अगर आपको लगता है कि पच्चीस की उम्र में करोड़पति न बन पाना आपकी सबसे बड़ी हार है तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी के सही रास्ते पर हैं। अपनी कीमती जवानी फालतू के खर्चों में उड़ाकर अब रिटायरमेंट के नाम पर रोना धोना बंद कीजिये क्योंकि आपकी यह कंगाली वाली आदतें ही आपको बुढ़ापे में भी काम करने पर मजबूर करेंगी।
डेविड बाख की यह मास्टरपीस हमें बताती है कि देर से शुरुआत करने का मतलब गेम हारना नहीं है। आज हम उन तीन पावरफुल लेसन्स के बारे में बात करेंगे जो आपकी डूबती हुई फाइनेंशियल नैया को पार लगा सकते हैं।
लेसन १ : द लट्टे फैक्टर और ऑटोमैटिक सेविंग्स
ज्यादातर लोग यही सोचते रह जाते हैं कि जब छप्पर फाड़कर पैसा आएगा तब वह अमीर बनेंगे। लेकिन सच तो यह है कि वह छप्पर कभी नहीं फटता और आप फटे हाल ही रह जाते हैं। डेविड बाख कहते हैं कि आपकी अमीरी का रास्ता आपकी बड़ी सैलरी में नहीं बल्कि उन छोटे छोटे खर्चों में छुपा है जिन्हें आप इग्नोर कर देते हैं। इसे लेखक ने द लट्टे फैक्टर कहा है। अब इंडिया में हम लट्टे तो कम ही पीते हैं लेकिन हमारे पास अपना खुद का चाय सुट्टा और नेटफ्लिक्स वाला वर्जन तैयार है।
जरा सोचिए आप ऑफिस के नीचे हर रोज जो दो कप कड़क चाय और साथ में वह बिना बात का समोसा पेलते हैं वह आपको कितना महंगा पड़ रहा है। आपको लगता होगा कि दस बीस रुपये से क्या ही होगा। लेकिन यही वह छोटी दीमक है जो आपकी वेल्थ को धीरे धीरे चाट रही है। अगर आप दिन के केवल सौ रुपये भी फालतू की चीजों पर खर्च करना बंद कर दें तो महीने के तीन हजार बचते हैं। सुनने में यह रकम शायद आपके एक संडे ब्रंच के बिल से भी कम लगे लेकिन यही असली गेम है।
डेविड बाख का कहना है कि आप चाहे कितनी भी देर से शुरुआत करें अगर आप इन छोटे खर्चों को पकड़ लें तो आप कमाल कर सकते हैं। लेकिन यहाँ एक प्रॉब्लम है। इंसान का दिमाग बड़ा ही लालची और आलसी होता है। जैसे ही सैलरी अकाउंट में आती है हमारा अंदर का रईस जाग जाता है। हमें लगता है कि नया फोन या वह महंगी घड़ी नहीं ली तो समाज हमें जीने नहीं देगा। इसलिए लेखक एक मास्टर प्लान देते हैं और वह है ऑटोमैटिक सेविंग्स।
इसका मतलब है कि आपको अपनी इच्छाशक्ति पर भरोसा बिल्कुल नहीं करना है। अपनी मेहनत की कमाई को खुद से बचाने का सबसे बढ़िया तरीका यह है कि उसे अपने हाथ लगने ही न दें। अपने बैंक को बोलिये कि जैसे ही सैलरी आए उसमें से एक हिस्सा सीधा इन्वेस्टमेंट वाले अकाउंट में चला जाए। जब पैसा आंखों के सामने होगा ही नहीं तो उसे खर्च करने का ख्याल भी नहीं आएगा। यह वैसा ही है जैसे आप डाइटिंग पर हों और घर में समोसे ही न मंगाएं। जब दिखेगा नहीं तो भूख भी नहीं लगेगी।
अमीर बनने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप अपनी जिंदगी को नरक बना लें या कंजूस बन जाएं। इसका मतलब बस इतना है कि आप अपनी फिजूलखर्ची को एक सिस्टम में डाल दें। जब आपका पैसा आपके सो जाने के बाद भी खुद काम पर लगा रहता है तब जाकर आप असल में वेल्थ क्रिएट करते हैं। देर से शुरुआत करने वालों के लिए यह पहला कदम सबसे जरूरी है क्योंकि अब आपके पास वक्त बर्बाद करने की लक्जरी नहीं बची है। अगर अब भी आप इसी इंतजार में बैठे हैं कि कोई चमत्कार होगा तो यकीन मानिए वह चमत्कार केवल आपके बैंक बैलेंस का जीरो होना ही होगा।
लेसन २ : पे योरसेल्फ फर्स्ट
ज्यादातर लोगों का बजट बनाने का तरीका इतना महान होता है कि उसे देखकर इकोनॉमिक्स के टीचर सुसाइड कर लें। हम क्या करते हैं? पहले सैलरी आती है फिर रेंट देते हैं फिर बिजली का बिल भरते हैं और फिर ईएमआई के गड्ढे भरते हैं। अंत में अगर कुछ बच गया तो सोचते हैं कि चलो अब इसे सेव कर लेते हैं। लेकिन सच तो यह है कि महीने के आखिर तक सिर्फ खाली बटुआ और ढेर सारी उधारी ही बचती है। डेविड बाख कहते हैं कि अगर आप अमीर बनना चाहते हैं तो आपको अपनी लिस्ट में सबसे ऊपर खुद को रखना होगा। इसे ही कहते हैं पे योरसेल्फ फर्स्ट।
अब आप कहेंगे कि भाई मैं खुद को ही तो पे कर रहा हूं आखिर मेहनत तो मैं ही कर रहा हूं। लेकिन असल में आप मकान मालिक को अमीर बना रहे हैं आप फोन कंपनी को पैसा दे रहे हैं और आप उस रेस्टोरेंट वाले की जेब भर रहे हैं जहाँ आपने कल रात खाना खाया था। आपने अपने भविष्य वाले वर्जन के लिए क्या बचा कर रखा? कुछ भी नहीं। पे योरसेल्फ फर्स्ट का सीधा मतलब यह है कि आपकी कमाई का पहला एक घंटा या आपकी सैलरी का पहला दस परसेंट हिस्सा सीधे आपके रिटायरमेंट अकाउंट या इन्वेस्टमेंट में जाना चाहिए। और यह काम बिल भरने से भी पहले होना चाहिए।
मान लीजिए आप एक पार्टी में गए और वहां शानदार बफे लगा है। आप लाइन में सबसे पीछे खड़े हैं। जब तक आपकी बारी आती है तब तक सारा पनीर खत्म हो चुका होता है और आपके हिस्से में सिर्फ सादी ग्रेवी और ठंडी रोटियां आती हैं। आपकी लाइफ के साथ भी यही हो रहा है। आप अपनी कमाई की लाइन में सबसे पीछे खड़े हैं। अगर आप देर से शुरुआत कर रहे हैं तो आपको लाइन तोड़कर सबसे आगे आना होगा।
यहाँ बहुत से लोग बहाना बनाते हैं कि मेरी तो सैलरी ही इतनी कम है कि गुजारा ही मुश्किल से होता है। यह सिर्फ एक दिमागी वहम है। अगर कल को सरकार आपका टैक्स पांच परसेंट बढ़ा दे तो क्या आप जीना छोड़ देंगे? नहीं न। आप तब भी मैनेज कर लेंगे। बस इसी तरह आपको यह मान लेना है कि आपकी सैलरी असल में उतनी है ही नहीं जितनी बैंक में आती है। जो हिस्सा आपने खुद को पे किया है वह अब आपका है ही नहीं वह आपके अमीर होने का टिकट है।
डेविड बाख का यह नियम उन लोगों के लिए वरदान है जो चालीस की उम्र में पहुँच कर अचानक जागते हैं और सोचते हैं कि अब क्या होगा। अगर आप अपनी इनकम का बड़ा हिस्सा तुरंत इन्वेस्ट करना शुरू कर देते हैं तो आप उस समय की भरपाई कर सकते हैं जो आपने फालतू की पार्टियों और गैजेट्स में गवां दिया था। याद रखिये अगर आप आज खुद को पे नहीं करेंगे तो कल आपको दूसरों के नीचे काम करके उन्हें पे करना पड़ेगा। चॉइस आपकी है कि आप अपनी कमाई के बफे में सबसे पहले पनीर उठाना चाहते हैं या फिर बची हुई सूखी रोटियां।
लेसन ३ : द पावर ऑफ कंपाउंडिंग फॉर लेट स्टार्टर्स
अगर आप यह सोचकर चादर तानकर सो गए हैं कि अब तो बहुत देर हो चुकी है और अमीर बनना आपके बस की बात नहीं तो जरा अपनी आंखें खोलिए। डेविड बाख कहते हैं कि समय निकल गया है इसका मतलब यह नहीं कि रेस खत्म हो गई है। बस अब आपको अपनी गाड़ी का गियर बदलने की जरूरत है। यहाँ काम आता है कंपाउंडिंग का जादू जिसे दुनिया का आठवां अजूबा कहा जाता है। लेकिन लेट स्टार्टर्स के लिए यह जादू तभी काम करता है जब आप अपनी इन्वेस्टमेंट की स्पीड बढ़ा देते हैं और सही जगह पैसा लगाते हैं।
मान लीजिये आप और आपका दोस्त एक ही बस स्टॉप पर खड़े हैं। आपका दोस्त पंद्रह मिनट पहले वाली बस पकड़कर निकल गया और आप अभी भी वहीं खड़े होकर अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। अब आपके पास दो ही रास्ते हैं। या तो वहीं खड़े होकर रोते रहिये या फिर एक तेज रफ्तार वाली टैक्सी पकड़िये जो आपको उस बस से भी आगे निकाल दे। फाइनेंस की दुनिया में वह टैक्सी है हाई रिटर्न वाले एसेट्स और ज्यादा बड़ी इन्वेस्टमेंट राशि। जो लोग बीस साल की उम्र में शुरू करते हैं वह अगर छोटा अमाउंट भी डालें तो चलता है। लेकिन अगर आप तीस या चालीस में शुरू कर रहे हैं तो आपको अपनी सेविंग्स का साइज बढ़ाना होगा।
अक्सर लोग डर के मारे अपना पैसा सेविंग्स अकाउंट में पड़ा रहने देते हैं जहाँ उसे महंगाई का दीमक धीरे धीरे खा जाता है। यह वैसा ही है जैसे आप अपने पैसे को तिजोरी में बंद करके रख दें और उम्मीद करें कि वह वहां बच्चे पैदा करेगा। पैसा तभी बढ़ता है जब वह बाहर जाकर काम पर लगता है। कंपाउंडिंग का असली मजा तब आता है जब आपके पैसे पर मिलने वाला इंटरेस्ट भी इंटरेस्ट कमाने लगता है। देर से शुरू करने वालों को कंपाउंडिंग के इस पहिये को तेजी से घुमाना पड़ता है। इसके लिए आपको इंडेक्स फंड्स या म्यूचुअल फंड्स जैसे टूल्स का सहारा लेना चाहिए जो लॉन्ग टर्म में इन्फ्लेशन को मात दे सकें।
यहाँ सबसे बड़ी रुकावट आपका अपना डर और प्रोक्रेस्टिनेशन यानी टालने की आदत है। हम सोचते हैं कि चलो अगले साल से पक्का शुरू करेंगे। लेकिन वह अगला साल कभी नहीं आता। याद रखिये कंपाउंडिंग में सबसे ज्यादा वैल्यू समय की होती है। अगर आपने आज भी शुरुआत नहीं की तो कल का दिन आज से भी ज्यादा महंगा पड़ेगा। अमीर बनने का सबसे अच्छा समय कल था और दूसरा सबसे अच्छा समय आज है।
अपनी जिंदगी के इस आखिरी मौके को हाथ से मत जाने दीजिये। डेविड बाख का यह नो फेल प्लान तभी फेल होता है जब आप इसे शुरू ही नहीं करते। अपनी पुरानी गलतियों का बोझ उतार कर फेंक दीजिये और आज से ही अपनी वेल्थ की ईंट रखना शुरू कीजिये। जब आप अपनी मेहनत और कंपाउंडिंग की ताकत को मिला देते हैं तो अमीर बनना कोई सपना नहीं बल्कि एक हकीकत बन जाता है। अब फैसला आपके हाथ में है कि आप एक पछतावे वाली जिंदगी जीना चाहते हैं या फिर एक ऐसा बुढ़ापा जहाँ आपको पैसों के लिए किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।
तो दोस्तों, अब बहाने बनाना बंद कीजिये और आज ही अपने भविष्य के लिए पहला कदम उठाइए। अपनी फिजूलखर्ची वाली लिस्ट बनाइये और उसे अपनी इन्वेस्टमेंट की किश्त में बदल दीजिये। याद रखिये देर से जागना बुरा नहीं है लेकिन जागने के बाद भी फिर से सो जाना आपकी सबसे बड़ी बेवकूफी होगी। आज ही कमेंट्स में लिखिये कि आप अपना लट्टे फैक्टर कहाँ से कम करने वाले हैं और इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो हमेशा कहता है कि अब तो बहुत देर हो गई है। आपकी फाइनेंशियल आजादी की शुरुआत इसी पल से होती है।
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