Sales Growth (Hindi)


अगर आपको लगता है कि सिर्फ चिल्लाने और डिस्काउंट देने से सेल्स बढ़ती है तो मुबारक हो आप अपनी कंपनी को डुबोने की रेस में सबसे आगे हैं। बिना सही स्ट्रेटेजी के सेल्स बढ़ाना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के गाड़ी को धक्का मारना। थक आप जाएंगे और बिजनेस वही खड़ा रहेगा।

क्या आप भी पुराने घिसे पिटे तरीके अपनाकर अपने कॉम्पिटिटर्स को आगे बढ़ते देख जल रहे हैं। अब जलना छोड़िए और सेल्स ग्रोथ के असली सीक्रेट्स को समझिए जो दुनिया के टॉप लीडर्स फॉलो करते हैं। चलिए जानते हैं वो ३ पावरफुल लेसन जो आपकी सेल्स की गेम बदल देंगे।


लेसन १ : फ्यूचर ट्रेंड्स को पहचानें और वहीं अपना दांव लगाएं

ज्यादातर सेल्स टीमें उस मछली को पकड़ने की कोशिश करती हैं जो कल मर चुकी थी। मतलब वो उन्हीं पुराने मार्केट्स और पुराने कस्टमर्स के पीछे भागते रहते हैं जो अब बोर हो चुके हैं। सेल्स ग्रोथ बुक हमें सिखाती है कि अगर आपको सच में ग्रो करना है तो आपको वहां होना चाहिए जहाँ दुनिया जा रही है न कि वहां जहाँ दुनिया थी। इसे एक सिंपल उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप आज के जमाने में नोकिया के कीपैड वाले फोन बेचने की जिद्द पकड़ लें तो क्या होगा। लोग आपको पागल समझेंगे और आपकी दुकान पर ताला लग जाएगा। यही हाल उन बिजनेस का होता है जो मार्केट के बदलते मिजाज को नहीं समझते।

दुनिया के टॉप सेल्स लीडर्स कभी भी कल की सेल्स रिपोर्ट देखकर खुश नहीं होते बल्कि वो अगले १० साल का रोडमैप तैयार करते हैं। वो देखते हैं कि कौन से नए शहर बस रहे हैं या कौन सी नई टेक्नोलॉजी लोगों की जरूरत बनने वाली है। अगर आप आज भी उसी मोहल्ले में सेल्स बढ़ाना चाहते हैं जहाँ हर दूसरी दुकान आपके जैसी है तो आप सिर्फ गला काट कॉम्पिटिशन में फंसकर रह जाएंगे। वहां सेल्स नहीं बढ़ेगी बल्कि सिर्फ आपका बीपी बढ़ेगा। असली खिलाड़ी वो है जो देखता है कि आने वाले समय में डिमांड कहाँ शिफ्ट हो रही है।

मान लीजिए एक बंदा है राहुल जो पुरानी स्टाइल की साड़ियां बेचता है। राहुल के पास बहुत एक्सपीरियंस है लेकिन उसकी सेल्स गिर रही है। क्यों। क्योंकि राहुल की टारगेट ऑडियंस अब इन्स्टाग्राम और डिजिटल फैशन की तरफ मुड़ गई है। अब राहुल अगर वही पुरानी घिसी पिटी बातों से सेल्स बढ़ाने की कोशिश करेगा तो वो सिर्फ अपना टाइम बर्बाद करेगा। वहीं उसका पड़ोसी समीर यह समझ जाता है कि अब लोग ऑनलाइन कस्टमाइज्ड ड्रेस पसंद कर रहे हैं। समीर अपनी स्ट्रेटेजी बदलता है और वहां पहुंच जाता है जहाँ कस्टमर का ध्यान है। समीर को सेल्स के लिए चीखना नहीं पड़ता क्योंकि उसने ट्रेंड को पकड़ लिया है।

सेल्स में सफल होने का मतलब यह नहीं है कि आप कितने अच्छे सेल्समैन हैं बल्कि यह है कि आप सही जगह पर खड़े हैं या नहीं। अगर आप रेगिस्तान में गरम चाय बेचेंगे तो आप कितने भी बड़े सेल्स एक्सपर्ट क्यों न हों आपकी सेल्स जीरो ही रहेगी। बुक कहती है कि अपनी ग्रोथ का कम से कम ५० परसेंट हिस्सा उन मार्केट्स से निकालिए जो अभी नए हैं और तेजी से बढ़ रहे हैं। जो लोग ट्रेंड के पीछे भागते हैं वो हमेशा थक जाते हैं लेकिन जो ट्रेंड के आगे चलते हैं पैसा उनके पीछे भागता है।

अपनी टीम को सिर्फ यह मत सिखाइये कि बेचना कैसे है बल्कि उन्हें यह भी सिखाइये कि देखना कैसे है। जब आप मार्केट के माइक्रो ट्रेंड्स को समझना शुरू कर देते हैं तब आपको समझ आता है कि आपकी असली कमाई कहाँ छुपी है। पुराने ढर्रे पर चलकर आप सिर्फ सर्वाइव कर सकते हैं लेकिन थॉमस बॉमगार्टनर और हुमायूं हातामी की यह रिसर्च कहती है कि असली ग्रोथ के लिए आपको अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर फ्यूचर में झांकना ही पड़ेगा। वरना इतिहास गवाह है कि जो समय के साथ नहीं बदला समय ने उसे मिटा दिया। अब चॉइस आपकी है कि आपको बदलते वक्त का लीडर बनना है या गुजरे हुए कल की एक याद।


लेसन २ : डेटा की शक्ति को पहचानें और डिजिटल बाजीगर बनें

अगर आपको आज भी लगता है कि सेल्स करने के लिए बस आपकी मीठी बातें और एक अच्छी मुस्कान काफी है तो शायद आप किसी पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म में जी रहे हैं। आज के दौर में कस्टमर आपसे ज्यादा स्मार्ट है। उसे पता है कि आप उसे क्या बेचने वाले हैं और उसका दाम क्या है। सेल्स ग्रोथ बुक का दूसरा सबसे बड़ा लेसन यह है कि बिना डेटा के आप सिर्फ एक अंधे आदमी की तरह अंधेरे कमरे में काली बिल्ली ढूंढ रहे हैं जो वहां है ही नहीं। आज की डेट में डेटा ही नया पेट्रोल है और अगर आपकी सेल्स गाड़ी में यह नहीं है तो आप बहुत जल्द रास्ते के किनारे खड़े नजर आएंगे।

सोचिए एक सेल्समैन आपके घर आता है और आपको गंजा होने की दवा बेचने की कोशिश करता है जबकि आपके सिर पर घने बाल हैं। आप उसे देखते ही दरवाजा बंद कर लेंगे और मन ही मन उसे गालियां देंगे। यहाँ उस सेल्समैन की बातों में कोई कमी नहीं थी कमी थी उसके डेटा में। उसने यह रिसर्च ही नहीं की कि उसे किसके पास जाना चाहिए। यही गलती आज के बहुत से इंडियन स्टार्टअप्स और बिजनेसेस कर रहे हैं। वो हर किसी को हर चीज बेचने की कोशिश करते हैं और फिर रोते हैं कि लोग भाव नहीं दे रहे। भाई साहब जब आप बिना निशाने के तीर चलाएंगे तो वो हवा में ही जाएगा न।

डिजिटल टूल्स का मतलब सिर्फ फेसबुक पर फोटो डालना नहीं है। इसका मतलब है यह समझना कि आपका कस्टमर रात को क्या सर्च कर रहा है और उसे किस चीज की तकलीफ है। टॉप सेल्स लीडर्स अब गनशॉट की जगह स्नाइपर वाली अप्रोच रखते हैं। वो जानते हैं कि उनका आइडियल कस्टमर कौन है उसकी उम्र क्या है और उसे महीने की किस तारीख को शॉपिंग करना पसंद है। जब आपके पास ऐसा सॉलिड डेटा होता है तो आप सेल्स नहीं करते बल्कि आप कस्टमर की प्रॉब्लम सॉल्व करते हैं। और यकीन मानिए जब आप किसी की प्रॉब्लम सॉल्व करते हैं तो वो खुद अपनी जेब खाली करने को तैयार रहता है।

मान लीजिए आपकी एक कपड़े की दुकान है। एक तरफ आप अखबार में पंपलेट बंटवाते हैं जो आधे से ज्यादा लोग बिना पढ़े रद्दी में डाल देते हैं। दूसरी तरफ आप डिजिटल डेटा का इस्तेमाल करके सिर्फ उन लोगों को अपना विज्ञापन दिखाते हैं जिन्होंने पिछले हफ्ते शादी की शॉपिंग के बारे में गूगल किया है। अब आप खुद सोचिए कि किसके पास ज्यादा ग्राहक आएंगे। जाहिर है डेटा वाले के पास। इसे कहते हैं स्मार्ट सेल्स। इसमें मेहनत कम और मुनाफा ज्यादा होता है। पुराने जमाने के सेल्समैन गधों की तरह मेहनत करते थे लेकिन आज के डिजिटल सेल्समैन चीते की तरह सही मौके का इंतजार करते हैं और सटीक वार करते हैं।

बुक हमें यह भी सिखाती है कि डेटा का मतलब सिर्फ नंबर्स की एक्सेल शीट नहीं है। यह एक जरिया है अपने कस्टमर के साथ रिश्ता बनाने का। जब आप डेटा की मदद से उसे उसकी पसंद की चीज सही समय पर ऑफर करते हैं तो उसे लगता है कि आप उसका मन पढ़ रहे हैं। यही वो जादू है जो एक नॉर्मल ब्रांड को एक लव ब्रांड बना देता है। अगर आप आज भी पुरानी डायरी में कस्टमर के नाम लिख रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि आपकी सेल्स करोड़ों में पहुंच जाएगी तो आपको अपनी सोच पर थोड़ा और काम करने की जरूरत है। डिजिटल दुनिया की इस रेस में डेटा ही आपका सबसे बड़ा हथियार है और अगर आपने इसे चलाना नहीं सीखा तो कॉम्पिटिशन आपको कच्चा चबा जाएगा।


लेसन ३ : सेल्स ऑपरेशंस को धार दें और अपनी टीम को शेर बनाएं

अगर आप एक ऐसी टीम के साथ जंग जीतने निकले हैं जिसे तलवार पकड़ना भी नहीं आता तो हार के लिए तैयार रहिये। सेल्स ग्रोथ बुक का तीसरा लेसन सीधा आपके ईगो पर चोट करता है। लेखक कहते हैं कि सेल्स बढ़ना कोई इत्तेफाक नहीं है बल्कि एक साइंस है। बहुत से बॉस अपनी सेल्स टीम को सुबह नौ बजे मार्केट में धकेल देते हैं और शाम को पूछते हैं कि भाई आर्डर क्यों नहीं आया। अरे भाई जब आपने उन्हें सही हथियार और ट्रेनिंग ही नहीं दी तो वो खाली हाथ ही लौटेंगे न। इसे एक उदाहरण से देखिए। मान लीजिए आपने एक बहुत महंगी स्पोर्ट्स कार खरीदी लेकिन उसका इंजन जाम है और टायर की हवा निकली हुई है। अब आप चाहे कितने भी बड़े ड्राइवर क्यों न हों वो कार रेस नहीं जीत सकती। आपकी सेल्स टीम भी उसी कार की तरह है।

सेल्स ऑपरेशंस का मतलब है वो सारा तामझाम जो पीछे से सेल्समैन को सपोर्ट करता है। इसमें उनकी ट्रेनिंग, उनके पास मौजूद सॉफ्टवेयर और सबसे जरूरी उनका हौसला शामिल है। टॉप लेवल की कंपनियां अपनी सेल्स टीम को केवल सेल्समैन नहीं बल्कि कंसल्टेंट बनाती हैं। वो उन्हें सिखाती हैं कि कस्टमर के सामने गिड़गिड़ाना नहीं है बल्कि अपनी वैल्यू दिखानी है। अगर आपकी टीम का आधा समय सिर्फ ऑफिस के फालतू फॉर्म भरने और रिपोर्ट बनाने में निकल जाता है तो यकीन मानिए वो खाक सेल्स करेंगे। एक प्रोफेशनल सेल्स टीम का मतलब है कि उन्हें पता हो कि आज किससे मिलना है, क्या बात करनी है और डील को क्लोज कैसे करना है। बाकी सारा फालतू काम ऑटोमेशन पर होना चाहिए।

एक सेल्स मैनेजर है मिस्टर खन्ना। खन्ना जी को लगता है कि अपनी टीम पर चिल्लाने से और उन्हें हर घंटे फोन करके परेशान करने से सेल्स बढ़ जाएगी। उनकी टीम फील्ड पर कम और खन्ना जी के फोन के डर में ज्यादा रहती है। नतीजा यह हुआ कि पूरी टीम फ्रस्ट्रेट हो गई और एक एक करके सबने नौकरी छोड़ दी। दूसरी तरफ है मिस्टर बजाज। उन्होंने अपनी टीम को बेस्ट सीआरएम टूल दिया और हर हफ्ते उन्हें नई सेल्स तकनीक सिखाई। बजाज की टीम को पता है कि कंपनी उनके साथ खड़ी है। उनकी टीम मार्केट में शिकार करने वाले शेरों की तरह घूमती है क्योंकि उनका बैकएंड यानी सेल्स ऑपरेशन सॉलिड है। अब आप खुद तय कीजिये कि आप खन्ना बनना चाहते हैं या बजाज।

अक्सर बिजनेस ओनर सोचते हैं कि सेल्स बढ़ाने के लिए बस और लोग भर्ती कर लो। लेकिन सच तो यह है कि १० गधों को साथ लेकर चलने से अच्छा है कि २ घोड़ों को पालें। सेल्स ऑपरेशंस का असली काम यही है कि वो आपकी टीम की एफिशिएंसी को बढ़ा दे। जब आपका प्रोसेस स्मूथ होता है तो सेल्स के नंबर अपने आप ऊपर जाने लगते हैं। सेल्स कोई कुश्ती का मैच नहीं है जहाँ सिर्फ ताकत काम आए यहाँ दिमाग और डिसिप्लिन की जरूरत होती है। बुक के अनुसार जो कंपनियां अपने सेल्स प्रोसेस को हर ६ महीने में रिफ्रेश करती हैं उनकी ग्रोथ दूसरों के मुकाबले ३ गुना ज्यादा होती है।

अंत में बात घूम फिरकर वही आती है कि अगर आप अपने लोगों में इन्वेस्ट नहीं करेंगे तो वो आपके बिजनेस में रिजल्ट इन्वेस्ट नहीं करेंगे। अपनी टीम को सिर्फ टार्गेट का पहाड़ा मत पढ़ाइए बल्कि उन्हें वो रास्ता दिखाइए जिस पर चलकर वो उस टार्गेट को अचीव कर सकें। जब आपके सेल्स ऑपरेशंस और आपकी टीम के बीच एक तालमेल बैठ जाता है तब आपकी कंपनी एक ऐसी मशीन बन जाती है जिसे रोकना नामुमकिन होता है। याद रखिये सेल्स कोई वन मैन शो नहीं है यह एक टीम गेम है और टीम तभी जीतती है जब उसका कैप्टन उन्हें सही रिसोर्स और सही दिशा देता है।


सेल्स बढ़ाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है बस अपनी सोच को थोड़ा अपडेट करने की जरूरत है। अगर आप आज भी वही पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं तो रुकिए और सोचिए कि आप कहाँ गलत जा रहे हैं। क्या आप कल के ट्रेंड्स देख पा रहे हैं। क्या आपके पास डेटा की पावर है। या फिर आपकी टीम बिना धार वाली कुल्हाड़ी से पेड़ काटने की कोशिश कर रही है। आज ही इनमें से किसी एक लेसन को अपने बिजनेस में लागू कीजिये और फर्क देखिये। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो सेल्स बढ़ाने के लिए रात दिन एक कर रहा है पर उसे रिजल्ट नहीं मिल रहे। चलिए साथ मिलकर ग्रो करते हैं।

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