क्या आप अभी भी अपने पुराने बिजनेस मॉडल को चिपके हुए हैं और सोच रहे हैं कि ग्रोथ क्यों रुकी है। मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट खुद लिख रहे हैं। दुनिया बदल गई और आप अभी भी १८वीं सदी की स्ट्रेटेजी लेकर बैठे हैं। यह ईगो आपको बहुत भारी पड़ने वाला है।
लेकिन घबराइए मत अभी भी मौका है। ओमर अबोश की किताब पिवट टू द फ्यूचर हमें सिखाती है कि कैसे इस बदलती दुनिया में खुद को फिर से जिंदा करना है। चलिए समझते हैं वह ३ बड़े लेसन जो आपके डूबते करियर या बिजनेस को बचा सकते हैं।
लेसन १ : पुराने को नया बनाना सीखें (रिइन्वेंटिंग द ओल्ड)
क्या आपको लगता है कि आपका पुराना बिजनेस या हुनर अब कचरा हो गया है। अगर हां तो आप उन लोगों में से हैं जो सोने की खदान पर बैठकर भी भीख मांग रहे हैं। अक्सर लोग सोचते हैं कि नई टेक्नोलॉजी आने का मतलब है पुराने को पूरी तरह खत्म कर देना। लेकिन पिवट टू द फ्यूचर हमें सिखाती है कि असली खिलाड़ी वह है जो अपने पुराने एसेट्स को नए जमाने के हिसाब से ढालना जानता है।
सोचिए एक पुरानी दुकान की जो सालों से कपड़े बेच रही है। अब अमेजन और मिंत्रा के दौर में उस दुकानदार को लगता है कि उसकी दुकान बंद होने वाली है। वह डर के मारे डिप्रेशन में चला जाता है। लेकिन क्या उसने यह सोचा कि उसके पास वह चीज है जो ऑनलाइन साइट्स के पास नहीं है। वह है कस्टमर का भरोसा और टच एंड फील का अनुभव। असली पिवट तब होता है जब वह दुकानदार अपनी दुकान को एक एक्सपीरियंस सेंटर बना देता है जहां लोग आकर कपड़े देखते हैं और ऐप के जरिए आर्डर करते हैं।
ज्यादातर लोग गलती यह करते हैं कि वे अपने पुराने काम को बोझ समझने लगते हैं। वे नई चीजों के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे कोई प्यासा रेगिस्तान में पानी के पीछे भागता है। लेकिन भाई साहब बिना पुराने इंजन के नई गाड़ी भी नहीं चलती। आपका पुराना अनुभव ही वह पैसा पैदा करेगा जिससे आप नए एक्सपेरिमेंट कर पाएंगे। अगर आप अपने पास्ट को गाली दे रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप अपने फ्यूचर की जड़ें काट रहे हैं।
हकीकत तो यह है कि दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियां आज भी अपने पुराने प्रोडक्ट्स से पैसा कमाकर नए प्रोजेक्ट्स में लगा रही हैं। वे अपनी पुरानी गाय का दूध निकालती हैं ताकि नया बछड़ा पाल सकें। लेकिन आप तो पूरी गाय ही बेचने निकल पड़े हैं। यह समझदारी नहीं बेवकूफी है। आपको अपने पुराने काम को इतना एफिशिएंट बनाना होगा कि वहां से कम मेहनत में ज्यादा प्रॉफिट आए। तभी आप उस पैसे को नए डिजिटल बदलावों में लगा पाएंगे। अगर आप अपने आज को नहीं संभाल सकते तो कल की बड़ी बड़ी बातें करना बंद कर दीजिए।
लेसन २ : सही समय पर सही बदलाव (वाइज पिवटिंग)
ज्यादातर लोग तब तक रास्ता नहीं बदलते जब तक वे दीवार से टकराकर अपना सिर नहीं फुड़वा लेते। इसे लोग वफादारी समझते हैं पर असल में यह जिद्दीपन है जो आपको बर्बाद कर देता है। पिवट टू द फ्यूचर कहती है कि बदलाव तब मत करिए जब मजबूरी हो बल्कि तब करिए जब आप सबसे ज्यादा सफल हों। लेकिन हमारे यहाँ तो उल्टा हिसाब है। जब तक बिजनेस में आग नहीं लगती तब तक हम फायर ब्रिगेड को फोन भी नहीं करते।
एक ऐसी टैक्सी कंपनी के बारे में सोचिए जो सालों से राज कर रही थी। उन्होंने सोचा कि लोग हमेशा उन्हें ही फोन करेंगे क्योंकि उनका नाम बड़ा है। फिर उबर और ओला आए। टैक्सी कंपनी के मालिक हंसते रहे और बोले कि यह ऐप वगैरह कुछ नहीं चलेगा। आज वह मालिक अपनी पुरानी गाड़ियां कबाड़ में बेच रहा है और रो रहा है कि किस्मत खराब थी। किस्मत खराब नहीं थी भाई साहब आपका विजन खराब था। आपने तब पिवट नहीं किया जब आपके पास पैसा और पावर दोनों थे।
असली पिवटिंग का मतलब यह नहीं कि आप सब कुछ छोड़कर कुछ नया शुरू कर दें। इसका मतलब है कि आप अपनी कोर वैल्यू को पहचानें और उसे नए तरीके से पेश करें। अगर आप एक टीचर हैं और आज भी सिर्फ ब्लैकबोर्ड पर पढ़ा रहे हैं तो आप गायब होने वाले हैं। आपको वही ज्ञान यूट्यूब या डिजिटल कोर्सेज के जरिए बांटना होगा। आप पढ़ाना नहीं छोड़ रहे बस अपना रास्ता बदल रहे हैं।
लोग अक्सर बदलाव से इसलिए डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग क्या कहेंगे। अगर मैंने अपना पुराना तरीका बदला तो क्या मैं फेल मान लिया जाऊंगा। सच तो यह है कि जो नहीं बदलता वह इतिहास की किताबों में दफन हो जाता है। आपको अपनी ईगो को साइड में रखकर मार्केट की नब्ज पकड़नी होगी। अगर हवा का रुख बदल रहा है तो अपनी पतंग की डोर भी घुमा लेनी चाहिए। वरना आपकी पतंग कटेगी भी और लोग हंसेंगे भी।
लेसन ३ : लगातार नया सोचना (कंटीन्यूअस इनोवेशन)
क्या आपको लगता है कि एक बार सफल होने के बाद आप चैन की नींद सो सकते हैं। अगर ऐसा है तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। इस डिजिटल दुनिया में सफलता की एक्सपायरी डेट बहुत कम होती है। पिवट टू द फ्यूचर का तीसरा और सबसे बड़ा लेसन यही है कि इनोवेशन कोई एक बार का इवेंट नहीं है बल्कि यह एक अंतहीन सफर है। जैसे आपके मोबाइल के ऐप्स हर महीने अपडेट मांगते हैं वैसे ही आपके दिमाग और बिजनेस को भी अपडेट की जरूरत है।
एक ऐसे रेस्टोरेंट के बारे में सोचिए जिसका खाना शहर में सबसे मशहूर था। मालिक को लगा कि अब तो लोग लाइन लगाकर आएंगे ही। उसने सर्विस पर ध्यान देना बंद कर दिया और पुरानी कुर्सियों को भी नहीं बदला। फिर एक नया कैफे खुला जिसमें बढ़िया म्यूजिक और इंस्टाग्राम के लिए अच्छी लाइटिंग थी। अब वह पुराना रेस्टोरेंट खाली पड़ा है और मालिक सरकार को दोष दे रहा है। भाई साहब सरकार ने आपकी कुर्सियां गंदी नहीं की थीं और न ही आपके मेन्यू को बोरिंग बनाया था। आपने खुद को अपडेट करना जरूरी नहीं समझा और मार्केट आपको पीछे छोड़कर आगे निकल गया।
असली इनोवेशन का मतलब यह नहीं कि आप हर दिन रॉकेट बनाएं। इसका मतलब है हर दिन यह सोचना कि मैं कल से बेहतर कैसे बन सकता हूं। क्या मैं अपने कस्टमर का समय बचा सकता हूं। क्या मैं अपनी सर्विस को थोड़ा और आसान बना सकता हूं। जो लोग खुद को हर वक्त बदलने के लिए तैयार रखते हैं उन्हें डिस्टर्प्शन से डर नहीं लगता। वे खुद डिस्टर्प्शन बन जाते हैं।
याद रखिए आज जो चीज आपको सफल बना रही है वही कल आपकी असफलता का कारण बन सकती है। क्योंकि आप उसी सफलता के नशे में चूर होकर अपनी आंखें बंद कर लेंगे। लेकिन यह दुनिया सोती नहीं है। कोई न कोई कहीं बैठकर आपके काम को और भी कम कीमत में और भी बेहतर तरीके से करने का प्लान बना रहा है। अगर आप उनसे जीतना चाहते हैं तो आपको अपनी पुरानी जीत का जश्न मनाना छोड़कर नई जंग की तैयारी शुरू करनी होगी। पिवट करना कोई मजबूरी नहीं बल्कि एक समझदार लीडर की पहचान है।
दोस्तों दुनिया तेजी से बदल रही है और आपके पास दो ही रास्ते हैं। या तो आप इस बदलाव के साथ पिवट करना सीखें या फिर इतिहास का एक बोरिंग हिस्सा बन जाएं। आज ही बैठिए और सोचिए कि आपके काम में वह कौन सी चीज है जो पुरानी हो चुकी है। उसे बदलिए इससे पहले कि वक्त आपको बदल दे। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अभी भी पुरानी लकीर का फकीर बना हुआ है। कमेंट में बताएं कि आपका अगला पिवट क्या होगा।
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