क्या आप अब भी पुरानी घिसी पिटी सोच लेकर बैठे हैं कि सब कुछ खुद खरीदना ही सक्सेस है। मुबारक हो आप अपनी मेहनत की कमाई और कीमती समय दोनों बर्बाद कर रहे हैं। दुनिया कोलाबोरेटिव इकोनोमी में करोड़ों छाप रही है और आप बस अकेले मालिक बनने के चक्कर में पीछे छूट रहे हैं।
आज हम रोबिन चेस की बुक पीयर्स इंक से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो आपके बिजनेस और लाइफ को देखने का नजरिया बदल देंगे। चलिए समझते हैं वह तीन बड़े लेसन जो आपको इस नई डिजिटल दुनिया का असली खिलाड़ी बनाएंगे।
लेसन १ : एक्सेस इज बेटर देन ओनरशिप (मालकियत की पुरानी बीमारी छोड़ो और एक्सेस का हाथ थामो)
आजकल के दौर में अगर आप अभी भी यह सोचते हैं कि खुद की गाड़ी होना या खुद का बड़ा ऑफिस होना ही अमीरी की निशानी है तो सच मानिए आप अभी भी पिछली सदी के खयालों में जी रहे हैं। रोबिन चेस अपनी इस किताब में बहुत ही कड़वा लेकिन जरूरी सच बताती हैं। वह कहती हैं कि चीजें खरीदना और उनका मालिक बनना अब एक लायबिलिटी यानी बोझ बनता जा रहा है। असल समझदारी तो चीजों को एक्सेस करने में है। अब जरा सोचिए आपने लाखों रुपये लगाकर एक चमचमाती कार खरीदी। अब वह कार आपके घर के बाहर खड़ी है और उसका टायर धीरे धीरे हवा छोड़ रहा है। वह कार 95 परसेंट समय तो बस धूल खाती है लेकिन उसकी EMI और इंश्योरेंस आपके खून पसीने की कमाई को दीमक की तरह चाट रहे हैं। क्या फायदा ऐसी ओनरशिप का जो आपको फायदा देने के बजाय आपकी जेब ही ढीली कर रही है।
यहाँ एंट्री होती है एक्सेस की। आज की दुनिया में आपको कार का मालिक बनने की जरूरत नहीं है बस आपको एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए कार का एक्सेस चाहिए। उबर और ओला जैसे प्लेटफॉर्म्स ने यही तो किया है। उन्होंने आपको मालिक नहीं बनाया बल्कि आपको सर्विस का एक्सेस दे दिया। यह एक तरह का ऐसा अरेंजमेंट है जहाँ आप सिर्फ तब पैसे देते हैं जब आप उस चीज का इस्तेमाल करते हैं। यह वैसी ही बात है जैसे आपको प्यास लगी हो तो आप पूरा कुआं नहीं खरीदते बल्कि बस एक गिलास पानी पीकर अपनी प्यास बुझा लेते हैं। लेकिन हमारे बीच कुछ ऐसे शूरवीर अभी भी हैं जो एक कप कॉफी पीने के लिए पूरी की पूरी कॉफी की दुकान खरीदने का सपना देखते हैं और फिर जब बिजनेस नहीं चलता तो कहते हैं कि किस्मत खराब थी।
रियल लाइफ में भी देखिए। पहले लोग बड़ी बड़ी फिल्में देखने के लिए DVD खरीदते थे। अब वह DVD अलमारी के किसी कोने में मकड़ी के जालों के बीच दफन हो चुकी है। अब जमाना नेटफ्लिक्स का है। आप फिल्म के मालिक नहीं हैं लेकिन आपके पास हजारों फिल्मों का एक्सेस है। यह मॉडल आपको आजादी देता है। जब आपके पास ओनरशिप का बोझ नहीं होता तो आप ज्यादा रिस्क ले सकते हैं और ज्यादा तेजी से ग्रो कर सकते हैं। आप खुद सोचिए कि आप किसी ऐसी चीज में पैसे क्यों फंसा रहे हैं जिसे आप शायद ही कभी इस्तेमाल करेंगे। लोग जिम की मेंबरशिप तो ऐसे लेते हैं जैसे कल ही मिस्टर इंडिया बन जाएंगे लेकिन हकीकत यह है कि वह जिम के ओनर को बस अमीर बना रहे होते हैं।
अगर आप एक नया स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं तो ऑफिस खरीदने या लंबा रेंट देने के बजाय को वर्किंग स्पेस का इस्तेमाल करें। वहाँ आपको सब कुछ बना बनाया मिलता है। बिजली का बिल या इंटरनेट की चिकचिक आपकी नहीं होती। आप बस अपनी लैपटॉप लेकर जाते हैं और काम शुरू कर देते हैं। यह एक्सेस की पावर है। जो लोग ओनरशिप के मोह में फंसे रहते हैं वह अक्सर अपनी सारी एनर्जी और पैसा बस मेंटेनेंस में ही लगा देते हैं। रोबिन चेस कहती हैं कि जब आप एक्सेस को चुनते हैं तो आप दरअसल अपनी एफिशिएंसी बढ़ा रहे होते हैं। आप कम से कम खर्चे में ज्यादा से ज्यादा आउटपुट निकाल पाते हैं।
तो अगली बार जब आपके मन में कुछ बड़ा खरीदने का भूत सवार हो तो खुद से एक सवाल जरूर पूछिएगा। क्या मुझे सच में इसकी ओनरशिप चाहिए या मेरा काम सिर्फ इसके एक्सेस से चल सकता है। याद रखिए इस नई दुनिया में वही जीत रहा है जो हल्का होकर दौड़ रहा है। भारी भरकम ओनरशिप के बोझ तले दबे लोग अक्सर रेस के बीच में ही हांफने लगते हैं। एक्सेस आपको वह पंख देता है जिससे आप बिना किसी फालतू खर्चे के उड़ सकते हैं। यह लेसन सिर्फ बिजनेस के लिए नहीं है बल्कि आपकी लाइफस्टाइल के लिए भी एक बड़ा वेक अप कॉल है।
लेसन २ : प्लेटफार्म और पीयर्स का पावर (बड़े हाथी और फुर्तीले खरगोश की अनोखी जुगलबंदी)
रोबिन चेस हमें एक बहुत ही मजेदार कॉन्सेप्ट समझाती हैं जिसे वह पीयर्स इंक कहती हैं। यहाँ इंक का मतलब है बड़ा कॉर्पोरेट ढांचा या प्लेटफॉर्म और पीयर्स का मतलब है आप और हम जैसे आम लोग। अब जरा सोचिए एक तरफ एक बहुत बड़ी कंपनी है जिसके पास अरबों रुपये और बड़े बड़े सर्वर्स हैं और दूसरी तरफ लाखों ऐसे लोग हैं जिनके पास टैलेंट और खाली समय है। जब यह दोनों हाथ मिलाते हैं तो धमाका होता है। पुराने जमाने में अगर किसी को बड़ा बिजनेस करना होता था तो उसे हजारों कर्मचारी और बड़ी फैक्ट्रियां चाहिए होती थीं। लेकिन आज के डिजिटल दौर में आपको बस एक स्मार्ट प्लेटफॉर्म चाहिए जहाँ लोग खुद आकर अपनी वैल्यू जोड़ सकें।
यूट्यूब को ही देख लीजिए। यूट्यूब खुद कोई वीडियो नहीं बनाता। अगर यूट्यूब के कर्मचारी खुद बैठकर वीडियो बनाने लगते तो शायद साल में दो चार अच्छी फिल्में ही बना पाते। लेकिन उन्होंने क्या किया। उन्होंने एक जबरदस्त प्लेटफॉर्म तैयार किया और उसे हम जैसे पीयर्स यानी क्रिएटर्स के लिए खोल दिया। अब दुनिया भर के करोड़ों लोग अपनी क्रिएटिविटी दिखा रहे हैं। कोई खाना बनाना सिखा रहा है तो कोई यह बता रहा है कि बिना नहाए फ्रेश कैसे दिखें। यूट्यूब ने सिर्फ एक स्टेज दिया और कलाकारों ने अपनी परफॉरमेंस से उसे दुनिया का सबसे बड़ा वीडियो लाइब्रेरी बना दिया। यहाँ प्लेटफॉर्म ने वह काम किया जो आम आदमी नहीं कर सकता था यानी बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर देना और आम लोगों ने वह किया जो बड़ी कंपनी कभी नहीं कर पाती यानी हर कोने से यूनिक और क्रिएटिव कंटेंट लाना।
यह एक ऐसी पार्टनरशिप है जहाँ दोनों का फायदा है। अगर आप आज के दौर में अकेले सब कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं तो आप उस जिद्दी इंसान की तरह हैं जो खुद ही ईंट बना रहा है और खुद ही महल खड़ा करना चाहता है। भाई साहब जमाना बदल गया है। आज आपको बस एक ऐसा ढांचा खड़ा करना है जहाँ दूसरे लोग आकर अपना हुनर दिखा सकें। एयरबीएनबी का ही मामला ले लीजिए। उन्होंने दुनिया भर में एक भी होटल नहीं बनाया लेकिन आज वह दुनिया की सबसे बड़ी होटल चैन से भी ज्यादा वैल्युएबल हैं। क्यों। क्योंकि उन्होंने लोगों के खाली कमरों यानी रिसोर्सेज को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया। यहाँ प्लेटफॉर्म ने भरोसा और पेमेंट सिस्टम दिया और पीयर्स ने अपनी जगह और सर्विस दी।
लेकिन हमारे यहाँ अभी भी कुछ लोग ऐसे हैं जो सोचते हैं कि वह अपना खुद का एक ऐसा साम्राज्य बनाएंगे जहाँ पत्ता भी उनकी मर्जी के बिना न हिले। ऐसे लोग अक्सर थक हार कर बैठ जाते हैं क्योंकि वह स्केल नहीं कर पाते। पीयर्स इंक का मॉडल आपको रॉकेट की रफ्तार देता है। यह मॉडल कहता है कि आप वह काम कीजिए जिसमें बहुत ज्यादा पैसा और पावर चाहिए और बाकी का काम उन लोगों पर छोड़ दीजिए जो उसे आपसे बेहतर और ज्यादा पैशन के साथ कर सकते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप शादी का टेंट लगा दें और मेहमान खुद अपनी अपनी पसंद का गाना गाकर माहौल बना दें। आपको बस टेंट और लाइट का इंतजाम करना है।
आज के स्टार्टअप्स को भी यही समझना होगा। अगर आप हर चीज खुद कंट्रोल करेंगे तो आप कभी बड़े नहीं हो पाएंगे। आपको लोगों को अपने साथ जोड़ना होगा। उन्हें वह आजादी देनी होगी कि वह आपके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके अपना भी फायदा कर सकें और आपका भी। जब आप दूसरों को कमाने और ग्रो करने का मौका देते हैं तभी आप खुद एक बड़ी ताकत बनते हैं। यह कोलाबरेशन ही असली कैपिटलिज्म है जहाँ किसी एक का एकाधिकार नहीं बल्कि सबकी भागीदारी होती है। रोबिन चेस कहती हैं कि भविष्य उन लोगों का है जो दूसरों के लिए दरवाजे खोलते हैं न कि उन लोगों का जो दीवारों के पीछे छिपकर बैठते हैं।
लेसन ३ : एबंडेंस माइंडसेट (कमी का रोना छोड़ो और बिखरे हुए खजाने को समेटना सीखो)
क्या आपको भी ऐसा लगता है कि दुनिया में अब कुछ नया करने के लिए बचा ही नहीं है। या फिर सारे अच्छे आइडियाज और रिसोर्सेज पर बड़े खिलाड़ियों ने कब्जा कर लिया है। अगर हाँ तो आप कमी वाले माइंडसेट यानी स्कैरसिटी माइंडसेट के शिकार हैं। रोबिन चेस अपनी किताब पीयर्स इंक में एक बहुत ही क्रांतिकारी बात कहती हैं। वह कहती हैं कि हमारे चारों तरफ रिसोर्सेज की कोई कमी नहीं है बस वह बिखरे हुए हैं और सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं। वह इसे एबंडेंस यानी प्रचुरता कहती हैं। अब जरा सोचिए आपके शहर की सड़कों पर हजारों कारें चल रही हैं जिनमें सिर्फ ड्राइवर अकेला बैठा है। बाकी की तीन सीटें खाली हैं। यह वह रिसोर्स है जो बर्बाद हो रहा है।
आप अपने घर की ड्रिल मशीन को ही देख लीजिए। आपने बड़े चाव से उसे खरीदा था कि घर के सारे फोटो फ्रेम खुद लगाएंगे। लेकिन पूरे साल में आपने उसका इस्तेमाल कितनी बार किया। शायद सिर्फ दस मिनट के लिए। बाकी के 364 दिन और 23 घंटे वह मशीन आपके स्टोर रूम में धूल चाट रही है। आपके पड़ोसी को भी छेद करने के लिए ड्रिल चाहिए और वह भी नई खरीदने की सोच रहा है। यहाँ रिसोर्स की कमी नहीं है बस कोलाबरेशन की कमी है। अगर हम उस एक मशीन को शेयर कर सकें तो वह एबंडेंस है। लेकिन हम ठहरे अपनी चीजों को छाती से लगाकर बैठने वाले लोग। हमें लगता है कि अगर अपनी चीज किसी को दे दी तो उसकी वैल्यू कम हो जाएगी। जबकि असलियत में वह चीज बेकार पड़े पड़े ही अपनी वैल्यू खो रही है।
रोबिन चेस कहती हैं कि जब हम पीयर्स यानी आम लोगों की ताकत और प्लेटफॉर्म को जोड़ते हैं तो हमें उन रिसोर्सेज का पता चलता है जो अब तक छिपे हुए थे। इंटरनेट ने इस एबंडेंस को सबके सामने ला दिया है। विकिपीडिया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। दुनिया भर के लोगों के पास ज्ञान था लेकिन वह उनके दिमाग तक ही सीमित था। विकिपीडिया ने एक प्लेटफॉर्म दिया और लोगों ने अपना ज्ञान वहां उड़ेल दिया। आज वह दुनिया का सबसे बड़ा एनसाइक्लोपीडिया है और वह भी बिल्कुल फ्री। यहाँ किसी ने किसी को पैसे नहीं दिए बस लोगों ने अपने खाली समय और जानकारी को शेयर किया।
अगर आप एक एंटरप्रेन्योर हैं तो आपको यह ढूंढना होगा कि समाज में ऐसी कौन सी चीज है जो बहुत ज्यादा मात्रा में है लेकिन बेकार पड़ी है। क्या वह लोगों का खाली समय है। क्या वह लोगों की खाली गाड़ियां हैं या फिर उनके घर का एक्स्ट्रा कमरा। जब आप इस नजरिये से दुनिया को देखते हैं तो आपको हर तरफ अपॉर्चुनिटी ही अपॉर्चुनिटी नजर आती है। लेकिन हमारे यहाँ कुछ ऐसे महानुभाव भी हैं जो सोचते हैं कि जब तक वह करोड़ों का लोन लेकर अपनी फैक्ट्री नहीं लगाएंगे तब तक वह बिजनेसमैन नहीं बनेंगे। भाई साहब आज के दौर में बिना एक भी ईंट लगाए आप पूरी दुनिया में अपना साम्राज्य फैला सकते हैं बस आपको दूसरों के पास मौजूद एक्स्ट्रा रिसोर्स को सही तरीके से मैनेज करना आना चाहिए।
यह एबंडेंस माइंडसेट आपको डर से आजाद करता है। जब आपको पता होता है कि दुनिया मौकों से भरी पड़ी है तो आप कॉम्पिटिशन से नहीं डरते बल्कि कोलाबरेशन पर ध्यान देते हैं। आप यह नहीं सोचते कि मुझे दूसरे का हिस्सा छीनना है बल्कि आप यह सोचते हैं कि कैसे हम मिलकर इस पूरे केक को बड़ा बना सकते हैं। रोबिन चेस का यह लेसन हमें सिखाता है कि फ्यूचर उनका नहीं है जो सब कुछ मुट्ठी में दबाकर रखना चाहते हैं बल्कि उनका है जो हाथ खोलकर सबको साथ लेकर चलते हैं। तो अपने अंदर के उस कंजूस इंसान को बाहर निकालिए जो हर चीज पर मेरा मेरा चिल्लाता है और उस लीडर को जगाइए जो शेयरिंग और एक्सेस में विश्वास रखता है।
तो दोस्तों, पीयर्स इंक की यह समरी हमें सिखाती है कि दुनिया बदल चुकी है। अब ओनरशिप का बोझ ढोने के बजाय एक्सेस का आनंद लीजिए। अकेले लड़ने के बजाय प्लेटफॉर्म्स का हिस्सा बनिए और कमी का रोना छोड़कर चारों तरफ बिखरी हुई प्रचुरता यानी एबंडेंस को पहचानिए। क्या आप आज भी पुरानी सोच के साथ ही जीना चाहते हैं या इस नई डिजिटल क्रांति का हिस्सा बनकर अपनी लाइफ बदलना चाहते हैं। कमेंट्स में जरूर बताएं कि आप अपनी लाइफ की कौन सी एक चीज आज से ही दूसरों के साथ शेयर करने के लिए तैयार हैं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी ओनरशिप के जाल में फंसे हुए हैं।
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