Marketbusters (Hindi)


क्या आप भी वही पुराने घिसे पिटे बिजनेस आइडियाज लेकर बैठे हैं और सोच रहे हैं कि ग्रोथ क्यों नहीं हो रही। सच तो यह है कि आपका कॉम्पिटिटर आपसे आगे निकल रहा है क्योंकि आप अभी भी पत्थर के जमाने की स्ट्रेटेजीज चिपकाए हुए हैं। बिना मार्केटबस्टर्स की इन चालों के आपका बिजनेस बस एक महंगा शौक बनकर रह जाएगा।

लेकिन फिक्र मत कीजिए। आज हम रिटा मैक्ग्राथ और इयान मैकमिलन की बुक मार्केटबस्टर्स से वह सीक्रेट्स निकालेंगे जो बड़े बड़े स्टार्टअप्स को यूनिकॉर्न बना देते हैं। चलिए देखते हैं वह 3 बड़े लेसन जो आपकी तरक्की के दरवाजे खोल देंगे।


लेसन १ : कस्टमर एक्सपीरियंस को पूरी तरह बदल डालो

बिजनेस की दुनिया में ज्यादातर लोग सिर्फ अपने प्रोडक्ट को चमकाने में लगे रहते हैं। उनको लगता है कि अगर साबुन की खुशबू अच्छी है तो दुनिया लाइन लगाकर खरीदेगी। पर भाई साहब असल खेल तो तब शुरू होता है जब कस्टमर आपके बारे में सोचना शुरू करता है और तब तक चलता है जब तक वह उसे कचरे के डिब्बे में नहीं फेंक देता। मार्केटबस्टर्स का पहला लेसन यही है कि अपने प्रोडक्ट के बारे में सोचना बंद करो और कस्टमर के पूरे सफर पर ध्यान दो।

मान लीजिए आप एक ऑनलाइन कपड़े की दुकान चला रहे हैं। अब टी शर्ट तो हर कोई बेच रहा है। पर अगर आपका कस्टमर साइज को लेकर कन्फ्यूज है या उसे रिटर्न करने में पसीने आ रहे हैं तो आपकी टी शर्ट चाहे सोने के धागे से बनी हो वह दोबारा नहीं आएगा। असली मार्केटबस्टर वह होता है जो कस्टमर की उस छोटी सी चुभन को पहचान ले जिसे वह खुद भी नहीं बोल पा रहा। क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ कंपनियां इतनी सफल क्यों होती हैं। क्योंकि वे सिर्फ सामान नहीं बेचतीं वे आपकी लाइफ से फ्रस्ट्रेशन कम करती हैं।

एक रियल लाइफ एक्जाम्पल देखिए। इंडिया में पहले गैस सिलेंडर बुक करना मतलब एक पूरी जंग लड़ने जैसा था। आपको एजेंसी जाना पड़ता था फिर घंटों फोन मिलाना पड़ता था और फिर भी डिलीवरी का कोई ठिकाना नहीं होता था। फिर कंपनियों ने क्या किया। उन्होंने सिर्फ गैस नहीं बेची उन्होंने बुकिंग का पूरा एक्सपीरियंस बदल दिया। अब बस एक वॉट्सएप मैसेज या एक मिस्ड कॉल और सिलेंडर आपके घर के बाहर। उन्होंने गैस नहीं बदली उन्होंने आपके काम करने का तरीका बदल दिया।

कुछ लोग अभी भी अपनी दुकान पर अकड़ कर बैठते हैं जैसे वह कस्टमर पर अहसान कर रहे हों। अगर आपके स्टोर में घुसते ही कस्टमर को ऐसा लगे कि वह किसी सरकारी दफ्तर में आ गया है जहाँ उसे कोई पूछने वाला नहीं है तो समझ लीजिए कि आपकी ग्रोथ की गाड़ी में पंचर हो चुका है। लोग अब क्वालिटी के लिए नहीं बल्कि इज्जत और आसानी के लिए पैसे देते हैं। अगर आप उनकी लाइफ का एक छोटा सा हिस्सा भी आसान बना सकते हैं तो आप मार्केट को डोमिनेट करेंगे।

अक्सर बिजनेस ओनर सोचते हैं कि डिस्काउंट देना ही एकमात्र रास्ता है। अरे भाई अगर आप कस्टमर को कंफर्ट दे रहे हैं तो वह खुशी खुशी ज्यादा पैसे भी देगा। सोचिए आप एक नाई की दुकान पर जाते हैं। एक जगह आपको सस्ती कटिंग मिलती है पर वहां इतनी भीड़ और गंदगी है कि आपको अपनी जान का डर लगने लगे। दूसरी जगह थोड़ी महंगी है पर वहां आपको अपॉइंटमेंट मिलता है और जाते ही ठंडी कॉफी। आप कहां जाएंगे। जाहिर है जहां आपकी इज्जत है। यही वह पहला कदम है जो आपको एक साधारण बिजनेसमैन से एक मार्केटबस्टर बनाता है।


लेसन २ : प्राइसिंग और पेमेंट के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाएं

ज्यादातर दुकानदार और बिजनेस ओनर आज भी उसी पुरानी सोच में फंसे हैं कि भाई सामान लो और पैसे दो। उनको लगता है कि बस कीमत कम कर दी तो कस्टमर दौड़ा चला आएगा। लेकिन मार्केटबस्टर्स बुक कहती है कि असली खेल कीमत कम करने में नहीं बल्कि पैसे लेने के तरीके में है। कभी कभी आप बिना रेट कम किए सिर्फ पेमेंट का मॉडल बदलकर पूरे मार्केट की छुट्टी कर सकते हैं। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है पर यही वह मास्टरस्ट्रोक है जो बड़े प्लेयर्स चलते हैं।

मान लीजिए आपको एक बहुत महंगा सॉफ्टवेयर खरीदना है जिसकी कीमत एक लाख रुपये है। अब एक आम आदमी इसे लेने से पहले दस बार सोचेगा और शायद कभी न खरीदे। लेकिन अगर वही कंपनी कहे कि आपको एक लाख नहीं देने हैं बस हर महीने एक हजार रुपये देने हैं और जब तक मन करे तब तक इस्तेमाल करना है। अब क्या हुआ। अचानक वह चीज सबकी पहुंच में आ गई। इसे कहते हैं सब्सक्रिप्शन मॉडल। यहाँ कंपनी ने कीमत कम नहीं की बल्कि उसे देने का तरीका इतना आसान बना दिया कि कस्टमर को वह बोझ नहीं लगा।

एक मजेदार मिसाल लेते हैं। हमारे मोहल्ले में एक जिम खुला। मालिक ने पहले महीने की फीस दो हजार रुपये रखी और साथ में तीन हजार का एडमिशन चार्ज। नतीजा यह हुआ कि जिम खाली पड़ा रहा क्योंकि लोग इतना पैसा एक साथ नहीं देना चाहते थे। फिर उसने दिमाग लगाया और मार्केटबस्टर वाली चाल चली। उसने कहा कि एडमिशन फ्री है और आप जितने दिन आएंगे उतने के हिसाब से पैसे दीजिए। अब जो लोग हफ्ते में सिर्फ दो दिन वर्कआउट करना चाहते थे वे भी वहां पहुँच गए। भीड़ इतनी बढ़ गई कि मालिक को नया फ्लोर लेना पड़ा। इसे कहते हैं कस्टमर की जेब और दिमाग दोनों को समझना।

कुछ लोग अभी भी अपनी पुरानी उधारी वाली डायरी लेकर बैठे रहते हैं और फिर रोते हैं कि पैसा फंस गया। अरे भाई जब दुनिया यूपीआई और ऑटो पे पर चल रही है तो आप अभी भी चेक के पीछे क्यों भाग रहे हैं। अगर आप अपने कस्टमर को पेमेंट करने का सबसे कूल और आसान तरीका नहीं दे रहे हैं तो आप खुद ही उसे अपने कॉम्पिटिटर के पास भेज रहे हैं। लोग अब आलसी हो चुके हैं और जो बिजनेस उनके आलस को सपोर्ट करता है वही सबसे ज्यादा पैसा कमाता है। यह कड़वा सच है पर सच है।

सोचिए अगर नेटफ्लिक्स आपसे कहता कि हर फिल्म देखने के अलग पैसे दो। क्या आप इतने शो देखते। बिल्कुल नहीं। उन्होंने क्या किया। एक फिक्स अमाउंट लो और जितना मर्जी देखो। इससे कस्टमर को लगा कि उसका फायदा हो रहा है और कंपनी को मिला हर महीने आने वाला पक्का पैसा। इसे ही कहते हैं विन विन सिचुएशन। अगर आप भी अपने बिजनेस में ऐसा कोई मॉडल ला सकें जहाँ कस्टमर को शुरुआत में बड़ा झटका न लगे तो आप देखेंगे कि आपकी सेल रॉकेट की तरह ऊपर जाएगी।


लेसन ३ : कम एसेट्स और स्मार्ट रिसोर्स मैनेजमेंट से बाजी मारना

पुराने जमाने में लोग सोचते थे कि अगर बड़ा बिजनेस खड़ा करना है तो बहुत बड़ी जमीन, आलीशान ऑफिस और सैकड़ों वर्कर्स की फौज चाहिए होगी। लेकिन मार्केटबस्टर्स बुक हमें सिखाती है कि आज के दौर में यह सोच न सिर्फ पुरानी है बल्कि खतरनाक भी है। असली मार्केटबस्टर वह नहीं है जिसके पास सबसे ज्यादा सामान है, बल्कि वह है जो दूसरों के रिसोर्स को स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल करना जानता है। इसे कहते हैं एसेट लाइट मॉडल। यानी वजन कम और रफ़्तार सबसे तेज।

कल्पना कीजिए कि आपको एक टैक्सी कंपनी शुरू करनी है। पुराने तरीके से आप सौ कारें खरीदेंगे, ड्राइवर रखेंगे और गैरेज का किराया भरेंगे। इस सबमें आपका आधा खून तो लोन की किश्तें चुकाने में ही जल जाएगा। पर ऊबर और ओला ने क्या किया। उन्होंने एक भी कार नहीं खरीदी। उन्होंने बस उन लोगों को जोड़ा जिनके पास कार थी और उन लोगों से मिलाया जिन्हें सवारी चाहिए थी। उन्होंने अपनी जेब से एसेट्स नहीं बनाए बल्कि एक ऐसा सिस्टम बनाया जो दूसरों के एसेट्स पर चलता है। यह सुनने में जितना आसान लगता है, इसे लागू करने के लिए उतना ही बड़ा जिगरा चाहिए।

हमारे शहर में एक भाई साहब ने क्लाउड किचन शुरू किया। उन्होंने कोई बड़ा रेस्टोरेंट नहीं खोला जहाँ लोग आकर बैठें, वेटर रखें या महंगे फर्नीचर पर पैसा बर्बाद करें। उन्होंने बस एक छोटा सा किचन लिया और बेहतरीन खाना बनाकर जोमैटो और स्विगी पर बेचना शुरू किया। उनका खर्चा कम था इसलिए वे अच्छी क्वालिटी का खाना कम दाम में दे पाए। वहीं दूसरी तरफ बड़े बड़े रेस्टोरेंट अपनी सजावट और बिजली के बिल के चक्कर में कस्टमर को लूटते रहे और आखिर में बंद हो गए। इसे कहते हैं दिमाग से खेलना, शरीर से नहीं।

कुछ लोग आज भी बिजनेस शुरू करने से पहले पच्चीस लाख का इंटीरियर करवाते हैं और फिर खाली दुकान में बैठकर मक्खियां मारते हैं। अरे भाई, कस्टमर आपकी दीवारों को चाटने नहीं आएगा, उसे आपके काम से मतलब है। अगर आप अपने पैसे को फालतू की चीजों में ब्लॉक कर रहे हैं तो आप खुद ही अपने बिजनेस की कब्र खोद रहे हैं। मार्केटबस्टर्स का सीधा सा नियम है कि अपने रिस्क को कम से कम रखो और आउटपुट को ज्यादा से ज्यादा।

आज के इस डिजिटल युग में अगर आप अपनी हर चीज खुद ही मैनेज करने की जिद पर अड़े हैं, तो मुबारक हो, आप बहुत जल्द थकने वाले हैं। स्मार्ट बिजनेसमैन वह है जो लॉजिस्टिक्स के लिए किसी और को पकड़े, मार्केटिंग के लिए किसी एक्सपर्ट को और खुद सिर्फ उस चीज पर ध्यान दे जो उसका असली टैलेंट है। जब आप बोझ कम करते हैं, तभी आप लंबी रेस के घोड़े बनते हैं। याद रखिए, मार्केट में वही टिकता है जो वक्त के साथ खुद को हल्का और फुर्तीला बनाए रखता है।


मार्केटबस्टर्स सिर्फ एक किताब नहीं है, यह एक चेतावनी है उन लोगों के लिए जो अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। चाहे वह कस्टमर के सफर को समझना हो, पेमेंट के तरीकों को आसान बनाना हो या फिर एसेट लाइट मॉडल अपनाना हो। असली ग्रोथ तभी आती है जब आप लीक से हटकर सोचते हैं। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप भी वही भीड़ का हिस्सा बने रहना चाहते हैं जो सिर्फ सर्वाइवल के लिए लड़ रही है, या फिर आप वह मार्केटबस्टर बनना चाहते हैं जो पूरे खेल के नियम बदल देता है।

अगर आपको इन लेसन्स ने सोचने पर मजबूर किया है, तो इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो अपना नया स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। नीचे कमेंट्स में बताएं कि इन तीनों में से कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा प्रैक्टिकल लगा। चलिए मिलकर इंडिया के बिजनेस लैंडस्केप को बदलते हैं।

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