Make Your Own Luck (Hindi)


अगर आप अभी भी भारी भरकम डिग्री और कॉलेज के घिसे पिटे नोट्स के भरोसे बैठे हैं तो बधाई हो आप अपनी लाइफ फ्लश करने की तैयारी कर रहे हैं। जबकि दुनिया पीटर कैश के बताए सीक्रेट्स से अपनी किस्मत खुद लिख रही है आप बस लक के भरोसे बैठे किसी चमत्कार का इंतजार करते रहिये।

क्या आप जानते हैं कि बिजनेस स्कूल आपको थ्योरी तो रटा देते हैं पर असल दुनिया के थप्पड़ झेलना नहीं सिखाते। आज हम पीटर कैश की बुक मेक योर ओन लक से वो ३ लेसन सीखेंगे जो आपकी सोच बदल देंगे।


लेसन १ : किस्मत का इंतजार मत करो उसे मैन्युफैक्चर करो

ज्यादातर लोग लाइफ में बस एक ही चीज का इंतजार करते हैं और वो है 'सही वक्त' या 'अच्छी किस्मत'। उन्हें लगता है कि एक दिन अचानक आसमान से कोई फरिश्ता आएगा और उनकी खाली जेब में सफलता के सिक्के डाल देगा। अगर आप भी इसी कैटेगरी में आते हैं तो यकीन मानिए आप उस इंसान की तरह हैं जो रेलवे स्टेशन पर खड़ा होकर जहाज का इंतजार कर रहा है। पीटर कैश अपनी किताब मेक योर ओन लक में पहला और सबसे कड़ा लेसन यही देते हैं कि लक कोई जादू की छड़ी नहीं है जिसे घुमाया और काम हो गया। असल में किस्मत एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की तरह है जहाँ आपको खुद मेहनत का कच्चा माल डालना पड़ता है तब जाकर लक का फिनिश्ड प्रोडक्ट बाहर आता है।

इसे एक सिंपल उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपका एक दोस्त है जो हमेशा कहता है कि भाई मेरी तो किस्मत ही खराब है मुझे कभी अच्छी जॉब नहीं मिलती। अब अगर आप उसकी डेली रूटीन देखेंगे तो पता चलेगा कि वो महाशय दोपहर को १२ बजे सोकर उठते हैं और उनका सारा रिसर्च सिर्फ नेटफ्लिक्स की नई सीरीज तक सीमित है। वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा बंदा है जो हर रोज नए लोगों से मिलता है स्किल्स सीखता है और हफ्ते में १० इंटरव्यू देता है। अब अगर दूसरे बंदे को नौकरी मिल जाए तो पहला बंदा कहेगा कि भाई इसकी तो किस्मत चमक गई। भाई साहब यह किस्मत नहीं है यह तैयारी और मौके का मिलन है।

पीटर कैश कहते हैं कि बिजनेस स्कूल आपको बैलेंस शीट पढ़ना सिखा सकते हैं लेकिन वो आपको यह नहीं सिखा सकते कि जब दरवाजा खटखटाने पर भी कोई बाहर न आए तो खिड़की से कैसे घुसना है। असल दुनिया में लक का मतलब होता है खुद को ऐसी पोजीशन में खड़ा करना जहाँ अवसर आपसे टकराएं। अगर आप घर के अंदर रजाई ओढ़कर बैठे रहेंगे तो अवसर आपके बेडरूम का दरवाजा तोड़कर अंदर नहीं आएगा। किस्मत उनके पास आती है जो पसीना बहाने के लिए तैयार होते हैं और जिनके पास उस पसीने को पोंछने के लिए एक रुमाल यानी एक सॉलिड प्लान होता है।

हमारे समाज में एक बड़ी गलतफहमी है कि अमीर लोग सिर्फ इसलिए अमीर हैं क्योंकि उनके सितारे बुलंद थे। लोग अक्सर कहते हैं कि अरे उसके पास तो बाप दादा का पैसा था या उसे सही टाइम पर सही बंदा मिल गया। लेकिन कोई यह नहीं देखता कि उस सही बंदे से मिलने के लिए उसने कितने गलत लोगों के धक्के खाए थे। पीटर कैश साफ कहते हैं कि अगर आप अपनी लाइफ की स्क्रिप्ट खुद नहीं लिखेंगे तो कोई और उसे लिखकर आपको एक छोटा सा साइड रोल पकड़ा देगा। और यकीन मानिए वो रोल इतना छोटा होगा कि आपको खुद को ढूंढने के लिए मैग्नीफाइंग ग्लास की जरूरत पड़ेगी।

इसलिए आज से ही यह कहना बंद कर दीजिए कि मेरी किस्मत खराब है। सच तो यह है कि आपने अभी तक अपनी किस्मत को चैलेंज ही नहीं किया है। आपने बस हार मानकर बैठना सीख लिया है क्योंकि वो सबसे आसान काम है। याद रखिये कि एक बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही समय दिखाती है पर इसका मतलब यह नहीं कि वो घड़ी काम कर रही है। आपको अपनी लाइफ की घड़ी में सेल डालने होंगे उसे चाबी देनी होगी और हर सेकंड भागना होगा। तभी आप उस मुकाम पर पहुँच पाएंगे जहाँ लोग आपको देखकर कहेंगे कि क्या किस्मत लेकर पैदा हुआ है। यह लेसन हमें सिखाता है कि अवसर का शिकार करना पड़ता है उसका हाथ जोड़कर इंतजार नहीं।


लेसन २ : नेटवर्किंग का मतलब मतलब निकालना नहीं बल्कि रिश्ते बनाना है

अगर आपको लगता है कि नेटवर्किंग का मतलब सिर्फ लोगों को अपना बिजनेस कार्ड थमाना या लिंक्डइन पर रिक्वेस्ट भेजना है तो आप उतने ही गलत हैं जितना कि डाइट पर होकर रसगुल्ला खाना। पीटर कैश इस किताब में एक बहुत ही कड़वी सच्चाई बताते हैं कि बिजनेस की दुनिया में आपके पास कितनी डिग्रियां हैं इससे ज्यादा यह मायने रखता है कि आपकी फोन बुक में किसके नंबर हैं। लेकिन यहाँ एक ट्विस्ट है। लोग अक्सर दूसरों से तभी मिलते हैं जब उन्हें कोई काम होता है। इसे नेटवर्किंग नहीं बल्कि इसे स्वार्थ कहते हैं। और यकीन मानिए दुनिया को आपका मतलब आपसे भी ज्यादा जल्दी समझ आता है।

मान लीजिए आपका एक ऐसा रिश्तेदार है जो साल भर कभी फोन नहीं करता लेकिन अचानक एक दिन उसका कॉल आता है और वो कहता है कि अरे बेटा बहुत बड़े आदमी बन गए हो जरा मेरे लड़के की नौकरी लगवा दो। आपका पहला रिएक्शन क्या होगा। जाहिर है आप फोन काटने के बहाने ढूंढेंगे। पीटर कैश कहते हैं कि असली बिजनेस टाइकून वो होते हैं जो प्यास लगने से बहुत पहले कुआं खोदना शुरू कर देते हैं। यानी जब आपको किसी से काम न हो तब भी उनसे रिश्ता बनाए रखें। अगर आप सिर्फ जरूरत के वक्त लोगों को याद करेंगे तो लोग आपको एक इस्तेमाल किए हुए टिश्यू पेपर की तरह याद रखेंगे।

बिजनेस स्कूल आपको नेटवर्किंग के बड़े बड़े मॉडल समझाते हैं लेकिन वो यह नहीं सिखाते कि एक कप चाय पर होने वाली बातें करोड़ों की डील फिक्स करवा सकती हैं। लोग उन लोगों के साथ बिजनेस करना पसंद करते हैं जिन्हें वो पसंद करते हैं और जिन पर वो भरोसा करते हैं। पीटर कैश के अनुसार आपका नेटवर्क ही आपकी असली नेट वर्थ है। अगर आप अपने कमरे में बंद होकर सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर सफल होने का सपना देख रहे हैं तो आप अपनी सफलता की उम्र छोटी कर रहे हैं। बाहर निकलिए लोगों की मदद कीजिए और बिना किसी स्वार्थ के अपना सर्कल बड़ा कीजिए।

अक्सर देखा गया है कि लोग नेटवर्किंग के नाम पर सिर्फ चापलूसी करते हैं। उन्हें लगता है कि बड़े लोगों की जी हुजूरी करने से काम बन जाएगा। लेकिन असली नेटवर्किंग वैल्यू देने के बारे में है। आप सामने वाले की लाइफ में क्या वैल्यू ऐड कर सकते हैं यह सोचकर आगे बढ़ें। अगर आप किसी कमरे में सबसे स्मार्ट इंसान हैं तो समझ लीजिए कि आप गलत कमरे में बैठे हैं। आपको ऐसे लोगों के बीच होना चाहिए जो आपसे ज्यादा सफल हों ताकि आप उनसे कुछ सीख सकें और उनके औरा का हिस्सा बन सकें। किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है जिनके पास सही लोगों का सपोर्ट सिस्टम होता है।

रिश्तों का निवेश शेयर मार्केट के निवेश जैसा है। आप आज निवेश करेंगे तो भविष्य में इसका मुनाफा मिलेगा। अगर आप आज बीज नहीं बोएंगे तो कल फसल की उम्मीद करना बेवकूफी है। पीटर कैश हमें सिखाते हैं कि लोगों को यह फर्क नहीं पड़ता कि आप कितना जानते हैं जब तक उन्हें यह पता न चले कि आप उनकी कितनी परवाह करते हैं। इसलिए अपने ईगो को साइड में रखिये और असली रिश्तों की दीवार खड़ी कीजिए क्योंकि जब बुरा वक्त आता है तो आपकी डिग्रियां अलमारी में रखी रह जाती हैं और आपके बनाए हुए रिश्ते ही आपको बाहर निकालते हैं।


लेसन ३ : फेलियर को अपना दुश्मन नहीं बल्कि अपना डेटा पार्टनर बनाओ

बिजनेस स्कूल में जब किसी केस स्टडी में कोई कंपनी फेल होती है तो उसे एक गलती की तरह पढ़ाया जाता है। लेकिन पीटर कैश कहते हैं कि असल जिंदगी में फेलियर एक लेसन है जिसकी ट्यूशन फीस काफी महंगी होती है। अगर आप लाइफ में कभी फेल नहीं हुए तो इसका मतलब यह नहीं कि आप बहुत जीनियस हैं बल्कि इसका मतलब यह है कि आप अभी तक अपने कंफर्ट जोन के सोफे पर चिपक कर बैठे हैं। जो इंसान गिरता नहीं वो कभी दौड़ना नहीं सीख सकता। किस्मत बनाने का तीसरा सबसे बड़ा सीक्रेट यही है कि आपको रिस्क लेने से प्यार करना होगा और असफलता को एक फीडबैक की तरह देखना होगा।

मान लीजिए आप पहली बार किचन में चाय बनाने गए और आपने नमक को चीनी समझकर डाल दिया। अब आपके पास दो रास्ते हैं। या तो आप रोना शुरू कर दें कि मेरी तो किस्मत ही खराब है मुझसे चाय भी नहीं बनती या फिर आप उस चाय को चखें और यह समझें कि अगली बार डिब्बे पर लेबल लगाना जरूरी है। बिजनेस भी बिल्कुल ऐसा ही है। पीटर कैश के मुताबिक हर हार आपको यह बताती है कि कौन सा रास्ता बंद है ताकि आप सही रास्ते पर ज्यादा तेजी से भाग सकें। लेकिन हमारे यहाँ लोग फेल होने के नाम से ऐसे डरते हैं जैसे बचपन में होमवर्क न करने पर टीचर की छड़ी से डरते थे।

रिस्क लेने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी सारी जमा पूंजी लेकर जुए की टेबल पर बैठ जाएं। पीटर कैश 'कैलकुलेटेड रिस्क' की बात करते हैं। वो कहते हैं कि अगर आप जीतने की संभावना को १० परसेंट भी बढ़ा सकते हैं तो वो रिस्क लेने लायक है। ज्यादातर लोग पूरी जिंदगी सिर्फ इसलिए मिडिल क्लास रह जाते हैं क्योंकि वो रिस्क लेने के नाम पर कांपने लगते हैं। उन्हें लगता है कि जो है उसे बचाकर रखना ही समझदारी है। जबकि सच्चाई यह है कि रुकना ही सबसे बड़ा रिस्क है। रुकी हुई गाड़ी को जंग लग जाता है और चलते हुए टायर ही मंजिल तक पहुँचते हैं।

पीटर कैश अपनी किताब में बार बार जोर देते हैं कि सफलता की सीढ़ी सीधे ऊपर नहीं जाती। वो सांप सीढ़ी के खेल जैसी है जहाँ कभी आपको ९९ पर सांप काट सकता है। लेकिन असली खिलाड़ी वो है जो सांप के डसने के बाद फिर से १ से शुरू करने का दम रखता है। अगर आप अपनी हार का शोक मनाने में ही ६ महीने निकाल देंगे तो अगली जीत का मौका आपके बगल से निकल जाएगा और आपको पता भी नहीं चलेगा। किस्मत भी बहादुरों का साथ देती है बुजदिलों का नहीं जो हर छोटे रिस्क पर अपनी कुंडली दिखाने पंडित जी के पास भागते हैं।

इसलिए अगर आप अपनी किस्मत खुद लिखना चाहते हैं तो रिस्क से डरना छोड़िये। पीटर कैश का यह लेसन हमें सिखाता है कि सफलता के रास्ते में 'फेलियर' कोई रुकावट नहीं है बल्कि वो उसी रास्ते का एक मील का पत्थर है। जब आप अपनी गलतियों से सीखना शुरू कर देते हैं तो आप अजेय बन जाते हैं। याद रखिये कि एडिशन ने बल्ब बनाने से पहले १००० बार फेल होकर यह सीखा था कि कौन से १००० तरीके काम नहीं करते। अगर वो पहले ही प्रयास में हार मान लेते तो आज हम अंधेरे में मोमबत्ती जलाकर एक दूसरे का मुंह देख रहे होते। अपनी किस्मत के मैन्युफैक्चरर बनिए और रिस्क को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाइये।


तो दोस्तों, पीटर कैश की यह बुक हमें सिखाती है कि किस्मत आसमान से नहीं गिरती बल्कि हमारे इरादों की भट्टी में तपकर तैयार होती है। क्या आप आज भी अपने लक के भरोसे बैठकर अपनी जिंदगी बर्बाद करना चाहते हैं या फिर आज से ही अपनी किस्मत की चाबी अपने हाथ में लेना चाहते हैं। नीचे कमेंट्स में लिखकर बताइये कि आपकी लाइफ का वो कौन सा रिस्क था जिसने आपकी किस्मत बदल दी। इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा अपनी फूटी किस्मत का रोना रोता रहता है। चलिए साथ मिलकर अपनी तकदीर बदलते हैं।

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