Scale (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो खुद को बिजनेस का मालिक समझते हैं पर असल में आप अपने ही बिजनेस के सबसे सस्ते मजदूर बन चुके हैं। बिना आपके एक पत्ता भी नहीं हिलता और वेकेशन के नाम पर सिर्फ फोन पर क्लाइंट की गालियां सुन रहे होते हैं। मुबारक हो, आप तरक्की नहीं कर रहे, बस धीरे-धीरे जल रहे हैं।

आज हम जेफ हॉफमैन और डेविड फिंकेल की बुक स्केल की मदद से उन सीक्रेट्स को समझेंगे जो आपके बिजनेस को एक सिस्टम बनाएंगे। हम देखेंगे कि कैसे आप अपने काम से बाहर निकलकर अपनी लाइफ वापस पा सकते हैं और बिजनेस को दस गुना बढ़ा सकते हैं।


लेसन १ : सेल्फ एम्प्लॉयड से बिजनेस ओनर बनने का सफर

ज्यादातर भारतीय बिजनेसमैन को लगता है कि अगर वो दुकान पर नहीं बैठेंगे तो गल्ला चोरी हो जाएगा या क्लाइंट भाग जाएगा। आप सुबह आठ बजे शटर उठाते हैं और रात को दस बजे थके-हारे घर लौटते हैं। आपको लगता है कि आप बहुत बड़े बिजनेसमैन बन गए हैं। लेकिन सच तो यह है कि आपने बस खुद को एक ऐसी नौकरी पर रख लिया है जहाँ बॉस भी आप हैं और चपरासी भी आप। आप असल में बिजनेस ओनर नहीं बल्कि एक सेल्फ एम्प्लॉयड मजदूर हैं जिसे छुट्टी लेने के लिए भी खुद से ही मिन्नतें करनी पड़ती हैं।

सोचिए अगर आप एक महीने के लिए पहाड़ों पर घूमने चले जाएं और अपना फोन बंद कर दें। क्या आपका बिजनेस तब भी वैसे ही चलेगा जैसे अभी चल रहा है। अगर जवाब ना है तो भाई साहब आप बिजनेस नहीं चला रहे, बिजनेस आपको चला रहा है। स्केल बुक कहती है कि एक असली बिजनेस ओनर वह होता है जो बिजनेस के अंदर काम नहीं करता बल्कि बिजनेस पर काम करता है। मतलब आपका काम माल बेचना या बिल बनाना नहीं होना चाहिए बल्कि यह सोचना होना चाहिए कि माल बेचने वाले लोग और तरीके कैसे बेहतर किए जाएं।

मान लीजिए आपके पड़ोस में एक शर्मा जी की चाट की दुकान है। शर्मा जी खुद ही टिक्की तलते हैं, खुद ही चटनी डालते हैं और खुद ही पैसे गिनते हैं। अब शर्मा जी को लगता है कि उनके बिना स्वाद नहीं आएगा। यह उनकी सबसे बड़ी गलतफहमी है। इसी चक्कर में वो जिंदगी भर एक ही दुकान पर पसीना बहाते रह जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ हल्दीराम या मैकडोनाल्ड्स को देखिए। क्या आपने कभी उनके मालिक को काउंटर पर आलू छीलते देखा है। बिल्कुल नहीं। उन्होंने एक ऐसा सिस्टम बनाया है कि कोई भी आए स्वाद वही रहेगा।

जब तक आप अपने बिजनेस के हर छोटे काम में अपनी उंगली फंसाकर रखेंगे तब तक आप कभी बड़े नहीं हो पाएंगे। आप एक छोटे से कुएं के मेढक बनकर रह जाएंगे जिसे लगता है कि उसके बिना दुनिया रुक जाएगी। असलियत में आप अपने बिजनेस के विकास के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा हैं। आप जितने ज्यादा जरूरी बनते जाएंगे बिजनेस उतना ही छोटा होता जाएगा।

अगर आपको वाकई में स्केल करना है तो आपको अपनी ईगो को साइड में रखना होगा। यह सोचना बंद करिए कि आपके जैसा कोई दूसरा काम नहीं कर सकता। सच तो यह है कि लोग आपसे बेहतर काम कर सकते हैं बस आपको उन्हें सही गाइडेंस देनी होगी। जब आप खुद को ऑपरेशंस से अलग कर लेते हैं तब आपके पास वह खाली समय बचता है जिसमें आप नई स्ट्रेटजी बना सकें। वरना आप बस आग बुझाने वाले फायर फाइटर बने रहेंगे जो रोज एक नई मुसीबत को सुलझाने में अपनी जवानी बर्बाद कर रहा है।

असली आजादी तब है जब आप सो रहे हों और आपका पैसा और आपकी टीम आपके लिए काम कर रही हो। अगर आप अभी भी इस डर में जी रहे हैं कि आपके बिना सब बर्बाद हो जाएगा तो आपने बिजनेस नहीं बल्कि एक पिंजरा बनाया है। अब फैसला आपका है कि आप उस पिंजरे के अंदर ही रहना चाहते हैं या उसे एक उड़ता हुआ हवाई जहाज बनाना चाहते हैं।


लेसन २ : सिस्टम और प्रोसेस की ताकत

अभी हमने देखा कि आपको बिजनेस के अंदर काम करना बंद करना होगा। लेकिन सवाल यह आता है कि अगर आप काम नहीं करेंगे तो काम होगा कैसे। क्या सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दें। बिल्कुल नहीं। यहीं पर काम आता है सिस्टम। एक ऐसा मजबूत ढांचा जिसे आप एक बार बना दें और फिर वो अपने आप चलता रहे। हमारे देश में लोगों को लगता है कि सिस्टम का मतलब सिर्फ बड़े सॉफ्टवेयर या कंप्यूटर होते हैं। भाई साहब, सिस्टम का मतलब है हर उस काम को करने का एक तय तरीका जिसे कोई भी इंसान आसानी से दोहरा सके।

सोचिए आपके ऑफिस में एक बहुत टैलेंटेड लड़का है जिसका नाम है रमेश। रमेश को सब पता है कि क्लाइंट से कैसे बात करनी है और फाइल कहाँ रखनी है। एक दिन रमेश की शादी हो जाती है और वो दस दिन की छुट्टी पर चला जाता है। अब आपके ऑफिस में कोहराम मच गया है। आपको फाइल नहीं मिल रही, क्लाइंट नाराज हो रहे हैं और आप पागलों की तरह उसे फोन कर रहे हैं। यहाँ गलती रमेश की नहीं है, गलती आपकी है। आपने बिजनेस को रमेश पर टिकाया है, सिस्टम पर नहीं।

जब तक आपका बिजनेस लोगों के भरोसे चलेगा, तब तक आप हमेशा खतरे में रहेंगे। लोग बीमार पड़ते हैं, लोग नौकरी छोड़ते हैं और लोग गलतियां भी करते हैं। लेकिन एक सही प्रोसेस कभी बीमार नहीं पड़ता। आपको अपने बिजनेस के हर छोटे काम के लिए एक 'हाउ टू' गाइड बनानी होगी। चाहे वो फोन उठाने का तरीका हो या ईमेल का जवाब देने का। जब आप हर चीज को डॉक्यूमेंट कर देते हैं, तब कोई नया लड़का भी आकर उसी क्वालिटी का काम कर सकता है जो आपका सबसे पुराना स्टाफ करता था।

आपने देखा होगा कि गली के नुक्कड़ वाला हलवाई कभी अपनी रेसिपी किसी को नहीं बताता। उसे लगता है कि अगर उसने राज बता दिया तो उसकी वैल्यू खत्म हो जाएगी। नतीजा यह होता है कि वो पूरी उम्र उसी भट्टी के सामने पसीना बहाता है। दूसरी तरफ बड़ी कंपनियां जैसे डोमिनोज को देखिए। उनका पिज्जा बनाने का तरीका एक सिस्टम है। उन्हें दुनिया के सबसे बेस्ट शेफ की जरूरत नहीं है। वो किसी भी आम लड़के को ट्रेनिंग देकर दस मिनट में वही स्वाद वाला पिज्जा बनवा लेते हैं। क्योंकि उन्होंने हुनर को इंसान के दिमाग से निकालकर कागजों और मशीनों पर उतार दिया है।

आपको भी अपने बिजनेस में यही करना है। हर उस काम की लिस्ट बनाइए जो बार-बार होता है। उसे स्टेप बाय स्टेप लिख डालिए। शुरुआत में यह आपको बहुत बोरिंग और फालतू का काम लगेगा। आपको लगेगा कि इससे अच्छा तो मैं खुद ही काम निपटा लूं। लेकिन याद रखिए, आज का लगाया हुआ यह थोड़ा सा समय आपको भविष्य में हजारों घंटों की आजादी देगा। जब आप सिस्टम बना लेते हैं, तो आप एक मालिक से एक ऑपरेटर बन जाते हैं जो सिर्फ ऊपर से देखता है कि मशीन सही चल रही है या नहीं।

सिस्टम बनाने का मतलब यह भी है कि आप अपनी गलतियों से सीख रहे हैं। अगर एक बार कोई गलती हुई, तो उसे सिर्फ सुधारिए मत, बल्कि सिस्टम में ऐसा बदलाव करिए कि वो गलती दोबारा हो ही न सके। बिना सिस्टम के बिजनेस करना ऐसा है जैसे बिना स्टयरिंग के कार चलाना। आप कितनी भी रेस दे दें, आप कभी सही मंजिल पर नहीं पहुंचेंगे। इसलिए अपनी टीम को काम मत सौंपिए, उन्हें एक प्रोसेस सौंपिए। जब प्रोसेस मजबूत होगा, तो आपका बिजनेस एक ऐसी मशीन बन जाएगा जो आपके सोने के दौरान भी आपके लिए नोट छाप रही होगी।


लेसन ३ : हाई वैल्यू एक्टिविटीज पर फोकस करना

अब जब आपने सिस्टम बना लिया है, तो सवाल उठता है कि आप अपने बचे हुए समय का करेंगे क्या। बहुत से लोग खाली बैठते ही घबराने लगते हैं और फिर से वही छोटे-मोटे कामों में घुस जाते हैं जैसे ऑफिस की स्टेशनरी का हिसाब रखना या ये देखना कि पेंट का कलर कैसा होगा। भाई साहब, अगर आप दो करोड़ का बिजनेस करना चाहते हैं, तो आपको दो सौ रुपये वाले काम छोड़ने होंगे। स्केल बुक का तीसरा सबसे बड़ा लेसन यही है कि आपको अपनी 'हाई वैल्यू एक्टिविटीज' को पहचानना होगा और सारा ध्यान सिर्फ वहीं लगाना होगा।

जरा सोचिए, एक दिन में आपके पास भी चौबीस घंटे हैं और एलन मस्क के पास भी उतने ही हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि आप अपना आधा दिन ईमेल का जवाब देने या वेंडर से दस रुपये कम कराने में निकाल देते हैं। इसे कहते हैं 'लो वैल्यू वर्क'। यह काम आपको बिजी तो रखता है, पर अमीर नहीं बनाता। आपको यह समझना होगा कि आपके बिजनेस में वो कौन से २-३ काम हैं जिनसे सबसे ज्यादा पैसा और ग्रोथ आती है। हो सकता है वो नई पार्टनरशिप करना हो, बड़ी सेल्स क्लोज करना हो या नए प्रोडक्ट्स प्लान करना हो।

मान लीजिए आप एक बहुत बड़े क्रिकेट कोच हैं। आपका काम खिलाड़ियों को तकनीक सिखाना और मैच की स्ट्रेटजी बनाना है। लेकिन आप क्या कर रहे हैं। आप मैदान पर घास काट रहे हैं, पिच पर पानी डाल रहे हैं और खिलाड़ियों के जूते पॉलिश कर रहे हैं। अब आप बिजी तो बहुत हैं, पसीना भी खूब बह रहा है, लेकिन क्या आपकी टीम मैच जीतेगी। कभी नहीं। क्योंकि जो आपका असली काम था यानी 'स्ट्रेटजी बनाना', वो तो आपने किया ही नहीं। आप बस वो काम कर रहे हैं जो कोई भी माली या हेल्पर कर सकता था।

भारतीय बिजनेस ओनर्स अक्सर इसी जाल में फंसते हैं। उन्हें लगता है कि अगर वो हर चीज में दखल नहीं देंगे तो उनकी वैल्यू कम हो जाएगी। असल में आप अपनी वैल्यू तब बढ़ाते हैं जब आप उन कामों को डेलीगेट कर देते हैं जो आपकी जगह कोई और कर सकता है। आपको अपनी 'टाइम वैल्यू' कैलकुलेट करनी चाहिए। अगर आपके एक घंटे की कीमत हजार रुपये है, तो क्या आपको वो काम करना चाहिए जिसे कोई पांच सौ रुपये महीने वाला स्टाफ कर सके। बिल्कुल नहीं। हर बार जब आप कोई छोटा काम खुद करते हैं, तो आप अपने बिजनेस की ग्रोथ से चोरी कर रहे होते हैं।

हाई वैल्यू एक्टिविटीज पर फोकस करने का मतलब है कि आपको 'ना' कहना सीखना होगा। उन मीटिंग्स को ना कहिए जिनका कोई मतलब नहीं है। उन क्लाइंट्स को छोड़िए जो सिरदर्द ज्यादा देते हैं और मुनाफा कम। जब आप अपने समय को एक कीमती एसेट की तरह ट्रीट करेंगे, तभी दुनिया आपकी इज्जत करेगी। अपने बिजनेस के लिए एक विजनरी बनिए, न कि एक क्लर्क। जब आप ऊपर से बैठकर बड़े फैसले लेते हैं, तभी आपका बिजनेस असल मायने में स्केल होता है।

अंत में याद रखिए, बिजनेस बढ़ाना कोई जादू नहीं है, बल्कि यह एक चॉइस है। क्या आप वही पुराने घिसे-पिटे तरीके से काम करते रहना चाहते हैं या फिर एक ऐसा एम्पायर खड़ा करना चाहते हैं जो आपके बिना भी फले-फूले। स्केल बुक के ये लेसन सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि आज से ही लागू करने के लिए हैं। उठिए, अपनी कुर्सी छोड़िए और अपने बिजनेस को एक सिस्टम की तरह चलाना शुरू करिए। आपकी असली लाइफ आपका इंतजार कर रही है।


अगर आप आज भी अपने बिजनेस में एक मजदूर की तरह काम कर रहे हैं, तो रुकिए और सोचिए। क्या आप सच में ग्रो कर रहे हैं या बस अपनी लाइफ वेस्ट कर रहे हैं। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो दिन-रात काम में फंसे रहते हैं पर फिर भी आगे नहीं बढ़ पा रहे। नीचे कमेंट में बताएं कि आप अपने बिजनेस का कौन सा एक काम आज ही डेलीगेट करने वाले हैं।

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