रहते हैं। अब जब आप प्लेटफॉर्म की भाषा समझ गए हैं, तो समय आ गया है उस आखिरी मुक्के का जो गेम खत्म कर देगा।
लेसन ३ : राइट हुक मारिए पर सलीके के साथ
अब तक आपने बहुत सारे जैब मार लिए। आपने लोगों को हंसाया, सिखाया और प्लेटफॉर्म के हिसाब से बढ़िया कंटेंट भी परोसा। अब आपकी ऑडियंस आपको प्यार करने लगी है। उन्हें आप पर भरोसा है। अब समय आ गया है वो काम करने का जिसके लिए आप यहाँ आए थे यानी अपना प्रोडक्ट बेचना या अपना काम निकलवाना। इसे गैरी वी कहते हैं राइट हुक। लेकिन यहाँ भी ९९ परसेंट लोग गड़बड़ कर देते हैं। वो इतना जोर से मुक्का मारते हैं कि कस्टमर डर कर भाग जाता है। राइट हुक का मतलब यह नहीं है कि आप लोगों के गले में अपना सामान जबरदस्ती उतार दें।
सही राइट हुक वो है जो बहुत ही नेचुरल लगे। जब आप पहले ही इतनी वैल्यू दे चुके होते हैं, तो आपकी ऑडियंस खुद ही यह पूछने लगती है कि भाई साहब आपका कोई कोर्स है क्या। या आपकी सर्विस कहाँ से ले सकते हैं। तब जब आप अपना ऑफर सामने रखते हैं, तो वो लोगों को विज्ञापन नहीं बल्कि एक मदद की तरह लगता है। सोचिए आपने किसी दोस्त की गाड़ी कई बार ठीक करवाई है और एक दिन आप उसे कहते हैं कि यार मैं पुरानी गाड़ियों का स्पेयर पार्ट भी बेचता हूँ, अगर चाहिए तो बताना। क्या वो आपसे बुरा मानेगा। बिल्कुल नहीं, बल्कि वो खुशी-खुशी आपसे ही खरीदेगा।
राइट हुक मारते समय आपको क्लियर होना पड़ेगा। गोल-मोल बातें मत कीजिए। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी वेबसाइट पर जाएं, तो साफ-साफ कहिए। अगर आप चाहते हैं कि वो आपका प्रोडक्ट खरीदें, तो उसका फायदा बताइए। लेकिन याद रखिए, राइट हुक तभी काम करेगा जब आपने पीछे बहुत सारे जैब मारे हों। अगर आपने आते ही सीधे राइट हुक मारना शुरू कर दिया, तो आप उस सेल्समैन की तरह लगेंगे जो घर का दरवाजा खुलते ही पैर अंदर फंसा देता है। ऐसे लोगों को कोई पसंद नहीं करता।
गैरी वी कहते हैं कि बिजनेस में आप दूसरों से कुछ मांगने का हक तभी कमाते हैं जब आप उन्हें पहले बहुत कुछ दे चुके हों। सोशल मीडिया की इस शोर भरी दुनिया में अगर आप सिर्फ चिल्लाएंगे तो कोई नहीं सुनेगा। आपको पहले शांति से लोगों की सेवा करनी होगी। और जब आप अपना राइट हुक मारें, तो वो इतना सटीक होना चाहिए कि सामने वाले को लगे कि यही तो वो चीज थी जिसकी मुझे तलाश थी। आपका कॉल टू एक्शन यानी सीटीए बिल्कुल साफ और आसान होना चाहिए। लोगों को कन्फ्यूज मत कीजिए कि अब आगे क्या करना है।
तो भाई साहब, कहानी का सार यह है कि अगर आपको इस डिजिटल युग में जीतना है, तो आपको एक प्रोफेशनल बॉक्सर बनना होगा। आपको सबर रखना होगा। आपको लोगों के दिल में अपनी जगह बनानी होगी। और जब सही मौका मिले, तब अपना दांव खेलना होगा। याद रखिए, सोशल मीडिया पर लोग आपसे कुछ खरीदने नहीं आए हैं, वो वहां एन्जॉय करने आए हैं। अगर आप उनके मजे में खलल डाले बिना अपना काम कर लेते हैं, तो आप असली बाजीगर हैं। वरना तो दुनिया में करोड़ों लोग पोस्ट डाल ही रहे हैं, क्या ही फर्क पड़ता है।
आज की इस भागदौड़ वाली लाइफ में हम सब बहुत जल्दी में हैं। हमें लगता है कि रातों-रात सक्सेस मिल जाएगी। लेकिन गैरी वी की यह बुक हमें सिखाती है कि असली ताकत रिश्तों में है। आप अपने ऑडियंस के साथ कैसा रिश्ता बनाते हैं, वही आपकी असली कमाई है। तो आज से ही तय कीजिए कि आप सिर्फ सेल्स की बातें नहीं करेंगे, बल्कि लोगों की लाइफ में असलियत में वैल्यू ऐड करेंगे।
अगर आपको यह आर्टिकल काम का लगा, तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो अपनी सोशल मीडिया मार्केटिंग से परेशान है। और हमें नीचे कमेंट करके बताइए कि आपका अगला जैब क्या होने वाला है। चलिए, मिलकर इस डिजिटल दुनिया में अपनी धाक जमाते हैं।
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