Own Your Career, Own Your Life (Hindi)


क्या आप अभी भी अपनी किस्मत और अपने बॉस के भरोसे बैठे हैं। बधाई हो आप अपनी लाइफ की गाड़ी की पिछली सीट पर सो रहे हैं जबकि आपका करियर खाई की तरफ जा रहा है। अगर आपको लगता है कि सिर्फ मेहनत से तरक्की मिलेगी तो आप बहुत बड़े धोखे में जी रहे हैं।

​एंडी स्टोर्च की बुक ओन योर करियर ओन योर लाइफ हमें सिखाती है कि कैसे अपनी लाइफ का कंट्रोल वापस लेना है। चलिए देखते हैं वो 3 बड़े लेसन जो आपकी प्रोफेशनल जिंदगी को पूरी तरह बदल कर रख देंगे।


लेसन १ : पैसेंजर नहीं ड्राइवर बनिए

​ज्यादातर लोग अपने करियर को एक सरकारी बस की तरह चलाते हैं। बस में चढ़ तो गए हैं पर स्टीयरिंग किसके हाथ में है और कंडक्टर कहाँ उतार देगा इसका कोई अता पता नहीं है। अगर आपको लगता है कि आपकी कंपनी या आपका मैनेजर आपकी तरक्की का ठेका लेकर बैठा है तो आपसे बड़ा मासूम इस दुनिया में कोई नहीं है असलियत तो यह है कि कंपनी को सिर्फ अपने काम से मतलब है और आपके बॉस को अपनी कुर्सी से। ऐसे में अगर आप पैसेंजर बनकर पीछे वाली सीट पर बैठकर मूंगफली खा रहे हैं तो याद रखिये कि गाड़ी कहीं भी जा सकती है। एंडी स्टोर्च कहते हैं कि अपने करियर के ड्राइवर खुद बनिए। इसका मतलब है कि अपनी ग्रोथ की पूरी जिम्मेदारी आपको खुद उठानी होगी।

​मान लीजिये राहुल नाम का एक लड़का है जो एक आईटी कंपनी में काम करता है। राहुल बहुत मेहनती है और उसे लगता है कि एक दिन उसका बॉस खुद आकर उसे कहेगा कि राहुल तुम बहुत महान हो यह लो डबल सैलरी और केबिन। लेकिन असल में होता क्या है। साल के आखिर में राहुल को मिलता है एक ठेंगा और एक छोटा सा इंक्रीमेंट जो महंगाई के सामने भी घुटने टेक देता है। क्यों। क्योंकि राहुल पैसेंजर था। उसने कभी नहीं पूछा कि मुझे आगे बढ़ने के लिए क्या नया सीखना चाहिए या मुझे कौन से बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करना चाहिए। वह बस चुपचाप बैठा रहा और उम्मीद करता रहा कि चमत्कार होगा। लेकिन बॉस को तो वही दिखता है जो खुद आकर अपनी वैल्यू बताता है।

​ड्राइवर बनने का मतलब है कि आपको पता होना चाहिए कि अगले दो साल में आप कहाँ पहुँचना चाहते हैं। अगर आपको लगता है कि मौजूदा कंपनी में आपका रास्ता बंद है तो रास्ता बदलिये। अपनी स्किल को अपडेट करना और अपने लिए नए मौके ढूंढना आपकी ड्यूटी है न कि आपके एचआर की। जब आप ड्राइवर की सीट पर बैठते हैं तो आप तय करते हैं कि गाड़ी की स्पीड क्या होगी और रास्ता कौन सा होगा। वरना पैसेंजर बनकर तो आप बस धक्के ही खाएंगे और दूसरे लोग आपको वहां उतार देंगे जहाँ उनका फायदा होगा।

​सोचिये अगर आप एक ट्रिप पर जा रहे हैं और आपको पता ही नहीं कि गाड़ी कहाँ जा रही है। क्या आप सुकून से बैठ पाएंगे। नहीं न। तो फिर अपनी जिंदगी और करियर के साथ ऐसा रिस्क क्यों लेना। अपने करियर का कंट्रोल अपने हाथ में लीजिये वरना कोई और आपको अपनी उंगलियों पर नचाने के लिए तैयार खड़ा है।



लेसन २ : नेटवर्क ही आपकी नेट वर्थ है

​अगर आपको लगता है कि सिर्फ ऑफिस में घिसने से और कोडिंग या एक्सेल शीट भरने से आप करोड़पति बन जाएंगे तो आपको सच में एक ठंडे पानी के शावर की जरूरत है। दुनिया काबिल लोगों से भरी पड़ी है पर पैसा और पोजीशन उन्हीं को मिलती है जिन्हें सही लोग जानते हैं। एंडी स्टोर्च साफ़ कहते हैं कि आपकी असली ताकत आपके काम में नहीं बल्कि आपके नेटवर्क में है। जो लोग अकेले कोने में बैठकर लंच करते हैं और सोचते हैं कि उनका काम खुद बोलेगा वह दरअसल एक बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। काम कभी नहीं बोलता जनाब काम को बुलवाना पड़ता है और इसके लिए आपको लोगों की जरूरत पड़ती है।

मान लीजिये विकास एक बहुत ही टैलेंटेड ग्राफिक डिजाइनर है। वह दिन रात बेहतरीन डिजाइन बनाता है पर ऑफिस के बाहर उसे कोई नहीं जानता। दूसरी तरफ है अमित जिसे डिजाइनिंग तो ठीक ठाक आती है पर वह हर इवेंट में जाता है और लिंक्डइन पर लोगों से बातें करता है। जब भी किसी बड़ी कंपनी में बड़ी ओपनिंग आती है तो लोग विकास को नहीं बल्कि अमित को फोन करते हैं। क्यों। क्योंकि अमित लोगों की यादों में है। विकास एक छुपा हुआ खजाना है जिसे किसी ने ढूंढा ही नहीं। और याद रखिये अगर खजाना जमीन के नीचे ही दबा रह गया तो उसकी कीमत जीरो है।

​नेटवर्किंग का मतलब यह नहीं है कि आप लोगों को चापलूसी भरे मैसेज भेजें या बस अपना मतलब निकालें। इसका मतलब है सच्चे रिश्ते बनाना और दूसरों की मदद करना। जब आप दूसरों की वैल्यू बढ़ाते हैं तो लोग आपकी वैल्यू खुद ही करने लगते हैं। अगर आप अभी भी सिर्फ अपने डेस्क पर चिपके रहते हैं तो आप एक ऐसी रेस लड़ रहे हैं जिसमें जीत कर भी आप हार जाएंगे। अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलिये और उन लोगों से हाथ मिलाइये जो वहां हैं जहाँ आप पहुँचना चाहते हैं।

​पुराने जमाने में कहते थे कि जानकारी ही ताकत है पर आज के दौर में जानकारी तो गूगल पर फ्री में मिल जाती है। आज के दौर में असली ताकत है कनेक्शन। आपका एक सही फोन कॉल आपके पांच साल की मेहनत बचा सकता है। इसलिए लंच ब्रेक में अकेले मोबाइल पर रील देखने के बजाय किसी कलीग या मेंटर के साथ कॉफी पीजिये। क्या पता आपकी अगली बड़ी तरक्की उसी कॉफी कप के पीछे छुपी हो।


लेसन ३ : हर दिन खुद को अपग्रेड करें

​क्या आपको याद है वो नोकिया का फोन जो कभी सबके पास होता था। आज वो कहाँ है। म्यूजियम में या किसी कबाड़ के डिब्बे में। क्यों। क्योंकि उसने वक्त के साथ खुद को बदलना जरूरी नहीं समझा। अगर आप भी वही पुरानी घिसी पिटी स्किल्स लेकर बैठे हैं जो आपने पांच साल पहले सीखी थीं तो मुबारक हो आप भी बहुत जल्द करियर के म्यूजियम में सजने वाले हैं। एंडी स्टोर्च का तीसरा लेसन बहुत सीधा है कि सीखना कभी बंद मत कीजिये। जिस दिन आपने सीखना बंद किया उसी दिन से आपकी ग्रोथ का उलटा काउंटडाउन शुरू हो गया है।

​अब जरा समीर की कहानी सुनिए। समीर को लगता था कि उसने कॉलेज की डिग्री ले ली है तो अब उसकी पढ़ाई खत्म और कमाई शुरू। वह ऑफिस आता है अपना पुराना काम करता है और घर जाकर नेटफ्लिक्स पर वेब सीरीज देखता है। उसे लगता है कि उसकी जॉब एकदम सेफ है। लेकिन अचानक मार्केट में एआई आ जाता है और उसका काम अब एक छोटा सा सॉफ्टवेयर समीर से दस गुना तेज कर देता है। समीर अब परेशान है क्योंकि उसके पास कोई नई स्किल नहीं है। उसने कभी नहीं सोचा था कि दुनिया इतनी तेजी से बदल जाएगी। समीर का हाल उस पहलवान जैसा है जो अखाड़े में जाने की तैयारी तो करता रहा पर यह भूल गया कि अब कुश्ती नहीं बल्कि एमएमए का जमाना है।

हम अपने फोन को तो हर महीने अपडेट करते हैं पर अपने दिमाग को अपडेट करने के लिए हमारे पास डेटा नहीं होता। एंडी स्टोर्च कहते हैं कि आपको अपनी लर्निंग का बजट बनाना चाहिए। चाहे वो किताबें पढ़ना हो या कोई नया कोर्स करना। अगर आप हर दिन सिर्फ एक परसेंट भी खुद को बेहतर बनाते हैं तो साल के अंत तक आप एक पूरी तरह से नए और पावरफुल इंसान बन जाएंगे। मार्केट में आपकी कीमत इस बात से नहीं लगती कि आपने कितने साल काम किया है बल्कि इस बात से लगती है कि आपको आज के जमाने का कितना काम आता है।

​खुद को अपग्रेड करना कोई बोझ नहीं बल्कि एक इन्वेस्टमेंट है। जब आप नए टूल्स और नई तकनीक सीखते हैं तो आप कंपनी के लिए बोझ नहीं बल्कि एक एसेट बन जाते हैं। तो आज ही अपनी वो पसंदीदा वेब सीरीज छोड़िये और कुछ ऐसा सीखिए जो आपके आने वाले कल को सिक्योर कर सके। याद रखिये कि रेस वही जीतता है जो ट्रैक के हिसाब से अपनी स्पीड और गियर बदलना जानता है।

 
दोस्तों, क्या आप अभी भी पैसेंजर बनकर दूसरों के भरोसे अपनी जिंदगी जी रहे हैं। अब वक्त आ गया है कि आप स्टीयरिंग अपने हाथ में लें। आज ही इस आर्टिकल से सीखे गए किसी एक लेसन को अपनी लाइफ में लागू करें। कमेंट में लिखकर बताएं कि आप आज से अपने करियर के लिए क्या नया शुरू करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जो अपनी बोरिंग जॉब से परेशान है पर कुछ नया नहीं कर रहा।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




​#CareerGrowth #SelfImprovement #ProfessionalDevelopment #SuccessTips #AndyStorch


_

Post a Comment

Previous Post Next Post