क्या आप अभी भी उन एम्प्लॉईज के भरोसे अपनी कंपनी को टॉप पर ले जाने का सपना देख रहे हैं जो सिर्फ सैलरी के लिए काम करते हैं। मुबारक हो। आप फेलियर की रेस में सबसे आगे दौड़ रहे हैं। बिना टैलेंट वाली टीम के साथ बिजनेस करना वैसा ही है जैसे पंचर टायर वाली गाड़ी से फॉर्मूला वन रेस जीतना।
इस आर्टिकल में हम द टैलेंट वार बुक से उन सीक्रेट्स को जानेंगे जो स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स अपनी टीम बनाने के लिए इस्तेमाल करती है। ये तीन लेसन आपकी टीम और बिजनेस की पूरी दिशा बदल देंगे।
लेसन १ : कैरेक्टर ओवर स्किल्स
इमेजिन कीजिये कि आप एक बहुत बड़ी क्रिकेट टीम बना रहे हैं। आप किसे चुनेंगे। एक ऐसा खिलाड़ी जिसे बहुत अच्छी बैटिंग आती है पर वो टीम के साथ एडजस्ट नहीं कर सकता। या फिर एक ऐसा खिलाड़ी जिसमें सीखने की भूख है और जिसका कैरेक्टर पत्थर की तरह मजबूत है। ज्यादातर लोग पहले खिलाड़ी को चुनकर अपनी बर्बादी का टिकट बुक कर लेते हैं। द टैलेंट वार किताब का सबसे पहला और बड़ा लेसन यही है कि हमेशा कैरेक्टर को स्किल्स के ऊपर रखें।
स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेस जैसे सील टीम सिक्स या मार्कोस के पास जब लोग आते हैं तो वो ये नहीं देखते कि आपको गन चलानी आती है या नहीं। वो ये देखते हैं कि जब आप थककर चूर हो जाएंगे और चारों तरफ से मुसीबतें आपको घेर लेंगी तब आप क्या करेंगे। क्या आप मैदान छोड़कर भागेंगे या अपने साथी को कंधे पर उठाकर आगे बढ़ेंगे। टेक्निकल स्किल्स तो दो महीने की ट्रेनिंग में सिखाई जा सकती हैं। पर किसी इंसान के अंदर ईमानदारी और मेहनत करने का जज्बा पैदा करना भगवान के बस की बात भी नहीं है।
सोचिये आप एक सेल्स मैनेजर ढूंढ रहे हैं। एक बंदा आता है जिसका रिज्यूमे बहुत चमकदार है। उसने बड़ी बड़ी कंपनियों में काम किया है। लेकिन इंटरव्यू के दौरान वो अपनी पुरानी कंपनी की बुराई करता है और अपने जूनियर को नीचा दिखाता है। वहीं दूसरा बंदा है जिसके पास एक्सपीरियंस कम है पर उसकी बातों में सच्चाई और सीखने का जुनून है। अगर आपने सिर्फ स्किल्स देखकर पहले बंदे को रख लिया तो समझ लीजिये कि आपने अपनी टीम में एक दीमक पाल लिया है। वो बंदा सेल तो बढ़ा देगा पर आपका वर्क कल्चर ऐसा खराब करेगा कि अच्छे लोग भाग जाएंगे।
लोग अक्सर गलती करते हैं कि वो रिज्यूमे पर लिखे हुए नंबर्स और सर्टिफिकेट्स को देखकर इम्प्रेस हो जाते हैं। सच तो ये है कि सर्टिफिकेट तो कोई भी बना सकता है। पर वो एटीट्यूड कहाँ से लाओगे जो मुश्किल समय में टीम को टूटने न दे। आप किसी को कोडिंग सिखा सकते हैं। आप किसी को मार्केटिंग की ट्रिक्स रटा सकते हैं। लेकिन आप किसी आलसी इंसान को मेहनती नहीं बना सकते। आप किसी धोखेबाज को वफादार नहीं बना सकते। इसलिए जब भी हायरिंग करें तो अपना चश्मा बदलें। स्किल्स तो बदलती रहती हैं पर कैरेक्टर उम्र भर साथ रहता है।
आजकल की दुनिया में लोग सोचते हैं कि अगर हमने सबसे महंगे और स्किल्ड लोग रख लिए तो हमारा काम हो गया। अरे भाई अगर उन टैलेंटेड लोगों में ईगो ज्यादा है और टीम स्पिरिट कम है तो वो आपस में ही लड़कर आपकी नैया डुबो देंगे। एक औसत स्किल वाला इंसान जो आपकी कंपनी के विजन को अपना मानता है वो उस एक्सपर्ट से लाख गुना बेहतर है जो सिर्फ अपनी जेब भरने आया है। इसलिए अपनी टीम में शेर पालें जो वफादार हों। सिर्फ वो सर्कस के जानवर न रखें जो सिर्फ चाबुक के डर से करतब दिखाते हैं।
लेसन २ : टैलेंट माइंडसेट का जादू
अगर आपको लगता है कि अच्छे लोगों को ढूंढकर ऑफिस में बिठा देना ही आपकी जिम्मेदारी खत्म कर देता है, तो आप शायद किसी मुगालते में जी रहे हैं। द टैलेंट वार बुक का दूसरा बड़ा लेसन यह है कि टैलेंट को सिर्फ ढूंढना ही काफी नहीं है, बल्कि एक ऐसा कल्चर और माइंडसेट बनाना जरूरी है जहाँ वो टैलेंट फल-फूल सके। इमेजिन कीजिये कि आपने नर्सरी से सबसे महंगा और सुंदर पौधा खरीदा है, लेकिन आप उसे लाकर एक ऐसी मिट्टी में दबा देते हैं जहाँ न धूप है और न ही पानी। तो क्या होगा। वो पौधा सूख ही जाएगा ना। बिलकुल यही हाल उन कंपनियों का होता है जो टैलेंटेड लोगों को तो हायर कर लेती हैं, पर उन्हें काम करने के लिए पुराना और सड़ा हुआ माहौल देती हैं।
मिलिट्री की भाषा में इसे टैलेंट माइंडसेट कहा जाता है। इसका मतलब है कि टॉप से लेकर बॉटम तक हर किसी को यह पता होना चाहिए कि हमारी असली ताकत पैसा या मशीनें नहीं, बल्कि हमारे लोग हैं। सोचिये एक ऐसी कंपनी के बारे में जहाँ बॉस को लगता है कि वो सबसे स्मार्ट है और बाकी सब सिर्फ उसकी आज्ञा मानने के लिए पैदा हुए हैं। ऐसे माहौल में अगर कोई टैलेंटेड बंदा नया आईडिया लेकर आएगा, तो बॉस उसे यह कहकर चुप करा देगा कि यहाँ वही होगा जो सालों से होता आ रहा है। यह वैसा ही है जैसे आप विराट कोहली को टीम में रखें और फिर उसे कहें कि तुम बैटिंग मत करो, सिर्फ बाउंड्री पर फील्डिंग करो और मेरी बातें सुनो। ऐसा एटीट्यूड रखने वाले लोग खुद तो डूबते ही हैं, साथ में कंपनी का जहाज भी ले डूबते हैं।
टैलेंटेड लोगों को कंट्रोल नहीं, बल्कि आजादी चाहिए होती है। उन्हें एक मिशन चाहिए होता है जिसमें वो अपनी जान फूंक सकें। जब आप किसी को जिम्मेदारी देते हैं और उस पर भरोसा करते हैं, तो वो अपनी क्षमता से ज्यादा काम करके दिखाता है। लेकिन अगर आप हर छोटी बात पर उनके सिर पर खड़े रहेंगे और माइक्रो मैनेजमेंट करेंगे, तो वो जल्दी ही फ्रस्ट्रेट होकर इस्तीफा दे देंगे। और यकीन मानिये, टैलेंटेड लोगों के पास ऑप्शंस की कमी नहीं होती। वो आज आपकी कंपनी छोड़ेंगे और कल आपकी कॉम्पिटिटर कंपनी में बैठकर आपके ही बिजनेस की धज्जियां उड़ा रहे होंगे। क्या आप वाकई ऐसा चाहते हैं।
एक असली टैलेंट माइंडसेट वाला लीडर जानता है कि उसे अपनी टीम को चुनौती देनी है। वो उन्हें कंफर्ट जोन से बाहर निकालता है पर साथ ही उन्हें गिरने पर संभालने का हौसला भी देता है। अगर आपकी टीम में लोग गलती करने से डरते हैं, तो समझ लीजिये कि वहाँ टैलेंट मर रहा है। क्योंकि जहाँ रिस्क नहीं है, वहाँ इनोवेशन भी नहीं है। स्पेशल ऑपरेशंस में हर मिशन के बाद एक चर्चा होती है जिसे आफ्टर एक्शन रिव्यु कहते हैं। वहाँ सीनियर और जूनियर सब बराबर होते हैं और अपनी गलतियों पर खुलकर बात करते हैं। क्या आपके ऑफिस में एक जूनियर अपने सीनियर को यह बोलने की हिम्मत रखता है कि सर आपका आईडिया गलत है। अगर नहीं, तो आपके यहाँ टैलेंट नहीं, सिर्फ जी हुजूरी करने वाले लोग बचेंगे।
टैलेंट माइंडसेट कोई एक दिन का काम नहीं है। यह हर रोज की जाने वाली मेहनत है। आपको अपने लोगों को यह महसूस कराना होगा कि वो किसी बड़े मकसद का हिस्सा हैं। जब लोग खुद को वैल्यूड महसूस करते हैं, तो वो सिर्फ काम नहीं करते, वो इतिहास रचते हैं। और जो कंपनियां अपने लोगों की कद्र नहीं करतीं, वो इतिहास के पन्नों में कहीं खो जाती हैं। अब फैसला आपका है कि आप एक लेगेसी बनाना चाहते हैं या सिर्फ एक और नाकाम बिजनेस की कहानी।
लेसन ३ : लीडरशिप की असली जिम्मेदारी
ज्यादातर कंपनियों में जब कोई नया बंदा हायर करना होता है, तो मैनेजर साहब बड़े आराम से HR डिपार्टमेंट को फोन घुमा देते हैं। वो सोचते हैं कि जैसे जोमैटो से बिरयानी आर्डर की जाती है, वैसे ही HR उन्हें एक परफेक्ट एम्प्लॉई लाकर दे देगा। द टैलेंट वार बुक का तीसरा कड़वा सच यही है कि अगर आप एक लीडर हैं, तो हायरिंग आपकी सबसे पहली और सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसे किसी और पर थोपकर आप अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। सोचिये कि बॉर्डर पर जंग छिड़ी हो और सेना का जनरल कहे कि सैनिक कौन होंगे ये तो क्लर्क डिसाइड करेगा। क्या ऐसा जनरल कभी जंग जीत पाएगा। बिलकुल नहीं।
स्पेशल ऑपरेशंस के कमांडर्स अपना आधा से ज्यादा समय सिर्फ इस बात पर लगाते हैं कि उनकी टीम में कौन शामिल हो रहा है। वो जानते हैं कि एक गलत इंसान पूरी टीम की जान जोखिम में डाल सकता है। बिजनेस में भी यही नियम लागू होता है। एक घटिया हायरिंग आपके लाखों रुपये और महीनों का समय बर्बाद कर सकती है। क्या आपने कभी गौर किया है कि जब आप किसी गलत बंदे को रख लेते हैं, तो उसे सुधारने में आपकी जितनी एनर्जी लगती है, उतनी एनर्जी में तो आप दो नए बिजनेस खड़े कर लेते। एक लीडर का काम सिर्फ हुक्म चलाना नहीं है, बल्कि अपनी टीम के लिए सही टैलेंट को पहचानना और उसे तराशना है।
लीडरशिप का मतलब सिर्फ केबिन में बैठकर रिपोर्ट देखना नहीं है। आपको खुद मैदान में उतरना होगा। आपको इंटरव्यू में बैठना होगा और उस बंदे की आँखों में झाँककर देखना होगा कि क्या उसमें वो आग है जो आपके विजन को सच कर सके। अगर आप खुद अपनी टीम नहीं चुन रहे, तो आप लीडर नहीं, सिर्फ एक एडमिनिस्ट्रेटर हैं। और याद रखिये, एडमिनिस्ट्रेटर के लिए लोग काम करते हैं, पर लीडर के लिए लोग मर मिटने को तैयार रहते हैं। जब आप खुद हायरिंग में शामिल होते हैं, तो आप टीम को ये मैसेज देते हैं कि हर एक मेंबर मेरे लिए बहुत कीमती है।
अक्सर देखा गया है कि लीडर्स उन लोगों को रखने से डरते हैं जो उनसे ज्यादा स्मार्ट हों। उन्हें अपनी कुर्सी छिन जाने का डर सताता है। ये सबसे बड़ी बेवकूफी है। एक महान लीडर वो है जो अपने से ज्यादा टैलेंटेड लोगों को एक साथ ला सके और उन्हें एक कॉमन गोल के लिए काम करने पर राजी कर ले। अगर आपकी टीम में आप ही सबसे होशियार इंसान हैं, तो आपकी टीम बहुत बड़ी मुसीबत में है। आपको ऐसे लोग चाहिए जो आपकी कमियों को पूरा करें, न कि ऐसे जो सिर्फ आपकी हाँ में हाँ मिलाएं।
अंत में ये समझ लीजिये कि टैलेंट की ये जंग कोई और नहीं, सिर्फ आप ही जीत सकते हैं। अपनी टीम के हर एक इंसान को एक एसेट की तरह देखिये, न कि लायबिलिटी की तरह। जब आप अपने लोगों में इन्वेस्ट करते हैं और उन्हें सही लीडरशिप देते हैं, तो वो आपको वो रिजल्ट्स लाकर देते हैं जिनकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी। तो अगली बार जब टीम बनाने की बारी आए, तो फोन साइड में रखिये और खुद उस टैलेंट की खोज में निकल जाइये। क्योंकि सही लोग ही आपकी कंपनी को अर्श से फर्श तक ले जाने की ताकत रखते हैं।
द टैलेंट वार सिर्फ एक किताब नहीं है, ये एक आईना है उन सभी के लिए जो अपनी टीम को बड़ा बनाना चाहते हैं। क्या आप अब भी वही पुराने ढर्रे पर चलना चाहते हैं या अपनी टीम को एक स्पेशल ऑपरेशंस यूनिट की तरह पावरफुल बनाना चाहते हैं। फैसला आपके हाथ में है। अगर आप आज नहीं बदले, तो कल कोई और आपके टैलेंटेड लोगों को छीनकर ले जाएगा।
इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो हमेशा अपनी टीम से परेशान रहता है। और नीचे कमेंट में बताइये कि आपकी टीम का सबसे बड़ा चैलेंज क्या है। चलिए मिलकर इस टैलेंट वार को जीतते हैं।
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