आप अभी भी उस परफेक्ट आईडिया का इंतजार कर रहे हैं ताकि दुनिया हिल जाए। सच तो यह है कि आपका प्लान फ्लॉप होने वाला है क्योंकि आप सिर्फ सोचने में एक्सपर्ट हैं। जबकि स्मार्ट लोग कचरा बेचकर करोड़ों कमा रहे हैं और आप खाली हाथ बैठे बस जल रहे हैं।
आज के इस आर्टिकल में हम माइकल मास्टरसन की बुक रेडी फायर एम से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो आपके बिजनेस करने के पुराने और थके हुए नजरिए को पूरी तरह बदल देंगे। चलिए उन 3 लेसन की गहराई में चलते हैं जो आपको अमीर बनाएंगे।
लेसन १ : एक्शन पहले प्लानिंग बाद में - परफेक्शन का भूत भगाओ
ज्यादातर लोग बिजनेस शुरू करने का नाम सुनते ही सबसे पहले एक सुंदर सी डायरी खरीदते हैं और उसमें नीले काले पेन से ऐसी प्लानिंग करते हैं जैसे उन्हें मंगल ग्रह पर कॉलोनी बसानी हो। वो हफ़्तों तक लोगो के डिजाइन और ऑफिस की कुर्सी के कलर पर माथापच्ची करते हैं। उन्हें लगता है कि जब तक सब कुछ परफेक्ट नहीं होगा तब तक मार्केट में कदम रखना पाप है। माइकल मास्टरसन कहते हैं कि यह परफेक्शन का भूत असल में आपकी नाकामी का सबसे बड़ा संकेत है। सच तो यह है कि जब तक आप अपना पहला प्रोडक्ट बेचते नहीं हैं तब तक आपका बिजनेस सिर्फ आपके दिमाग की एक कोरी कल्पना है।
सोचिए कि आप एक रेस्टोरेंट खोलना चाहते हैं और आप छह महीने सिर्फ इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि टिश्यू पेपर का टेक्सचर कैसा होना चाहिए। इस बीच आपका पड़ोसी एक ठेले पर बढ़िया मोमोज बेचना शुरू कर देता है और महीने के अंत तक वह आपसे ज्यादा कैश कमा रहा होता है। इसे ही कहते हैं रेडी और फायर। आप पहले निशाना साधने में अपनी पूरी जवानी निकाल देते हैं और तब तक चिड़िया उड़ चुकी होती है। मास्टरसन का सीधा सा फंडा है कि आप अपना बेसिक प्रोडक्ट तैयार कीजिए और उसे तुरंत मार्केट में फेंक दीजिए।
लोग कहते हैं कि भाई बिना पूरी तैयारी के गिर गए तो क्या होगा। अरे भाई गिरोगे तभी तो पता चलेगा कि जमीन कहाँ गीली है। जब आप मार्केट में उतरते हैं तब आपको असली फीडबैक मिलता है। कस्टमर आपको बताएगा कि आपका प्रोडक्ट हीरा है या पत्थर। वह प्लानिंग वाली डायरी आपको कभी सच नहीं बताएगी। जो लोग पहले एम यानी निशाना लगाने बैठते हैं वो अक्सर कभी ट्रिगर दबा ही नहीं पाते। उनका डर उन्हें जकड़ लेता है।
असली खिलाड़ी वह है जो पहले गोली चलाता है और फिर देखता है कि गोली कहाँ लगी। अगर गोली निशाने से थोड़ी दूर लगी है तो अगले शॉट में अपनी पोजीशन ठीक करो। इसे ही बुक में फायर और फिर एम करना कहा गया है। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इसी तरह शुरू हुए हैं। उन्होंने पहले एक काम चलाऊ चीज बनाई और फिर लोगों की डिमांड के हिसाब से उसे बेहतर किया।
अगर आप आज भी इस इंतजार में बैठे हैं कि जब आपके पास एक करोड़ की फंडिंग होगी या जब आपको बेस्ट आईडिया आएगा तभी आप शुरू करेंगे तो यकीन मानिए आप सिर्फ अपने बुढ़ापे का इंतजार कर रहे हैं। मार्केट को आपकी प्लानिंग से कोई लेना देना नहीं है उसे सिर्फ रिजल्ट चाहिए। तो अपनी उस चमकती हुई डायरी को बंद करिए और अपना पहला खराब सा दिखने वाला प्रोडक्ट बेचना शुरू करिए। सुधार तो बाद में भी होता रहेगा लेकिन खोया हुआ समय कभी वापस नहीं आता।
लेसन २ : सेल्स ही सब कुछ है - एडमिनिस्ट्रेशन को मारो गोली
जब नया बिजनेस शुरू होता है तो लोग खुद को तुरंत एक बड़ी कंपनी का सीईओ समझने लगते हैं। वो पहले दिन ही बिजनेस कार्ड छपवाते हैं और लिंक्डइन पर अपना स्टेटस अपडेट करते हैं। फिर वो बैठ जाते हैं अपना अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर सेट करने या फैंसी ऑफिस फर्नीचर ढूंढने। माइकल मास्टरसन कहते हैं कि यह सब ड्रामा है। अगर आप अपने बिजनेस के शुरुआती लेवल पर हैं जिसे वो स्टेज 1 कहते हैं तो आपका सिर्फ एक ही काम है और वह है सेल्स। अगर आपके पास सेल्स नहीं है तो आपके पास बिजनेस नहीं है बल्कि आपके पास बस एक महंगा और थका देने वाला शौक है।
जरा सोचिए आप एक जिम खोलते हैं और आप दो महीने इस बात पर बहस करते हैं कि रिसेप्शन पर बैठने वाली लड़की की यूनिफार्म का शेड क्या होगा। जबकि हकीकत यह है कि आपके जिम में एक भी मेम्बर नहीं आया है। आप वहां बैठकर अपनी फाइलों को सजा रहे हैं और खुद को बहुत बिजी दिखा रहे हैं। मास्टरसन कहते हैं कि यह असल में काम से बचने का एक तरीका है। सेल्स करना मुश्किल है क्योंकि उसमें रिजेक्शन मिलता है और फाइल सजाना आसान है क्योंकि कागज कभी पलटकर आपको मना नहीं करता।
एक सफल आंत्रप्रेन्योर वह नहीं है जिसके पास सबसे बढ़िया ऑफिस है बल्कि वह है जिसके बैंक अकाउंट में कस्टमर का पैसा आ रहा है। शुरुआती दौर में आपको अपना 80 परसेंट समय सिर्फ और सिर्फ बेचने में लगाना चाहिए। आपको खुद को एक सेल्समैन की तरह देखना होगा। अगर आप बेचने से डरते हैं या आपको लगता है कि सेल्स करना छोटा काम है तो आप बहुत जल्द अपनी दुकान बढ़ाकर घर बैठने वाले हैं। लोग अक्सर पूछते हैं कि भाई मेरा प्रोडक्ट तो अभी पूरी तरह तैयार ही नहीं है तो बेचूं क्या। अरे भाई जो है वही बेचो। जब जेब में पैसा आएगा तब प्रोडक्ट को चमकाने की हिम्मत भी आएगी।
ज्यादातर स्टार्टअप इसलिए दम तोड़ देते हैं क्योंकि वो ऑपरेशन और एडमिनिस्ट्रेशन के जाल में फंस जाते हैं। वो टैक्स की बातें करेंगे और लीगल फॉर्मेलिटीज में उलझे रहेंगे जबकि उनके पास एक भी पेइंग कस्टमर नहीं होता। मास्टरसन का कहना है कि जब तक आप कम से कम एक मिलियन डॉलर की सेल्स तक नहीं पहुँच जाते तब तक आपको किसी और चीज के बारे में सोचना ही नहीं चाहिए। सेल्स वह ऑक्सीजन है जो आपके बिजनेस को जिंदा रखती है। अगर ऑक्सीजन ही नहीं है तो आप चाहे कितना भी महंगा परफ्यूम छिड़क लें शरीर तो ठंडा ही रहेगा।
तो अगली बार जब आप खुद को किसी मीटिंग में फालतू की चर्चा करते हुए पाएं तो खुद से पूछिए कि क्या इस बात से आज कोई सेल होने वाली है। अगर जवाब ना है तो तुरंत उस मीटिंग को छोड़िए और फोन उठाकर किसी क्लाइंट को कॉल लगाइए। याद रखिए दुनिया आपके आईडिया की कद्र नहीं करती दुनिया सिर्फ उस ट्रांजैक्शन को देखती है जो आपके और कस्टमर के बीच हुआ है। सेल्स ही वह इकलौती चीज है जो आपके बिजनेस के सारे पाप धो सकती है।
लेसन ३ : स्केलिंग का सही तरीका - बंदर की तरह उछलना बंद करो
जब किसी का बिजनेस थोड़ा चलने लगता है और खाते में पहली बार कुछ लाख रुपये दिखते हैं तो इंसान का दिमाग सातवें आसमान पर पहुँच जाता है। उसे लगता है कि वह तो अब अगला एलन मस्क बन गया है। अब वह सोचता है कि चलो एक नया प्रोडक्ट लॉन्च करते हैं या फिर किसी दूसरे शहर में नई ब्रांच खोलते हैं। माइकल मास्टरसन कहते हैं कि यह वही वक्त है जब सबसे ज्यादा बिजनेस डूबते हैं। लोग अपनी जीत को पचा नहीं पाते और बहुत जल्दी हाथ-पैर फैलाने की कोशिश करते हैं। इसे ही कहते हैं बिना एम किए कहीं भी फायर कर देना।
मान लीजिए आपकी एक चाय की दुकान बहुत अच्छी चलने लगी और लोग लाइन लगाकर खड़े होने लगे। अब आप जोश में आकर अगले ही हफ्ते पिज्जा और बर्गर भी बेचना शुरू कर देते हैं क्योंकि आपको लगता है कि कस्टमर तो है ही। नतीजा यह होता है कि आपकी चाय की क्वालिटी गिर जाती है और पिज्जा कोई खरीदना नहीं चाहता। आप एक चीज के मास्टर बनने के बजाय हर चीज के जोकर बन जाते हैं। मास्टरसन का कहना है कि स्केलिंग का मतलब यह नहीं है कि आप हर चमकती हुई चीज के पीछे भागें। स्केलिंग का असली मतलब है जो चीज काम कर रही है उसे और बड़ा करना।
जब आप स्टेज 2 में पहुँचते हैं यानी जब आपकी सेल्स स्टेबल हो जाती है तब आपको अपने सिस्टम को मजबूत करना होता है। आपको ऐसे लोग चाहिए जो आपके काम को संभाल सकें ताकि आप नए आइडियाज पर काम कर सकें। लेकिन नया आईडिया हमेशा आपके पुराने बिजनेस से जुड़ा होना चाहिए। अगर आप जूते बेच रहे हैं तो मोजे बेचना स्केलिंग है लेकिन जूते बेचते बेचते अचानक सॉफ्टवेयर बनाने लगना सिर्फ और सिर्फ सुसाइड है। लोग अक्सर अपनी कोर स्ट्रेंथ को भूल जाते हैं और उन गलियों में निकल जाते हैं जिनका उन्हें नक्शा तक नहीं पता।
बिजनेस में ग्रोथ का मतलब सिर्फ टर्नओवर बढ़ाना नहीं है बल्कि प्रॉफिट को बढ़ाना है। बहुत से लोग बड़ी बड़ी गाड़ियां ले लेते हैं और बड़े ऑफिस रेंट पर ले लेते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अब तो हम बड़े हो गए हैं। मास्टरसन सलाह देते हैं कि जब तक आपका बिजनेस खुद अपने पैरों पर खड़ा होकर भागने न लगे तब तक फालतू के खर्चों से बचिए। स्केलिंग धीरे धीरे और सोच समझकर होनी चाहिए। आपको अपनी उस एक चीज को इतना परफेक्ट बनाना है कि मार्केट में आपके जैसा कोई दूसरा न हो।
ज्यादातर आंत्रप्रेन्योर बंदर की तरह एक डाल से दूसरी डाल पर कूदते रहते हैं और अंत में किसी भी डाल पर टिक नहीं पाते। अगर आपने एक बार सेल्स का फॉर्मूला क्रैक कर लिया है तो उसे ही बार बार दोहराएं। जो चीज आपको जीरो से एक करोड़ तक लाई है वही आपको एक करोड़ से सौ करोड़ तक भी ले जाएगी बस आपको उसे सही तरीके से बढ़ाना आना चाहिए। अपनी सफलता को बहुत हल्का मत लीजिए और न ही बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंस में आकर गलत फैसले लीजिए। स्टेबिलिटी ही असली ग्रोथ की चाबी है।
तो दोस्तों, माइकल मास्टरसन की यह बुक हमें सिखाती है कि बिजनेस कोई रॉकेट साइंस नहीं है बल्कि सही समय पर सही एक्शन लेने का नाम है। परफेक्शन के जाल से बाहर निकलिए और आज ही अपना पहला कदम उठाइए। अगर आप गिरेंगे भी तो कुछ न कुछ सीखकर ही उठेंगे। क्या आप अभी भी सिर्फ प्लान बना रहे हैं या मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं।
नीचे कमेंट्स में बताइए कि आप अपने बिजनेस का पहला फायर कब करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो सिर्फ बड़ी बड़ी बातें करते हैं लेकिन काम शुरू नहीं करते। याद रखिए दुनिया सिर्फ उन लोगों को याद रखती है जिन्होंने खेल खेला है न कि उन्हें जो सिर्फ स्टेडियम में बैठकर तालियां बजा रहे थे।
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