How Will You Measure Your Life? (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो ऑफिस की कुर्सी पर चिपककर करोड़ों कमाने का सपना देखते हैं और घर पर बीवी बच्चों को शक्ल तक नहीं दिखाते। बधाई हो आप अपनी लाइफ को पूरी तरह बर्बाद करने के एकदम सही रास्ते पर चल रहे हैं। सच तो यह है कि बिना सही प्लान के आप सिर्फ एक थके हुए अमीर इंसान बनेंगे जिसके पास पैसे तो होंगे पर उन पैसों को खर्च करने के लिए कोई अपने वाला नहीं होगा।

इस आर्टिकल में हम क्लेटन क्रिस्टेंसन की बेहतरीन किताब हाउ विल यू मेजर योर लाइफ के उन ३ सीक्रेट लेसन के बारे में बात करेंगे जो आपके करियर और पर्सनल लाइफ के बीच का बैलेंस एकदम परफेक्ट बना देंगे।


लेसन १ : करियर की असली ख़ुशी और मोटिवेशन का सही मतलब

हमारे यहाँ एक बहुत बड़ी गलतफहमी पाली जाती है कि जिस दिन सैलरी अकाउंट में मोटा पैसा गिरेगा उस दिन लाइफ सेट हो जाएगी। हम सब उस गधे की तरह दौड़ रहे हैं जिसके सामने गाजर लटका दी गई है और हमें लगता है कि बस वो गाजर मिल जाए तो जन्नत मिल जाएगी। क्लेटन क्रिस्टेंसन कहते हैं कि असल में दुनिया दो तरह के फैक्टर्स पर चलती है। पहले होते हैं हाइजीन फैक्टर्स जैसे आपकी सैलरी आपका ऑफिस का केबिन और वो चमचमाती ऑफिस की कुर्सी। अगर ये चीजें कम हों तो आपको चिढ़ होने लगती है गुस्सा आता है और आप बॉस को मन ही मन गालियां देते हैं। लेकिन मजे की बात सुनिए। अगर आपकी सैलरी बढ़ा दी जाए या आपको बढ़िया एसी वाला कमरा दे दिया जाए तो इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि आप अपने काम से प्यार करने लगेंगे। आप बस शिकायत करना बंद कर देंगे।

असली खेल तो दूसरे फैक्टर में है जिसे मोटिवेटर्स कहते हैं। इसमें आता है चैलेंजिंग काम कुछ नया सीखने की भूख और यह अहसास कि आप जो कर रहे हैं उसका कोई मतलब है। अब मान लीजिए आप एक ऐसी कंपनी में हैं जहाँ आपको हर महीने दो लाख रुपये मिलते हैं लेकिन आपका काम बस एक्सेल शीट में डेटा भरना है जिसे कोई नहीं देखता। यकीन मानिए तीन महीने बाद आप उस दो लाख की सैलरी के बावजूद दुनिया के सबसे दुखी इंसान होंगे। आप सुबह उठकर ऑफिस जाने के नाम पर ऐसे मुंह बनाएंगे जैसे कोई आपको काला पानी की सजा सुना रहा हो। वहीँ दूसरी तरफ अगर आप किसी ऐसे स्टार्टअप में हैं जहाँ पैसे थोड़े कम हैं पर आपको हर दिन कुछ नया और तूफानी करने को मिल रहा है तो आप थके होने के बावजूद अगले दिन के लिए एक्साइटेड रहेंगे।

हम अक्सर अपनी लाइफ की स्ट्रेटजी उन चीजों पर बना लेते हैं जो हमें थोड़े समय के लिए ख़ुशी देती हैं पर लंबे समय में हमें खोखला कर देती हैं। आप अपने करियर को ऐसे मापते हैं कि इस साल कितना इंक्रीमेंट हुआ या डेजिग्नेशन क्या मिला। पर क्या आपने कभी खुद से पूछा कि जो काम आप दिन के दस घंटे कर रहे हैं क्या वो आपको अंदर से बेहतर इंसान बना रहा है। अगर आप सिर्फ ईएमआई भरने के लिए जी रहे हैं तो आप एक प्रोफेशनल नहीं बल्कि एक हाई पेड मज़दूर हैं। लोग अक्सर कहते हैं कि भाई अभी मेहनत कर ले बाद में एन्जॉय करेंगे। यह बाद में कभी नहीं आता। अगर आपको अपने काम में आज मजा नहीं आ रहा तो कल भी नहीं आएगा। अपने मोटिवेशन को पहचानिए वरना आप उस सोने के पिंजरे में बंद रहेंगे जहाँ दाना तो बढ़िया मिलता है पर उड़ने की आजादी छीन ली जाती है।

करियर में सफलता का मतलब सिर्फ बैंक बैलेंस बढ़ाना नहीं बल्कि अपनी काबिलियत को सही जगह लगाना है। जब तक आप अपने काम में कोई बड़ा मकसद नहीं ढूंढेंगे तब तक आप सिर्फ एक मशीन की तरह काम करते रहेंगे जिसका स्विच किसी और के हाथ में है। यह सोचिए कि क्या आपका काम आपको वो सुकून दे रहा है जो एक अच्छी नींद के लिए ज़रूरी है।


लेसन २ : रिश्तों में इन्वेस्टमेंट और रिसोर्स एलोकेशन की गलती

हम इंडियंस की एक बड़ी बीमारी है। हम अपने करियर की प्रोग्रेस को तो ग्राफ बनाकर ट्रैक करते हैं पर घर वालों को लगता है कि वो तो टेकन फॉर ग्रांटेड हैं। क्लेटन क्रिस्टेंसन कहते हैं कि लाइफ में सबसे बड़ी ट्रेजेडी तब होती है जब एक इंसान प्रोफेशनल लाइफ के शिखर पर होता है पर उसके साथ सेलिब्रेट करने के लिए कोई अपना नहीं बचता। इसे ऐसे समझिए कि आप अपने ऑफिस के प्रोजेक्ट के लिए रात रात भर जाग सकते हैं क्योंकि वहां आपको तुरंत रिजल्ट और बॉस की शाबाशी दिखती है। लेकिन अपने बच्चे के साथ पार्क में खेलने या पार्टनर की बात सुनने में आपको कोई इमिडिएट फायदा नहीं दिखता। तो आप क्या करते हैं। आप अपना सारा कीमती समय और एनर्जी यानी अपने रिसोर्स उस जगह झोंक देते हैं जहाँ से जल्दी आउटपुट मिले।

यही सबसे बड़ा जाल है। रिश्ते किसी फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह नहीं होते कि एक बार पैसा डाल दिया और भूल गए। रिश्ते एक पौधे की तरह होते हैं जिन्हें हर दिन पानी देना पड़ता है। लोग अक्सर सोचते हैं कि अभी करियर बना लेता हूँ फिर परिवार को समय दूंगा। पर दोस्त तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। जब आपके बच्चे बड़े हो जाएंगे तब उन्हें आपकी सलाह की नहीं बल्कि उनके दोस्तों की ज़रूरत होगी। तब आप हाथ में आईफोन लेकर उनके पीछे भागेंगे पर उनके पास आपके लिए पांच मिनट भी नहीं होंगे। हम अक्सर उन लोगों को सबसे ज्यादा नजरअंदाज करते हैं जो हमें सबसे ज्यादा प्यार करते हैं क्योंकि हमें लगता है कि वो तो कहीं नहीं जा रहे।

सोचिए आप एक बहुत बड़ी डील क्लोज करके घर आए और आपको पता चला कि आपकी पत्नी या माता पिता को अब आपसे बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं है क्योंकि आपने सालों से उनके साथ कोई गहरा कनेक्शन ही नहीं बनाया। क्या उस डील के करोड़ों रुपये आपको वो सुकून दे पाएंगे। बिलकुल नहीं। लाइफ को मापने का असली पैमाना यह नहीं है कि आपने कितनी गाड़ियां खरीदीं बल्कि यह है कि आपके बुरे वक्त में कितने लोग बिना किसी स्वार्थ के आपके पास खड़े हैं। हम पैसे कमाने के चक्कर में उन लोगों को खो देते हैं जिनके लिए हम असल में पैसा कमा रहे थे। यह तो वही बात हुई कि आप रेस जीतने के चक्कर में इतने तेज भागे कि फिनिश लाइन पर पहुँचते ही आपको पता चला कि आप रास्ता ही भटक गए थे।

रिश्तों में इन्वेस्ट करने का मतलब सिर्फ महंगे तोहफे देना नहीं है। इसका मतलब है अपना समय देना अपनी अटेंशन देना और सामने वाले की भावनाओं को समझना। अगर आप ऑफिस की मीटिंग के बीच में अपनी मां का फोन काट देते हैं पर क्लाइंट की फालतू बातों को घंटों सुनते हैं तो आपकी प्रायोरिटी एकदम गलत है। अपनी एनर्जी को सही जगह एलोकेट करना सीखिए। ऑफिस का काम आपके बिना भी चल जाएगा पर आपका परिवार आपके बिना बिखर जाएगा। इसलिए अपने रिसोर्स को सिर्फ वहां मत लगाइए जहाँ पैसा मिलता है बल्कि वहां भी लगाइए जहाँ सुकून मिलता है।


लेसन ३ : मार्जिनल थिंकिंग का जाल और अपने उसूलों की हिफाजत

आपने अक्सर लोगों को यह कहते सुना होगा कि भाई बस यह एक बार कर लेते हैं अगली बार से पक्का नहीं करेंगे। चाहे वो ऑफिस में किसी को छोटा सा झूठ बोलना हो या फिर अपने काम में थोड़ी सी हेराफेरी करना। क्लेटन क्रिस्टेंसन इसे मार्जिनल थिंकिंग कहते हैं जो असल में एक मीठा जहर है। हमें लगता है कि सिर्फ एक बार नियम तोड़ने से क्या फर्क पड़ेगा। आखिर हम इंसान हैं और थोड़ी बहुत गलती तो चलती है। पर सच तो यह है कि अपने उसूलों को सौ परसेंट समय फॉलो करना बहुत आसान है बजाय इसके कि आप उन्हें निन्यानवे परसेंट समय फॉलो करें। जैसे ही आप उस एक परसेंट की खिड़की खोलते हैं आप उस ढलान पर खड़े हो जाते हैं जहाँ से वापस आना नामुमकिन है।

मान लीजिए आप अपनी हेल्थ को लेकर बहुत सीरियस हैं पर आपका दोस्त कहता है कि आज भाई का बर्थडे है तो बस एक गुलाब जामुन खा ले इससे क्या होगा। आप खा लेते हैं। अगले दिन कोई और बहाना मिल जाता है और धीरे धीरे वो एक बार वाली बात आपकी आदत बन जाती है। यही चीज हमारे करैक्टर के साथ होती है। जब आप पहली बार अपने सिद्धांतों से समझौता करते हैं तो आपको बहुत अजीब लगता है पर दूसरी बार वो आसान हो जाता है और तीसरी बार तक तो आपको अहसास भी नहीं होता कि आप कुछ गलत कर रहे हैं। हम अपनी लाइफ के बड़े फैसलों में तो बहुत ईमानदार बनते हैं पर छोटी छोटी चीजों में अपनी इमेज खो देते हैं।

दुनिया में कोई भी इंसान सुबह उठकर यह नहीं सोचता कि आज मैं अपनी लाइफ बर्बाद करूँगा या मैं एक बुरा इंसान बनूँगा। लोग धीरे धीरे छोटे छोटे समझौतों के जरिए वहां पहुँचते हैं। अगर आप खुद को आईने में देखकर यह नहीं कह सकते कि आप एक ईमानदार इंसान हैं तो आपकी सारी कामयाबी मिट्टी के बराबर है। आपकी डिग्रियां और आपके अवार्ड्स किसी काम के नहीं अगर आपका करैक्टर ही खोखला हो चुका है। याद रखिए कि आप जो भी छोटे काम करते हैं वो आपकी पहचान तय करते हैं। समाज क्या सोचेगा इससे ज्यादा ज़रूरी यह है कि आप अपने बारे में क्या सोचते हैं।

अंत में अपनी लाइफ को मापने का सबसे सही तरीका यह नहीं है कि आपने दुनिया को क्या दिखाया बल्कि यह है कि आपने उन लोगों की लाइफ में क्या बदलाव लाया जिनसे आप मिले। जब आप इस दुनिया से जाएंगे तो लोग यह याद नहीं रखेंगे कि आपके पास कौन सी कार थी बल्कि वो यह याद रखेंगे कि आपने उनके साथ कैसा बर्ताव किया और आप किन सिद्धांतों के साथ जिए। अपने उसूलों पर अडिग रहना ही असली मर्दानगी और असली सक्सेस है।


तो दोस्त अपनी लाइफ को मापना आज से ही शुरू कीजिए। क्या आप सिर्फ एक रेस का हिस्सा हैं या आप वाकई अपनी शर्तों पर जी रहे हैं। अपने करियर रिश्तों और उसूलों के बीच का बैलेंस आज ही बनाइये वरना कल बहुत देर हो जाएगी। अगर आपको लगता है कि इस आर्टिकल ने आपकी सोच में थोड़ा भी बदलाव किया है तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो सिर्फ काम के बोझ तले दबा जा रहा है। कमेंट में ज़रूर बताएं कि आपकी लाइफ का सबसे ज़रूरी लेसन क्या है।

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