अगर आपको लगता है कि आप बहुत टैलेंटेड है और फिर भी आपकी लाइफ और बिजनेस वही पुराने ढर्रे पर चल रहे है तो मुबारक हो आप अपनी आखों पर पट्टी बांधकर रेस जीतना चाहते है। बिना इनोवेशन के आप बस एक थकी हुई मशीन है जो बिना मतलब के चल रही है।
आज हम रोवन गिब्सन की किताब द ४ लेंसेस ऑफ इनोवेशन की मदद से आपके दिमाग की धूल साफ करेंगे। हम जानेंगे वो ३ पावरफुल लेसन जो आपकी सोच को पूरी तरह बदलकर रख देंगे और आपको एक क्रिएटिव जीनियस बनाएंगे।
लेसन १ : चैलेंजिंग ऑर्थोडॉक्सी - पुरानी सोच की अर्थी उठाओ
सोचिए आप एक ऐसी शादी में गए है जहाँ दूल्हा और दुल्हन की जगह उनके पुराने रस्मों रिवाजों की पूजा हो रही है। अजीब लगा ना। लेकिन सच तो यह है कि आपका बिजनेस और करियर भी इसी तरह की पुरानी सोच के बोझ तले दबा हुआ है। रोवन गिब्सन कहते है कि इनोवेशन का पहला दुश्मन कोई और नहीं बल्कि वो पुराने नियम है जिन्हें हम पत्थर की लकीर मान लेते है। इसे कहते है ऑर्थोडॉक्सी। यह वो मानसिक जेल है जहाँ हम खुद को बंद रखते है क्योंकि हमारे सीनियर या दादा परदादा ऐसा ही करते आए थे।
मिसाल के तौर पर पुराने जमाने में लोग मानते थे कि अगर सामान बेचना है तो एक शानदार दुकान होनी चाहिए और सेल्समैन की चिकनी चुपड़ी बातें जरूरी है। फिर आया ई कॉमर्स और उसने इस सोच के गाल पर जोर का तमाचा जड़ा। उन्होंने पूछा कि दुकान की जरूरत ही क्या है। जब लोग फोन पर रील देख सकते है तो फोन से सामान क्यों नहीं खरीद सकते। जो लोग इस पुराने नियम से चिपके रहे वो आज धूल फांक रहे है और जिन्होंने इस ऑर्थोडॉक्सी को चैलेंज किया वो आज करोड़ों में खेल रहे है।
अक्सर जब आप ऑफिस में कुछ नया करने की कोशिश करते है तो कोई न कोई पंडित जी आकर कहेंगे कि बेटा यहाँ काम ऐसे ही होता है। असल में यह वो लोग है जो बदलाव के नाम से ऐसे डरते है जैसे कोई भूत देख लिया हो। इनोवेशन का मतलब ही यही है कि आप उन बातों पर सवाल उठाएं जिन्हें बाकी सब सच मान चुके है। आप पूछिए कि क्या वाकई इस प्रोसेस की जरूरत है। क्या हम इस काम को बिल्कुल अलग तरीके से नहीं कर सकते।
सालों तक लोग भारी भरकम सूटकेस उठाकर स्टेशन पर दौड़ते थे। किसी ने यह सवाल नहीं उठाया कि भाई इंसान ने पहिए का आविष्कार हजारों साल पहले कर दिया था तो उसे सूटकेस के नीचे लगाने में इतनी देर क्यों लगी। सबने मान लिया था कि सूटकेस मतलब हाथ से उठाना। जब किसी ने इस सोच को चुनौती दी और नीचे पहिए लगाए तब जाकर दुनिया को समझ आया कि हम कितने बड़े बेवकूफ थे।
अगर आप भी अपनी फील्ड में कुछ बड़ा करना चाहते है तो सबसे पहले उन नियमों की लिस्ट बनाइए जिन्हें हर कोई फॉलो करता है। फिर एक एक करके उन पर सवाल उठाइए। अपनी सोच को उस ढाचे से बाहर निकालिए जहाँ सिर्फ पुराने फार्मूले चलते है। याद रखिए जब तक आप पुराने खयालात की अर्थी नहीं उठाएंगे तब तक नए आइडियाज का जन्म नहीं होगा। यह लेसन आपको सिखाता है कि सवाल पूछना बगावत नहीं बल्कि तरक्की की पहली सीढ़ी है।
लेसन २ : हार्नेसिंग ट्रेंड्स - वक्त के पहिए पर सवारी करना सीखो
जैसे ही आपने पुरानी सोच को चुनौती दी, अब बारी आती है आने वाले कल को पकड़ने की। रोवन गिब्सन कहते है कि ज्यादातर लोग तब जागते है जब ट्रेन स्टेशन छोड़ चुकी होती है। इनोवेशन का दूसरा लेंस है ट्रेंड्स को पहचानना। यह वो कला है जिससे आप यह समझ पाते है कि दुनिया किस तरफ झुक रही है। अगर आप आज भी वही पुराने घिसे पिटे आइडियाज पर काम कर रहे है, तो आप उस इंसान की तरह है जो बारिश रुकने के बाद छाता बेचने निकला है।
ट्रेंड्स का मतलब सिर्फ यह नहीं कि आजकल इंस्टाग्राम पर कौन सा गाना बज रहा है। इसका मतलब है टेक्नोलॉजी, समाज और लोगों की आदतों में होने वाले वो गहरे बदलाव जो पूरी इंडस्ट्री को पलट देते है। मिसाल के तौर पर, जब इंटरनेट नया नया आया था, तब कुछ लोगों ने इसे बस एक फालतू की चीज समझा। लेकिन जिन लोगों ने इस ट्रेंड की लहर को पहचाना, उन्होंने अमेजन और गूगल खड़ी कर दी। बाकी लोग आज भी अपनी पुरानी डायरी में हिसाब लिख रहे है और परेशान है कि धंधा मंदा क्यों है।
अब जरा अपने आस पास देखिए। हर कोई कहता है कि मुझे तो सब पता है। पर सच तो यह है कि उन्हें सिर्फ कल की खबरें पता होती है। असली इनोवेटर वो है जो आज के बदलावों को जोड़कर कल की फोटो देख लेता है। इसे एक मजाक की तरह समझिए। अगर आप आज के दौर में यह सोचकर बिजनेस शुरू कर रहे है कि आप लोगों को लेटर लिखना सिखाएंगे, तो आपकी बुद्धि पर तरस ही खाया जा सकता है। आज का ट्रेंड डिजिटल है, तेज है और शॉर्टकट वाला है। अगर आप इस लहर पर सवार नहीं होंगे, तो यह लहर आपको डुबो देगी।
नोकिया को तो आप जानते ही होंगे। एक समय था जब हर हाथ में नोकिया का फोन होता था। लेकिन जब स्मार्टफोन और टचस्क्रीन का ट्रेंड आया, तो उन्हें लगा कि यह तो बस एक शौक है जो जल्दी खत्म हो जाएगा। उन्हें अपनी कीपैड वाली दुनिया से इतना प्यार था कि उन्होंने आने वाले तूफान को अनदेखा कर दिया। नतीजा क्या हुआ। आज नोकिया म्यूजियम की चीज बनकर रह गया है। उन्होंने ट्रेंड को हारनेस यानी काबू करने के बजाय उससे लड़ने की कोशिश की।
ट्रेंड्स को समझना कोई जादू नहीं है। आपको बस अपनी आखें और कान खुले रखने है। पूछिए खुद से कि अगले पांच साल में लोग कैसे जिएंगे। क्या वो अभी भी वैसे ही शॉपिंग करेंगे। क्या वो वैसे ही खाना खाएंगे। जब आप इन बदलावों को अपनी स्ट्रैटेजी में शामिल करते है, तो आप सिर्फ एक बिजनेसमैन नहीं बल्कि एक विजनरी बन जाते है। याद रखिए, जो वक्त के साथ नहीं बदलता, वक्त उसे बदल देता है और अक्सर यह बदलाव बहुत दर्दनाक होता है। इसलिए वक्त के पहिए के नीचे दबने के बजाय उस पर सवारी करना सीखिए।
लेसन ३ : अंडरस्टैंडिंग नीड्स - कस्टमर के दिल का हाल जानो
अब तक आपने पुरानी सोच को बदला और ट्रेंड्स को पकड़ा। लेकिन अगर आपको यही नहीं पता कि आपके कस्टमर को असल में चाहिए क्या, तो आपकी सारी मेहनत बेकार है। रोवन गिब्सन का तीसरा लेंस है कस्टमर की उन जरूरतों को समझना जिन्हें वो खुद भी शब्दों में बयान नहीं कर पा रहे है। इसे कहते है अनमेट नीड्स। ज्यादातर कंपनियां वही बेच रही है जो सब बेच रहे है। वो कस्टमर से पूछती है कि आपको क्या चाहिए और कस्टमर वही कहता है जो उसने पहले से देख रखा है। असली इनोवेटर वो है जो कस्टमर की खामोशी पढ़ लेता है।
जरा सोचिए, अगर स्टीव जॉब्स ने लोगों से पूछा होता कि उन्हें कैसा फोन चाहिए, तो शायद लोग कहते कि हमें एक ऐसा फोन दो जिसकी बैटरी ज्यादा चले और बटन थोड़े बड़े हो। किसी ने यह नहीं कहा था कि हमें बटन हटाकर पूरी स्क्रीन दे दो। लेकिन जॉब्स ने समझा कि लोगों को असल में एक ऐसा डिवाइस चाहिए जो उनके हाथ में पूरी दुनिया समेट दे। उन्होंने वो दिया जिसकी जरूरत लोगों को थी, पर उन्हें पता नहीं था। इसे कहते है कस्टमर के जूतों में पैर रखकर दुनिया को देखना।
हम में से ज्यादातर लोग अपनी ही दुनिया में इतने मगन रहते है कि सामने वाले की तकलीफ दिखती ही नहीं। हम बस अपना प्रोडक्ट बेचने में लगे रहते है जैसे कोई जबरदस्ती किसी के गले में खाना ठूस रहा हो। अगर आप किसी को वो दे रहे है जो उसकी लाइफ आसान बना दे, तो आपको मार्केटिंग पर करोड़ों खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लोग खुद आपके पास दौड़े चले आएंगे। लेकिन इसके लिए आपको अपनी ईगो साइड में रखकर एक जासूस की तरह लोगों की आदतों को गौर से देखना होगा।
पहले लोग टैक्सी ढूंढने के लिए सड़क के किनारे खड़े होकर हाथ हिलाते थे और टैक्सी वाले ऐसे इग्नोर करते थे जैसे वो कोई सेलिब्रिटी हो। ओला और उबर ने इस बेइज्जती को समझा। उन्होंने देखा कि समस्या टैक्सी की नहीं है, समस्या उस अनिश्चितता और इंतजार की है। उन्होंने आपको फोन पर ही यह पावर दे दी कि आप अपनी सवारी देख सके। उन्होंने आपकी उस जरूरत को पूरा किया जिसे आपने कभी किसी से शिकायत के तौर पर नहीं कहा था, बस चुपचाप सह रहे थे।
इनोवेशन का यह लेंस आपको सिखाता है कि कस्टमर भगवान नहीं, बल्कि एक इंसान है जिसकी अपनी परेशानियां और फ्रस्ट्रेशन है। जब आप उन फ्रस्ट्रेशन का इलाज ढूंढ लेते है, तो आप एक लीडर बन जाते है। अगर आप आज भी वही घिसा पिटा माल बेच रहे है और रो रहे है कि सेल नहीं हो रही, तो समझ जाइए कि आपने लोगों की जरूरत को समझा ही नहीं। याद रखिए, दुनिया आपको आपके टैलेंट के पैसे नहीं देती, वो अपनी समस्याओं के समाधान के पैसे देती है।
तो दोस्तों, क्या आप अब भी वही पुरानी सोच और घिसे पिटे रास्तों पर चलना चाहते है। द ४ लेंसेस ऑफ इनोवेशन सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि आपके दिमाग का ताला खोलने की चाबी है। आज ही अपने काम करने के तरीके को गौर से देखिए और पूछिए कि क्या आप वाकई इनोवेट कर रहे है या बस भीड़ का हिस्सा है। अगर इस आर्टिकल ने आपकी सोच की खिड़की थोड़ी भी खोली है, तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे जो बदलाव से डरते है। कमेंट में बताइए कि आप इन ४ लेंसेस में से सबसे पहले कौन सा लेंस अपनी लाइफ में इस्तेमाल करेंगे। चलिए, अब दुनिया को अपने नए नजरिए से हैरान करने का समय आ गया है।
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