Learning Leadership (Hindi)


अगर आपको लगता है कि लीडरशिप सिर्फ ऑफिस के बॉस के लिए है तो मुबारक हो। आप अपनी लाइफ की स्टियरिंग व्हील किसी और को देकर खुद पीछे की सीट पर सो रहे हैं। इस किताब को न पढ़कर आप अपनी ग्रोथ का गला खुद घोंट रहे हैं।

आज के इस ब्लॉग में हम जेम्स कूजेस और बैरी पॉसनर की किताब से वो ३ लेसन सीखेंगे जो आपकी पर्सनालिटी को पूरी तरह बदल देंगे। चलिए लीडरशिप के इन सीक्रेट्स की गहराई में उतरते हैं।


लेसन १ : लीडरशिप पैदाईशी नहीं बल्कि सीखी जाने वाली कला है

अक्सर लोग यह सोचते हैं कि लीडर तो बस पैदा होते हैं। जैसे उनके डीएनए में ही कोई खास चिप लगी हो जो उन्हें भीड़ से अलग बनाती है। लेकिन जेम्स कूजेस और बैरी पॉसनर कहते हैं कि यह सबसे बड़ा झूठ है। अगर आप भी यही सोचकर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं कि आपके पास वो करिश्माई पर्सनालिटी नहीं है तो यकीन मानिए आप अपनी नाकामी को एक बहुत ही शानदार बहाना दे रहे हैं। लीडरशिप कोई जादू की छड़ी नहीं है जो किसी को विरासत में मिलती है बल्कि यह एक स्किल है जिसे कोई भी सीख सकता है।

सोचिए उस लड़के के बारे में जो पहली बार जिम जाता है। पहले दिन उससे खाली रॉड भी नहीं उठती और वह वहां खड़े तगड़े लोगों को देखकर सोचता है कि ये तो शुरू से ही ऐसे होंगे। लेकिन हकीकत यह है कि उन मस्कुलर लोगों ने भी कभी जीरो से ही शुरुआत की थी। लीडरशिप भी बिल्कुल उस जिम की मेंबरशिप की तरह है। आपको रोज पसीना बहाना पड़ता है और अपनी लीडरशिप मसल्स को ट्रेन करना पड़ता है। अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ कुर्सी पर बैठने से आप लीडर बन जाएंगे तो फिर तो बस का ड्राइवर भी खुद को पायलट समझने लगेगा।

हम में से बहुत से लोग यह गलती करते हैं कि हम लीडरशिप को सिर्फ एक टाइटल या पद मान लेते हैं। हमें लगता है कि जब विज़िटिंग कार्ड पर मैनेजर लिखा होगा तभी हम लीड करना शुरू करेंगे। यह सोच वैसी ही है जैसे कोई कहे कि जब मैं तैरना सीख जाऊंगा तभी पानी में उतरूंगा। भाई साहब अगर पानी में नहीं उतरोगे तो तैरना क्या डूबना भी नहीं सीख पाओगे। लीडरशिप का मतलब है पहल करना और जिम्मेदारी लेना। यह छोटे छोटे एक्शन से शुरू होती है।

अक्सर हमारे आसपास ऐसे लोग होते हैं जो हर प्रॉब्लम के लिए सरकार या कंपनी या अपने किस्मत को कोसते रहते हैं। यह लोग फॉलोअर्स की कैटेगरी में आते हैं जो सिर्फ इंस्ट्रक्शन का इंतजार करते हैं। वहीं एक लीडर वह होता है जो देखता है कि काम रुका हुआ है और वह बिना किसी के कहे उसे सुलझाने में लग जाता है। इसके लिए आपको किसी डिग्री या ऊंचे पद की जरूरत नहीं है। आपको बस अपनी उस झिझक को मारना है जो आपको आगे बढ़ने से रोकती है।

जब आप यह मान लेते हैं कि लीडरशिप एक सीखने वाली चीज है तो आप खुद को इम्प्रूव करने के लिए तैयार हो जाते हैं। आप फीडबैक लेना शुरू करते हैं और अपनी गलतियों से सीखते हैं। जो इंसान यह सोचता है कि उसे सब पता है वह दरअसल अपनी ग्रोथ का दरवाजा बंद कर चुका होता है। असली लीडर वही है जो हमेशा एक स्टूडेंट बना रहता है। वह जानता है कि आज का जमाना इतनी तेजी से बदल रहा है कि अगर उसने सीखना छोड़ा तो वह इतिहास बन जाएगा।

इसलिए अगर आपको लगता है कि आपमें वो बात नहीं है तो जरा रुकिए और खुद से पूछिए कि क्या आपने कभी कोशिश भी की है। क्या आपने कभी उस डर का सामना किया है जो आपको बोलने से रोकता है। लीडरशिप की शुरुआत खुद को लीड करने से होती है। अगर आप सुबह अलार्म बजने पर खुद को बिस्तर से नहीं उठा सकते तो आप पूरी टीम को क्या खाक लीड करेंगे। यह छोटी जीत ही आपको भविष्य का बड़ा लीडर बनाती है।


लेसन २ : अपनी वैल्यूज को पहचानो और खुद पर यकीन करो

लीडरशिप की दुनिया में सबसे बड़ी गलती लोग यह करते हैं कि वे दूसरों की नकल करने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि अगर वे किसी बड़े सीईओ की तरह बात करेंगे या उनके जैसा कोट पहनेंगे तो वे लीडर बन जाएंगे। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई गधा शेर की खाल ओढ़कर जंगल का राजा बनने की कोशिश करे। जैसे ही वह रेंकना शुरू करेगा उसकी असलियत सबके सामने आ जाएगी। जेम्स कूजेस और बैरी पॉसनर कहते हैं कि एक लीडर की आवाज में दम तब आता है जब वह अपनी खुद की वैल्यूज से जुड़ा होता है। जब तक आपको खुद नहीं पता कि आप किस बात के लिए खड़े हैं तब तक कोई और आपके पीछे क्यों खड़ा होगा।

कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसी बस में चढ़े हैं जिसका ड्राइवर हर दो मिनट में पैसेंजर्स से पूछ रहा है कि भाई साहब रास्ता किधर है। क्या आप उस बस में चैन से बैठ पाएंगे। बिल्कुल नहीं। आप तो बस के रुकने का इंतजार करेंगे ताकि जान बचाकर भाग सकें। लीडर के साथ भी यही होता है। अगर आपके पास अपना कोई विजन नहीं है और आप खुद ही कन्फ्यूज हैं तो आपकी टीम भी हमेशा डरी हुई रहेगी। खुद पर यकीन करने का मतलब यह नहीं है कि आपमें ईगो आ जाए। इसका मतलब यह है कि आपको पता हो कि आपके सिद्धांत क्या हैं। क्या आप ईमानदारी को चुनेंगे या शॉर्टकट को। क्या आप अपनी टीम का साथ देंगे या सिर्फ अपने बोनस के बारे में सोचेंगे।

आजकल के दौर में लोग अपनी वैल्यूज को सेल की तरह बदलते रहते हैं। जिधर फायदा दिखा उधर ही मुड़ गए। ऐसे लोगों को हम लीडर नहीं बल्कि गिरगिट कहते हैं। एक सच्चा लीडर वह है जो तूफान में भी अपनी जगह पर टिका रहता है। लोग आपके पीछे इसलिए नहीं आते कि आपके पास बहुत पैसा है या पावर है। वे इसलिए आते हैं क्योंकि उन्हें आप पर भरोसा होता है। और भरोसा तभी बनता है जब आपके शब्दों और आपके काम में कोई अंतर न हो। अगर आप ऑफिस में कहते हैं कि डिसिप्लिन बहुत जरूरी है लेकिन खुद दोपहर को लंच के बाद ऑफिस आते हैं तो यकीन मानिए आपकी टीम पीछे आपकी बहुत अच्छी कॉमेडी बनाती है।

अक्सर हम सोचते हैं कि दूसरों को इन्फ्लुएंस करने के लिए हमें बहुत ऊंची बातें करनी चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि लोग आपकी बातों से ज्यादा आपके व्यवहार को देखते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपकी टीम मेहनत करे तो आपको सबसे पहले खुद मैदान में उतरना होगा। लीडरशिप कोई ऐसा काम नहीं है जिसे आप रिमोट कंट्रोल से चला सकें। आपको अपनी वैल्यूज को अपने एक्शन में दिखाना पड़ता है। जब आप अपनी बात पर कायम रहते हैं तब लोग आपको एक मजबूत इंसान के रूप में देखते हैं। और लोग हमेशा मजबूत कंधों के सहारे ही चलना पसंद करते हैं।

खुद पर विश्वास करने का मतलब यह भी है कि आप अपनी कमजोरियों को स्वीकार करें। कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता। एक लीडर वह नहीं है जो कभी गलती न करे बल्कि वह है जो अपनी गलती मानकर उसे सुधारने का दम रखे। जो लोग यह दिखाते हैं कि उन्हें सब आता है वे दरअसल बहुत ही डरे हुए लोग होते हैं। उन्हें डर होता है कि अगर उनकी कोई कमजोरी सामने आ गई तो उनकी इज्जत कम हो जाएगी। जबकि असलियत इसके उलट है। जब आप अपनी कमियां स्वीकार करते हैं तो आपकी टीम को आपमें एक इंसान नजर आता है जिसे वे पसंद करते हैं और जिस पर वे भरोसा कर सकते हैं।

तो आज ही एक डायरी उठाइए और अपनी टॉप ३ वैल्यूज लिखिए। पूछिए खुद से कि आपके लिए सबसे ज्यादा जरूरी क्या है। जब आपको इसका जवाब मिल जाएगा तो आपके अंदर से एक ऐसी आवाज निकलेगी जो लोगों के दिलों तक पहुंचेगी। बिना खुद को जाने आप दुनिया को क्या खाक जानेंगे। लीडरशिप बाहर की लड़ाई बाद में है पहले यह आपके अपने अंदर की लड़ाई है। जब आप खुद को जीत लेते हैं तो दुनिया को जीतना बस समय की बात रह जाती है।


लेसन ३ : दूसरों को सशक्त बनाना और टीम में भरोसा जगाना

अगर आपको लगता है कि आप अकेले ही पूरी दुनिया जीत लेंगे तो शायद आप किसी गलतफहमी के शिकार हैं। इतिहास गवाह है कि अकेले तो सिर्फ जंगलों में रहा जा सकता है साम्राज्य नहीं बनाए जा सकते। जेम्स कूजेस और बैरी पॉसनर कहते हैं कि एक महान लीडर वह नहीं है जो अपने फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाता है बल्कि वह है जो नए लीडर्स पैदा करता है। अगर आपकी गैरमौजूदगी में आपकी टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर जाती है तो इसका मतलब है कि आप एक लीडर नहीं बल्कि एक माइक्रोमैनेजर हैं जो अपनी टीम का दम घोंट रहा है।

सोचिए उस शादी वाले घर के बारे में जहां एक फूफा जी होते हैं जिन्हें हर काम में टांग अड़ाने की आदत होती है। हलवाई ने नमक कितना डाला से लेकर टेंट का रंग कैसा है तक सब कुछ उन्हें ही तय करना है। नतीजा क्या होता है। बाकी सब लोग किनारे होकर बैठ जाते हैं और कहते हैं कि जब सब फूफा जी को ही करना है तो हम क्यों मेहनत करें। लीडरशिप में भी यही होता है। जब आप अपनी टीम पर भरोसा नहीं करते और हर छोटी चीज खुद कंट्रोल करना चाहते हैं तो आपकी टीम अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करना बंद कर देती है। वे बस एक रोबोट की तरह काम करने लगते हैं जो सिर्फ कमांड का इंतजार करते हैं।

सच्चा लीडर वह है जो अपनी टीम को पावर देता है। वह उन्हें जिम्मेदारी सौंपता है और उन्हें गलती करने की आजादी देता है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी टीम कुछ नया करे तो आपको उन्हें यह भरोसा दिलाना होगा कि अगर वे फेल भी हुए तो आप उनके पीछे खड़े हैं। जब लोग सुरक्षित महसूस करते हैं तभी वे अपना बेस्ट दे पाते हैं। लेकिन हमारे यहाँ तो मामला उल्टा है। जैसे ही कोई टीम मेंबर गलती करता है बॉस ऐसे चीखता है जैसे उसने देश का खजाना लूट लिया हो। ऐसे माहौल में कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता और बिना रिस्क के कभी कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिलती।

भरोसा एक टू वे ट्रैफिक की तरह है। अगर आप चाहते हैं कि टीम आप पर यकीन करे तो पहले आपको उन पर यकीन करना होगा। लीडरशिप का मतलब यह नहीं है कि आप सबसे स्मार्ट इंसान बनें बल्कि यह है कि आप अपनी टीम के सबसे स्मार्ट लोगों को एक साथ लाएं और उन्हें चमकने का मौका दें। एक अच्छा लीडर वह है जो जीत का क्रेडिट अपनी टीम को देता है और हार की जिम्मेदारी खुद अपने कंधों पर लेता है। लेकिन आजकल के ज्यादातर ऑफिसों में क्रेडिट लेने के लिए तो लंबी लाइन लगी होती है और जब बात जिम्मेदारी की आती है तो सब गायब हो जाते हैं।

अपनी टीम को सशक्त बनाने का मतलब है उन्हें रिसोर्सेस देना और उनकी बाधाओं को दूर करना। आपका काम यह नहीं है कि आप उन्हें बताएं कि काम कैसे करना है बल्कि यह बताना है कि पहुंचना कहां है। रास्ता उन्हें खुद खोजने दीजिए। जब एक इंसान खुद रास्ता खोजता है तो उसका उस काम से लगाव बढ़ जाता है। उसे महसूस होता है कि यह उसका अपना विजन है। यही वह भावना है जो एक साधारण टीम को एक असाधारण टीम में बदल देती है।

अंत में याद रखिए कि लीडरशिप एक सेवा है। आप अपनी टीम के लिए काम करते हैं न कि टीम आपके लिए। जिस दिन आपने यह बात समझ ली उस दिन से लोग आपके लिए नहीं बल्कि आपके साथ काम करना शुरू कर देंगे। यह किताब हमें यही सिखाती है कि लीडरशिप कोई ऐसा टाइटल नहीं है जिसे आप पहनकर घूमते हैं बल्कि यह एक आचरण है जिसे आप रोज जीते हैं। उठिए जिम्मेदारी लीजिए और दूसरों को आगे बढ़ने का मौका दीजिए। यही एक सफल लीडर की असली पहचान है।


लीडरशिप कोई ऐसी चीज नहीं है जो कल आएगी। यह आज और अभी से शुरू होती है। क्या आप आज एक कदम उठाने के लिए तैयार हैं। कमेंट्स में हमें बताएं कि आप अपनी लाइफ में कौन सा एक बदलाव लाएंगे। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे आप एक महान लीडर बनते देखना चाहते हैं। याद रखिए आपकी एक छोटी सी शुरुआत किसी बड़े बदलाव की नींव हो सकती है।

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