Return on Customer (Hindi)


क्या आप भी उन महान बिजनेस ओनर्स में से हैं जो कस्टमर को सिर्फ एक चलता फिरता एटीएम समझते हैं। अगर हां तो बधाई हो आप अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट खुद लिख रहे हैं। बिना रिटर्न ऑन कस्टमर समझे बिजनेस चलाना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के गाड़ी को धक्का मारना। बहुत मजा आ रहा है ना खाली जेब लेकर घूमने में।

आज हम डॉन पेपर्स और मार्था रोजर्स की शानदार किताब रिटर्न ऑन कस्टमर के उन सीक्रेट्स को खोलेंगे जो आपके डूबते हुए बिजनेस को रॉकेट बना सकते हैं। चलिए इन 3 पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : कस्टमर इक्विटी ही असली खजाना है

अक्सर हमारे देश के बिजनेस ओनर्स की एक बहुत ही मासूम और प्यारी आदत होती है। वे आज के मुनाफे को ही अपनी पूरी दुनिया मान लेते हैं। अगर आज गल्ले में हजार रुपये आए हैं तो वे खुश हैं और अगर नहीं आए तो वे दुनिया भर का दुख अपने सिर पर लेकर बैठ जाते हैं। लेकिन दोस्त यह सोच आपको अंबानी या टाटा नहीं बनाने वाली है। डॉन पेपर्स और मार्था रोजर्स अपनी इस किताब में हमें एक बहुत ही गहरा कॉन्सेप्ट समझाते हैं जिसे वे कस्टमर इक्विटी कहते हैं। साधारण भाषा में कहें तो इसका मतलब है कि एक कस्टमर आज आपको कितना पैसा दे रहा है यह जरूरी नहीं है बल्कि वह अपनी पूरी जिंदगी में आपके बिजनेस को कितनी वैल्यू देगा यह सबसे ज्यादा जरूरी है।

मान लीजिए आपके मोहल्ले में एक किराना स्टोर है। वहां एक शर्मा जी हर महीने पांच हजार रुपये का सामान लेने आते हैं। अब एक दिन शर्मा जी को जल्दी में एक बिस्किट का पैकेट चाहिए था लेकिन उनके पास खुले पैसे नहीं थे। दुकानदार ने बड़े ही एटीट्यूड में कहा कि उधार नहीं मिलेगा। शर्मा जी को बुरा लगा और उन्होंने उस दिन के बाद से वहां जाना छोड़ दिया। उस दुकानदार ने उस दिन सिर्फ दस रुपये के मुनाफे के चक्कर में उन लाखों रुपयों को लात मार दी जो शर्मा जी अगले दस सालों में उसे देने वाले थे। इसे कहते हैं अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारना और फिर उस कुल्हाड़ी को भी बेचना ताकि थोड़े और पैसे मिल जाएं।

ज्यादातर लोग शॉर्ट टर्म प्रॉफिट के चक्कर में लॉन्ग टर्म वेल्थ का गला घोंट देते हैं। उन्हें लगता है कि एक बार कस्टमर को लूट लिया तो वे राजा बन जाएंगे। लेकिन असली राजा वह है जो यह समझता है कि कस्टमर एक पेड़ों का बगीचा है जिसे रोज पानी देना पड़ता है ना कि वह कोई लकड़ी का गट्ठर है जिसे एक बार जलाकर राख कर दिया जाए। अगर आप सिर्फ आज के सेल्स टारगेट को पूरा करने के पीछे भाग रहे हैं तो आप असल में अपनी भविष्य की इनकम को खत्म कर रहे हैं।

आज के डिजिटल युग में तो यह और भी जरूरी हो गया है। एक नाराज कस्टमर सिर्फ आपकी दुकान पर आना बंद नहीं करता बल्कि वह सोशल मीडिया पर आपकी ऐसी बैंड बजाता है कि आपके आने वाले दस नए कस्टमर भी रास्ता बदल लेते हैं। इसलिए अगर आप अपने बिजनेस को सच में बड़ा करना चाहते हैं तो अपनी नजरें गल्ले से हटाकर उस रिश्ते पर टिकाइए जो आप कस्टमर के साथ बना रहे हैं। याद रखिए कि पैसा तो हाथ की मैल है लेकिन एक बार गया हुआ कस्टमर दोबारा वापस नहीं आता।

क्या आपको लगता है कि आप भी अपने बिजनेस में सिर्फ आज का फायदा देख रहे हैं। अगर ऐसा है तो संभल जाइए क्योंकि यह रास्ता सिर्फ और सिर्फ खड्डे की तरफ जाता है। अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे भरोसा ही आपके बिजनेस का सबसे बड़ा इंजन बन सकता है जो इसे मीलों आगे ले जाएगा।


लेसन २ : भरोसा ही सबसे बड़ी करेंसी है

बिजनेस की दुनिया में लोग अक्सर सोचते हैं कि सबसे जरूरी चीज पैसा या मार्केटिंग है। लेकिन सच तो यह है कि बिना भरोसे के आपकी मार्केटिंग वैसी ही है जैसे किसी को बिना शादी के इनविटेशन कार्ड भेजना। किताब में लेखक हमें यह सिखाते हैं कि कस्टमर और आपके बीच का रिश्ता केवल लेन देन का नहीं बल्कि विश्वास का होना चाहिए। अगर आपका कस्टमर आप पर आंख मूंदकर भरोसा करता है तो यकीन मानिए कि आपके कॉम्पिटिटर चाहे कितनी भी बड़ी सेल लगा लें या डिस्काउंट दे दें वह कहीं नहीं हिलेगा। भरोसा कमाना मुश्किल है पर इसे खोना उतना ही आसान है जितना मोबाइल का ग्लास टूटना।

मान लीजिए आप एक सेकंड हैंड कार खरीदने जाते हैं। डीलर आपको दुनिया भर के सपने दिखाता है कि गाड़ी सिर्फ पांच हजार किलोमीटर चली है और इसे एक डॉक्टर साहब चलाते थे। आप खुशी खुशी गाड़ी घर लाते हैं और अगले ही दिन पता चलता है कि उसका इंजन तो सिर्फ दुआओं पर चल रहा है। अब वह डीलर चाहे आपको फ्री में सर्विसिंग दे दे या चांदी का सिक्का आप दोबारा उसकी शक्ल भी नहीं देखना चाहेंगे। उसने एक बार आपसे झूठ बोलकर चंद रुपये तो कमा लिए लेकिन उसने उस भरोसे का कत्ल कर दिया जो उसे सालों तक प्रॉफिट दिला सकता था। इसे कहते हैं सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को एक ही दिन में काटकर बिरयानी बना लेना।

असल में ट्रस्ट एक बैंक अकाउंट की तरह है। जब आप कस्टमर को अच्छी सर्विस देते हैं या उसकी प्रॉब्लम को ईमानदारी से सुलझाते हैं तो आप उस अकाउंट में डिपॉजिट कर रहे होते हैं। और जब आप कोई गलती करते हैं या उसे बेवकूफ बनाते हैं तो आप वहां से विड्रॉल करते हैं। दिक्कत तब आती है जब आपके अकाउंट में बैलेंस जीरो होता है और आप फिर भी चेक काटने की कोशिश करते हैं। बिजनेस में ईमानदारी कोई नैतिकता का विषय नहीं है बल्कि यह एक बहुत ही स्मार्ट बिजनेस स्ट्रेटजी है।

जब आप कस्टमर को वह वैल्यू देते हैं जिसका आपने वादा किया था तब आप एक ऐसी दीवार खड़ी कर देते हैं जिसे कोई भी एडवर्टाइजमेंट नहीं तोड़ सकता। लोग आजकल विज्ञापनों पर भरोसा नहीं करते वे उन लोगों पर भरोसा करते हैं जिन्होंने उन्हें कभी धोखा नहीं दिया। इसलिए अगर आप अपने बिजनेस में लंबी रेस का घोड़ा बनना चाहते हैं तो झूठे वादे करना बंद कीजिए। अगर आपके प्रोडक्ट में कोई कमी है तो उसे साफ बताइए। शायद उस वक्त सेल ना हो लेकिन आप उस कस्टमर का दिल जीत लेंगे जो बाद में दस और लोगों को आपके पास लेकर आएगा।

भरोसा एक ऐसा इन्वेस्टमेंट है जिस पर कोई टैक्स नहीं लगता और इसका रिटर्न हमेशा छप्पर फाड़कर मिलता है। लेकिन अगर आप अभी भी सोच रहे हैं कि सबको एक ही लाठी से हांक कर आप अमीर बन जाएंगे तो अगला लेसन आपकी यह गलतफहमी भी दूर कर देगा।


लेसन ३ : हर कस्टमर की अपनी एक अलग दुनिया है

हमारे यहाँ एक बहुत पुरानी और घिसी पिटी कहावत है कि ग्राहक भगवान होता है। लेकिन सच तो यह है कि ज्यादातर बिजनेस ओनर्स के लिए हर ग्राहक बस एक नंबर होता है। वे सबको एक ही चश्मे से देखते हैं और सबको एक ही जैसा माल बेचने की कोशिश करते हैं। डॉन पेपर्स और मार्था रोजर्स कहते हैं कि यह आपकी सबसे बड़ी गलती है। हर कस्टमर की जरूरतें, उसकी पसंद और उसका बजट अलग होता है। अगर आप एक कॉलेज के स्टूडेंट को वही पिच दे रहे हैं जो आप एक रिटायर्ड अंकल को दे रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आप कुएं में पत्थर फेंक रहे हैं और आवाज आने का इंतजार कर रहे हैं।

मान लीजिए आप एक रेस्टोरेंट में जाते हैं और वेटर बिना आपसे पूछे ही आपके सामने कद्दू की सब्जी और करेले का जूस रख देता है क्योंकि उसके पास आज यही ज्यादा बना है। आप उसे गुस्से में देखते हैं और वह कहता है कि सर, सब यही खा रहे हैं तो आप भी यही खाइए। कैसा लगेगा आपको। यकीनन आप वहां से भाग खड़े होंगे। लेकिन असल जिंदगी में हम अपने कस्टमर्स के साथ यही करते हैं। हम उन्हें वह बेचने की कोशिश करते हैं जो हमारे पास है, ना कि वह जिसकी उन्हें जरूरत है। इसे कहते हैं कस्टमर के सिर पर जबरदस्ती टोपी पहनाना, भले ही उसका सिर छोटा हो या बड़ा।

सक्सेसफुल बिजनेस वही है जो अपने कस्टमर्स को अलग अलग कैटेगरी में बांटना जानता है। लेखक इसे 'कस्टमर डिफरेंशिएशन' कहते हैं। आपको यह पता होना चाहिए कि आपका कौन सा कस्टमर गोल्ड है और कौन सा बस विंडो शॉपिंग करने आया है। जो कस्टमर आपको सालों से बिजनेस दे रहा है, उसे वही ट्रीटमेंट देना जो कल पहली बार आए इंसान को दे रहे हैं, यह उस वफादार कस्टमर की बेइज्जती है। यह वैसा ही है जैसे आप अपनी शादी की एनिवर्सरी पर अपनी पत्नी को वही गिफ्ट दें जो आपने ऑफिस के सीक्रेट सांता में अपने कलीग को दिया था। इसके बाद जो आपका हाल होगा, वही आपके बिजनेस का भी होगा।

जब आप डेटा और फीडबैक का सही इस्तेमाल करते हैं, तो आप हर कस्टमर को एक पर्सनलाइज्ड एक्सपीरियंस दे सकते हैं। आज के दौर में लोग सामान नहीं खरीदते, वे अनुभव खरीदते हैं। उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि यह ब्रांड मुझे समझता है। अगर आप उनके जन्मदिन पर उन्हें सिर्फ एक ऑटोमेटेड मैसेज भेजने के बजाय उनकी पसंद का कोई छोटा सा डिस्काउंट कूपन भेज दें, तो वे आपके फैन बन जाएंगे। छोटे छोटे बदलाव ही बड़े प्रॉफिट की नींव रखते हैं।

तो दोस्तों, रिटर्न ऑन कस्टमर कोई रॉकेट साइंस नहीं है। यह सिर्फ इंसानी रिश्तों को बिजनेस में उतारने की कला है। अगर आप अपने कस्टमर की वैल्यू समझेंगे, उन पर भरोसा करेंगे और उन्हें एक यूनिक इंसान की तरह ट्रीट करेंगे, तो आपका बिजनेस सफलता की उन ऊंचाइयों को छुएगा जिसे आपके कॉम्पिटिटर सिर्फ सपनों में ही देख पाएंगे। अब वक्त है एक्शन लेने का और अपने बिजनेस के हर कस्टमर को एक एसेट की तरह देखने का।


अगर आपको आज का यह आर्टिकल पसंद आया और आप अपने बिजनेस को लेकर सीरियस हैं, तो नीचे कमेंट में 'ग्रोथ' जरूर लिखें। इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपना नया स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं ताकि वे ये गलतियां ना करें। याद रखिए, कस्टमर बढ़ेगा तभी तो इंडिया बढ़ेगा।

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