Sink or Swim (Hindi)


क्या आपको भी लगता है कि नई नौकरी लगते ही आप ऑफिस के राजा बन गए हैं? असलियत तो यह है कि बिना सही प्लान के आप वहां सिर्फ एक डूबते हुए जहाज के कैप्टन हैं जिसे जल्द ही बाहर फेंक दिया जाएगा। अपनी पुरानी आदतों के साथ नई कुर्सी पर चिपकना आपको करियर का जोकर बना सकता है।

परेशान मत होइये। आज हम 'सिंक और स्विम' बुक की मदद से उन सीक्रेट्स को जानेंगे जो आपको नई नौकरी के पहले 12 हफ्तों में डूबने से बचाकर एक प्रो प्लेयर की तरह तैरना सिखाएंगे।


लेसन १ : बॉस और कलीग्स के साथ ट्रस्ट का नेटवर्क बनाना

नई नौकरी का पहला दिन किसी ऐसी शादी जैसा होता है जहां आपको पता ही नहीं कि कौन सा रिश्तेदार कब आपकी शिकायत कर देगा। अक्सर लोग सोचते हैं कि नई जॉब में जाते ही वह अपनी कोडिंग या एक्सेल शीट के जादू से सबको अपना दीवाना बना लेंगे। लेकिन असलियत में 'सिंक और स्विम' के लेखक कहते हैं कि आपकी स्किल से ज्यादा आपकी 'सोशल बॉन्डिंग' मैटर करती है। इमेजिन कीजिये कि आप एक नए ऑफिस में गए और पहले ही दिन से 'मिस्टर इंडिया' बनकर अपनी डेस्क पर दुबक कर बैठ गए। आप काम तो बहुत अच्छा कर रहे हैं लेकिन किसी को पता ही नहीं कि आप वहां मौजूद भी हैं। यह सबसे बड़ी गलती है।

आपको अपने बॉस के साथ पहले हफ्ते में ही ट्यूनिंग सेट करनी होगी। बॉस कोई भगवान नहीं होता जिसे सिर्फ दूर से प्रणाम किया जाए। वह आपका सबसे बड़ा स्टेकहोल्डर है। अगर आप अपने बॉस की वर्किंग स्टाइल को नहीं समझ पाए तो समझिये कि आप बिना पतवार की नाव चला रहे हैं। क्या आपके बॉस को लंबे ईमेल पसंद हैं या वह सिर्फ काम की बात सुनना पसंद करते हैं? क्या वह सुबह के समय चिड़चिड़े रहते हैं या शाम को कॉफी के वक्त डिस्कशन करना पसंद करते हैं? यह छोटी छोटी बातें ही तय करेंगी कि आप उस ऑफिस में तैरेंगे या फिर बिना पानी के ही डूब जाएंगे।

सिर्फ बॉस ही नहीं बल्कि अपने कलीग्स के साथ भी रिश्ता बनाना जरूरी है। कई लोग नए ऑफिस में जाते ही 'मैं सबसे बेस्ट हूँ' वाला एटीट्यूड दिखाने लगते हैं। यकीन मानिये ऐसा करने वालों को लंच ब्रेक में कोई अपने साथ नहीं बिठाता। ऑफिस का कैंटीन वह जगह है जहाँ असली 'पॉलिटिक्स' और 'इन्फोर्मेशन' का खजाना मिलता है। वहां जाइए और लोगों से बात कीजिये। उनसे पूछिए कि ऑफिस का अघोषित नियम क्या है। क्या यहाँ टाइम पर आना जरूरी है या काम खत्म करके जाना? जब आप लोगों से जुड़ते हैं तो आप केवल एक एम्प्लॉई नहीं बल्कि उनकी टीम का हिस्सा बन जाते हैं। याद रखिये कि मुश्किल समय में आपकी एक्सेल स्किल्स नहीं बल्कि वे लोग ही आपको बचाएंगे जिनसे आपने कैंटीन में हंसकर बात की थी। अगर आप इस पहले लेसन को इग्नोर करते हैं तो आप बस उस फाइल की तरह हैं जिसे लोग डेस्क के कोने में दबा देते हैं और फिर भूल जाते हैं।


लेसन २ : अपनी वैल्यू दिखाने के लिए क्विक विन्स हासिल करना

ज्यादातर लोग नई नौकरी मिलते ही 'शक्तिमान' बनने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि वे पहले ही महीने में कंपनी का रेवेन्यू डबल कर देंगे या कोई ऐसा सॉफ्टवेयर बना देंगे जो खुद ब खुद चाय भी बना दे। लेकिन भाई साहब, हकीकत तो यह है कि पहले कुछ हफ्तों में तो आपको यह भी ढंग से पता नहीं होता कि ऑफिस का प्रिंटर कहाँ रखा है। 'सिंक और स्विम' बुक हमें सिखाती है कि बड़े बड़े वादे करने से बेहतर है कि आप 'क्विक विन्स' यानी छोटी छोटी जीत पर फोकस करें। इमेजिन कीजिये कि आप एक क्रिकेट मैच में आए हैं और पहली ही बॉल पर छक्का मारने के चक्कर में क्लीन बोल्ड हो गए। इससे अच्छा तो यह होता कि आप सिंगल लेकर अपनी जगह पक्की करते।

ऑफिस में क्विक विन्स का मतलब है वह छोटे काम जिन्हें कोई और हाथ नहीं लगाना चाहता या जो काफी समय से पेंडिंग पड़े हैं। मान लीजिये आपके डिपार्टमेंट की कोई ऐसी फाइल है जो सालों से बिखरी पड़ी है और उसे देखकर सबका सर चकराता है। अगर आप चुपचाप उसे ऑर्गनाइज कर देते हैं तो आप रातों रात सबकी नजरों में हीरो बन जाते हैं। लोग सोचेंगे कि जो इंसान इतनी छोटी चीज को इतने सलीके से कर सकता है वह बड़े प्रोजेक्ट्स भी संभाल लेगा। यह एक साइकोलॉजिकल गेम है। जब आप छोटे छोटे टास्क समय से पहले और परफेक्शन के साथ पूरे करते हैं तो आप अपने बॉस के दिमाग में एक 'भरोसेमंद इंसान' की इमेज बना लेते हैं।

लेकिन यहाँ एक सावधानी भी जरूरी है। कुछ लोग इतने उत्साही हो जाते हैं कि वे हर काम के लिए 'हां' बोल देते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप किसी बुफे में गए और अपनी प्लेट में सब कुछ भर लिया लेकिन खा एक भी नहीं पाए। अगर आप बहुत ज्यादा काम ले लेंगे और उसे पूरा नहीं कर पाएंगे तो आपकी इमेज एक 'फेंकू' इंसान की बन जाएगी। इसलिए स्मार्ट बनिए। वही काम हाथ में लीजिये जहाँ आप रिजल्ट दिखा सकें। जब आप अपनी छोटी छोटी जीत का शोर नहीं बल्कि उसका असर दिखाते हैं तो ऑफिस के पुराने खिलाडी भी आपको इज्जत देने लगते हैं। याद रखिये कि बड़ी कामयाबी रातों रात नहीं मिलती बल्कि वह इन छोटी छोटी जीतों का ही जोड़ होती है। अगर आप अभी तक अपनी बड़ी इमेज बनाने के चक्कर में कुछ भी नहीं कर पाए हैं तो समझ जाइये कि आप अपनी ही नाव में छेद कर रहे हैं।


लेसन ३ : फीडबैक का इस्तेमाल और अपनी प्रोग्रेस को ट्रैक करना

ऑफिस में सबसे खतरनाक इंसान वह नहीं है जो गलतियां करता है बल्कि वह है जो यह सोचता है कि वह कभी गलती कर ही नहीं सकता। 'सिंक और स्विम' बुक का सबसे बड़ा मंत्र है फीडबैक मांगना। ज्यादातर लोग फीडबैक से ऐसे डरते हैं जैसे बचपन में रिपोर्ट कार्ड से डरते थे। उन्हें लगता है कि अगर बॉस ने कुछ कमी निकाल दी तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी। लेकिन हकीकत में चुपचाप बैठे रहना और गलत दिशा में मेहनत करते रहना ही आपको डूबने के लिए काफी है। सोचिये कि आप गूगल मैप्स चलाकर दिल्ली जा रहे हैं लेकिन आपने रास्ता गलत चुन लिया और आपका जीपीएस शांत बैठा है। आप कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाएंगे। ऑफिस में आपका बॉस और आपकी टीम ही वह जीपीएस हैं।

आपको हर दो हफ्ते में अपने बॉस के पास जाकर यह पूछने की हिम्मत जुटानी होगी कि क्या आप सही जा रहे हैं। उनसे पूछिए कि आपकी कौन सी बात उन्हें अच्छी लग रही है और कहाँ आपको सुधार की जरूरत है। जब आप खुद आगे बढ़कर फीडबैक मांगते हैं तो आप यह दिखाते हैं कि आप सीखने के लिए तैयार हैं और आप कंपनी के लिए सीरियस हैं। इमेजिन कीजिये कि आप जिम जा रहे हैं और गलत तरीके से डंबल उठा रहे हैं। अगर ट्रेनर आपको नहीं टोकेगा तो आपकी बॉडी बनने के बजाय हड्डी टूट जाएगी। ठीक वैसे ही ऑफिस में भी अपनी ईगो को साइड में रखिये। अगर आप सोचते हैं कि आपको सब पता है तो आप उस पुराने नोकिया फोन की तरह हैं जिसे अपडेट न होने की वजह से सबने भुला दिया।

इसके साथ ही अपने 12 हफ्तों के सफर का एक रिकॉर्ड रखिये। आपने क्या सीखा और आपने कंपनी के लिए क्या वैल्यू ऐड की इसका हिसाब आपके पास होना चाहिए। कई बार ऐसा होता है कि अप्रेजल के वक्त आपको याद ही नहीं रहता कि आपने तीन महीने पहले क्या कमाल किया था। अगर आपके पास अपनी प्रोग्रेस का डेटा होगा तो आप कॉन्फिडेंस के साथ अपनी बात रख पाएंगे। ऑफिस में केवल गधे की तरह मेहनत करना काफी नहीं है बल्कि उस मेहनत को सही जगह और सही तरीके से प्रेजेंट करना भी जरूरी है। अगर आप फीडबैक नहीं ले रहे हैं तो आप एक बंद कमरे में अंधेरे में तीर चला रहे हैं। अंधेरे में तीर चलाने से शिकार नहीं मिलता बल्कि सिर्फ दीवारें खराब होती हैं।


नई नौकरी का यह 12 हफ्तों का सफर आपको बना भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है। चॉइस आपकी है कि आप एक साधारण एम्प्लॉई बनकर भीड़ में खो जाना चाहते हैं या एक रॉकस्टार बनकर अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं। इन लेसन को सिर्फ पढ़िए मत बल्कि कल सुबह ऑफिस जाते ही इन्हें अपनी लाइफ में उतारिए। याद रखिये कि समंदर में वही बचता है जो हाथ पैर मारना जानता है।

अगर आपको यह लेसन काम के लगे हैं तो इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जिसकी नई नौकरी लगी है ताकि वह भी सिंक होने के बजाय स्विम करना सीख सके। नीचे कमेंट में लिखिए कि आपकी नई जॉब का सबसे बड़ा चैलेंज क्या है। चलिए मिलकर आपके करियर को नेक्स्ट लेवल पर ले जाते हैं।

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