Multipliers (Hindi)


अगर आपको लगता है कि आप अपनी टीम के सबसे स्मार्ट इंसान हैं तो मुबारक हो, आप ही अपनी कंपनी की ग्रोथ के सबसे बड़े दुश्मन हैं। आपकी इसी 'मैं सब जानता हूँ' वाली ईगो ने लोगों का टैलेंट कुचल दिया है और अब वे बस आपकी हां में हां मिलाने वाले रोबोट बन चुके हैं।

आज हम लिज वाइसमैन की बुक मल्टीप्लायर्स से वो सीक्रेट्स समझेंगे जो आपको एक डिमिनिशर से असली लीडर बनाएंगे। चलिए जानते हैं वो ३ लेसन जो आपकी टीम की इंटेलिजेंस को डबल कर सकते हैं और आपको एक असली मेंटर बना सकते हैं।


लेसन १ : द टैलेंट मैग्नेट - लोगों को इस्तेमाल मत कीजिये, उन्हें ग्रो कीजिये

क्या आपने कभी ऐसे बॉस के साथ काम किया है जिसे देखकर ऐसा लगता है जैसे उसने पूरी दुनिया की अक्ल का ठेका खुद ही ले रखा है। ऑफिस में घुसते ही वह ऐसे एक्सप्रेशन देता है जैसे वह कोई बहुत बड़ा एहसान कर रहा है। ऐसे लोग खुद को बहुत बड़ा तुर्रम खान समझते हैं और इन्हें बुक की भाषा में डिमिंिशर कहा जाता है। डिमिंिशर का मतलब है वो इंसान जो दूसरों की काबिलियत को बढ़ाना तो दूर, उसे और कम कर देता है। ये वो लोग हैं जो टैलेंट को हीरे की तरह नहीं बल्कि कोयले की तरह देखते हैं। उन्हें लगता है कि उनके बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता।

अब जरा इमेजिन कीजिये एक ऐसे लीडर को जो कमरे में आता है तो माहौल भारी नहीं बल्कि हल्का हो जाता है। वह इंसान जिसे पता है कि सामने वाले बंदे में क्या हुनर है, भले ही उस बंदे को खुद न पता हो। इसे कहते हैं मल्टीप्लायर। मल्टीप्लायर असल में एक टैलेंट मैग्नेट होता है। वह लोगों को काम पर इसलिए नहीं रखता कि उनसे बस मजदूरी करवानी है, बल्कि इसलिए रखता है ताकि उनका बेस्ट वर्जन बाहर आ सके।

सोचिये आपके ऑफिस में एक ऐसा मैनेजर है जो हर मीटिंग में सिर्फ अपनी चलाता है। उसे लगता है कि अगर उसने चुप रहकर दूसरों की सुन ली तो उसकी इज्जत कम हो जाएगी। यह डिमिंिशर अप्रोच है। यह इंसान टैलेंट को हायर तो कर लेता है लेकिन फिर उन्हें एक पिंजरे में बंद कर देता है। नतीजा क्या होता है। आपकी टीम के होनहार लोग भी धीरे धीरे अपनी क्रिएटिविटी छोड़ देते हैं और बस उतना ही करते हैं जितना बोला गया है। वह बस घड़ी देखते रहते हैं कि कब ६ बजेंगे और कब इस 'नॉलेज के देवता' से पीछा छूटेगा।

वहीं दूसरी तरफ एक मल्टीप्लायर लीडर क्या करता है। वह लोगों को ढूँढता है और उन्हें फ्रीडम देता है। वह जानता है कि राहुल को एक्सेल शीट में मजा आता है और स्नेहा को क्लाइंट से बात करने में। वह उन्हें वही काम देगा जिसमे वो बेस्ट हैं। वह लोगों को इस्तेमाल नहीं करता, वह उन्हें इन्वेस्ट करता है। वह समझता है कि अगर टीम स्मार्ट बनेगी तो वह खुद ब खुद स्मार्ट दिखेगा।

असली लीडरशिप ये नहीं है कि आप कितने स्मार्ट हैं, बल्कि ये है कि आप अपने आस पास के लोगों को कितना स्मार्ट बना सकते हैं। अगर आपकी मौजूदगी में लोग खुद को छोटा महसूस कर रहे हैं तो आप लीडर नहीं, सिर्फ एक पद लेकर बैठे इंसान हैं। मल्टीप्लायर बनिए जो लोगों की खूबियों को मैग्नेट की तरह खींचे और उन्हें चमकने का मौका दे। जब आप लोगों को यह भरोसा देते हैं कि आप उनके टैलेंट की कदर करते हैं, तो वे अपनी पूरी जान लगा देते हैं। याद रखिये, एक अकेला इंसान कभी पहाड़ नहीं तोड़ सकता, लेकिन एक टैलेंट मैग्नेट पूरी फौज खड़ी कर सकता है जो नामुमकिन को भी मुमकिन बना दे।


लेसन २ : द चैलेंजर - टीम को आराम नहीं, चुनौती दीजिये

ज्यादातर मैनेजर्स को लगता है कि एक अच्छा बॉस वही है जो अपनी टीम को बहुत ही आसान और कम्फर्टेबल काम दे। उन्हें लगता है कि अगर टीम पर दबाव नहीं होगा तो वो खुश रहेंगे। लेकिन सच तो ये है कि ऐसे लीडर्स अपनी टीम को धीरे धीरे आलसी और कामचोर बना देते हैं। डिमिंिशर लीडर अक्सर अपनी टीम को छोटे छोटे और बोरिंग काम देता है क्योंकि उसे भरोसा ही नहीं होता कि उसके लोग कुछ बड़ा कर सकते हैं। उसे लगता है कि अगर कोई मुश्किल काम आ गया तो टीम रायता फैला देगी। इसलिए वह खुद ही सारे बड़े फैसले लेता है और टीम को बस 'कॉपी पेस्ट' वाले काम पर लगा देता है।

वहीं दूसरी तरफ एक मल्टीप्लायर लीडर 'द चैलेंजर' की तरह काम करता है। वह जानता है कि इंसान की असली काबिलियत तब बाहर आती है जब उसे उसकी लिमिट से थोड़ा ज्यादा खींचने को कहा जाए। वह अपनी टीम के सामने ऐसे गोल्स रखता है जिन्हें देखकर एक बार तो टीम के पसीने छूट जाएं। लेकिन यहाँ एक ट्विस्ट है। वह सिर्फ गोल देकर गायब नहीं हो जाता, बल्कि वह टीम में ये यकीन जगाता है कि 'हाँ, तुम ये कर सकते हो'।

इमेजिन कीजिये एक ऐसी सिचुएशन जहाँ आपकी कंपनी को एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट मिला है। एक डिमिंिशर बॉस कहेगा कि देखो ये बहुत मुश्किल काम है, तुम लोग बस डेटा एंट्री करो, बाकी क्लाइंट हैंडलिंग और स्ट्रेटेजी मैं देख लूँगा। यहाँ उसने अपनी टीम को चैलेंज करने के बजाय उन्हें छोटा महसूस करा दिया। लेकिन एक मल्टीप्लायर लीडर कहेगा कि दोस्तों ये प्रोजेक्ट हमारे लिए एक बड़ा मौका है। मुझे पता है कि हमने पहले कभी ऐसा नहीं किया, लेकिन मुझे आपकी क्रिएटिविटी पर पूरा भरोसा है। बताइए हम इस इम्पॉसिबल डेडलाइन को कैसे अचीव कर सकते हैं।

जब आप लोगों को चैलेंज करते हैं, तो उनके दिमाग के वो हिस्से एक्टिवेट होते हैं जो आराम करते समय सो रहे होते हैं। एक चैलेंजर कभी भी सीधे जवाब नहीं देता। वह सवाल पूछता है। अगर कोई एम्प्लॉई उसके पास प्रॉब्लम लेकर आता है, तो वह उसे सलूशन बताने के बजाय उससे पूछता है कि अगर तुम मेरी जगह होते तो क्या करते। इससे सामने वाले को सोचना पड़ता है। उसे महसूस होता है कि उसकी राय की कीमत है।

सर्कस के शेर और जंगल के शेर में यही फर्क होता है। सर्कस का शेर बस कोड़े की आवाज पर नाचता है क्योंकि उसे कभी चैलेंज नहीं किया गया, बस हुक्म दिया गया। लेकिन जंगल का शेर खुद अपनी चुनौतियां चुनता है और इसलिए वह राजा कहलाता है। अगर आप अपनी टीम को सिर्फ हुक्म देंगे, तो वो सर्कस के शेर बन जाएंगे जो आपके बिना एक कदम भी नहीं चल पाएंगे। लेकिन अगर आप उन्हें चैलेंज देंगे, तो वो ऐसे शिकारी बनेंगे जो किसी भी मुश्किल को हल कर लेंगे। इसलिए अपनी टीम के लिए कम्फर्ट जोन के दरवाजे बंद कर दीजिये और उनके लिए अपॉर्चुनिटी के आसमान खोल दीजिये।


लेसन ३ : द लिबरेटर - डर का माहौल नहीं, काम की आजादी दीजिये

कुछ ऑफिस का माहौल ऐसा होता है जैसे वहां कोई खुशियां मनाने नहीं बल्कि किसी मातम में आए हों। जैसे ही बॉस के जूतों की आवाज सुनाई देती है, लोग अचानक से टाइपिंग की स्पीड बढ़ा देते हैं और स्क्रीन पर ऐसे सीरियस बन जाते हैं जैसे वो नासा का कोई रॉकेट लॉन्च कर रहे हों। इसे कहते हैं डर का माहौल, और इसे बनाने वाले को बुक की भाषा में डिमिंिशर कहा जाता है। ये वो लोग हैं जिन्हें लगता है कि अगर उन्होंने खौफ पैदा नहीं किया, तो लोग काम नहीं करेंगे। नतीजा ये होता है कि टीम के लोग नए आइडियाज देने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर कुछ गलत हो गया तो बॉस उनकी क्लास लगा देगा।

लेकिन एक मल्टीप्लायर लीडर 'द लिबरेटर' होता है। लिबरेटर का मतलब है वो इंसान जो अपनी टीम को आजाद करता है। वह ऐसा माहौल बनाता है जहाँ लोग गलती करने से नहीं डरते। वह जानता है कि अगर कोई गलती नहीं कर रहा, तो इसका मतलब है कि वह कुछ नया ट्राई ही नहीं कर रहा। लिबरेटर अपनी टीम को एक ऐसी 'सेफ स्पेस' देता है जहाँ वो अपनी बात बेबाकी से रख सकें। यहाँ 'आजादी' का मतलब ये नहीं कि सब अपनी मनमर्जी करें, बल्कि इसका मतलब ये है कि लोगों के पास अपना बेस्ट काम करने की मेंटल फ्रीडम हो।

इमेजिन कीजिये एक मीटिंग चल रही है। एक डिमिंिशर बॉस वहां बैठा है जो हर किसी की बात काट रहा है और अपनी नॉलेज झाड़ रहा है। वहां लोग अपनी राय देने से पहले दस बार सोचेंगे। वहीं दूसरी तरफ एक लिबरेटर लीडर चुपचाप बैठकर सुनता है। वह कमरे में सबसे ज्यादा सुनने वाला और सबसे कम बोलने वाला इंसान होता है। वह लोगों को प्रोत्साहित करता है कि 'बोलो, तुम्हारे दिमाग में क्या है'। वह जानता है कि जब लोग रिलैक्स होते हैं, तभी उनका दिमाग सबसे ज्यादा क्रिएटिव होता है।

एक लिबरेटर का काम ये नहीं है कि वह सबको खुश रखे, बल्कि उसका काम ये है कि वह सबको काम करने के लिए प्रेरित करे। वह एक ऐसा प्रेशर कुकर नहीं बनाता जो कभी भी फट जाए, बल्कि वह एक ऐसा एनवायरनमेंट बनाता है जहाँ काम करना एक बोझ नहीं बल्कि एक मजेदार चैलेंज बन जाए। जब आप अपनी टीम को ये भरोसा दिलाते हैं कि आप उनके साथ खड़े हैं, चाहे रिजल्ट जो भी हो, तो वो लोग अपनी लिमिट से बाहर जाकर परफॉर्म करते हैं।

तो अब ये फैसला आपको करना है। क्या आप एक ऐसा लीडर बनना चाहते हैं जिससे लोग डरें और जिसके पीछे हटते ही वो आपकी बुराई करें। या आप एक ऐसा लिबरेटर बनना चाहते हैं जिसकी गैर मौजूदगी में भी टीम उतनी ही मेहनत से काम करे क्योंकि उन्हें अपने काम से और आपसे प्यार है। याद रखिये, असली पावर कंट्रोल करने में नहीं, बल्कि कंट्रोल छोड़ने में है। जब आप लोगों को उड़ने के लिए आसमान देते हैं, तो वो आपको ऐसी ऊंचाइयों पर ले जाते हैं जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी।


तो दोस्तों, मल्टीप्लायर बनना कोई जादू नहीं है, ये एक चॉइस है। आज ही अपने अंदर के उस डिमिंिशर को बाहर निकाल फेंकिये जो दूसरों को छोटा दिखाकर खुद को बड़ा समझना चाहता है। अपने आस पास के लोगों की ताकत बनिए, उनकी कमजोरी नहीं। अगर आपको ये लेसन पसंद आए हैं, तो इसे अपने उस दोस्त या बॉस के साथ जरूर शेयर करें जिसे एक मल्टीप्लायर बनने की सख्त जरूरत है। चलिए साथ मिलकर एक ऐसा वर्क कल्चर बनाते हैं जहाँ हर कोई स्मार्ट महसूस करे।

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