क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो भीड़ में किसी खोई हुई चप्पल की तरह गायब हो जाते हैं। बधाई हो आप अपनी लाइफ और करियर को खुद अपने हाथों से बोरिंग बना रहे हैं। बिना पॉप टेक्निक के आप सिर्फ एक और बैकग्राउंड शोर हैं जिसे दुनिया इग्नोर कर रही है।
अगर आप चाहते हैं कि लोग आपको देखते ही इग्नोर न करें बल्कि आपके दीवाने हो जाएं तो यह आर्टिकल आपके लिए है। चलिए सैम हॉर्न की इस कमाल की बुक से वह सीक्रेट्स जानते हैं जो आपको रातोंरात एक ब्रांड बना सकते हैं।
लेसन १ : पॉप फैक्टर - बोरिंग से ब्रिलियंट बनने का सफर
अगर आप अपनी लाइफ में वही पुराने घिसे-पिटे तरीके अपना रहे हैं तो यकीन मानिए आप उस सफेद दीवार की तरह हैं जिस पर किसी की नजर नहीं जाती। सैम हॉर्न अपनी बुक में सबसे पहले पॉप (POP) शब्द का मतलब समझाती हैं। पी का मतलब है पर्पजफुल, ओ का मतलब है ऑरिजिनल, और पी का मतलब है पिथी। अब इसे थोड़ा आसान भाषा में समझते हैं। इमेजिन करिए कि आप एक शादी में गए हैं और वहां सबने सफेद कुर्ते पहने हैं। अचानक एक बंदा नियॉन पिंक कलर का सूट पहनकर आ जाता है। क्या आप उसे इग्नोर कर पाएंगे। बिलकुल नहीं। चाहे वह आपको अजीब लगे या अच्छा पर उसने आपका ध्यान खींच लिया है। यही पॉप फैक्टर का जादू है।
आज के जमाने में लोगों का अटेंशन स्पैन एक गोल्डफिश से भी कम हो गया है। अगर आपने शुरू के तीन सेकंड में अपनी बात नहीं कही तो लोग आपको ऐसे स्वाइप करेंगे जैसे कोई खराब डेटिंग प्रोफाइल हो। मान लीजिए आप एक नया स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं या ऑफिस में कोई प्रेजेंटेशन दे रहे हैं। अगर आपका आईडिया सुनते ही सामने वाले के चेहरे पर वह "वाह" वाली फीलिंग नहीं आई तो समझ लीजिए आप फेल हो गए हैं। लोग अक्सर सोचते हैं कि बहुत सारा डेटा और भारी-भरकम शब्द बोलकर वे इम्प्रेस कर लेंगे। पर असलियत तो यह है कि जब आप बहुत ज्यादा टेक्निकल हो जाते हैं तो सामने वाला मन ही मन यह सोच रहा होता है कि डिनर में पनीर बनेगा या चिकन।
सैम हॉर्न कहती हैं कि आपको अपनी बात को एकदम छोटा और असरदार यानी पिथी बनाना होगा। जैसे "जस्ट डू इट" सुनते ही नाइकी याद आता है। क्या उन्होंने पच्चीस पेज का मैनिफेस्टो लिखा। नहीं। उन्होंने बस तीन शब्द कहे और खेल खत्म। हमारे इंडियन मार्केट में भी यही होता है। अगर आपका काम यूनिक नहीं है तो आप बस एक और मोहल्ले की किराने की दुकान बनकर रह जाएंगे जहां लोग सिर्फ उधार मांगने आते हैं। आपको अपनी पर्सनालिटी और अपने काम में वह तड़का लगाना होगा जो लोगों को मजबूर कर दे कि वे रुकें और आपको सुनें।
कुछ लोग इतने बोरिंग होते हैं कि अगर वे किसी पार्टी में जाएं तो पार्टी खुद-ब-खुद खत्म हो जाती है। वे अपनी बात शुरू करते हैं अपनी डिग्री से और खत्म करते हैं अपनी उपलब्धियों पर। भाई किसी को फर्क नहीं पड़ता कि आपने कौन सा मेडल जीता है अगर आप अपनी बात को मजेदार नहीं बना सकते। अगर आप भीड़ का हिस्सा बने रहना चाहते हैं तो मुबारक हो आप बहुत सेफ खेल रहे हैं। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि जब आप कमरे में घुसें तो लोग अपना फोन छोड़कर आपको देखें तो आपको पॉप करना ही पड़ेगा। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है बस थोड़ा सा दिमाग लगाकर अपनी बात को दूसरों से अलग पेश करने का हुनर है।
लेसन २ : W-३ फॉर्मूला - अपनी असली पहचान का असली सच
क्या आपको भी लगता है कि आप दुनिया के सबसे बड़े मिस्ट्री मैन या वुमन हैं। लोग आपसे पूछते हैं कि भाई करते क्या हो और आप आधे घंटे का लेक्चर झाड़ देते हैं। बधाई हो आपने सामने वाले का कीमती वक्त बर्बाद कर दिया और उसे कन्फ्यूज भी कर दिया। सैम हॉर्न अपनी बुक में डब्लू३ (W3) फॉर्मूला के बारे में बताती हैं जो आपकी पहचान को शीशे की तरह साफ कर देता है। पहला डब्लू है हु (Who) यानी आप कौन हैं। दूसरा है व्हाट (What) यानी आप क्या ऑफर कर रहे हैं। और तीसरा सबसे जरूरी है व्हाई (Why) यानी दुनिया को रत्ती भर भी फर्क क्यों पड़ना चाहिए कि आप जिंदा हैं या नहीं।
इमेजिन करिए आप एक लिफ्ट में हैं और आपके साथ आपका ड्रीम बॉस खड़ा है। आपके पास सिर्फ ३० सेकंड हैं। अब अगर आप वहां खड़े होकर अपनी कुंडली सुनाने लगेंगे तो वह बॉस अगली मंजिल पर उतरकर भाग जाएगा। लेकिन अगर आप उसे यह बता सकें कि आप उसकी कौन सी बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व कर सकते हैं तो वह शायद अपना कार्ड आपको दे दे। इंडिया में हम लोग अक्सर अपनी मेहनत का ढिंढोरा पीटते हैं पर यह भूल जाते हैं कि क्लाइंट या बॉस को सिर्फ अपने फायदे से मतलब है। उन्हें आपकी रातों की नींद से कोई लेना-देना नहीं है उन्हें बस अपना काम चाहिए।
एक और मजेदार बात यह है कि हम खुद को बहुत यूनिक समझते हैं। लेकिन असलियत में हम सब उसी एक रेस में दौड़ रहे हैं जहाँ हर कोई एक जैसा दिखना चाहता है। अगर आप एक डिजिटल मार्केटर हैं और आप वही घिसी-पिटी बातें कर रहे हैं जो बाकी हजार लोग कर रहे हैं तो आप बस एक और शोर हैं। सैम हॉर्न कहती हैं कि आपको अपना "व्हाई" इतना स्ट्रॉन्ग बनाना होगा कि लोग आपसे जुड़ने के लिए बेताब हो जाएं। जैसे अगर आप जिम ट्रेनर हैं तो यह मत कहिए कि मैं वजन घटाता हूँ। यह कहिए कि मैं आपको उस पुरानी जींस में वापस फिट कर दूँगा जो आपने पांच साल से नहीं पहनी। देखिए कैसे लोगों की आंखों में चमक आती है।
लोग अपनी लिंक्डइन प्रोफाइल पर "पैशनेट लीडर" या "विज़नरी थिंकर" लिखते हैं। भाई, अगर आप विज़नरी होते तो कम से कम यह तो देख पाते कि यह कितना बोरिंग लग रहा है। असल में लोग उन लोगों की तरफ खिंचे चले आते हैं जो सीधे मुद्दे की बात करते हैं और जिनकी बातों में दम होता है। डब्लू३ फॉर्मूला आपको वह क्लैरिटी देता है जो आपको एक आम इंसान से एक ब्रांड में बदल देती है। अगर आप आज भी अपनी पहचान को लेकर कन्फ्यूज हैं तो समझ लीजिए कि आप उस जीपीएस की तरह हैं जो हर मोड़ पर "री-कैलकुलेटिंग" बोलता रहता है और कभी मंजिल तक नहीं पहुँचता।
लेसन ३ : कनेक्टिविटी और रीयल वर्ल्ड इम्पैक्ट - दिल जीत लिया तो समझो खेल जीत लिया
क्या आपको भी लगता है कि लोग आपके आईडिया को सिर्फ इसलिए पसंद करेंगे क्योंकि वह लॉजिकल है। अगर हाँ तो मुबारक हो आप दुनिया के सबसे बड़े मुगालते में जी रहे हैं। सैम हॉर्न अपनी बुक में साफ कहती हैं कि इंसान कोई कैलकुलेटर नहीं है जो सिर्फ नंबर्स और फैक्ट्स से चलता है। इंसान चलता है इमोशन्स से। अगर आप अपनी बात को किसी के दिल तक नहीं पहुँचा सकते तो वह आपकी बात को अपने दिमाग के कचरे के डिब्बे में डाल देगा। इमेजिन करिए कि आप अपनी बीवी या गर्लफ्रेंड को यह बता रहे हैं कि आपने आज ऑफिस में कितनी बड़ी एक्सेल शीट भरी है। क्या वह इम्प्रेस होगी। नहीं। वह बस यह सोचेगी कि काश उसने आज नेटफ्लिक्स पर कोई अच्छी मूवी देख ली होती।
सैम हॉर्न कहती हैं कि आपको कनेक्टिविटी पैदा करनी होगी। इसके लिए आपको कहानियों का सहारा लेना होगा। कहानियां लोगों के दिमाग में इमेज बनाती हैं। जब आप कहते हैं कि मेरा प्रोडक्ट बहुत अच्छा है तो कोई यकीन नहीं करता। लेकिन जब आप यह बताते हैं कि कैसे उस प्रोडक्ट ने एक डूबते हुए बिजनेस को बचाया तो लोग अपनी कुर्सी के कोने पर आ जाते हैं। इंडिया में हम भावनाओं के भूखे लोग हैं। यहाँ इमोशनल मार्केटिंग से लोग कफ़न भी बेच देते हैं और आप अपनी इतनी शानदार सर्विस नहीं बेच पा रहे। क्योंकि आप आज भी वही पुराने घिसे हुए 'फीचर्स' और 'बेनिफिट्स' रट रहे हैं।
कुछ सेल्समेन ऐसे होते हैं जो आपको फ्रिज बेचने के लिए उसके कंप्रेसर की टेक्निकल स्पेसिफिकेशन सुनाने लगते हैं। भाई मुझे यह जानना है कि इसमें मेरी आइसक्रीम जमेगी या नहीं और बिजली का बिल मुझे सड़क पर तो नहीं ले आएगा। अगर आप अपनी बात को सामने वाले की जरूरत से नहीं जोड़ सकते तो आप सिर्फ एक रेडियो हैं जो बिना किसी लिसनर के बज रहा है। कनेक्टिविटी का मतलब है कि जब आप बोलें तो सामने वाले को लगे कि आप उसी की जिंदगी की बात कर रहे हैं। सैम हॉर्न की यह बुक हमें सिखाती है कि कैसे अपनी बातों में वह हुक लगाएं जो किसी को भी आपका फैन बना दे।
आज के इस कॉम्पिटिशन वाले दौर में अगर आप सिर्फ एक अच्छे एम्प्लॉई या एक अच्छे बिजनेसमैन हैं तो आप बस एक और ईंट हैं दीवार में। आपको वह पेंट बनना होगा जो उस दीवार को खूबसूरत बना दे। लेसन यह है कि अपनी बातों को आसान रखिए और दूसरों के नजरिए से सोचिए। अगर आप आज भी अपनी ही धुन में गा रहे हैं तो फिर अकेले ही नाचते रहिये क्योंकि भीड़ तो उसी के पीछे जाएगी जो उन्हें कुछ खास महसूस कराएगा।
अब वक्त आ गया है कि आप खुद से एक सवाल पूछें। क्या आप वही पुराने घिसे-पिटे इंसान बने रहना चाहते हैं जिसे कोई याद नहीं रखता। या फिर आप वह पॉप फैक्टर लाना चाहते हैं जो आपकी पहचान को अमर कर दे। याद रखिये कि दुनिया में टैलेंट की कमी नहीं है कमी है तो सिर्फ उसे सही तरीके से पेश करने वालों की। आज ही सैम हॉर्न की इन टेक्निक्स को अपनी लाइफ में उतारें और देखें कि कैसे लोग आपकी तरफ खिंचे चले आते हैं। उठिए अपनी पहचान बनाइए और दुनिया को दिखा दीजिये कि आप क्या चीज हैं।
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