One Billion Customers (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि चाइना में बिजनेस करना बच्चों का खेल है। अगर हाँ तो बधाई हो आप अपनी मेहनत की कमाई को आग लगाने की तैयारी कर रहे हैं। बिना इस बुक के लेसन समझे आप अपनी कंपनी को चीन की उन गलियों में खो देंगे जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं मिलता और दुनिया आप पर हँसेगी।

इस आर्टिकल में हम जेम्स मैकग्रेगर की आंखों देखी उन गलतियों और स्ट्रेटजी के बारे में बात करेंगे जो आपको एक अरब कस्टमर्स तक पहुँचा सकती हैं। चलिए इन ३ लेसन के जरिए चाइना मार्केट के अनसुने सच को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : पार्टनरशिप की पावर और धोखे से बचाव

चीन के मार्केट में घुसना वैसा ही है जैसे किसी अनजान जंगल में बिना मैप के निकल जाना। यहाँ हर कदम पर आपको एक गाइड की जरूरत होती है जिसे हम लोकल पार्टनर कहते हैं। जेम्स मैकग्रेगर कहते हैं कि बिना पार्टनर के आप वहाँ एक कदम भी नहीं चल सकते। लेकिन असली खेल तब शुरू होता है जब आप अपना पार्टनर चुनते हैं। बहुत से विदेशी बिजनेसमैन को लगता है कि उन्होंने एक बहुत बड़ा जैकपॉट जीत लिया है। उन्हें लगता है कि बस अब तो पैसा ही पैसा होगा। लेकिन असलियत यह है कि वहाँ पार्टनरशिप का मतलब अक्सर यह होता है कि आपका पार्टनर आपकी टेक्नोलॉजी और आपके आइडिया चुराने की फिराक में बैठा है।

सोचिए आपने एक बहुत शानदार मशीन बनाई है। आप इसे चीन में बेचना चाहते हैं। आपने वहाँ के एक लोकल बिजनेसमैन से हाथ मिलाया। वह आपसे बहुत प्यार से बात करता है। वह आपको बढ़िया खाना खिलाता है और बड़ी बड़ी बातें करता है। आपको लगता है कि भाई मिल गया। लेकिन कुछ ही महीनों बाद आपको पता चलता है कि आपके बगल वाली गली में ही आपकी मशीन का एक सस्ता और नकली वर्जन बिक रहा है। और उसे बेचने वाला कोई और नहीं बल्कि आपका वही प्यारा पार्टनर है। यह कोई मजाक नहीं है बल्कि वहाँ का कड़वा सच है। अगर आप सावधान नहीं रहे तो आपका पार्टनर ही आपकी कब्र खोद देगा। वह आपकी आँखों में धूल झोंक कर आपका पूरा बिजनेस हड़प लेगा और आप बस हाथ मलते रह जाएंगे।

मैकग्रेगर समझाते हैं कि चीन में बिजनेस करते वक्त आपको अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी यानी अपने सीक्रेट्स को ऐसे संभाल कर रखना चाहिए जैसे कोई कंजूस अपनी तिजोरी की चाबी संभालता है। लोग अक्सर अपनी सारी जानकारी और अपनी सारी ताकत एक ही बार में पार्टनर के सामने रख देते हैं। यह वैसी ही बेवकूफी है जैसे किसी अनजान को अपने घर की चाबियाँ देकर छुट्टी पर चले जाना। फिर जब आप वापस आते हैं तो घर खाली मिलता है और आप सोचते हैं कि यह क्या हो गया। चीन में आपका पार्टनर आपका सबसे बड़ा दोस्त भी हो सकता है और सबसे बड़ा दुश्मन भी। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आपने उस पर कितना भरोसा किया और अपनी पीठ कितनी खुली छोड़ी।

वहाँ के लोग बिजनेस को एक जंग की तरह देखते हैं। और जंग में सब कुछ जायज है। उनके लिए एग्रीमेंट सिर्फ कागजों का एक ढेर है जिसे कभी भी बदला जा सकता है। अगर आप वहाँ जाकर यह उम्मीद करते हैं कि सब कुछ कानून के हिसाब से चलेगा तो आप अभी भी सपनों की दुनिया में जी रहे हैं। आपको अपनी ईंट खुद ही मजबूत रखनी होगी। अपनी टेक्नोलॉजी के खास हिस्सों को हमेशा अपने पास रखें। पार्टनर को सिर्फ उतना ही बताएं जितना उसे काम चलाने के लिए जरूरी है। बाकी सब कुछ अपने पास तिजोरी में बंद रखें। वरना आप देखते रह जाएंगे और वह अरबों का मार्केट आपके हाथ से फिसल जाएगा।


लेसन २ : गवर्नमेंट के साथ तालमेल का खेल

चीन में बिजनेस करने का मतलब सिर्फ एक अच्छा प्रोडक्ट बनाना नहीं है। असल में वहां आपका असली बॉस आपका कस्टमर नहीं बल्कि वहां की सरकार है। जेम्स मैकग्रेगर बताते हैं कि अगर आपने वहां की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ सेटिंग नहीं बिठाई तो आपका बिजनेस शुरू होने से पहले ही खत्म हो सकता है। वहां के नियम सुबह कुछ और होते हैं और शाम को कुछ और। यह वैसा ही है जैसे आप किसी ऐसे गेम में हिस्सा ले रहे हों जहाँ अंपायर ही बीच मैच में रूल्स बदल देता है क्योंकि उसे आपका चेहरा पसंद नहीं आया। अगर आप वहां जाकर यह चिल्लाएंगे कि यह तो अनफेयर है तो लोग आप पर सिर्फ हँसेंगे।

कल्पना कीजिए कि आपने बीजिंग के सबसे महंगे इलाके में एक बहुत बड़ा शोरूम खोला है। आपने करोड़ों रुपये विज्ञापन पर खर्च कर दिए हैं। लेकिन अचानक एक दिन एक छोटा सा सरकारी अफसर आता है और कहता है कि आपकी बिल्डिंग का रंग वहां के वातावरण के हिसाब से मैच नहीं कर रहा है। अब आप चाहे जितने भी तर्क दे दें या कानून की किताबें दिखा दें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। आपको वह रंग बदलना ही पड़ेगा वरना अगले दिन आपके गेट पर ताला लटका होगा। चीन में सरकार ही सब कुछ है। वहां के बड़े बड़े बिजनेसमैन भी सरकारी अफसरों के सामने ऐसे खड़े होते हैं जैसे स्कूल में कोई बच्चा प्रिंसिपल के सामने खड़ा हो। अगर आप वहां जाकर अपनी अकड़ दिखाएंगे तो वह अकड़ निकलने में उन्हें दो मिनट भी नहीं लगेंगे।

वहां बिजनेस का मतलब है पॉलिटिक्स। अगर सरकार चाहती है कि कोई खास इंडस्ट्री आगे बढ़े तो वह उसे रातों रात आसमान पर पहुँचा देगी। लेकिन अगर उन्हें लगा कि आप उनकी नेशनल सिक्योरिटी या उनके ईगो के लिए खतरा बन रहे हैं तो वह आपको जमीन के अंदर गाड़ने में भी देर नहीं करेंगे। बहुत से विदेशी बिजनेसमैन वहां जाते हैं और सोचते हैं कि हम तो बहुत बड़ी कंपनी हैं हम जो चाहेंगे वही होगा। यह उनकी सबसे बड़ी भूल होती है। वहां आपको झुकना सीखना होगा। आपको यह समझना होगा कि वहां का कानून कोई पत्थर की लकीर नहीं है बल्कि एक ऐसी रबर है जिसे सरकार अपनी मर्जी से जितना चाहे खींच सकती है।

वहां के लोकल अधिकारी आपसे ऐसे वादे करेंगे जैसे वह आपके सगे भाई हों। वह आपको सब्सिडी देंगे और जमीन भी देंगे। लेकिन याद रखिए कि यह सब एक जाल भी हो सकता है। वह आपको तब तक सपोर्ट करेंगे जब तक उन्हें आपसे कुछ मिल रहा है। जिस दिन आपने उनकी बात मानना बंद किया उसी दिन से आपकी मुश्किलें शुरू हो जाएंगी। जेम्स कहते हैं कि वहां के सिस्टम को समझना किसी पहेली को सुलझाने जैसा है। आपको सरकार के विजन के साथ अपना विजन मिलाना होगा। अगर सरकार कहती है कि उन्हें ग्रीन एनर्जी चाहिए तो आपको भी ग्रीन एनर्जी की माला जपनी होगी। वहां वही टिकता है जो सरकार की धुन पर नाचना जानता है।


लेसन ३ : नेगोशिएशन की कला और सब्र का फल

अगर आपको लगता है कि आप एक बहुत बड़े सेल्समैन हैं और आप किसी को भी कुछ भी बेच सकते हैं तो एक बार चीन के नेगोशिएशन टेबल पर बैठकर देखिए। जेम्स मैकग्रेगर कहते हैं कि वहां डील करना किसी मैराथन दौड़ जैसा है जहाँ खत्म होने की लाइन बार बार आगे बढ़ा दी जाती है। विदेशी बिजनेसमैन अक्सर अपनी रिटर्न फ्लाइट का टिकट जेब में लेकर जाते हैं और सोचते हैं कि तीन दिन में डील पक्की करके वापस आ जाएंगे। चीन के लोग आपकी इसी जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। वह जानते हैं कि आपको जल्दी है और बस यही आपकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है। वह आपको तब तक थकाएंगे जब तक आप हार मानकर उनकी हर शर्त पर हाँ न कह दें।

सोचिए आप एक टेबल पर बैठे हैं और सामने दस चाइनीज अधिकारी हैं। आप अपनी प्रेजेंटेशन देते हैं और वह सब बस आपको पत्थर की तरह घूरते रहते हैं। कोई मुस्कुराहट नहीं और कोई जवाब नहीं। फिर अचानक वह आपस में अपनी भाषा में बात करने लगते हैं और आपको ऐसा लगता है जैसे आप वहां हैं ही नहीं। यह उनकी एक सोची समझी चाल होती है आपको नर्वस करने की। जब आप परेशान होकर अपनी तरफ से कुछ छूट देने की बात करते हैं तो वह और भी शांत हो जाते हैं। उन्हें पता है कि जैसे जैसे आपकी फ्लाइट का समय करीब आएगा आप अपनी कीमत कम करते जाएंगे। वहां डील साइन करना वैसा ही है जैसे किसी जिद्दी बच्चे को अपनी बात मनवाना। आपको बहुत ज्यादा सब्र दिखाना होगा वरना आप अपना नुकसान करवा बैठेंगे।

वहां के लोग आपसे तब तक बात करेंगे जब तक आप पूरी तरह खाली न हो जाएं। वह आपसे आपकी कंपनी के सारे राज उगलवा लेंगे और फिर अंत में कहेंगे कि हमें यह डील मंजूर नहीं है। या फिर वह आखिरी मिनट पर कोई ऐसी शर्त रख देंगे जो आपने सपने में भी नहीं सोची होगी। जेम्स समझाते हैं कि चीन में 'हाँ' का मतलब हमेशा 'हाँ' नहीं होता। कभी कभी इसका मतलब होता है कि 'शायद' और कभी कभी इसका मतलब होता है कि 'मुझे आपकी बात समझ नहीं आई लेकिन मैं बुरा नहीं बनना चाहता'। वहां के लोग अपनी भावनाओं को चेहरे पर नहीं आने देते। आपको उनके दिमाग के अंदर झांकना सीखना होगा।

असल में वहां बिजनेस एक रिश्ता है। वह आपसे तब तक डील नहीं करेंगे जब तक उन्हें यह न लगे कि आप उनके काबू में हैं। वह आपको खूब शराब पिलाएंगे और बड़ी बड़ी पार्टियां देंगे ताकि आप अपनी सतर्कता खो दें। लेकिन याद रखिए कि हर जाम के साथ वह आपकी कमजोरी ढूंढ रहे होते हैं। वहां जीतने का सिर्फ एक ही तरीका है और वह है सब्र। आपको उन्हें यह दिखाना होगा कि आपको जाने की कोई जल्दी नहीं है। जब उन्हें लगेगा कि आप झुकने वाले नहीं हैं तब वह असल मुद्दे पर बात करना शुरू करेंगे। यह एक मानसिक लड़ाई है जिसे जीतने के लिए आपको लोहे जैसा जिगर और हिमालय जैसा धीरज चाहिए। जो यहाँ टिक गया समझो वह एक अरब कस्टमर्स के दिल तक पहुँच गया।


चीन का मार्केट एक बहुत बड़ा समंदर है जहाँ मोती भी हैं और खतरनाक शार्क भी। अगर आप बिना तैयारी के इसमें कूदेंगे तो डूबना पक्का है। लेकिन अगर आप इन ३ लेसन को अपनी ढाल बना लें तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। क्या आप अपनी बिजनेस स्ट्रेटजी को बदलने के लिए तैयार हैं। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो बड़े सपने देखते हैं और कमेंट में बताएं कि आपको सबसे खतरनाक लेसन कौन सा लगा। याद रखिए कि नॉलेज ही वह चाबी है जो सफलता के बंद दरवाजे खोलती है।

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