क्या आप अभी भी मीटिंग में लोगों के नाम भूलकर जोकर बन रहे हैं। बधाई हो। आप अपना करियर खुद ही बर्बाद कर रहे हैं। बिना याददाश्त के आप ऑफिस के फर्नीचर से ज्यादा कुछ नहीं हैं। अगर दिमाग खाली है तो प्रमोशन का सपना देखना छोड़ दीजिये।
आज हम फ्रेंक फेलबरबाम की किताब द बिजनेस ऑफ मेमोरी से ऐसे सीक्रेट्स जानेंगे जो आपके दिमाग को सुपर कंप्यूटर बना देंगे। ये लेसन आपकी प्रोफेशनल लाइफ को पूरी तरह बदल देंगे और आपको एक लीडर बनाएंगे।
लेसन १ : विजुअलाइजेशन और एसोसिएशन की ताकत
मान लीजिये आप एक बहुत बड़ी क्लाइंट मीटिंग में बैठे हैं। क्लाइंट अपना नाम बताता है और दो मिनट बाद आपके दिमाग से वो नाम ऐसे गायब हो जाता है जैसे चुनाव के बाद नेता के वादे। आप वहां बैठे मुस्कुरा रहे हैं पर अंदर ही अंदर आप उसे 'सर' या 'मैम' बोलकर काम चलाने की कोशिश कर रहे हैं। ये सिचुएशन जितनी फनी लगती है उतनी ही खतरनाक आपके करियर के लिए है। फ्रैंक फेलबरबाम कहते हैं कि हमारा दिमाग शब्दों को याद रखने के लिए नहीं बना है। हमारा दिमाग तो फोटोग्राफर है। इसे तस्वीरें पसंद हैं। अगर मैं आपसे कहूँ 'हाथी' तो आपके दिमाग में ह, ा, थ, ी अक्षर नहीं आते। बल्कि एक बड़ी सूंड वाला जानवर आता है। यही है विजुअलाइजेशन का असली जादू।
ज्यादातर लोग जानकारी को रटने की कोशिश करते हैं। ये वही लोग हैं जो एग्जाम से एक रात पहले रट्टा मारते थे और आज ऑफिस की प्रेजेंटेशन भूल जाते हैं। असल में हमारी याददाश्त एक हुक की तरह काम करती है। अगर आपको कोई नई चीज याद रखनी है तो उसे किसी पुरानी और जानी पहचानी चीज से टांग दीजिये। इसे कहते हैं एसोसिएशन। मान लीजिये आपको याद रखना है कि आपके नए बॉस का नाम 'आकाश' है। अब आप बस ये सोचिये कि वो बॉस ऑफिस की छत फाड़कर ऊपर आसमान यानी आकाश में उड़ रहे हैं। ये सुनने में जितना बेवकूफी भरा लगेगा उतना ही जल्दी आपको याद होगा। हमारा दिमाग बोरिंग चीजों को कचरे के डिब्बे में डाल देता है। उसे मसाला चाहिए। उसे ड्रामेबाजी पसंद है।
असल जिंदगी में हम डेटा और नंबर्स के पीछे भागते हैं। लेकिन डेटा को जब तक आप एक मजेदार कहानी या तस्वीर में नहीं बदलेंगे वो आपके दिमाग में टिकेगा नहीं। जैसे अगर आपको सेल्स टारगेट याद रखना है जो कि दस लाख है। तो सोचिये कि आपके ऑफिस के डेस्क पर दस लाख की गड्डियां रखी हैं और उन पर आप सो रहे हैं। ये तस्वीर आपके दिमाग में एक इमोशन पैदा करती है। जहाँ इमोशन आता है वहां मेमोरी अपने आप मजबूत हो जाती है। लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि उनकी याददाश्त कमजोर है। सच तो ये है कि याददाश्त कमजोर नहीं होती बस उसे ट्रेनिंग की जरूरत होती है।
हमारा दिमाग एक जिम की तरह है। जितना आप इसे विजुअलाइज करने के लिए मजबूर करेंगे ये उतना ही शार्प होता जाएगा। अगली बार जब कोई आपसे कुछ कहे तो उसे सुनने के साथ साथ अपनी आंखों के सामने उसकी एक फिल्म चलते हुए देखिये। अगर वो फिल्म कॉमेडी है तो और भी अच्छा है। अजीबोगरीब तस्वीरें सबसे ज्यादा याद रहती हैं। अगर आप किसी को भूलना चाहते हैं तो उसे नॉर्मल तरीके से याद रखिये। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि वो जानकारी आपके दिमाग में लोहे की लकीर बन जाए तो उसे किसी फनी या अजीब चीज से जोड़ दीजिये। ये तकनीक आपको भीड़ से अलग खड़ा कर देगी। जब बाकी लोग अपनी डायरी में नाम ढूंढ रहे होंगे तब आप कॉन्फिडेंस के साथ लोगों को उनके नाम से बुला रहे होंगे। यही एक सुपरचार्ज ब्रेनपावर की शुरुआत है।
लेसन २ : नाम और चेहरों को याद रखने का सिस्टम
इमेजिन कीजिये कि आप एक नेटवर्किंग इवेंट में हैं। एक बंदा आपसे हाथ मिलाता है और अपना नाम बताता है। आप उससे हाथ मिलाते वक्त इतने जोश में होते हैं कि उसका नाम आपके कान के अंदर जाने के बजाय बाहर से ही यू-टर्न ले लेता है। पाँच मिनट बाद जब आप उसे दूसरे दोस्त से मिलवाते हैं तो आप कहते हैं 'भाई इनसे मिलो ये मेरे बहुत खास दोस्त हैं नाम तो जानते ही होगे'। ये जो नाम भूलने वाली बीमारी है ना ये असल में आपकी बेइज्जती कराने का सबसे तेज रास्ता है। फ्रैंक फेलबरबाम कहते हैं कि किसी का नाम भूलना असल में ये मैसेज देता है कि आप उस इंसान को इम्पोर्टेन्ट नहीं समझते। और बिजनेस की दुनिया में लोगों को छोटा महसूस कराना सुसाइड करने जैसा है।
चेहरों को याद रखना तो आसान है क्योंकि वो हमारे सामने होते हैं। लेकिन नाम हवा की तरह उड़ जाते हैं। इसका हल बहुत सिंपल है। जब भी आप किसी से मिलें तो सबसे पहले उसके चेहरे पर कोई एक ऐसी चीज ढूंढें जो सबसे अलग हो। हो सकता है उसकी नाक थोड़ी बड़ी हो या उसकी आंखें बहुत चमकती हों या शायद उसके बाल थोड़े अजीब हों। अब उस खास चीज को उसके नाम के साथ जोड़ दीजिये। अगर उस बंदे का नाम 'शेर सिंह' है और उसकी मूंछें बड़ी हैं तो बस ये सोचिये कि उसकी मूंछों पर एक छोटा सा शेर बैठा है। ये सुनते ही आपको हंसी आएगी और यही हंसी उस नाम को आपके दिमाग में फेविकोल की तरह चिपका देगी।
अक्सर हम नाम इसलिए भूलते हैं क्योंकि हम सुनते ही नहीं हैं। जब कोई अपना नाम बताता है तो हमारा दिमाग ये सोच रहा होता है कि हमें आगे क्या बोलना है। अपनी इस आदत को बदलिए। जैसे ही कोई अपना नाम बताए उसे तुरंत दोहराइये। 'ओह तो आपका नाम राहुल है बहुत अच्छा लगा राहुल जी'। नाम को बार बार बोलने से वो आपके दिमाग के शॉर्ट टर्म मेमोरी से निकलकर लॉन्ग टर्म मेमोरी में चला जाता है। ये कोई जादू नहीं है बल्कि एक साइंस है। लोग अपने नाम से सबसे ज्यादा प्यार करते हैं। जब आप किसी भीड़ भरी मीटिंग में किसी को उसके नाम से पुकारते हैं तो आप अचानक उसकी नजरों में एक जीनियस बन जाते हैं।
कई लोग बहाना बनाते हैं कि भाई मैं तो नाम याद रखने में बहुत कच्चा हूँ। ये कच्चा पक्का कुछ नहीं होता। ये बस आपके आलस का नतीजा है। आपने कभी गौर किया है कि आपको अपने उधार लेने वाले दोस्तों के नाम कभी नहीं भूलते। क्यों। क्योंकि वहां आपका इंटरेस्ट जुड़ा है। अगर आप बिजनेस में आगे बढ़ना चाहते हैं तो हर इंसान को एक करोड़ का चेक समझिये। क्या आप एक करोड़ के चेक पर लिखा नाम भूलेंगे। कभी नहीं। बस यही एटीट्यूड आपको हर मीटिंग में रखना है। चेहरों को गौर से देखिये और नामों को उनके साथ किसी फनी कहानी की तरह जोड़ दीजिये।
प्रोफेशनल लाइफ में ये स्किल आपको एक अलग लेवल पर ले जाएगी। जब आप क्लाइंट के बच्चों के नाम या उसकी पिछली बातों को याद रखते हैं तो वो समझ जाता है कि आप कोई मशीन नहीं बल्कि एक इंसान हैं जो रिश्तों की कदर करता है। याददाश्त बढ़ाना सिर्फ दिमाग का खेल नहीं है बल्कि ये लोगों का दिल जीतने का सबसे बड़ा हथियार है। अगर आप अपनी ब्रेनपावर को सुपरचार्ज करना चाहते हैं तो सबसे पहले इस 'नाम भूलने' के ड्रामे को बंद कीजिये। अपनी आंखों और कानों को एक साथ काम पर लगाइये। जब आप होश में रहकर लोगों से मिलेंगे तो आपका दिमाग खुद ब खुद डेटा स्टोर करने लगेगा।
लेसन ३ : मेंटल फाइलिंग कैबिनेट बनाना
अब बात करते हैं उस सिचुएशन की जब आपका दिमाग कबाड़खाने जैसा बन जाता है। ऑफिस में बॉस ने कुछ डेटा बताया। बीवी ने शाम को सब्जी लाने को कहा। और क्लाइंट ने अपनी फीडबैक दी। शाम होते होते आपके दिमाग में सब कुछ ऐसे मिक्स हो जाता है जैसे संडे मार्केट की भीड़। आप सब्जी लेने जाते हैं तो बॉस का डेटा याद आता है। और जब बॉस के सामने होते हैं तो भिंडी का भाव याद आता है। फ्रैंक फेलबरबाम कहते हैं कि बिना सिस्टम के जानकारी याद रखना वैसा ही है जैसे बिना अलमारी के कमरे में कपड़े फेंक देना। जब पार्टी में जाना होगा तो मोजा कभी नहीं मिलेगा। इसलिए आपको अपने दिमाग के अंदर एक मेंटल फाइलिंग कैबिनेट यानी एक दिमागी अलमारी बनानी होगी।
इस तकनीक को 'लोकस मेथड' भी कहते हैं। ये सुनने में भारी लगता है पर है बहुत सिंपल। अपने घर या ऑफिस के किसी ऐसे रास्ते को चुनिये जिसे आप रोज देखते हैं। जैसे आपका बेडरूम फिर हॉल और फिर किचन। अब जो भी जानकारी आपको याद रखनी है उसे इन जगहों पर रख दीजिये। मान लीजिये आपको एक प्रेजेंटेशन के पाँच पॉइंट्स याद रखने हैं। पहले पॉइंट को अपने बिस्तर पर लेटा दीजिये। दूसरे पॉइंट को सोफे पर बिठा दीजिये। और तीसरे को फ्रिज के अंदर जमा दीजिये। जब आप प्रेजेंटेशन देने खड़े होंगे तो आपको बस अपने घर की उस सैर पर निकलना है। जैसे ही आप फ्रिज खोलेंगे आपको अपना तीसरा पॉइंट याद आ जाएगा। ये आपके दिमाग को एक स्ट्रक्चर देता है जिससे जानकारी इधर उधर नहीं भागती।
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि नोट्स लिख लेने से काम चल जाएगा। भाई साहब डायरी तो अलमारी में पड़ी रह जाती है और दिमाग वहां खाली हाथ खड़ा होता है। असली लीडर वो है जिसके पास जानकारी उसकी उंगलियों पर हो। जब आप इस फाइलिंग सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं तो आप डेटा के गुलाम नहीं बल्कि मालिक बन जाते हैं। ये तकनीक उन लोगों के लिए वरदान है जो कहते हैं कि उन्हें चीजें समय पर याद नहीं आतीं। याददाश्त का मतलब सिर्फ स्टोर करना नहीं है बल्कि सही समय पर उसे बाहर निकालना है। अगर तिजोरी की चाबी खो गई तो अंदर रखे सोने का कोई फायदा नहीं है।
सोचिये कि आपके करियर का ग्राफ कहाँ जाएगा जब आप बिना किसी पेपर के घंटों तक मीटिंग हैंडल कर पाएंगे। लोग आपको चलता फिरता गूगल समझने लगेंगे। और ये सब मुमकिन है अगर आप अपने दिमाग को थोड़ा सलीके से इस्तेमाल करना सीख लें। ये कोई रॉकेट साइंस नहीं है। बस थोड़ी सी प्रैक्टिस और ढेर सारा इमेजिनेशन चाहिए। अपनी याददाश्त को सुपरचार्ज करने का मतलब ये नहीं है कि आप रट्टू तोता बन जाएं। बल्कि इसका मतलब ये है कि आप अपने दिमाग के इंजीनियर बन जाएं। जो जानते हैं कि कौन सी फाइल कहाँ रखी है।
अपनी याददाश्त पर भरोसा करना सीखिये। जब आप खुद को बार बार बोलते हैं कि 'मैं तो भुलक्कड़ हूँ' तो आपका दिमाग भी मान लेता है कि उसे मेहनत करने की जरूरत नहीं है। इस नेगेटिव सोच को कचरे में डालिये। आप एक सुपरचार्ज ब्रेनपावर के साथ पैदा हुए हैं। बस आपने उस पर धूल जमने दी है। इन तकनीकों का इस्तेमाल कीजिये और देखिये कैसे आप ऑफिस में और अपनी जिंदगी में एक चमकता हुआ सितारा बन जाते हैं। याद रखिये सफल वही है जिसकी याददाश्त सही है। क्योंकि जो याद रखता है वही राज करता है।
तो दोस्तों, क्या आप तैयार हैं अपने दिमाग के उस पुराने जंग लगे ताले को खोलने के लिए। याददाश्त कोई गिफ्ट नहीं है जो कुछ ही लोगों को मिलता है। ये एक हुनर है जिसे आप आज से ही सीख सकते हैं। नीचे कमेंट्स में लिखिये कि आप आज से कौन सी एक चीज याद रखने की प्रैक्टिस करेंगे। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो हमेशा चाबियां रखकर भूल जाता है। चलिए साथ मिलकर अपने ब्रेनपावर को सुपरचार्ज करते हैं।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#MemoryMastery #CareerGrowth #BrainPower #SuccessTips #BookSummary
_