The Digital Transformation Handbook (Hindi)


अगर आप अभी भी अपने बिजनेस को पुराने जमाने की तरह चला रहे हैं तो मुबारक हो। आप खुद अपने हाथों से अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं। मार्केट बदल चुका है और आप वहीं अटके हैं। डिजिटल के नाम पर सिर्फ एक फेसबुक पेज बनाना काफी नहीं है भाई। अगर यह बुक नहीं पढ़ी तो आप उस सीढ़ी को मिस कर रहे हैं जो आपके कॉम्पिटिटर्स को आपसे मीलों आगे ले जा रही है।

डेविड रोजर्स की यह किताब डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का पूरा खेल बदल देती है। इस आर्टिकल में हम उन ३ बड़े लेसन के बारे में बात करेंगे जो आपके बिजनेस को इस नए दौर में सर्वाइव करने और टॉप पर पहुंचने में मदद करेंगे।


लेसन १ : कस्टमर अब राजा नहीं बल्कि एक नेटवर्क है

पुराने जमाने में मार्केटिंग का मतलब होता था कि आपने टीवी पर एक विज्ञापन चलाया और उम्मीद की कि लोग उसे देखेंगे। उस समय कस्टमर सिर्फ एक टारगेट था। लेकिन डेविड रोजर्स कहते हैं कि अगर आप आज भी यही सोच रहे हैं तो आप असल में डायनासोर के जमाने में जी रहे हैं। आज का कस्टमर एक अकेला इंसान नहीं है। वह एक बहुत बड़े डिजिटल नेटवर्क का हिस्सा है। वह फेसबुक पर रिव्यु लिखता है। वह इंस्टाग्राम पर आपकी सर्विस की धज्जियां उड़ा सकता है। और वह यूट्यूब पर आपके प्रोडक्ट का पोस्टमार्टम कर सकता है।

सोचिए आपके पास एक शानदार साड़ी की दुकान है। पुराने समय में अगर किसी कस्टमर को साड़ी पसंद नहीं आई तो वह ज्यादा से ज्यादा अपनी पड़ोसन से बुराई करती थी। लेकिन आज? वह सीधे गूगल पर जाकर वन स्टार रेटिंग चिपका देगी। देखते ही देखते आपके पूरे शहर को पता चल जाएगा कि आपकी दुकान की सर्विस बेकार है। यही है कस्टमर नेटवर्क की पावर। आप अब उन्हें कंट्रोल नहीं कर सकते। आपको उनके साथ जुड़ना होगा।

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का पहला कदम यह है कि आप अपने कस्टमर को एक पैसिव बायर समझना बंद करें। उन्हें अपने ब्रांड का हिस्सा बनाएं। आज के दौर में लोग विज्ञापन पर भरोसा नहीं करते। वे दूसरे कस्टमर के रिव्यु पर भरोसा करते हैं। अगर आप उन्हें अच्छी वैल्यू देंगे तो वे खुद आपके लिए मार्केटिंग करेंगे। लेकिन अगर आपने उन्हें हल्के में लिया तो वे आपको मार्केट से बाहर करने में देर नहीं लगाएंगे।

जरा सोचिए उन ब्रांड्स के बारे में जो आज भी वही घिसे पिटे तरीके अपना रहे हैं। वे करोड़ों रुपये एड्स पर खर्च करते हैं लेकिन अपने फेसबुक कमेंट्स का जवाब तक नहीं देते। यह तो वही बात हुई कि आप किसी पार्टी में गए और वहां बस अपनी ही तारीफ किए जा रहे हैं लेकिन सामने वाले की बात सुन ही नहीं रहे। ऐसे लोग पार्टी में अकेले रह जाते हैं। और ऐसे बिजनेस मार्केट में अकेले रह जाते हैं।

आपको यह समझना होगा कि आज कस्टमर के पास चॉइस की कमी नहीं है। अगर आप उन्हें एंगेज नहीं करेंगे तो वे एक क्लिक में आपके कॉम्पिटिटर के पास चले जाएंगे। डिजिटल दौर में सर्वाइव करने का मतलब सिर्फ ऑनलाइन होना नहीं है। इसका मतलब है अपने कस्टमर नेटवर्क की आवाज को सुनना और उनके साथ एक रिश्ता बनाना। यह लेसन हमें सिखाता है कि बिजनेस अब सिर्फ बेचने का नाम नहीं है। यह लोगों को अपने साथ जोड़ने का नाम है।


लेसन २ : डेटा को कचरा नहीं बल्कि अपना सबसे बड़ा एसेट बनाएं

ज्यादातर बिजनेस ओनर्स के लिए डेटा का मतलब होता है महीने के अंत में मिलने वाली एक एक्सेल शीट जिसे देखकर उन्हें बस सिरदर्द होता है। वे डेटा को एक बोझ समझते हैं जिसे आईटी डिपार्टमेंट को संभालना चाहिए। लेकिन डेविड रोजर्स कहते हैं कि डिजिटल दौर में डेटा वह तेल है जिससे आपका बिजनेस इंजन चलता है। अगर आप डेटा का सही इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो आप असल में अंधेरे में तीर चला रहे हैं। और यकीन मानिए मार्केट अब इतना बेरहम हो चुका है कि वह आपकी इस अंधेरी दुनिया को उजाड़ने में एक मिनट भी नहीं लगाएगा।

सोचिए आप एक रेस्टोरेंट चलाते हैं। आपके पास हर रोज सौ लोग आते हैं। अब एक तरीका तो यह है कि आप बस उनसे पैसे लें और उन्हें भूल जाएं। दूसरा तरीका यह है कि आप उनका डेटा रखें। आपको पता होना चाहिए कि शर्मा जी को पनीर टिक्का पसंद है और वर्मा जी हमेशा शनिवार को ही आते हैं। अगर आपके पास यह डेटा है तो आप शर्मा जी को उनके जन्मदिन पर पनीर टिक्का पर डिस्काउंट का मैसेज भेज सकते हैं। यह कोई जादू नहीं है। यह सिर्फ डेटा का सही इस्तेमाल है। लेकिन नहीं हमारे कई भाई तो आज भी इसी बात में खुश हैं कि गल्ले में पैसे आ गए।

आजकल डेटा का मतलब सिर्फ नंबर्स नहीं है। आपके कस्टमर क्या सर्च कर रहे हैं। वे आपकी वेबसाइट पर कितना समय बिता रहे हैं। वे किस चीज को देखकर अनसब्सक्राइब कर रहे हैं। यह सब डेटा है। अगर आप इसे नहीं देख रहे हैं तो आप उस अंधे ड्राइवर की तरह हैं जो कह रहा है कि मुझे रास्ते की जरूरत नहीं है मुझे बस गाड़ी चलानी आती है। भाई साहब रास्ता ही तो डेटा है। बिना रास्ते के आप सीधे गड्ढे में ही गिरेंगे।

डेविड रोजर्स एक और कमाल की बात कहते हैं। डेटा अब सिर्फ आपके बिजनेस के अंदर से नहीं आता। अब डेटा चारों तरफ बिखरा पड़ा है। सोशल मीडिया और सेंसर से लेकर पब्लिक डेटा तक। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का मतलब है इस बिखरे हुए डेटा को समेटना और उससे एक ऐसी स्ट्रेटजी बनाना जो आपके कॉम्पिटिटर को समझ ही न आए। जब आप डेटा का इस्तेमाल करते हैं तो आप गेस वर्क करना बंद कर देते हैं। आप जानते हैं कि मार्केट में क्या बिकेगा और क्या नहीं।

लेकिन कई लोग डेटा के नाम पर बस कन्फ्यूज रहते हैं। वे डेटा जमा तो बहुत करते हैं लेकिन उसका करते कुछ नहीं हैं। यह तो वही बात हुई कि आपने जिम की मेंबरशिप तो ले ली लेकिन जा घर पर समोसे रहे हैं। डेटा जमा करने से बिजनेस नहीं बढ़ता। डेटा से इनसाइट निकालने से बिजनेस बढ़ता है। आपको यह समझना होगा कि डेटा आपकी कंपनी का सबसे कीमती एसेट है। इसे संभलकर रखें और इसका इस्तेमाल अपनी ग्रोथ के लिए करें। वरना कोई दूसरा डेटा का इस्तेमाल करके आपके कस्टमर्स को आपसे छीन ले जाएगा और आप बस हाथ मलते रह जाएंगे।


लेसन ३ : कॉम्पिटिशन अब दुश्मन नहीं बल्कि पार्टनरशिप का मौका है

पुराने जमाने में बिजनेस का मतलब होता था एक जंग। जहां आप अपने पड़ोस वाली दुकान को बर्बाद करने की कसमें खाते थे। आपको लगता था कि अगर वह जीतेगा तो मैं हार जाऊंगा। लेकिन डेविड रोजर्स कहते हैं कि डिजिटल दुनिया में यह 'जीरो सम गेम' वाला माइंडसेट अब काम नहीं आता। आज के समय में बाउंड्री धुंधली हो चुकी हैं। जिसे आप अपना दुश्मन समझते हैं हो सकता है कि वही आपके बिजनेस को बढ़ाने का सबसे बड़ा जरिया बन जाए। इसे रोजर्स 'को-ओपिटिशन' कहते हैं।

मान लीजिए आपकी एक छोटी सी मोबाइल एक्सेसरीज की दुकान है। अब आप अमेजॉन या फ्लिपकार्ट को अपना दुश्मन मानकर बैठ सकते हैं और हर दिन उन्हें कोस सकते हैं कि उन्होंने आपका धंधा चौपट कर दिया। या फिर आप स्मार्ट बन सकते हैं और अपनी दुकान को अमेजॉन पर रजिस्टर कर सकते हैं। अब अमेजॉन आपका कॉम्पिटिटर भी है और आपका सबसे बड़ा सेल्स चैनल भी। अगर आप अभी भी पुराने 'दुश्मनी' वाले मोड में हैं तो आप खुद को एक बहुत बड़े मार्केट से दूर रख रहे हैं। यह तो वही बात हुई कि आप नदी के बीच में खड़े हैं और प्यासे मर रहे हैं क्योंकि आपको पानी देने वाला फिल्टर पसंद नहीं है।

आजकल बड़े से बड़ा प्लेयर भी अकेले सब कुछ नहीं कर सकता। एप्पल और सैमसंग को देखिए। दुनिया के सामने वे एक दूसरे के जानी दुश्मन हैं और कोर्ट में केस लड़ते रहते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि आईफोन की कई स्क्रीन खुद सैमसंग बनाता है? वे कॉम्पिटिटर भी हैं और पार्टनर भी। इसे कहते हैं डिजिटल एज का बिजनेस। अगर ये अरबों डॉलर की कंपनियां हाथ मिला सकती हैं तो आप अपनी छोटी सी ईगो लेकर क्यों बैठे हैं?

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का मतलब है अपनी इंडस्ट्री की वैल्यू चेन को समझना। आपको यह देखना होगा कि आप कहां दूसरों की मदद ले सकते हैं और कहां दूसरों की मदद कर सकते हैं। अगर आप सोचते हैं कि आप अकेले ही पूरी दुनिया जीत लेंगे तो भाई साहब आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। आज की दुनिया प्लेटफॉर्म्स की दुनिया है। उबर के पास खुद की कारें नहीं हैं लेकिन वह दुनिया की सबसे बड़ी टैक्सी कंपनी है। जोमेटो खुद खाना नहीं बनाता लेकिन वह लाखों रेस्टोरेंट्स का पार्टनर है।

अगर आप अपने कॉम्पिटिटर से नफरत करते रहेंगे तो आप कभी उनकी ताकत का फायदा नहीं उठा पाएंगे। अपनी सोच को बदलिए। देखिए कि कैसे आप दूसरों के साथ मिलकर कुछ नया क्रिएट कर सकते हैं। अगर आप ईगो को साइड में रखकर को-ओपरेशन करेंगे तो आप भी बढ़ेंगे और आपका पार्टनर भी। वरना इस डिजिटल रेस में अकेले भागने वाले बहुत जल्दी थककर घर बैठ जाते हैं। फैसला आपका है: अकेले लड़कर हारना है या साथ मिलकर जीतना है?


डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप कल पर टाल सकें। यह आज की जरूरत है। अगर आप अपने कस्टमर्स को नहीं समझेंगे डेटा की ताकत को नहीं पहचानेंगे और कॉम्पिटिशन के साथ तालमेल नहीं बिठाएंगे तो मार्केट आपको याद भी नहीं रखेगा। अब समय है एक्शन लेने का। अपने पुराने तरीकों को छोड़िए और डिजिटल एज के इन रूल्स को अपनाइए।

क्या आप अपने बिजनेस को बदलने के लिए तैयार हैं? हमें कमेंट में बताएं कि इन ३ लेसन में से आपको कौन सा सबसे ज्यादा पसंद आया और इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अभी भी पुराने ढर्रे पर बिजनेस चला रहा है।

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