Radical Candor (Hindi)


अगर आपको लगता है कि आप अपनी टीम के सबसे प्यारे और नाइस बॉस हैं तो बधाई हो आप अपनी कंपनी को डूबने के सबसे बड़े जिम्मेदार हैं। आपकी झूठी शराफत और सच न बोलने की आदत एम्प्लॉई के करियर और आपके बिजनेस दोनों का कचरा कर रही है। अब भी चुप रहकर बर्बादी का तमाशा देखना चाहते हैं क्या।

आज हम किम स्कॉट की किताब रेडिकल कैंडोर से सीखेंगे कि कैसे बिना विलेन बने आप सच बोल सकते हैं। ये लेसन आपकी लीडरशिप और काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे। चलिए इन लाइफ चेंजिंग लेसन को करीब से समझते हैं।


लेसन १ : केयर पर्सनली एंड चैलेंज डायरेक्टली

ऑफिस में काम करते हुए हम अक्सर दो रास्तों पर चलते हैं। या तो हम इतने खड़ूस बन जाते हैं कि लोग हमें देखते ही रास्ता बदल लेते हैं। या फिर हम इतने ज्यादा अच्छे बन जाते हैं कि लोग हमारे सिर पर चढ़कर तांडव करने लगते हैं। किम स्कॉट कहती हैं कि असली लीडर वही है जो इंसान की तरह परवाह भी करे और काम गलत होने पर सीधे मुंह पर सच भी बोले। इसे ही रेडिकल कैंडोर कहते हैं।

सोचिए आपके पास एक टीम मेंबर है जिसका नाम राहुल है। राहुल काम तो ठीक करता है लेकिन उसकी प्रेजेंटेशन इतनी बोरिंग होती है कि मीटिंग में लोग सो जाते हैं। अब आप एक अच्छे बॉस बनकर चुप रहते हैं क्योंकि आप राहुल का दिल नहीं दुखाना चाहते। इसे किम स्कॉट रुइनुस एम्पैथी कहती हैं। मतलब आपकी ज्यादा दया राहुल के करियर की कब्र खोद रही है। राहुल को लग रहा है कि वह बहुत अच्छा काम कर रहा है जबकि हकीकत में वह एक एवरेज एम्प्लॉई बनकर रह गया है। वहीं दूसरी तरफ अगर आप उसे सबके सामने डांट देते हैं और उसे बेवकूफ बोलते हैं तो आप ओब्नोक्सियस अग्रेशन दिखा रहे हैं। आप सच तो बोल रहे हैं लेकिन आपको राहुल की कोई परवाह नहीं है।

रेडिकल कैंडोर का मतलब है राहुल को अकेले में बुलाना। उसे पहले ये एहसास दिलाना कि आप चाहते हैं कि वह कंपनी में आगे बढ़े। और फिर उसे सीधा और साफ फीडबैक देना। राहुल भाई तुम्हारी स्लाइड में बहुत ज्यादा टेक्स्ट है और तुम पढ़कर सुना रहे हो जो बहुत बोरिंग है। तुम्हें इसे बेहतर करना होगा वरना तुम प्रमोट नहीं हो पाओगे। जब आप किसी की परवाह करते हैं तो आप उसे अंधेरे में नहीं छोड़ते। आप उसे आईना दिखाते हैं।

इंडियन ऑफिस में अक्सर लोग सच बोलने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि रिश्ता खराब हो जाएगा। लेकिन सच तो ये है कि जब आप फीडबैक नहीं देते तो आप उस इंसान का सबसे बड़ा नुकसान कर रहे होते हैं। अगर आप किसी के काम की बुराई नहीं कर पा रहे तो इसका मतलब है कि आप उसके साथ ईमानदार नहीं हैं। सच कड़वा जरूर होता है लेकिन वही आपको और आपकी टीम को ग्रोथ दिलाता है। बिना चैलेंज किए प्यार जताना असल में प्यार नहीं बल्कि डरपोक होने की निशानी है। एक बॉस के तौर पर आपकी जिम्मेदारी सिर्फ काम करवाना नहीं है बल्कि लोगों को बेहतर बनाना भी है। और बेहतर बनने के लिए सच सुनना सबसे पहली जरूरत है।


लेसन २ : ओब्नोक्सियस अग्रेशन और रुइनुस एम्पैथी से बचें

लीडरशिप की दुनिया में दो ऐसे गड्ढे हैं जिनमें अक्सर अच्छे से अच्छे बॉस गिर जाते हैं। पहला गड्ढा है ओब्नोक्सियस अग्रेशन। इसे आसान भाषा में समझें तो यह वह बॉस है जो ऑफिस में घुसते ही चिल्लाना शुरू कर देता है। मान लीजिए आपकी टीम की सुप्रिया ने एक छोटी सी गलती कर दी। अब आप उसे सबके सामने झाड़ रहे हैं और उसकी काबिलियत पर सवाल उठा रहे हैं। आपको लग रहा है कि आप सच बोल रहे हैं और बहुत पावरफुल हैं। लेकिन हकीकत में आप सिर्फ एक बदतमीज इंसान बन रहे हैं। जब आप लोगों की परवाह किए बिना सच को पत्थर की तरह मारते हैं तो लोग आपकी बात सुनना बंद कर देते हैं। वे आपसे डर सकते हैं लेकिन आपकी इज्जत कभी नहीं करेंगे। ऐसी टीम में लोग काम सिर्फ इसलिए करते हैं ताकि आपकी डांट से बच सकें न कि इसलिए कि वे कंपनी को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

अब आते हैं दूसरे और सबसे खतरनाक गड्ढे पर जिसे किम स्कॉट रुइनुस एम्पैथी कहती हैं। यह वह बॉस है जो बहुत ही प्यारा और भोला बनता है। ऑफिस में कोई काम नहीं कर रहा है तो भी यह बॉस मुस्कुराता रहता है। मान लीजिए अमित नाम का एक एम्प्लॉई है जो हर डेडलाइन मिस करता है। पर आप सोचते हैं कि बेचारा अमित बहुत दूर से ऑफिस आता है या उसके घर में शायद कोई दिक्कत होगी। आप उसे कुछ नहीं कहते और उसका काम खुद करने लगते हैं या किसी और पर डाल देते हैं। आपको लग रहा है कि आप बहुत अच्छे इंसान हैं। लेकिन असल में आप अमित के लिए जहर बन रहे हैं। जब छंटनी का समय आएगा तो अमित सबसे पहले बाहर होगा क्योंकि आपने उसे कभी सुधरने का मौका ही नहीं दिया। आपकी झूठी शराफत ने एक करियर बर्बाद कर दिया।

इन दोनों के बीच में एक और भयानक चीज होती है जिसे मैन्युपुलेटिव इंसिन्सियारिटी कहते हैं। यह तब होता है जब आपको इंसान की परवाह भी नहीं है और आप उसे सच बोलने की हिम्मत भी नहीं रखते। आप पीठ पीछे बुराई करते हैं लेकिन सामने से मीठी बातें करते हैं। यह तो पॉलिटिक्स की हद है।

रेडिकल कैंडोर इन सब से अलग है। यह कहता है कि सीधे बात करो लेकिन दिल में सामने वाले की भलाई रखो। अगर कोई गलती कर रहा है तो उसे तुरंत बताओ पर अकेले में। अगर आप सुप्रिया को यह समझा सकें कि उसकी गलती से पूरी टीम का प्रोजेक्ट लेट हो सकता है और आप उसे बेहतर करते हुए देखना चाहते हैं तो वह आपकी बात को समझेगी। बिना गाली दिए और बिना गुस्सा दिखाए भी कड़वी बात कही जा सकती है। जब आप इन दो गड्ढों से बचकर सीधे रास्ते पर चलते हैं तभी आप एक टीम को लीड करने के लायक बनते हैं। वरना आप सिर्फ एक कुर्सी पर बैठे हुए इंसान हैं जिसका काम सिर्फ अटेंडेंस चेक करना रह गया है।


लेसन ३ : फीडबैक लेने का कल्चर बनाएं

ज्यादातर मैनेजर्स को लगता है कि फीडबैक देना एक वन-वे ट्रैफिक है। यानी बॉस बोलेगा और एम्प्लॉई सर झुकाकर सुनेगा। लेकिन किम स्कॉट कहती हैं कि अगर आप अपनी टीम को सच बोलना सिखाना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको खुद सच सुनने की हिम्मत जुटानी होगी। एक सच्चा लीडर वह नहीं है जिसके पास हर सवाल का जवाब हो बल्कि वह है जो अपनी गलतियों को सबके सामने मानने का जिगरा रखता हो। अगर आपकी टीम आपसे डरती है तो वे आपको कभी नहीं बताएंगे कि आपका आइडिया कितना बकवास है। और जिस दिन टीम ने सच बोलना बंद कर दिया समझ लीजिए आपकी कंपनी के उल्टे दिन शुरू हो गए।

सोचिए आप एक मीटिंग में हैं और आपने एक नया प्लान पेश किया। आपकी टीम के लोग जानते हैं कि यह प्लान फेल हो जाएगा लेकिन वे चुप हैं। क्यों। क्योंकि पिछली बार जब किसी ने सवाल उठाया था तो आपने उसे चुप करा दिया था। इसे कहते हैं ईगो का पहाड़। रेडिकल कैंडोर का तीसरा और सबसे जरूरी हिस्सा है कि आप अपनी टीम से पूछें कि मैं कहाँ गलत जा रहा हूँ। और जब कोई जूनियर आपको बताए कि सर आपकी ये बात समझ नहीं आई या ये गलत है तो उसे इनाम दें न कि उसे नौकरी से निकालने की धमकी। जब आप खुद फीडबैक मांगते हैं तो आप एक ऐसा माहौल बनाते हैं जहाँ सच बोलना नॉर्मल बात हो जाती है।

इंडियन कल्चर में हम बड़ों को टोकना बदतमीजी समझते हैं। लेकिन ऑफिस में यही कल्चर बर्बादी की जड़ है। अगर आपका जूनियर आपको टोक रहा है तो वह आपकी इज्जत कम नहीं कर रहा बल्कि वह कंपनी को डूबने से बचा रहा है। आपको अपनी टीम को यह भरोसा दिलाना होगा कि यहाँ सच बोलने पर फांसी नहीं दी जाती। जब आप अपनी कमियां सुनते हैं और उन्हें सुधारते हैं तो आपकी टीम का आप पर भरोसा बढ़ जाता है। उन्हें लगता है कि हमारा बॉस भी एक इंसान है और वह भी सीख रहा है।

फीडबैक लेने का मतलब यह नहीं है कि आप हर किसी की बात मान लें। इसका मतलब है कि आप हर किसी की बात को ध्यान से सुनें और उस पर विचार करें। जब लोग देखते हैं कि उनके फीडबैक से बदलाव आ रहा है तो वे और भी ज्यादा जिम्मेदारी से काम करने लगते हैं। यह एक फिल्म की तरह है जहाँ डायरेक्टर एक्टर की बात सुनता है ताकि सीन बेहतर हो सके। अगर डायरेक्टर जिद्दी हो जाए तो फिल्म फ्लॉप होना तय है। इसलिए अपनी कुर्सी का रौब छोड़िए और अपनी टीम के लिए एक ऐसा दरवाजा खोलिए जहाँ सच बिना किसी डर के अंदर आ सके। जब फीडबैक लेना और देना पानी पीने जितना नेचुरल हो जाएगा तब आपकी टीम को दुनिया की कोई ताकत नहीं हरा पाएगी।


लीडर बनना कोई डेजिग्नेशन नहीं है बल्कि एक जिम्मेदारी है। रेडिकल कैंडोर हमें सिखाता है कि हम बिना अपनी इंसानियत खोए भी एक सख्त और कामयाब बॉस बन सकते हैं। बस याद रखिए कि आपको लोगों की परवाह करनी है और उन्हें सच का आईना भी दिखाना है। आज ही अपने किसी टीम मेंबर या दोस्त को बुलाइए और उसे वह सच बताइए जो आप काफी समय से छुपा रहे थे पर पूरे प्यार और सम्मान के साथ। यकीन मानिए यह एक बातचीत आपकी लाइफ और करियर दोनों को बदल देगी। अगर आपको ये लेसन काम के लगे तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो मैनेजर बनने का सपना देख रहे हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि क्या आप एक रेडिकल बॉस बनना चाहेंगे।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#Leadership #Management #RadicalCandor #CareerGrowth #TeamBuilding


_

Post a Comment

Previous Post Next Post