क्या आप भी अपनी कंपनी को बस एक एवरेज दुकान की तरह चला रहे हैं। अगर आपके पास कोई बड़ा विजन नहीं है तो मुबारक हो आप बहुत जल्द मार्केट से गायब होने वाले हैं। पैसा तो हर कोई कमाता है पर आप जैसे लोग असली इम्पैक्ट मिस कर रहे हैं क्योंकि आपको ब्रांड बनाना आता ही नहीं।
आज हम जिम स्टेंगल की बुक ग्रो से वो सीक्रेट्स समझेंगे जो दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों को टॉप पर रखते हैं। चलिए जानते हैं वो ३ लेसन जो आपके बिजनेस को हमेशा के लिए बदल देंगे।
लेसन १ : ब्रांड आइडियल का जादू और सिर्फ प्रॉफिट का पीछा करने की गलती
अगर आप यह सोचते हैं कि बिजनेस का मतलब सिर्फ सामान बेचना और बैंक बैलेंस बढ़ाना है तो आप उस रेस में दौड़ रहे हैं जिसका फिनिशिंग लाइन कभी आता ही नहीं। जिम स्टेंगल ने अपनी रिसर्च में साफ कर दिया है कि दुनिया की टॉप ५० कंपनियां इसलिए सफल नहीं हैं क्योंकि वे मार्केटिंग में करोड़ों फूंकती हैं। वे इसलिए सफल हैं क्योंकि उनके पास एक आइडियल है। एक ऐसा मकसद जो दुनिया को थोड़ा बेहतर बनाने का दम रखता है। हमारे यहाँ गली के नुक्कड़ पर जो शर्मा जी की दुकान है और एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी है उसमें बस यही फर्क है। शर्मा जी को सिर्फ आज की कमाई की चिंता है पर एक लेजेंडरी ब्रांड को कल के इम्पैक्ट की फिक्र होती है।
सोचिए अगर आप एक साबुन बेच रहे हैं। आप कह सकते हैं कि यह झाग बनाता है और मैल साफ करता है। पर क्या कोई आपके झाग के लिए इमोशनल होगा। बिल्कुल नहीं। लेकिन जब एक ब्रांड यह कहता है कि वह लोगों के सेल्फ कॉन्फिडेंस को बढ़ाने के लिए काम कर रहा है तो बात बदल जाती है। लोग प्रोडक्ट नहीं खरीदते वे उस फीलिंग को खरीदते हैं जो आप उन्हें बेच रहे हैं। जो कंपनियां सिर्फ मुनाफे के पीछे भागती हैं वे उस लालची रिश्तेदार की तरह होती हैं जो सिर्फ काम पड़ने पर याद आता है। ऐसी कंपनियों का कोई वफादार फैन नहीं होता। बस ट्रांजेक्शन होता है। और जैसे ही कोई दूसरा डिस्काउंट देगा आपका कस्टमर हाथ हिलाकर टाटा बोल देगा।
जिम स्टेंगल कहते हैं कि प्रॉफिट तो एक बाय प्रोडक्ट है। यह उस तालियों की तरह है जो एक अच्छी परफॉरमेंस के बाद बजती हैं। अगर आप स्टेज पर खड़े होकर सिर्फ तालियों की भीख मांगेंगे तो कोई नहीं बजाएगा। आपको परफॉरमेंस पर ध्यान देना होगा। आपको यह समझना होगा कि आपका बिजनेस लोगों की लाइफ में क्या वैल्यू ऐड कर रहा है। क्या आप उनकी कोई प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हैं या बस अपनी जेब भर रहे हैं। जब आप अपनी कंपनी के पीछे एक बड़ा मकसद जोड़ देते हैं तो आपके एम्प्लोई भी सिर्फ सैलरी के लिए काम नहीं करते। वे एक मिशन का हिस्सा बन जाते हैं।
जैसे इंडिया में हम देखते हैं कि कुछ ब्रांड्स सालों से हमारे इमोशंस से जुड़े हैं। वे सिर्फ तेल या घी नहीं बेच रहे वे भरोसा बेच रहे हैं। अगर आपके बिजनेस में वो रूह नहीं है तो समझो आप एक जिंदा लाश चला रहे हैं। बिना विजन के ग्रोथ वैसी ही है जैसे बिना पेट्रोल के फरारी। दिखती तो अच्छी है पर जाएगी कहीं नहीं। इसलिए रुकिए और सोचिए कि क्या आपका ब्रांड किसी की जिंदगी में कोई असली बदलाव ला रहा है। क्या आप दुनिया को कुछ ऐसा दे रहे हैं जिसके लिए लोग आपको याद रखें। अगर जवाब ना है तो समझ लीजिए कि आप बहुत बड़ी अपॉर्चुनिटी मिस कर रहे हैं।
यह तो बस शुरुआत थी। जब आप एक बड़ा मकसद ढूंढ लेते हैं तो आपको उसे लोगों की उन जरूरतों से जोड़ना होता है जो सदियों से नहीं बदलीं। और यही हमें ले जाता है हमारे अगले और सबसे जरूरी पड़ाव की तरफ।
लेसन २ : ५ मानवीय जरूरतों को समझना और उनसे जुड़ना
जब आप एक बार अपना मकसद तय कर लेते हैं तो अगला सवाल आता है कि आखिर लोग आपसे जुड़ेंगे क्यों। जिम स्टेंगल कहते हैं कि दुनिया की सबसे सफल कंपनियां इंसानी फितरत को बहुत करीब से जानती हैं। इंसान कितना भी मॉडर्न हो जाए पर उसकी बेसिक नीड्स कभी नहीं बदलतीं। लेखक ने ५ ऐसी फंडामेंटल जरूरतों के बारे में बताया है जिन पर अगर आपने अपना ब्रांड टिका दिया तो समझो आपकी लॉटरी लग गई। ये ५ चीजें हैं खुशी महसूस करना, दूसरों से जुड़ना, अपने आप पर गर्व करना, दुनिया को समझना और न्याय के साथ खड़े होना।
अब आप कहेंगे कि भाई मैं तो जूते बेचता हूं इसमें न्याय और खुशी कहाँ से आई। यही तो सारा खेल है। अगर आप सिर्फ रबर और कपड़ा बेच रहे हैं तो आप एक मोची हैं। पर अगर आप उस जूते को पहनकर एक इंसान को अपनी सेहत बेहतर करने का जरिया दे रहे हैं तो आप उसे खुशी और गर्व दे रहे हैं। जो कंपनियां इन इमोशंस को नहीं समझतीं वे उस बोरिंग टीचर की तरह होती हैं जो क्लास में आकर बस फार्मूला लिख देता है। कोई भी उनसे प्यार नहीं करता। पर जो ब्रांड इन ५ जरूरतों में से किसी एक को भी पकड़ लेते हैं वे लोगों के दिल में घर कर जाते हैं।
सोचिए उस सोशल मीडिया एप के बारे में जिसे आप दिन भर स्क्रॉल करते हैं। वह आपको क्या दे रहा है। वह आपको दूसरों से जुड़ने की जरूरत को पूरा कर रहा है। उसे पता है कि आप अकेलेपन से डरते हैं। वह आपकी उसी कमजोरी या जरूरत को अपना बिजनेस मॉडल बना लेता है। और आप हैं कि अपना कीमती वक्त वहाँ लुटा रहे हैं। कितना मजाक है ना कि हम फ्री एप्स के चक्कर में खुद ही प्रोडक्ट बन जाते हैं। लेकिन बिजनेस के नजरिए से देखें तो यह मास्टरस्ट्रोक है। अगर आपका ब्रांड किसी की लाइफ को आसान नहीं बना रहा या उसे कोई अच्छी फीलिंग नहीं दे रहा तो समझ लीजिए कि आप बस भीड़ बढ़ा रहे हैं।
इंडिया में भी हम देखते हैं कि कुछ ब्रांड्स सिर्फ 'खुशी' के नाम पर अपना सामान बेच देते हैं। त्योहारों के समय वे आपको इमोशनल कर देंगे और आप बिना सोचे समझे उनके डिब्बे घर ले आएंगे। उन्हें पता है कि इंडियन ऑडियंस इमोशंस की भूखी है। अगर आप अपने कस्टमर को यह महसूस नहीं करा सकते कि आपके साथ जुड़कर वह कुछ बेहतर बन रहा है तो फिर आप बस एक ट्रांजेक्शन कर रहे हैं। जिम स्टेंगल का कहना है कि महान कंपनियां कस्टमर के दिमाग में नहीं बल्कि उनके दिल के किसी कोने में बैठती हैं।
जब आप इन मानवीय जरूरतों को पूरा करना शुरू करते हैं तो आपका ब्रांड एक कम्युनिटी बन जाता है। लोग आपके बारे में दूसरों को खुद बताते हैं। आपको विज्ञापन पर पैसे बर्बाद करने की जरूरत नहीं पड़ती। पर यह सब तब तक मुमकिन नहीं है जब तक आपकी टीम और आपके लीडर्स खुद इस बात पर यकीन ना करें। यही वो कड़ी है जो एक अच्छे आइडिया को एक महान कंपनी में बदल देती है। और इसी टीम स्पिरिट और लीडरशिप की ताकत को हम अगले लेसन में समझेंगे जो कि किसी भी ऑर्गेनाइजेशन की असली रीढ़ होती है।
लेसन ३ : लीडरशिप की असली ताकत और कल्चर का कमाल
अगर आपको लगता है कि एक शानदार ऑफिस और बढ़िया कॉफी मशीन होने से आपकी कंपनी महान बन जाएगी, तो आप शायद किसी मुगालते में जी रहे हैं। जिम स्टेंगल कहते हैं कि लीडरशिप का मतलब सिर्फ ऑर्डर देना या मीटिंग्स में चिल्लाना नहीं होता। असली लीडर वो है जो अपनी टीम के दिलों में उस 'ब्रांड आइडियल' की आग जला सके। जब तक आपकी टीम के आखिरी इंसान को यह नहीं पता कि उसका काम दुनिया को कैसे बेहतर बना रहा है, तब तक आपकी ग्रोथ सिर्फ कागजों पर रहेगी। अक्सर हमारे यहाँ बॉस ऐसे होते हैं जो खुद तो विजन की बातें करते हैं पर असल में उन्हें सिर्फ महीने के टारगेट से मतलब होता है। ऐसे लीडर्स उस कैप्टन की तरह हैं जो जहाज तो चलाना चाहते हैं पर उन्हें ये नहीं पता कि जाना कहाँ है।
सोचिए अगर आप एक रेस्टोरेंट में काम करते हैं और आपका बॉस आपको रोज डांटता है कि प्लेट्स साफ क्यों नहीं हैं। आप चिड़चिड़े हो जाएंगे। पर अगर वही बॉस आपको ये समझा दे कि आपकी सफाई की वजह से एक परिवार यहाँ आकर सुकून के पल बिता पाता है और स्वस्थ रहता है, तो आपके काम करने का तरीका बदल जाएगा। महान कंपनियां अपने एम्प्लोई को नौकर नहीं बल्कि मिशन का हिस्सा मानती हैं। जिम स्टेंगल ने देखा कि जिन कंपनियों के पास एक बड़ा मकसद था, उनके एम्प्लोई ज्यादा खुश थे और ज्यादा मेहनत कर रहे थे। वो लोग सिर्फ सैलरी के लिए नहीं, बल्कि उस गर्व के लिए काम कर रहे थे जो उस ब्रांड से जुड़ने पर मिलता है।
अब थोड़ा सच का सामना करते हैं। आप में से कितने लोग ऐसे ऑफिस में काम करते हैं जहाँ कल्चर के नाम पर बस पॉलिटिक्स चलती है। जहाँ लीडर को इस बात से कोई मतलब नहीं कि आप क्या महसूस कर रहे हैं। जिम स्टेंगल की रिसर्च कहती है कि ऐसी कंपनियां लंबे समय तक टिक नहीं पातीं। जब लीडर खुद अपने ब्रांड के वैल्यूज को फॉलो नहीं करता, तो टीम भी उसे गंभीरता से नहीं लेती। ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे घर का बड़ा खुद तो सिगरेट पी रहा हो और बच्चों को सेहत के फायदे बता रहा हो। कितना मजाक लगता है ना सुनने में। पर यही कड़वी हकीकत है कई बिजनेस हाउसेस की।
ग्रोथ का असली इंजन वो कल्चर है जहाँ हर कोई एक दूसरे की मदद करता है क्योंकि उनका मकसद एक है। जब लीडरशिप पारदर्शी होती है और हर फैसला उस 'आइडियल' को ध्यान में रखकर लिया जाता है, तो चमत्कार होते हैं। तब आपको अपने एम्प्लोई पर नजर रखने के लिए CCTV की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि उनका खुद का जमीर उनके काम को परफेक्ट बनाता है। अगर आप एक लीडर हैं, तो आज खुद से पूछिए कि क्या आपने अपनी टीम को कोई ऐसा सपना दिया है जिसके लिए वो सुबह खुशी-खुशी उठ सकें।
जिम स्टेंगल की यह बुक हमें सिखाती है कि महानता का रास्ता मुनाफे की तिजोरी से नहीं बल्कि इंसानी जज्बातों की गलियों से होकर गुजरता है। अगर आपने लेसन ०१ के मकसद को समझा है और लेसन ०२ की इंसानी जरूरतों को पकड़ लिया है, तो लेसन ०३ की लीडरशिप ही उसे हकीकत में बदलेगी। अब फैसला आपका है कि आप बस एक कंपनी चलाना चाहते हैं या एक ऐसी लेगेसी छोड़ना चाहते हैं जिसे दुनिया याद रखे। उठिए और अपने बिजनेस को वो रूह दीजिए जिसका वो हकदार है। आज ही अपने विजन को पेपर से उतारकर लोगों के दिलों तक पहुँचाइए।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#BusinessStrategy #BrandPurpose #LeadershipSkills #JimStengel #BookSummaryHindi
_