अगर आप आज भी कछुए और खरगोश वाली पुरानी कहानी सुनकर धीरे चलने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं तो मुबारक हो। आप अपनी सक्सेस और करियर दोनों का गला घोंट रहे हैं। जब दुनिया रॉकेट की रफ़्तार से आगे निकल जाएगी तब आप अपनी सुस्ती का मेडल लेकर घर बैठना। क्या आपको सच में लगता है कि लोग आपका इंतजार करेंगे।
स्पीड और सक्सेस का गहरा नाता है जिसे समझना हर किसी के बस की बात नहीं है। आज हम जॉन जेंजर की किताब से वह राज जानेंगे जो आपको एक सुस्त इंसान से बदलकर एक सुपरफास्ट लीडर बना देंगे। चलिए इन ३ लेसन्स को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : स्पीड और क्वालिटी का बैलेंस
क्या आपको लगता है कि ऑफिस में सबसे लास्ट में घर जाने वाला बंदा सबसे ज्यादा मेहनती है। या फिर वो जो पागलों की तरह कीबोर्ड पीट रहा है वह कंपनी का अगला सीईओ बनेगा। अगर हाँ तो आप उसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ लोग मानते हैं कि धीमे चलने से काम परफेक्ट होता है। असलियत यह है कि आज के दौर में अगर आप धीरे हैं तो आप चाहे कितने भी परफेक्ट हों आप आउट ऑफ डेट हैं। जॉन जेंजर अपनी किताब स्पीड में साफ कहते हैं कि असली लीडरशिप का मतलब सिर्फ तेज भागना नहीं है। इसका मतलब है सही रफ़्तार के साथ टॉप क्लास क्वालिटी देना।
जरा उस हलवाई के बारे में सोचिए जो समोसे तो बहुत स्वादिष्ट बनाता है लेकिन एक समोसा तलने में दो घंटे लगा देता है। क्या आप उसकी दुकान पर खड़े रहेंगे। बिल्कुल नहीं। आप तो क्या मक्खियाँ भी वहां से बोर होकर उड़ जाएंगी। ठीक यही बात आपकी लीडरशिप पर लागू होती है। बहुत सारे लोग परफेक्शन के नाम पर काम को लटकाते रहते हैं। उन्हें लगता है कि वो बारीकियों पर ध्यान दे रहे हैं लेकिन असल में वो अपनी सुस्ती को छुपा रहे होते हैं। एक रीयल लाइफ उदाहरण देखिए। मान लीजिए आपकी टीम को एक नया सॉफ्टवेयर लॉन्च करना है। एक लीडर कहता है कि हम इसे छह महीने तक टेस्ट करेंगे ताकि एक भी बग न रहे। दूसरा लीडर कहता है कि हम इसे अगले महीने बेसिक फीचर्स के साथ मार्केट में उतारेंगे और फीडबैक के साथ सुधारेंगे। अब आप खुद सोचिए कि मार्केट पर कब्जा कौन करेगा। जब तक पहला लीडर अपनी चश्मा साफ करके कोडिंग चेक करेगा तब तक दूसरा लीडर मार्केट का आधा पैसा समेट चुका होगा।
स्पीड का मतलब यह नहीं है कि आप जल्दबाजी में कचरा बना दें। स्पीड का मतलब है अपने प्रोसेस को इतना स्मूथ बनाना कि क्वालिटी खराब न हो। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। एक तरफ वो ड्राइवर है जो सत्तर की स्पीड पर गाड़ी चलाता है लेकिन उसे यह नहीं पता कि ब्रेक कब मारना है। दूसरी तरफ वो प्रोफेशनल रेसर है जो दो सौ की रफ़्तार पर भी कार के हर पुर्जे पर कंट्रोल रखता है। आपको वह रेसर बनना है। बहुत से लोग डरते हैं कि अगर काम जल्दी किया तो गलती हो जाएगी। यह डर जायज है लेकिन इसका समाधान स्पीड कम करना नहीं है। इसका समाधान है अपनी स्किल्स को उस लेवल पर ले जाना जहाँ रफ़्तार आपकी मजबूरी नहीं बल्कि आपकी ताकत बन जाए।
सक्सेसफुल लीडर्स जानते हैं कि मार्केट में सेकंड आने वाले को कोई इनाम नहीं मिलता। अगर आप अपनी टीम के साथ बैठकर सिर्फ मीटिंग्स ही करते रह जाएंगे तो एक्शन कब लेंगे। इंडिया में हमें सिखाया जाता है कि जल्दी का काम शैतान का होता है। लेकिन बिजनेस की दुनिया में जल्दी का काम उस इंसान का होता है जिसे अपनी वैल्यू पता है। अगर आप आज के जमाने में कछुए की चाल चलेंगे तो खरगोश सिर्फ आपसे आगे नहीं निकलेगा बल्कि वो आपको कुचलकर निकल जाएगा और आपको पता भी नहीं चलेगा। इसलिए परफेक्शन का बहाना छोड़िए। अपनी रफ़्तार बढ़ाइए और यह सुनिश्चित कीजिए कि आपकी क्वालिटी उस रफ़्तार का साथ दे सके। जब आप तेजी से रिजल्ट्स देना शुरू करते हैं तभी लोग आपको एक असली लीडर के रूप में देखना शुरू करते हैं।
बिना स्पीड के क्वालिटी सिर्फ एक सजावट का सामान है जिसे कोई खरीदने वाला नहीं मिलेगा। क्या आप अपनी रफ़्तार को अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार हैं या फिर वही पुराने घिसे पिटे तरीकों से धीरे धीरे रेंगना चाहते हैं। फैसला आपका है क्योंकि वक्त किसी के लिए नहीं रुकता और जो वक्त के साथ नहीं चलता उसे इतिहास भी याद नहीं रखता। यह रफ़्तार ही है जो एक एवरेज मैनेजर और एक लीजेंडरी लीडर के बीच का फर्क तय करती है।
लेसन २ : स्ट्रैटेजिक क्लियरिटी
क्या आपने कभी उस दोस्त के साथ बाइक पर सफर किया है जिसे रास्ता तो पता नहीं होता पर वो गाडी फुल स्पीड में भगाता है। आप उससे पूछते हैं कि भाई कहाँ जा रहे हैं और वो कहता है कि पता नहीं पर हम बहुत जल्दी पहुँचने वाले हैं। सुनने में यह मजाक लगता है पर यकीन मानिए आज की कॉर्पोरेट दुनिया के आधे लीडर्स ऐसे ही काम कर रहे हैं। उनके पास बहुत जोश है उनकी टीम पागलों की तरह भाग रही है पर किसी को यह नहीं पता कि जाना कहाँ है। जॉन जेंजर कहते हैं कि बिना दिशा के स्पीड सिर्फ बर्बादी का दूसरा नाम है। इसे ही हम स्ट्रैटेजिक क्लियरिटी कहते हैं।
जरा कल्पना कीजिए कि आप एक बहुत बड़े जंगल में फंस गए हैं। आपके पास दुनिया की सबसे तेज कार है और पेट्रोल भी फुल है। अब आप पैडल दबाते हैं और गाडी जंगल के पेड़ों से टकराती हुई आगे बढ़ती है। क्या आप बाहर निकल पाएंगे। शायद नहीं। आप बस और ज्यादा गहराई में फंसते जाएंगे क्योंकि आपके पास मैप नहीं है। एक स्मार्ट लीडर वह नहीं है जो अपनी टीम को हर वक्त बिजी रखता है बल्कि वह है जो उन्हें यह बताता है कि आज जो काम हम कर रहे हैं उसका मतलब क्या है। जब टीम को अपना लक्ष्य साफ दिखता है तो काम की रफ़्तार अपने आप बढ़ जाती है क्योंकि फिर कोई भी इंसान यह पूछने के लिए नहीं रुकता कि अब आगे क्या करना है।
मान लीजिए एक बॉस अपनी टीम को बुलाता है और कहता है कि हमें इस महीने सेल्स बढ़ानी है। बस इतना ही। अब टीम कन्फ्यूज है। कोई सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल रहा है कोई ठंडे फोन कॉल्स कर रहा है तो कोई पुराने क्लाइंट्स को परेशान कर रहा है। रफ़्तार तो बहुत है पर रिजल्ट जीरो है। अब दूसरी तरफ एक स्मार्ट लीडर को देखिए। वह कहता है कि हमें इस महीने दिल्ली के मार्केट में खास तौर पर कॉलेज स्टूडेंट्स को अपना प्रोडक्ट बेचना है। अब टीम के पास एक क्लियर रास्ता है। उन्हें पता है कि तीर कहाँ मारना है। जब लक्ष्य साफ होता है तो रफ़्तार में भटकने का डर नहीं रहता।
अक्सर लीडर्स को लगता है कि अगर वो अपनी टीम को बहुत ज्यादा जानकारी देंगे तो वो डर जाएंगे। लेकिन सच तो यह है कि अनिश्चितता यानी कन्फ्यूजन स्पीड का सबसे बड़ा दुश्मन है। अगर आपकी टीम को यह नहीं पता कि कंपनी का विजन क्या है तो वो हर कदम फूंक फूंक कर रखेंगे। वो डरेंगे कि कहीं गलत बटन न दब जाए। लेकिन जब आप उन्हें क्लियरिटी देते हैं तो आप उनके पैरों से बेड़ियाँ खोल देते हैं। फिर वो भागते नहीं हैं बल्कि वो उड़ते हैं।
बहुत से लीडर्स अपनी स्ट्रैटेजी को इतना पेचीदा बना देते हैं जैसे वो नासा का कोई रॉकेट साइंस हो। अगर आपकी स्ट्रैटेजी आपकी टीम के सबसे आखिरी बंदे को समझ नहीं आ रही तो समझ लीजिए आपकी स्ट्रैटेजी बेकार है। क्लियरिटी का मतलब है सादगी। जब चीजें सिंपल होती हैं तभी वो फ़ास्ट होती हैं। अगर आपको अपनी रफ़्तार बढ़ानी है तो पहले अपनी विजन की धुंध को साफ कीजिए। चश्मा साफ़ होगा तभी तो रास्ता दिखेगा। बिना देखे भागने वाले अक्सर गड्ढे में ही मिलते हैं। इसलिए एक लीडर के तौर पर आपका पहला काम है अपनी टीम को वह चश्मा देना जिससे उन्हें अपना फ्यूचर एकदम क्रिस्टल क्लियर नजर आए।
जब आपकी टीम को पता होता है कि उनका हर एक मिनट कंपनी को कहाँ ले जा रहा है तो वो खुद अपनी स्पीड बढ़ा लेते हैं। आपको पीछे से धक्का मारने की जरूरत नहीं पड़ती। क्या आपकी टीम को पता है कि वो क्यों भाग रहे हैं या वो बस इसलिए काम कर रहे हैं क्योंकि महीने के आखिर में उन्हें सैलरी चाहिए। याद रखिए बिना विजन वाली स्पीड सिर्फ एक शोर है और विजन के साथ वाली स्पीड एक संगीत है। अब आप तय कीजिए कि आप अपनी कंपनी में शोर मचाना चाहते हैं या एक मधुर धुन बजाना चाहते हैं।
लेसन ३ : इनोवेशन को बढ़ावा देना
क्या आपने कभी सोचा है कि नोकिया या कोडक जैसी बड़ी कंपनियाँ अचानक गायब क्यों हो गईं। क्या उनके पास टैलेंट की कमी थी। या उनके पास पैसा खत्म हो गया था। बिल्कुल नहीं। उनके पास सबकुछ था बस एक चीज को छोड़कर और वह थी बदलने की रफ़्तार। जॉन जेंजर का तीसरा सबसे बड़ा लेसन यही है कि अगर आप पुराने घिसे पिटे तरीकों से चिपक कर बैठे रहेंगे तो दुनिया आपको एक पुराने म्यूजियम का हिस्सा बना देगी। रफ़्तार बढ़ाने का सबसे शॉर्टकट रास्ता है इनोवेशन। यानी पुराने रास्तों को छोड़कर नए और डिजिटल रास्तों पर चलना।
एक तरफ वो आदमी है जो बैलगाड़ी से शहर जा रहा है क्योंकि उसके दादाजी भी ऐसे ही जाते थे। दूसरी तरफ वो नौजवान है जिसने अपनी बाइक निकाल ली है। अब बैलगाड़ी वाला आदमी कितनी भी जोर से बैलों को हांक ले क्या वो बाइक का मुकाबला कर पाएगा। कभी नहीं। ठीक यही हाल उन लीडर्स का होता है जो आज भी कहते हैं कि हमारे यहाँ तो काम ऐसे ही होता आया है। भाई अगर ऐसे ही होता आया है तो फिर रिजल्ट भी वही पुराने वाले ही मिलेंगे। नया और बड़ा करने के लिए आपको रिस्क लेना होगा और नई टेक्नोलॉजी को अपनाना होगा।
इनोवेशन का मतलब यह नहीं है कि आप हर दिन नया आविष्कार करें। इसका सीधा मतलब है कि जो काम पहले दस घंटे में होता था उसे दो घंटे में कैसे किया जाए। मान लीजिए आपकी टीम अभी भी हाथ से डेटा एंट्री करती है और आप उन्हें चिल्लाकर कहते हैं कि तेज काम करो। अरे साहब चिल्लाने से स्पीड नहीं बढ़ेगी बल्कि एक ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर लाने से बढ़ेगी। इसे ही कहते हैं दिमाग वाली स्पीड। बहुत से मैनेजर्स को लगता है कि अगर उन्होंने नया तरीका आजमाया और वो फेल हो गया तो क्या होगा। इसी डर की वजह से वो अपनी टीम की रफ़्तार को ब्रेक मार देते हैं। एक असली लीडर अपनी टीम को फेल होने की आजादी देता है बशर्ते वो फेल भी बहुत तेजी से हों ताकि अगली बार वो सही रास्ता चुन सकें।
आज के दौर में जो लीडर बदलाव से डरता है वह असल में सक्सेस से डरता है। अगर आप वही पुरानी फाइलें और वही पुराने मीटिंग्स के तरीके फॉलो कर रहे हैं तो आप अपनी टीम का वक्त बर्बाद कर रहे हैं। इनोवेशन का माहौल तब बनता है जब लीडर खुद आगे बढ़कर कहता है कि चलो कुछ नया ट्राई करते हैं। जब आप अपनी टीम के दिमाग से पुराने ढर्रे का बोझ उतार देते हैं तो उनकी रफ़्तार अपने आप चार गुना हो जाती है। रफ़्तार सिर्फ पैरों में नहीं बल्कि सोच में होनी चाहिए।
याद रखिए रफ़्तार कोई मैजिक नहीं है बल्कि एक चॉइस है। अगर आप अपनी टीम को इनोवेशन का ईंधन देंगे तो वो रॉकेट की तरह उड़ेंगे। और अगर आप उन्हें पुरानी परंपराओं की बेड़ियों में बांधकर रखेंगे तो वो सिर्फ रेंगते रहेंगे। अब वक्त आ गया है कि आप अपनी लीडरशिप की बैलगाड़ी को छोड़ें और इनोवेशन के जेट विमान में सवार हों। क्योंकि जो तेजी से बदलता है वही इस मार्केट का असली राजा बनता है।
दोस्तो, स्पीड का मतलब सिर्फ भागना नहीं है बल्कि सही दिशा में सही सोच के साथ रफ़्तार पकड़ना है। अगर आप आज भी रुककर सोच रहे हैं तो याद रखिए कोई और आपसे आगे निकल चुका है। इस किताब के ये ३ लेसन्स आपकी लाइफ और करियर को बदल सकते हैं। क्या आप आज से अपनी वर्क लाइफ में स्पीड लाने का वादा करते हैं। कमेंट में लिखकर बताएं कि आप अपनी रफ़्तार बढ़ाने के लिए सबसे पहले क्या बदलेंगे। इस आर्टिकल को अपने उस सुस्त दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जिसे रफ़्तार की सख्त जरूरत है।
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