क्या आप भी उन लोगों में से हैं जिनके पास दुनिया बदलने वाले आइडियाज तो हैं पर असलियत में आप सिर्फ अपनी रजाई बदल पाते हैं। मुबारक हो, आप सिर्फ एक सपने देखने वाले हैं जो अपनी विजन को आलस की भेंट चढ़ा रहे हैं। अगर एक्जीक्यूशन नहीं सीखा तो आपके आइडियाज कूड़ेदान में ही मिलेंगे।
स्कॉट बेल्स्की की यह किताब आपको सिखाएगी कि कैसे खयाली पुलाव पकाना बंद करके असल में काम शुरू किया जाता है। चलिए जानते हैं वह 3 बड़े लेसन जो आपकी जिंदगी और काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : द प्रोजेक्ट मेथीमेटिक्स और एक्शन स्टेप्स का जादू
अक्सर हम इंडियन्स के साथ एक बहुत बड़ी समस्या होती है। हमारे पास आइडियाज की कोई कमी नहीं है। चाय की टपरी से लेकर ऑफिस के वाटर कूलर तक हम हर जगह दुनिया बदलने की बातें करते हैं। लेकिन जैसे ही काम करने की बारी आती है हमारा जोश वैसे ही ठंडा पड़ जाता है जैसे फ्रिज में रखा हुआ पिज्जा। स्कॉट बेल्स्की कहते हैं कि किसी भी बड़े विजन को सच करने का सबसे बड़ा दुश्मन खुद वह विजन ही होता है। क्योंकि वह इतना बड़ा और डरावना दिखता है कि हम शुरू करने से पहले ही हार मान लेते हैं। यहीं पर काम आता है द प्रोजेक्ट मेथीमेटिक्स।
लेखक समझाते हैं कि आपको अपने हर काम को तीन हिस्सों में बांटना चाहिए। पहला है एक्शन स्टेप्स। दूसरा है रेफरेंस और तीसरा है बैकबर्नर। चलिए इसे एक देसी उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपको अपनी बहन की शादी मैनेज करनी है। अब शादी का नाम सुनते ही दिमाग में हजार चीजें घूमने लगती हैं। टेंट वाला, हलवाई, कपड़े, मेहमानों की लिस्ट और वह फूफा जी जो बिना बात के नाराज होने वाले हैं। अगर आप सिर्फ शादी के बारे में सोचेंगे तो आप पागल हो जाएंगे।
स्कॉट बेल्स्की कहते हैं कि आपको सिर्फ एक्शन स्टेप्स पर फोकस करना चाहिए। एक्शन स्टेप्स वह छोटे काम हैं जो अभी किए जा सकते हैं। जैसे कि हलवाई को फोन करना या मेहमानों की लिस्ट बनाना। हम में से ज्यादातर लोग क्या करते हैं। हम मीटिंग्स करते हैं और लंबी लंबी बातें करते हैं। लेकिन मीटिंग खत्म होने के बाद किसी को पता नहीं होता कि कल सुबह उठकर सबसे पहला काम क्या करना है। अगर आपके पास कोई ऐसा काम है जिसके आगे कोई एक्शन वर्ब नहीं लगा है तो वह सिर्फ एक बोझ है। जैसे कि सिर्फ मार्केटिंग लिखना बेकार है। उसकी जगह लिखिए फेसबुक पर पांच ऐड पोस्ट करना। यह एक एक्शन स्टेप है।
अब बात करते हैं रेफरेंस की। यह वह जानकारी है जो काम तो नहीं है पर काम के दौरान चाहिए होती है। जैसे कि टेंट वाले का नंबर या हलवाई का मेनू। इसे एक्शन स्टेप्स के साथ मिक्स मत कीजिए। वरना आपका दिमाग कचरा बन जाएगा। और आखिर में आता है बैकबर्नर। यह वह आइडियाज हैं जो अच्छे तो हैं पर अभी के लिए जरूरी नहीं हैं। जैसे कि शादी में ड्रोन से एंट्री करना। यह सुनने में कूल है पर अगर अभी बजट नहीं है तो इसे बैकबर्नर में डाल दीजिए ताकि यह आपके आज के काम में रुकावट न बने।
हम लोग अक्सर क्या करते हैं। हम बैकबर्नर वाले आइडियाज पर घंटों बहस करते हैं और जो असल काम यानी एक्शन स्टेप्स होते हैं उन्हें भूल जाते हैं। रिजल्ट यह निकलता है कि शादी के दिन पता चलता है कि जनरेटर वाला ही नहीं आया। स्कॉट कहते हैं कि जो इंसान अपने प्रोजेक्ट्स को इस तरह नहीं बांटता वह सिर्फ एक खयाली पुलाव बनाने वाला शेफ है। अगर आप चाहते हैं कि आपका स्टार्टअप या आपका कोई भी प्रोजेक्ट जमीन पर उतरे तो आपको अपनी क्रिएटिविटी को इस सिस्टम के पिंजरे में डालना ही होगा। बिना सिस्टम के क्रिएटिविटी सिर्फ एक तमाशा है जो आपको तालियां तो दिलवा सकती है पर तरक्की नहीं।
लेसन २ : कम्युनिटी का पावर और फीडबैक का डर
क्या आपको भी ऐसा लगता है कि आपका आइडिया इतना कीमती है कि अगर आपने किसी को बताया तो वह उसे चुरा लेगा। सच तो यह है कि दुनिया के पास आपके आइडिया को चुराने का टाइम नहीं है क्योंकि सब अपने अपने अधूरे आइडियाज को लेकर बैठे हैं। स्कॉट बेल्स्की कहते हैं कि अपने आइडिया को किसी तिजोरी में बंद करके रखना उसे धीरे धीरे मारने जैसा है। क्रिएटिव लोग अक्सर अकेले काम करना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके जैसा विजन किसी और के पास नहीं है। लेकिन भाई साहब अकेले तो सिर्फ पहाड़ों पर तपस्या होती है बिजनेस या बड़े प्रोजेक्ट्स नहीं चलते।
इस बात को ऐसे समझिये कि आप एक नया यूट्यूब चैनल शुरू करना चाहते हैं। अब आप अपने कमरे में बंद होकर स्क्रिप्ट लिख रहे हैं और खुद को ही ऑस्कर विनिंग राइटर समझ रहे हैं। आप किसी को अपनी स्क्रिप्ट नहीं दिखाते क्योंकि आपको लगता है कि लोग मजाक उड़ाएंगे या फिर कोई आपका कॉन्सेप्ट कॉपी कर लेगा। फिर जब आप वीडियो डालते हैं तो पता चलता है कि वह तो इतना बोरिंग है कि आपके घरवाले भी उसे पूरा नहीं देख रहे। अगर आपने पहले ही अपने दोस्तों या किसी कम्युनिटी को वह स्क्रिप्ट दिखाई होती तो शायद वह आपको बता देते कि भाई यह जो तूने जोक मारा है वह सिर्फ तुझे ही समझ आ रहा है।
लेखक कहते हैं कि कम्युनिटी सिर्फ तालियां बजाने के लिए नहीं होती। कम्युनिटी आपको आईना दिखाने के लिए होती है। जब हम किसी ग्रुप का हिस्सा बनते हैं तो हमारे ऊपर एक पॉजिटिव प्रेशर आता है। इसे आप जिम पार्टनर वाले लॉजिक से समझ सकते हैं। अगर आप अकेले जिम जाते हैं तो जिस दिन बारिश होगी आप रजाई तानकर सो जाएंगे। लेकिन अगर आपका दोस्त बाहर खड़ा हॉर्न बजा रहा है तो आपको जाना ही पड़ेगा। यही बात आपके प्रोजेक्ट्स पर लागू होती है। जब आप अपने गोल्स और प्रोग्रेस को दूसरों के साथ शेयर करते हैं तो आप खुद को जवाबदेह बना लेते हैं।
स्कॉट बेल्स्की एक और मजेदार बात कहते हैं। वह कहते हैं कि हमें फीडबैक से इतना डर क्यों लगता है। असल में हम अपने काम से इतना प्यार करने लगते हैं कि हमें लगता है कि अगर किसी ने काम में गलती निकाली तो उसने हमारी परवरिश पर सवाल उठा दिया है। यह ईगो ही है जो हमें बड़ा बनने से रोकती है। एक सफल इंसान वह नहीं है जिसके पास सबसे अच्छा आइडिया है बल्कि वह है जिसने सबसे ज्यादा फीडबैक लेकर अपने बेकार आइडिया को तराश कर हीरा बना दिया है।
भारत में हम अक्सर अपनी उपलब्धियों को छुपाकर रखते हैं ताकि नजर न लग जाए। लेकिन प्रोफेशनल दुनिया में नजर नहीं बल्कि अंधेरा मार देता है। अगर लोग आपके काम के बारे में जानेंगे नहीं तो वे आपकी मदद कैसे करेंगे। आपको ऐसे लोगों के बीच रहना चाहिए जो आपसे सवाल पूछें और आपको चैलेंज करें। अगर आप अपने ग्रुप के सबसे स्मार्ट इंसान हैं तो यकीन मानिए आप गलत ग्रुप में हैं। अपनी कम्युनिटी बनाइये और अपने आइडियाज को दुनिया के सामने फेंक दीजिये। जो टूटना होगा वह टूट जाएगा और जो बचेगा वही असल में टिकाऊ होगा।
लेसन ३ : लीडरशिप और खुद को मैनेज करने की कला
क्या आपने कभी नोटिस किया है कि कुछ लोग हमेशा बिजी दिखाई देते हैं पर शाम को उनके पास दिखाने के लिए कोई काम नहीं होता। वे ऐसे घूमते हैं जैसे पूरी दुनिया का बोझ उन्हीं के कंधों पर है पर असल में वे सिर्फ अपनी ईमेल्स और फालतू की कॉल्स के बीच गोल गोल घूम रहे होते हैं। स्कॉट बेल्स्की कहते हैं कि दुनिया को लीड करने से पहले आपको खुद के दिमाग को लीड करना सीखना होगा। अगर आप खुद को मैनेज नहीं कर सकते तो आप अपनी टीम को सिर्फ कन्फ्यूजन ही देंगे और कुछ नहीं।
मान लीजिये आप एक टीम के मैनेजर हैं और आपको एक नया ऐप लॉन्च करना है। अब आप खुद तो सुबह 11 बजे सोकर उठते हैं और रात को 2 बजे अपनी टीम को मैसेज करके पूछते हैं कि काम कहाँ तक पहुँचा। आपकी टीम आपको जवाब तो दे देगी पर उनके मन में आपके लिए कोई इज्जत नहीं होगी। लीडरशिप का मतलब यह नहीं है कि आप सबसे ज्यादा काम करें बल्कि इसका मतलब यह है कि आप सबसे सही तरीके से काम करें। लेखक कहते हैं कि आपको अपनी कैपेबिलिटी बढ़ानी होगी। कैपेबिलिटी का मतलब है वह ताकत जिससे आप अपने आइडियाज को बिना थके और बिना रुके अंजाम तक पहुँचा सकें।
हम इंडियन्स में एक बड़ी आदत है कि हम आखिरी वक्त पर काम करने को अपनी बहादुरी समझते हैं। जब तक सिर पर तलवार नहीं लटकती हमारा दिमाग नहीं चलता। स्कॉट बेल्स्की कहते हैं कि यह बहादुरी नहीं बल्कि बेवकूफी है। यह तरीका आपको थकान और तनाव के अलावा कुछ नहीं देगा। एक अच्छा लीडर वह है जो अपनी एनर्जी को संभालकर रखता है। वह जानता है कि कब उसे ना कहना है। अक्सर हम लोग हर किसी को खुश करने के चक्कर में हर काम को हां बोल देते हैं। रिजल्ट यह होता है कि हम दस काम शुरू तो कर देते हैं पर खत्म एक भी नहीं कर पाते।
लेखक एक बहुत गहरी बात कहते हैं कि आपको अपनी उपलब्धियों को सेलिब्रेट करना सीखना चाहिए। अक्सर हम एक गोल पूरा करते ही दूसरे की तरफ भागने लगते हैं। इससे हमारा दिमाग एक मशीन बन जाता है जिसे कभी शांति नहीं मिलती। जब आप छोटी जीत को सेलिब्रेट करते हैं तो आपकी टीम का हौसला बढ़ता है और आपको आगे बढ़ने की एनर्जी मिलती है। याद रखिये कि सफलता कोई एक दिन का चमत्कार नहीं है बल्कि यह रोज किए जाने वाले छोटे और बोरिंग कामों का नतीजा है। अगर आप उन बोरिंग कामों को मजे के साथ करना सीख गए तो आपको कोई नहीं रोक सकता।
आपके पास दुनिया का सबसे बेस्ट विजन हो सकता है पर अगर आपके पास उसे पूरा करने का अनुशासन नहीं है तो वह विजन सिर्फ एक सुहाना सपना बनकर रह जाएगा। जाग जाइये क्योंकि सपने देखने वालों को सिर्फ उतना ही मिलता है जितना मेहनत करने वाले छोड़ देते हैं। अब समय है कि आप अपनी कुर्सी से उठें और अपने उस एक आइडिया पर काम शुरू करें जिसे आप पिछले कई महीनों से टाल रहे हैं।
आइडियाज की वैल्यू जीरो है अगर आप उन्हें हकीकत में नहीं बदलते। आज ही अपने सबसे बड़े प्रोजेक्ट को एक्शन स्टेप्स में बांटिए और कम से कम एक छोटा कदम उठाइए। अगर आपको यह लेसन पसंद आए तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो सिर्फ बड़ी बड़ी बातें करता है पर काम कुछ नहीं। कमेंट में बताइये कि आप अपने कौन से आइडिया पर आज से काम शुरू करने वाले हैं।
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