Smart Trust (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सबको अपना सगा समझकर धोखा खाते हैं या फिर शक के मारे अपनी ही परछाई से डरते हैं। बधाई हो। आप अपनी मेहनत की कमाई और सुकून दोनों ही कचरे में डाल रहे हैं। स्मार्ट ट्रस्ट के बिना आप बस एक आसान शिकार हैं।

स्टीफन कोवी की यह किताब आपको उस अंधेपन से बाहर निकालेगी जो आपको धोखेबाजों का फेवरेट बनाता है। चलिए जानते हैं वह ३ पावरफुल लेसन्स जो आपको इस मतलबी दुनिया में समझदार और कामयाब बनाएंगे।


लेसन १ : अंधा विश्वास एक बीमारी है और शक एक जहर है

आजकल की दुनिया में लोग दो ही तरह के हैं। पहले वो जो इतने मासूम हैं कि कल को कोई उन्हें ताजमहल बेचने आए तो वो एडवांस भी दे देंगे। इन्हें हम प्यार से 'ब्लाइंड ट्रस्ट' वाले लोग कहते हैं। और दूसरे वो हैं जो अपनी सगी परछाई पर भी नजर रखते हैं कि कहीं वह उनका बटुआ न मार ले। इसे 'नो ट्रस्ट' जोन कहते हैं। लेकिन स्टीफन कोवी कहते हैं कि ये दोनों ही रास्ते आपको बर्बादी की तरफ ले जाते हैं। अगर आप हर किसी पर भरोसा करते हैं तो आप बेवकूफ कहलाएंगे। और अगर आप किसी पर भी भरोसा नहीं करते तो आप अकेले और चिड़चिड़े होकर रह जाएंगे। असल खेल तो 'स्मार्ट ट्रस्ट' का है।

मान लीजिए आपका एक दोस्त है राहुल। राहुल पिछले पांच साल से आपसे पैसे उधार ले रहा है और कभी वापस नहीं करता। अब अगर आप उसे फिर से पैसे देते हैं तो यह भरोसा नहीं बल्कि आपकी महान बेवकूफी है। आप उसे 'ब्लाइंड ट्रस्ट' दे रहे हैं और राहुल आपके पैसों से वेकेशन मना रहा है। वहीं दूसरी तरफ आपका एक कलीग है समीर। समीर ने हमेशा अपना काम वक्त पर किया है और आपकी मदद की है। लेकिन आप फिर भी उसकी हर ईमेल को दस बार चेक करते हैं क्योंकि आपको लगता है कि दुनिया में हर कोई चोर है। यहाँ आप शक का जहर पी रहे हैं और अपना कीमती वक्त बर्बाद कर रहे हैं।

स्मार्ट ट्रस्ट आपको सिखाता है कि भरोसा करने से पहले अपना दिमाग और दिल दोनों खुला रखें। यह कोई जादू नहीं बल्कि एक जजमेंट है। आपको सामने वाले की नीयत और उसकी काबिलियत दोनों को देखना होगा। अगर किसी की नीयत अच्छी है पर उसे काम करना नहीं आता तो उस पर भरोसा करना आपको भारी पड़ेगा। और अगर कोई बहुत काबिल है पर उसकी नीयत खराब है तो वह आपका सबसे बड़ा नुकसान करेगा। स्मार्ट ट्रस्ट का मतलब है कि आप रिस्क को समझते हैं लेकिन फिर भी भरोसा करने का साहस दिखाते हैं।

जरा सोचिए अगर आपके घर का दूधवाला रोज दूध में पानी मिलाता है और आप फिर भी उससे बहस नहीं करते क्योंकि आपको लगता है कि भरोसा करना अच्छी बात है। तो भाई साहब आप दूध नहीं बल्कि महंगा पानी पी रहे हैं। और अगर आप अपनी पत्नी से रोज पूछते हैं कि वह सब्जी मंडी में किससे बात कर रही थी तो यकीन मानिए आप अपने घर को जेल बना रहे हैं। स्मार्ट ट्रस्ट इन दोनों ही सिचुएशन से बचने का नाम है। यह आपको एक ऐसी नजर देता है जिससे आप समझ पाते हैं कि किसे चाबी देनी है और किसे सिर्फ नमस्ते करके आगे बढ़ना है।

जब आप स्मार्ट ट्रस्ट अपनाते हैं तो आपकी लाइफ की कॉम्प्लेक्सिटी कम हो जाती है। आप हर छोटी बात पर शक करके अपनी एनर्जी वेस्ट नहीं करते। आप जानते हैं कि कहाँ बाउंड्री बनानी है और कहाँ दिल खोलना है। यह लेसन हमें सिखाता है कि भरोसा कोई तोहफा नहीं है जो सबको फ्री में बाँटा जाए। यह एक ऐसी इन्वेस्टमेंट है जिसे बहुत सोच समझकर सही जगह लगाना चाहिए। वरना इस कम भरोसे वाली दुनिया में लोग आपको लूटने के लिए लाइन लगाकर खड़े हैं।


लेसन २ : भरोसे का गणित - कैसे ट्रस्ट आपकी जेब और वक्त बचाता है

ज्यादातर लोगों को लगता है कि भरोसा सिर्फ एक इमोशनल बात है। जैसे कि "मुझे तुम पर यकीन है" कहना सिर्फ फिल्मों में अच्छा लगता है। लेकिन स्टीफन कोवी कहते हैं कि भरोसा असल में एक 'इकोनॉमिक ड्राइवर' है। इसका मतलब है कि अगर भरोसा बढ़ता है तो काम की स्पीड रॉकेट की तरह ऊपर जाती है और आपका खर्चा पत्थर की तरह नीचे गिरता है। इसे किताब में 'ट्रस्ट टैक्स' और 'ट्रस्ट डिविडेंड' कहा गया है। अगर आप किसी पर शक करते हैं तो आप उस पर नजर रखने के लिए एक 'टैक्स' भर रहे होते हैं। यह टैक्स पैसों के रूप में हो सकता है या आपके कीमती समय के रूप में।

मान लीजिए आपकी एक छोटी सी कंपनी है जहाँ आप अपने एम्प्लॉई सुमित पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं करते। अब सुमित को एक पेन भी खरीदना हो तो उसे पहले तीन कोटेशन लाने पड़ते हैं। फिर आप उस पर साइन करते हैं। फिर आपका मैनेजर उसे चेक करता है। इस छोटे से पेन को खरीदने में दस दिन और बीस लोगों की ईमेल बाजी लग जाती है। यहाँ पेन की कीमत १० रुपये है लेकिन उस पर 'शक का टैक्स' ५०० रुपये लग गया है। वहीं अगर सुमित पर आपको 'स्मार्ट ट्रस्ट' होता तो वह पेन तुरंत आता और काम शुरू हो जाता। कम भरोसे का मतलब है ज्यादा रूल्स। ज्यादा रूल्स का मतलब है धीमी स्पीड। और धीमी स्पीड का मतलब है बिजनेस का बेड़ा गर्क।

यही बात हमारी पर्सनल लाइफ पर भी लागू होती है। अगर आप अपनी गाड़ी ठीक कराने किसी मैकेनिक के पास जाते हैं और आपको उस पर भरोसा नहीं है। तो आप तीन घंटे धूप में खड़े होकर उसे काम करते हुए देखेंगे ताकि वह कोई पुराना पार्ट न डाल दे। यहाँ आपने मैकेनिक को तो पैसे दिए ही पर अपना तीन घंटे का कीमती वक्त भी 'टैक्स' के रूप में दे दिया। इसे कहते हैं लो ट्रस्ट की दुनिया में जीना। यहाँ हर कोई एक दूसरे को ठगने की फिराक में है और इसी चक्कर में हम सब अपनी लाइफ की एफिशिएंसी खो रहे हैं।

लेकिन जब आप 'स्मार्ट ट्रस्ट' का इस्तेमाल करते हैं तो आपको मिलता है 'ट्रस्ट डिविडेंड'। यह एक बोनस की तरह है। जब एक टीम में लोगों को एक दूसरे पर भरोसा होता है तो उन्हें हर बात के लिए मीटिंग करने या एग्रीमेंट साइन करने की जरूरत नहीं पड़ती। बातें इशारों में हो जाती हैं और काम बिजली की रफ्तार से होता है। जैसे कि पुराने जमाने में बड़े बड़े बिजनेस सिर्फ एक जुबान पर चलते थे। आज हम लाखों के वकील पालते हैं क्योंकि हमें इंसान की जुबान पर भरोसा नहीं रहा।

अगर आप आज भी पुराने खयालात के हैं और सोचते हैं कि सबको दबाकर रखने से काम अच्छा होता है तो आप गलतफहमी में हैं। आप बस एक डिक्टेटर बन रहे हैं जो अपनी ही प्रोग्रेस को रोक रहा है। स्मार्ट ट्रस्ट आपको सिखाता है कि भरोसा देकर आप असल में अपना ही फायदा कर रहे हैं। आप अपनी लाइफ से बेकार की चेकिंग और फालतू की कागजी कार्यवाही हटा देते हैं। इससे आपके पास वह एनर्जी बचती है जो आपको असल में बड़ा आदमी बनाने के लिए चाहिए। याद रखिए। जहाँ भरोसा नहीं होता वहाँ सिर्फ पॉलिटिक्स होती है। और पॉलिटिक्स से पेट नहीं भरता। केवल काम से भरता है।


लेसन ३ : भरोसे के ५ व्यवहार - जो आपको एक सच्चा लीडर बनाएंगे

सिर्फ यह जान लेना काफी नहीं है कि भरोसा जरूरी है। असली सवाल यह है कि इसे पैदा कैसे किया जाए। स्टीफन कोवी हमें ५ ऐसे व्यवहार बताते हैं जो किसी भी बंजर रिश्ते में भरोसे के फूल खिला सकते हैं। सबसे पहला है 'अपनी नीयत को साफ रखना'। अगर आपके मन में खोट है और आप ऊपर से मीठी बातें कर रहे हैं तो लोग आपकी वाइब्स पकड़ लेंगे। लोग बेवकूफ नहीं होते। उन्हें पता चल जाता है कि आप उनकी मदद कर रहे हैं या अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं।

दूसरा व्यवहार है 'काबिलियत बढ़ाना'। मान लीजिए आपका एक दोस्त बहुत अच्छा इंसान है पर उसे कार चलानी नहीं आती। क्या आप उसे अपनी नई कार की चाबी देंगे। बिल्कुल नहीं। यहाँ उसकी नीयत पर शक नहीं है पर उसकी काबिलियत पर भरोसा नहीं है। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि लोग आप पर भरोसा करें तो आपको अपने काम में एक्सपर्ट बनना होगा। तीसरा तरीका है 'दूसरों को पहले भरोसा देना'। अगर आप चाहते हैं कि दुनिया आप पर यकीन करे तो आपको पहल करनी होगी। एक छोटे बच्चे की तरह मत बनिए जो कहता है कि पहले वह मुझे खिलौना देगा तब मैं उसे अपनी चॉकलेट दूँगा। स्मार्ट ट्रस्ट का मतलब है कि आप रिस्क लेते हैं और सामने वाले को खुद को साबित करने का मौका देते हैं।

मान लीजिए आप एक नई कंपनी में मैनेजर बने हैं। अब आप पहले दिन से ही सबके कंप्यूटर पर जासूसी कैमरा लगवा देते हैं। इससे आपके एम्प्लॉईज को लगेगा कि आप उन्हें चोर समझते हैं। नतीजा यह होगा कि वो भी आपको धोखा देने के नए रास्ते ढूंढ लेंगे। लेकिन अगर आप उन्हें यह कहें कि मुझे आप पर यकीन है और यह आपका टारगेट है। तो वो अपनी जान लगा देंगे आपका भरोसा बनाए रखने के लिए। इसे ही कोवी साहब असली ताकत कहते हैं।

चौथा व्यवहार है 'अपनी गलतियों को मानना'। अगर आपने रायता फैला दिया है तो उसे साफ कीजिए। बहाने मत बनाइए कि बिल्ली रास्ता काट गई थी या ऑफिस की लिफ्ट खराब थी। जब आप अपनी गलती मान लेते हैं तो लोगों का आप पर भरोसा बढ़ जाता है क्योंकि उन्हें लगता है कि आप ईमानदार हैं। और पांचवा व्यवहार है 'वादे निभाना'। छोटे छोटे वादे भी बहुत मायने रखते हैं। अगर आपने कहा है कि आप ५ बजे फोन करेंगे तो ठीक ५ बजे फोन बजना चाहिए। वरना लोग आपको सीरियसली लेना बंद कर देंगे।


दोस्तों, इस कम भरोसे वाली दुनिया में 'स्मार्ट ट्रस्ट' एक सुपरपावर की तरह है। यह आपको धोखेबाजों से भी बचाता है और तरक्की के रास्ते भी खोलता है। याद रखिए। भरोसा कोई ऐसी चीज नहीं है जो एक दिन में बन जाए। यह हर रोज के छोटे छोटे कामों से पैदा होता है। तो आज ही फैसला कीजिए। क्या आप शक के साए में जीना चाहते हैं या स्मार्ट तरीके से भरोसा करके अपनी लाइफ को आसान बनाना चाहते हैं।

नीचे कमेंट्स में बताइए कि क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आपने किसी पर अंधा विश्वास किया और उसने आपको चूना लगा दिया। अपने एक्सपीरियंस शेयर करें ताकि बाकी लोग उस गलती से बच सकें। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जो हर किसी पर शक करता है या हर किसी पर आँख बंद करके यकीन कर लेता है।

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