क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो दिन रात गधे की तरह मेहनत तो कर रहे हैं पर आपका बिज़नेस वहीं का वहीं खड़ा है। शायद आपको लगता है कि आप अकेले ही पूरी दुनिया जीत लेंगे पर असलियत में आप बस अपनी ही बर्बादी का सामान तैयार कर रहे हैं। बिना सही पार्टनर के आपकी ग्रोथ बस एक सपना ही रह जाएगी।
आज हम इस ब्लॉग में रॉकेट फ्यूल बुक के वो ३ सीक्रेट लेसन जानेंगे जो आपके डूबते हुए बिज़नेस को कामयाबी के आसमान पर ले जा सकते हैं। चलिए समझते हैं कि कैसे एक सही पार्टनरशिप आपकी पूरी ज़िंदगी बदल सकती है।
लेसन १ : विजनरी और इंटेग्रेटर की अनोखी जोड़ी
क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग बहुत ही कमाल के आइडियाज लेकर आते हैं पर उनका स्टार्टअप शुरू होने से पहले ही दम तोड़ देता है। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे होते हैं जो काम तो बहुत सलीके से करते हैं पर उनके पास कोई बड़ा विजन ही नहीं होता। असल में बिज़नेस की दुनिया में दो तरह के खिलाड़ी होते हैं। एक होता है विजनरी और दूसरा होता है इंटेग्रेटर। विजनरी वह इंसान है जिसके दिमाग में हर दिन दस नए और तूफानी आइडियाज आते हैं। वह भविष्य को देख सकता है और बड़े सपने बुनने में माहिर होता है। लेकिन उसके साथ एक छोटी सी दिक्कत होती है। उसे काम को फिनिश करना या डिटेल्स पर ध्यान देना बिल्कुल पसंद नहीं होता। वह बस आसमान में उड़ना चाहता है।
अब एंट्री होती है इंटेग्रेटर की। यह वह बंदा है जिसके पैर हमेशा जमीन पर होते हैं। विजनरी अगर आसमान है तो इंटेग्रेटर वह मजबूत धरती है जो उस आसमान को सहारा देती है। इंटेग्रेटर का काम है विजनरी के बिखरे हुए आइडियाज को पकड़ना और उन्हें एक सिस्टम में ढालना। वह कंपनी के रोज के कामों को देखता है और यह पक्का करता है कि टीम सही दिशा में जा रही है। अगर विजनरी गाडी का इंजन है जो उसे रफ़्तार देता है तो इंटेग्रेटर वह स्टयरिंग व्हील है जो उसे सही मोड़ पर घुमाता है।
मान लीजिए आपका एक दोस्त है जो कहता है कि हम चांद पर चाय की दुकान खोलेंगे। यह सुनने में बड़ा कूल लगता है और यही विजनरी की पहचान है। लेकिन जब आप उससे पूछते हैं कि भाई चाय वहां बनेगी कैसे और दूध का इंतजाम कौन करेगा तो वह बगलें झांकने लगता है। यहीं पर आपकी जरूरत पड़ती है जो शायद एक इंटेग्रेटर हैं। आप हिसाब लगाएंगे कि रॉकेट का किराया कितना होगा और केतली में प्रेशर कितना रखना है। बिना आपके वह चाय की दुकान सिर्फ एक सपना बनकर रह जाएगी और बिना उसके विजन के आप शायद कभी चांद की तरफ देखते भी नहीं।
भारत में अक्सर लोग सोचते हैं कि मैं अकेला ही सब संभाल लूँगा। मैं ही सेल्स देखूंगा और मैं ही हिसाब किताब भी कर लूँगा। यह वैसी ही बात हो गई जैसे कोई सोचे कि वह अपनी ही शादी में दूल्हा भी बनेगा और खुद ही खाना भी परोसेगा। आखिर में ना तो शादी ढंग से होगी और ना ही मेहमान खुश होंगे। अगर आप विजनरी हैं तो आपको एक ऐसा इंटेग्रेटर ढूंढना होगा जो आपकी बकवास को बर्दाश्त कर सके और उसे हकीकत में बदल सके। इन दोनों का तालमेल ही वह असली रॉकेट फ्यूल है जो किसी भी कंपनी को करोड़ों की ऊंचाई पर ले जाता है। अगर आप अकेले भाग रहे हैं तो यकीन मानिए आप सिर्फ थक रहे हैं जीत नहीं रहे हैं।
लेसन २ : फाइव रूल्स और ट्वेल्व गाइडलाइंस का जादू
जब एक विजनरी और इंटेग्रेटर साथ आते हैं, तो शुरू में सब कुछ हनीमून जैसा लगता है। दोनों को लगता है कि बस अब तो दुनिया मुट्ठी में है। लेकिन जैसे ही बिज़नेस का प्रेशर बढ़ता है, दोनों के बीच ठन जाती है। विजनरी को लगता है कि इंटेग्रेटर बहुत धीरे चल रहा है और उसकी उड़ान को रोक रहा है। वहीं इंटेग्रेटर को लगता है कि विजनरी पागल हो गया है और हर रोज एक नई मुसीबत खड़ी कर देता है। इसी तकरार को खत्म करने के लिए इस बुक में फाइव रूल्स और ट्वेल्व गाइडलाइंस की बात की गई है। यह कोई बोरिंग नियम नहीं हैं, बल्कि यह आपके बिज़नेस की लक्ष्मण रेखा है।
सबसे बड़ा रूल है 'स्टे इन योर लेन'। इसका मतलब है कि अपनी हद में रहो। अगर विजनरी का काम आइडिया देना और कल्चर बनाना है, तो उसे बार-बार ऑपरेशंस में घुसकर टांग नहीं अड़ानी चाहिए। भारतीय घरों में आपने देखा होगा कि जब मम्मी रसोई में खाना बना रही होती हैं और पापा आकर बोलते हैं कि नमक थोड़ा कम डालना, तो फिर उस दिन घर में जो युद्ध होता है, वह किसी वर्ल्ड वॉर से कम नहीं होता। बिज़नेस में भी यही होता है। अगर विजनरी हर छोटी चीज़ में दखल देगा, तो इंटेग्रेटर का दिमाग खराब होना पक्का है। आपको एक दूसरे के काम का सम्मान करना सीखना होगा।
दूसरा बड़ा नियम है 'नो एंड रन'। अक्सर विजनरी किसी एम्प्लॉई के पास जाकर बोल देता है कि कल से हम यह नया प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं, जबकि बेचारा इंटेग्रेटर पहले से ही टीम को पुराने प्रोजेक्ट में रगड़ रहा होता है। यह टीम के लिए वैसा ही कन्फ्यूजन है जैसे किसी बच्चे को मम्मी कहे कि होमवर्क करो और पापा कहें कि चलो क्रिकेट खेलते हैं। बच्चा तो खुश हो जाएगा पर उसका रिजल्ट जीरो ही आएगा। इसलिए विजनरी को कोई भी बड़ा आदेश देने से पहले इंटेग्रेटर से बात करनी ही होगी। वरना आप अपनी ही टीम के बीच विलेन बन जाएंगे और काम का कबाड़ा हो जाएगा।
इन गाइडलाइंस का असली मकसद है ईगो को साइड में रखना। कई बार विजनरी को लगता है कि मालिक तो मैं हूँ, तो मेरी ही चलनी चाहिए। भाई साहब, अगर आपको सिर्फ अपनी चलानी है तो आप एक तानाशाह बन सकते हैं, बिज़नेसमैन नहीं। एक सफल बिज़नेस वह है जहाँ इंटेग्रेटर के पास इतनी ताकत हो कि वह विजनरी के खराब आइडियाज को 'ना' कह सके। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे एक तेज रफ़्तार फेरारी में ब्रेक का होना। ब्रेक का काम गाड़ी को रोकना नहीं, बल्कि उसे एक्सीडेंट से बचाना होता है ताकि वह और भी तेज चल सके। अगर आप इन नियमों को नहीं मानेंगे, तो आपकी पार्टनरशिप किसी पुरानी बॉलीवुड फिल्म के झगड़े जैसी हो जाएगी, जहाँ अंत में सब कुछ तबाह हो जाता है।
लेसन ३ : टू इन अ बॉक्स और सेम पेज मीटिंग का पावर
अब तक आपने पार्टनर तो ढूंढ लिया और नियम भी बना लिए पर क्या इतना काफी है। बिल्कुल नहीं। असली खेल तो तब शुरू होता है जब आप साथ में काम करना शुरू करते हैं। इस बुक का तीसरा सबसे बड़ा लेसन है 'टू इन अ बॉक्स' मॉडल। इसका सीधा मतलब यह है कि कंपनी के टॉप पर सिर्फ दो ही लोग होने चाहिए। एक विजनरी और एक इंटेग्रेटर। अगर वहां तीन या चार लोग अपनी अपनी चलाने लगेंगे तो वह बिज़नेस नहीं बल्कि पुरानी दिल्ली का ट्रैफिक जाम बन जाएगा जहाँ हर कोई हॉर्न बजा रहा है पर गाड़ी एक इंच भी आगे नहीं बढ़ रही।
इस तालमेल को बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है 'सेम पेज मीटिंग'। यह मीटिंग वैसी ही है जैसे एक शादीशुदा जोड़ा रात को बैठकर हिसाब लगाता है कि कल किसका बिल भरना है और बच्चे की स्कूल फीस कहाँ से आएगी। बिज़नेस में भी विजनरी और इंटेग्रेटर को हर महीने कम से कम एक बार एक कमरे में बंद होकर एक दूसरे के दिल की बात सुननी चाहिए। अगर विजनरी को लगता है कि कंपनी बोरिंग हो रही है या इंटेग्रेटर को लगता है कि विजनरी हवा में बातें कर रहा है तो यही वह जगह है जहाँ आपको झगड़ा सुलझाना है। अगर आप एक दूसरे से बात नहीं करेंगे तो आपके बीच की दूरियां वैसी ही बढ़ जाएंगी जैसे किसी सरकारी दफ्तर में फाइलें धूल खाती रहती हैं।
जरा सोचिए अगर एक क्रिकेट टीम में कप्तान कुछ और कह रहा हो और कोच कुछ और तो खिलाड़ी तो बीच में पागल ही हो जाएंगे। कर्मचारी हमेशा कन्फ्यूज रहते हैं कि आखिर सुनना किसकी है। जब आप 'टू इन अ बॉक्स' के तौर पर काम करते हैं तो पूरी कंपनी को एक क्लियर मैसेज जाता है। विजनरी बड़े सपने देखता है और इंटेग्रेटर उन्हें हकीकत में बदलने का रोडमैप बनाता है। इन दोनों के बीच का भरोसा ही आपकी कंपनी की असली दौलत है। अगर आप एक दूसरे की इज्जत नहीं कर सकते तो आपकी कंपनी किसी ऐसे पतंग की तरह होगी जिसकी डोर कट चुकी है। वह थोड़ी देर तो हवा में लहरेगी पर अंत में किसी के पेड़ पर जाकर ही फंसेगी।
तो दोस्तों, क्या आप तैयार हैं अपने बिज़नेस में वह रॉकेट फ्यूल डालने के लिए। याद रखिए अकेले आप तेज दौड़ सकते हैं पर साथ मिलकर आप बहुत दूर तक जा सकते हैं। अपनी ईगो को अलमारी में बंद कीजिए और एक ऐसा पार्टनर ढूंढिए जो आपकी कमियों को पूरा कर सके। जब एक पागल विजनरी को एक समझदार इंटेग्रेटर मिल जाता है तब इतिहास रचा जाता है। आप भी वह इतिहास रच सकते हैं बस जरूरत है सही इंसान पर भरोसा करने की और हाथ मिलाकर आगे बढ़ने की। आज ही अपने अंदर के विजनरी या इंटेग्रेटर को पहचानिए और अपने बिज़नेस को एक नई उड़ान दीजिए।
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