Friction (Hindi)


क्या आप अभी भी वही घिसे पिटे तरीके इस्तेमाल करके अपने बिजनेस और करियर की बैंड बजा रहे हैं? बधाई हो। आप अपनी बर्बादी के खुद जिम्मेदार हैं। जब दुनिया वन क्लिक पेमेंट से करोड़ों छाप रही है तब आप फालतू के स्टेप्स बढ़ाकर अपने कस्टमर को भगा रहे हैं। यह आलस नहीं आपकी बेवकूफी है जो आपको पीछे रख रही है।

आज हम रोजर डूली की किताब फ्रिक्शन की मदद से समझेंगे कि कैसे छोटी छोटी मुश्किलें आपके बड़े सपनों का गला घोंट रही हैं। चलिए जानते हैं वह 3 लेसन जो आपकी लाइफ और काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे।


लेसन १ : फ्रिक्शन हर जगह है पर दिखता नहीं है

दोस्तो, क्या कभी आपने सोचा है कि कुछ एप्स को आप बार बार खोलते हैं और कुछ को डाउनलोड करते ही डिलीट कर देते हैं? बात सिर्फ फीचर्स की नहीं है। बात उस अदृश्य दुश्मन की है जिसे रोजर डूली फ्रिक्शन कहते हैं। फ्रिक्शन का सीधा मतलब है वह एक्स्ट्रा मेहनत जो आपको किसी लक्ष्य तक पहुंचने से रोकती है।

मान लीजिए आपको भूख लगी है? आपके पास दो ऑप्शन हैं, एक रेस्टोरेंट है जहाँ घुसते ही वेटर पानी लाता है और मेनू थमाता है। दूसरा रेस्टोरेंट ऐसा है जहाँ आपको पहले काउंटर पर लाइन में लगना है। फिर वहां से टोकन लेना है। फिर खुद जाकर टेबल साफ करनी है। अब आप भले ही कितने भी बड़े फूडी हों। आप उस दूसरे रेस्टोरेंट में तभी जाएंगे जब वहां फ्री में अमृत मिल रहा हो। वरना आप वहां कभी कदम नहीं रखेंगे।

यही फ्रिक्शन है, यह आपके बिजनेस के चेकआउट पेज पर हो सकता है। यह आपके ऑफिस में छुट्टी मांगने के लंबे प्रोसेस में हो सकता है। यहाँ तक कि यह आपके जिम न जाने के पीछे का कारण भी हो सकता है। अगर आपका जिम बैग अलमारी के सबसे पीछे दबा है तो वह बैग निकालना भी एक फ्रिक्शन है। और आपका दिमाग इतना शातिर है कि वह इस छोटी सी मेहनत से बचने के लिए आपको सोफे पर चिपकाए रखेगा।

हम अक्सर सोचते हैं कि लोग आलसी हैं। लेकिन असलियत यह है कि प्रोसेस घटिया है। अगर आप किसी को कोई काम करने के लिए मजबूर करना चाहते हैं तो बस उस काम को आसान बना दीजिए। और अगर आप चाहते हैं कि कोई बुरा काम रुक जाए तो वहां रोड़े अटका दीजिए।

भारतीय घरों में अक्सर रिमोट के लिए लड़ाई होती है। क्यों? क्योंकि रिमोट उठाना आसान है और टीवी तक जाकर बटन दबाना मुश्किल। अगर रिमोट की बैटरी निकाल दी जाए तो आधे लोग टीवी देखना ही छोड़ देंगे। यह मजाक लग सकता है पर यही सच है। सक्सेसफुल कंपनियां जैसे अमेज़न या नेटफ्लिक्स इसी सिद्धांत पर चलती हैं। उन्होंने आपके और आपकी इच्छा के बीच से सारे कांटे हटा दिए हैं।

अगर आप अपने करियर में आगे बढ़ना चाहते हैं तो देखिए कि आप खुद के लिए कितने कांटे बिछा रहे हैं। क्या आपकी टू डू लिस्ट इतनी लंबी है कि उसे देखकर ही पसीने आ जाते हैं? तो जनाब वह लिस्ट ही आपके लिए फ्रिक्शन है। उसे छोटा कीजिए। स्टेप्स कम कीजिए। जितना कम रेजिस्टेंस होगा उतनी ही तेज आपकी तरक्की की गाड़ी दौड़ेगी।


लेसन २ : मेहनत कम करो तो रिजल्ट बढ़ेंगे

दोस्तो, हम में से ज्यादातर लोग एक बहुत बड़ी गलतफहमी में जीते हैं। हमें लगता है कि अगर हम किसी काम को मुश्किल बनाएंगे तो वह ज्यादा कीमती लगेगा। लेकिन सच तो यह है कि दुनिया अब 'फास्ट एंड फ्यूरियस' हो चुकी है। अगर आप अपने कस्टमर या खुद के लिए किसी काम को करने का रास्ता आसान नहीं करते। तो यकीन मानिए आप अपनी कब्र खुद खोद रहे हैं। रोजर डूली कहते हैं कि इंसान का दिमाग बिजली की तरह होता है। वह हमेशा सबसे कम रेजिस्टेंस वाला रास्ता चुनता है।

मान लीजिए आप एक ऑनलाइन कोर्स बेचना चाहते हैं। अब आपने अपनी वेबसाइट पर दुनिया भर के फॉर्म भरवा दिए। नाम। पता। दादाजी का नाम। और फेवरिट पालतू जानवर। आप सोच रहे हैं कि आप डेटा जमा कर रहे हैं। पर असल में आप उस कस्टमर को गेट से ही बाहर धक्का मार रहे हैं। वह इंसान वहीं से भाग जाएगा जहाँ उसे अपना क्रेडिट कार्ड निकालने के लिए सोफे से उठना पड़े।

अमेज़न का वह 'वन क्लिक बाइंग' बटन याद है? वह कोई जादू नहीं था। वह प्योर साइकोलॉजी थी। उन्होंने बस एक स्टेप कम किया। पेमेंट के लिए बार बार एड्रेस भरने की झंझट खत्म कर दी। और नतीजा? अरबों डॉलर की सेल्स। उन्होंने फ्रिक्शन को मार गिराया। और यहाँ आप हैं। जो अपनी दुकान में घुसने के लिए भी कस्टमर से दस सवाल पूछते हैं।

यही बात आपकी पर्सनल लाइफ पर भी लागू होती है। अगर आप सुबह उठकर पढ़ाई करना चाहते हैं। पर आपकी मेज पर किताबों का ढेर लगा है और धूल जमी है। तो आपका दिमाग पढ़ाई शुरू करने से पहले उस धूल को देखकर ही थक जाएगा। यह धूल ही फ्रिक्शन है। अगर आप रात को ही मेज साफ करके किताब खोलकर सोएं। तो सुबह उठते ही पढ़ाई शुरू करना आसान होगा। आपने बस एक छोटा सा फ्रिक्शन कम किया। और आपकी प्रोडक्टिविटी रॉकेट की तरह ऊपर चली गई।

भारत में हम अक्सर 'जुगाड़' की बात करते हैं। असल में जुगाड़ क्या है? जुगाड़ फ्रिक्शन कम करने का एक देसी तरीका ही तो है। जब सरकारी दफ्तर में फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल पर नहीं हिलती। तो हम उसे हिलाने के लिए 'चाय पानी' का सहारा लेते हैं। वह चाय पानी उस सिस्टम के फ्रिक्शन को कम करने का तेल है। हालांकि मैं रिश्वत की बात नहीं कर रहा। पर सिस्टम की सड़न देखिए। जहाँ फ्रिक्शन ज्यादा होता है वहां करप्शन और आलस अपने आप आ जाते हैं।

अगर आप मैनेजर हैं और आपकी टीम काम नहीं कर रही। तो उन्हें चिल्लाने के बजाय यह देखिए कि उन्हें काम करने से रोक क्या रहा है। क्या उन्हें हर छोटी बात के लिए आपकी परमिशन चाहिए? क्या उन्हें ईमेल भेजने के लिए दस लोगों को सीसी में रखना पड़ता है? अगर हाँ। तो आप ही उनके रास्ते के सबसे बड़े फ्रिक्शन हैं। अपनी ईगो साइड में रखिए और रास्ता साफ कीजिए।

याद रखिए, जितना कम रगड़, उतनी ज्यादा रफ़्तार। अगर आप किसी को कुछ बेचना चाहते हैं। या किसी से कोई काम करवाना चाहते हैं। तो बस यह देखिए कि आप उनके रास्ते से कितने पत्थर हटा सकते हैं। जब रास्ता मक्खन जैसा होगा। तो लोग खुद दौड़कर आपके पास आएंगे।


लेसन ३ : फ्रिक्शन का सही इस्तेमाल भी मुमकिन है

दोस्तो, अब तक मैंने आपको डराया कि फ्रिक्शन बुरा है। फ्रिक्शन दुश्मन है। पर रुकिए। सिक्के का दूसरा पहलू भी है। रोजर डूली कहते हैं कि फ्रिक्शन हमेशा विलेन नहीं होता। कभी कभी यह आपका सबसे वफादार बॉडीगार्ड भी बन सकता है। इसे हम 'पॉजिटिव फ्रिक्शन' कह सकते हैं। अगर आपको किसी अच्छी चीज की तरफ ले जाने के लिए रास्ता साफ करना जरूरी है। तो किसी बुरी आदत से बचने के लिए रास्ते में पहाड़ खड़े करना भी उतना ही जरूरी है।

मान लीजिए आपको देर रात तक जंक फ़ूड खाने की गंदी आदत है। आप कसम खाते हैं कि आज से डाइटिंग शुरू। लेकिन जैसे ही रात के बारह बजते हैं। आपका हाथ अपने आप फ्रिज की तरफ बढ़ता है और वहां रखी चॉकलेट गायब हो जाती है। क्यों? क्योंकि वह चॉकलेट वहां मौजूद थी। वहां कोई फ्रिक्शन नहीं था। अब सोचिए। अगर आप वह चॉकलेट घर में रखें ही नहीं। और उसे खाने के लिए आपको रात के अंधेरे में बाइक निकालकर दो किलोमीटर दूर दुकान पर जाना पड़े। तो क्या आप जाएंगे? नब्बे परसेंट चांस है कि आप आलस के मारे सो जाएंगे। यहाँ उस दुकान की दूरी ने आपके और आपकी बुरी आदत के बीच एक फ्रिक्शन पैदा कर दिया। और आपकी सेहत जीत गई।

यही लॉजिक बड़ी कंपनियां भी इस्तेमाल करती हैं। कभी आपने नेटफ्लिक्स या अमेज़न प्राइम का सब्सक्रिप्शन कैंसिल करने की कोशिश की है? उसे सब्सक्राइब करना मक्खन की तरह आसान है। बस एक बटन दबाओ और पैसे कट गए। लेकिन जब आप उसे बंद करने जाते हैं। तो वह आपसे सौ सवाल पूछते हैं। आपको दस अलग पेजों पर ले जाते हैं। और अंत में कहते हैं कि 'क्या आप सच में हमें छोड़कर जाना चाहते हैं?' यह जानबूझकर पैदा किया गया फ्रिक्शन है। ताकि आप थक हारकर कैंसिल करने का विचार ही छोड़ दें। यह चालाकी है। पर यह काम करती है।

आप भी अपनी लाइफ में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा टाइम बर्बाद करते हैं। तो फेसबुक या इंस्टाग्राम के ऐप को अनइंस्टाल कर दीजिए। अब जब भी आपको उसे देखना होगा। आपको ब्राउजर खोलना पड़ेगा। पासवर्ड डालना पड़ेगा। और लॉगिन करना पड़ेगा। यह छोटा सा एक्स्ट्रा स्टेप आपके दिमाग को यह सोचने का वक्त देगा कि 'भाई। क्या सच में यह जरूरी है?'

बिजनेस में भी इसका एक बहुत गहरा लेसन है। कभी कभी आप नहीं चाहते कि हर कोई आपका कस्टमर बने। अगर आप एक प्रीमियम सर्विस दे रहे हैं। तो आप जानबूझकर अपने फॉर्म को थोड़ा लंबा रख सकते हैं। इससे वह लोग जो सिर्फ टाइम पास करने आए हैं। वे फ्रिक्शन की वजह से खुद ही बाहर निकल जाएंगे। आपके पास सिर्फ वही लोग बचेंगे जो सच में सीरियस हैं। यानी फ्रिक्शन यहाँ एक फिल्टर की तरह काम कर रहा है।

तो कहानी का सार यह है, फ्रिक्शन एक हथियार है। इसे सही जगह चलाएंगे तो आप एक सुपरह्यूमन बन जाएंगे। गलतियों के रास्ते में गड्ढे खोदिए और सही कामों के रास्ते में रेड कारपेट बिछाइए। जब आप इस आर्ट को मास्टर कर लेंगे। तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। क्योंकि तब आप सिस्टम के खिलाफ नहीं। बल्कि सिस्टम के साथ काम कर रहे होंगे।


दोस्तो, रोजर डूली की यह किताब हमें सिखाती है कि दुनिया बड़ी बड़ी बातों से नहीं। बल्कि छोटी छोटी रुकावटों को हटाने से बदलती है। आज ही अपने काम और अपनी लाइफ को गौर से देखिए। वह कौन सा छोटा सा पत्थर है जो आपकी रफ़्तार रोक रहा है? उसे अभी हटा दीजिए। और हां। अगर आपको यह लेसन कीमती लगा। तो इसे उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो अपनी लाइफ में फ्रिक्शन के मारे बैठे हैं। नीचे कमेंट में बताइए कि आप अपनी लाइफ का कौन सा फ्रिक्शन आज खत्म करने वाले हैं।

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