Renovate Before You Innovate (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो अपना पुराना घर पेंट करवाने के बजाय नया बंगला खरीदने का सपना देख रहे हैं भले ही जेब में फूटी कौड़ी न हो? मुबारक हो आप फेल होने की पहली सीढ़ी चढ़ चुके हैं। जब तक आप अपने मौजूदा बिजनेस का कचरा साफ नहीं करेंगे नया आइडिया भी आपको डुबोने ही आएगा।

इस आर्टिकल में हम सर्जियो जायमन की किताब रिनोवेट बिफोर यू इनोवेट से सीखेंगे कि क्यों नया करने की खुजली आपको बर्बाद कर सकती है। हम उन ३ बड़े लेसन्स पर बात करेंगे जो आपके गिरते हुए काम को फिर से खड़ा कर देंगे।


लेसन १ : इनोवेशन की बीमारी और रिनोवेशन का इलाज

आजकल के दौर में हर दूसरे इंसान को इनोवेशन का बुखार चढ़ा हुआ है। सबको लगता है कि अगर उन्होंने कुछ एकदम नया या अतरंगी नहीं किया तो दुनिया उन्हें भूल जाएगी। लोग अपने पुराने और चलते हुए बिजनेस को सिर्फ इसलिए छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि नया वाला आइडिया ज्यादा कूल है। सर्जियो जायमन कहते हैं कि यह असल में एक बीमारी है जिसे वह 'इनोवेशन का नशा' कहते हैं। आप खुद सोचिये कि अगर आपकी पुरानी कार का टायर पंचर है तो क्या आप उसे ठीक करवाएंगे या सीधे शोरूम जाकर नई कार की किश्तें भरेंगे? जाहिर है आप टायर बदलेंगे। लेकिन बिजनेस में लोग अक्सर पूरी कार ही बदलने की बेवकूफी कर बैठते हैं।

रिनोवेशन का मतलब है कि जो आपके पास पहले से है उसे फिर से चमकाना। आपके पुराने कस्टमर्स और आपका पुराना ब्रांड आपकी असली ताकत हैं। अगर आपकी दुकान पर लोग समोसे खाने आते हैं और अचानक आप वहां पिज्जा बेचना शुरू कर दें तो न तो पुराने लोग बचेंगे और न ही नए लोग आएंगे। आपको बस अपने उन समोसों की चटनी बेहतर करने की जरूरत थी। लेकिन नहीं आपको तो नयापन चाहिए था। यह नयापन अक्सर जेब खाली करने का सबसे तेज तरीका साबित होता है।

असली मार्केटिंग का खेल यह नहीं है कि आप हर हफ्ते कुछ नया लॉन्च करें। असली खेल यह है कि आप अपने पुराने विनिंग प्रोडक्ट को इतनी बार पॉलिश करें कि वह हर बार नया लगे। लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि कोका कोला ने जब अपनी 'न्यू कोक' लॉन्च की थी तो वह इतिहास की सबसे बड़ी हार थी। क्यों? क्योंकि उन्होंने रिनोवेट करने के बजाय जबरदस्ती का इनोवेशन करने की कोशिश की थी। उन्होंने सोचा कि लोग कुछ नया मांग रहे हैं जबकि लोग तो सिर्फ वही पुरानी खुशी मांग रहे थे।

हमारा दिमाग अक्सर शॉर्टकट ढूंढता है। हमें लगता है कि नई चीज लाते ही रातों रात हम अमीर बन जाएंगे। लेकिन सच तो यह है कि नया काम शुरू करने में जो मेहनत और पैसा लगता है उसका आधा भी अगर आप पुराने को सुधारने में लगा दें तो रिजल्ट्स डबल मिलेंगे। रिनोवेशन आपको जमीन से जोड़े रखता है। यह आपको बताता है कि आपकी जड़ें कहां हैं। जब आप अपनी कमियों को पहचानते हैं और उन्हें ठीक करते हैं तो आप असल में एक मजबूत इमारत बना रहे होते हैं।

बिना सोचे समझे नया काम शुरू करना वैसा ही है जैसे आप बिना हेलमेट के सुपरबाइक चला रहे हों। देखने में तो बहुत कूल लगेगा लेकिन एक छोटा सा पत्थर भी आपको रास्ते से हटा सकता है। इसलिए पहले अपने पुराने आइडिया की धूल झाड़िये। देखिये कि आपके पुराने ग्राहकों ने आपको छोड़ना क्यों शुरू किया। क्या आपकी सर्विस खराब हो गई थी? क्या आपकी क्वालिटी गिर गई थी? इन सवालों के जवाब ढूंढना ही रिनोवेशन है। इनोवेशन तो इसके बहुत बाद की बात है। अगर नींव में दरार है तो ऊपर की मंजिल पर सोने का पेंट करने से कोई फायदा नहीं होगा।


लेसन २ : कस्टमर की मर्जी या अपनी मर्जी का खेल

ज्यादातर बिजनेसमैन और मार्केटर्स एक बहुत बड़ी गलतफहमी में जीते हैं। उन्हें लगता है कि वे जो बनाएंगे कस्टमर वही खरीदेगा। भाई साहब आप कोई जादूगर नहीं हैं और कस्टमर कोई भोला बच्चा नहीं है। सर्जियो जायमन साफ कहते हैं कि इनोवेशन का असली मतलब अपनी ईगो को संतुष्ट करना नहीं बल्कि कस्टमर की जेब से पैसा निकलवाना है। अगर आप कोई ऐसी चीज बना रहे हैं जिसे दुनिया को चाहिए ही नहीं तो आप बिजनेस नहीं कर रहे आप बस एक महंगा शौक पाल रहे हैं।

सोचिये कि आप एक ऐसी छतरी बनाते हैं जो म्यूजिक बजाती है। सुनने में तो बड़ा कूल लगता है न? लेकिन अगर वह छतरी धूप और बारिश से नहीं बचा पा रही तो कोई उसे क्यों खरीदेगा? लोग अक्सर इनोवेशन के नाम पर कचरा पैदा कर देते हैं क्योंकि वे कस्टमर से पूछना ही भूल जाते हैं। रिनोवेशन का दूसरा बड़ा स्टेप यही है कि आप अपने कस्टमर की उन जरूरतों को पहचानें जिन्हें आप पहले पूरा कर रहे थे लेकिन अब शायद ढीले पड़ गए हैं।

कस्टमर बहुत बेरहम होता है। उसे फर्क नहीं पड़ता कि आपने नया प्रोडक्ट बनाने में कितनी रातें काली की हैं। उसे बस इस बात से मतलब है कि क्या उसका काम आसान हो रहा है? अक्सर हम नए फीचर्स जोड़ने के चक्कर में प्रोडक्ट को इतना मुश्किल बना देते हैं कि आम आदमी उसे देखकर ही हाथ जोड़ लेता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी ढाबे पर आप सिर्फ रोटी सब्जी खाने गए हों और वेटर आपको पांच पेज का मेन्यू पकड़ा दे जिसमें डिशेज के नाम भी पढ़ना मुश्किल हो। वहां से इंसान पेट भरकर नहीं बल्कि सिर पकड़कर निकलता है।

मार्केटिंग का असली सच यह है कि कस्टमर को बदलाव पसंद है लेकिन उसे अपनापन भी चाहिए। जब आप रिनोवेट करते हैं तो आप उसे वही पुरानी भरोसेमंद चीज एक बेहतर अवतार में देते हैं। यह वैसा ही है जैसे पुरानी हिंदी फिल्मों को रीमास्टर करके एचडी में रिलीज किया जाए। कहानी वही है हीरो वही है लेकिन अब देखने का मजा दोगुना हो गया है। बिना रिसर्च के कुछ भी नया ठोक देना इनोवेशन नहीं बेवकूफी है।

अपनी कंपनी के अंदर बैठकर मीटिंग्स करना और ग्राफ्स देखना बहुत आसान है। असली चुनौती है मार्केट में जाकर धूल फांकना और यह देखना कि लोग आपके ब्रांड के बारे में क्या बात कर रहे हैं। अगर आपके पुराने कस्टमर टूटकर जा रहे हैं तो यकीन मानिए नया प्रोडक्ट लाने से वे वापस नहीं आएंगे। वे तब वापस आएंगे जब आप अपनी पुरानी गलतियों को सुधारेंगे और उन्हें वह वैल्यू देंगे जिसके लिए वे कभी आपके पास आए थे। रिनोवेशन आपको जमीन पर लाता है और आपको याद दिलाता है कि बॉस आप नहीं बल्कि वो कस्टमर है जो अपनी मेहनत की कमाई आपको दे रहा है।


लेसन ३ : डेटा का चश्मा और भावनाओं की धुंध

बिजनेस की दुनिया में आधे से ज्यादा लोग सिर्फ अपनी फीलिंग्स के आधार पर फैसले लेते हैं। उन्हें लगता है कि उनका दिल कह रहा है कि यह नया आइडिया आग लगा देगा। भाई साहब दिल खून पंप करने के लिए होता है बिजनेस चलाने के लिए नहीं। सर्जियो जायमन का तीसरा सबसे बड़ा लेसन यही है कि रिनोवेशन हमेशा डेटा और फैक्ट्स पर आधारित होना चाहिए। अगर आपका पिछला रिकॉर्ड कह रहा है कि लोग नीले रंग का साबुन ज्यादा खरीदते हैं तो जबरदस्ती लाल रंग का 'इनोवेटिव' साबुन लॉन्च करना सुसाइड करने जैसा है।

ज्यादातर लोग डेटा से इसलिए डरते हैं क्योंकि डेटा कभी झूठ नहीं बोलता और वह आपकी कमियां आपके मुंह पर मारता है। रिनोवेशन का मतलब है पिछले साल के सेल्स चार्ट को उठाना और यह देखना कि पैसा कहां से आ रहा था। हम अक्सर उन २० परसेंट चीजों को छोड़ देते हैं जो हमें ८० परसेंट प्रॉफिट दे रही होती हैं सिर्फ इसलिए क्योंकि वे अब हमें बोरिंग लगने लगी हैं। यह वैसा ही है जैसे कोई बल्लेबाज हर गेंद पर छक्का मारने की कोशिश में अपना नेचुरल गेम भूल जाए और जीरो पर आउट हो जाए।

भावनाओं में बहकर नया स्टार्टअप शुरू करना या नया ब्रांड लॉन्च करना बहुत ग्लैमरस लगता है। लेकिन असली ग्लैमर बैंक बैलेंस में होता है जो केवल सही रिनोवेशन से आता है। जब आप डेटा देखते हैं तो आपको समझ आता है कि आपकी पुरानी मशीनरी को बदलने की जरूरत है या आपकी मार्केटिंग टीम को। शायद आपको नया प्रोडक्ट चाहिए ही नहीं था शायद आपको बस अपनी डिलीवरी स्पीड सुधारनी थी। लेकिन डेटा को नजरअंदाज करके आप किसी ऐसी प्रॉब्लम का सॉल्यूशन ढूंढने निकल जाते हैं जो असल में थी ही नहीं।

सफल लोग पहले रिनोवेट करते हैं फिर जो पैसा और समय बचता है उसे इनोवेशन में लगाते हैं। यह एक रिस्क मैनेजमेंट की तरह है। अगर आपका पुराना काम आपको कमाकर दे रहा है तो आप नया एक्सपेरिमेंट करने की हिम्मत जुटा सकते हैं। लेकिन अगर पुराना जहाज डूब रहा है और आप उस पर नई पेंटिंग बना रहे हैं तो आप सबसे बड़े बेवकूफ हैं। रिनोवेशन आपको आईना दिखाता है कि आप असल में खड़े कहां हैं।

अंत में बस इतना समझ लीजिये कि मार्केट कोई लैब नहीं है जहाँ आप रोज नए एक्सपेरिमेंट करेंगे। मार्केट एक जंग का मैदान है जहाँ आपको टिके रहने के लिए अपनी पुरानी तलवार की धार तेज करनी पड़ती है। नया हथियार चलाने का शौक अच्छी बात है लेकिन अगर पुरानी तलवार ही हाथ से छूट गई तो जीतना मुमकिन नहीं है।


तो दोस्तों, रिनोवेट बिफोर यू इनोवेट हमें सिखाती है कि चमकती हुई हर नई चीज सोना नहीं होती। अपनी जड़ों को मजबूत कीजिये अपनी पुरानी गलतियों को सुधारिये और अपने मौजूदा ग्राहकों की इज्जत कीजिये। नया करने की रेस में अपनी पहचान मत खोइए।

अब आप मुझे कमेंट्स में बताइये कि आपके बिजनेस या करियर में वो कौन सी एक पुरानी चीज है जिसे आपको आज ही रिनोवेट करने की जरूरत है? क्या आप भी सिर्फ नया करने के चक्कर में पुराने को बर्बाद कर रहे हैं? अपनी कहानी शेयर कीजिये और इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त को भेजिए जो हर दूसरे दिन एक नया 'क्रांतिकारी' आइडिया लेकर आ जाता है। चलिए साथ मिलकर सुधार करते हैं।

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