अगर आपको लगता है कि आप बहुत मेहनत कर रहे हैं और फिर भी लाइफ में एवरेज ही रहेंगे तो मुबारक हो आप बिल्कुल सही हैं। स्टीव जॉब्स की यह बातें न जानकर आप अपनी तरक्की का गला घोंट रहे हैं और दुनिया आपका मजाक उड़ाती रहेगी।
आज हम वाल्टर आइजैकसन की लिखी स्टीव जॉब्स की बायोग्राफी से वो राज खोलेंगे जिन्होंने एक कॉलेज ड्रॉपआउट को दुनिया का सबसे बड़ा विजनरी बना दिया। यह ३ लेसन्स आपकी सोच और काम करने का तरीका हमेशा के लिए बदल देंगे।
लेसन १ : सादगी और फोकस का जादू
आज के जमाने में हम सबको सब कुछ चाहिए। हमें मल्टीटास्किंग का ऐसा भूत चढ़ा है कि हम एक साथ दस काम करना चाहते हैं और सच तो यह है कि अंत में हम एक भी काम ढंग से नहीं कर पाते। स्टीव जॉब्स का सबसे पहला और सबसे बड़ा लेसन यही है कि सादगी यानी सिंप्लिसिटी ही असली खूबसूरती है। जॉब्स का मानना था कि किसी चीज को सिंपल बनाना उसे कॉम्प्लिकेटेड बनाने से कहीं ज्यादा मुश्किल काम है।
जरा सोचिए आप एक रेस्टोरेंट में जाते हैं और वहां मेन्यू कार्ड किसी महाभारत के ग्रंथ जैसा मोटा है। आप कंफ्यूज हो जाते हैं और अंत में वही पनीर टिक्का आर्डर करते हैं जो आप पिछले दस साल से खा रहे हैं। स्टीव जॉब्स को यह कंफ्यूजन नफरत की हद तक नापसंद था। जब वह १९९७ में एप्पल में वापस लौटे तो कंपनी सैकड़ों प्रोडक्ट्स बना रही थी। उन्होंने मीटिंग बुलाई और एक बड़ा सा व्हाइटबोर्ड लिया। उन्होंने उस पर एक ग्रिड बनाया और कहा कि हमें केवल चार प्रोडक्ट्स बनाने हैं। बाकी सब कचरा है।
यह सुनने में बड़ा कूल लगता है लेकिन असल जिंदगी में 'ना' कहना सबसे मुश्किल काम है। हम अपने दोस्तों को 'ना' नहीं कह पाते जो हमें फालतू की पार्टी में बुलाते हैं। हम उन मोबाइल एप्स को 'ना' नहीं कह पाते जो हमारा कीमती वक्त चाट रही हैं। जॉब्स का फोकस ऐसा था कि वह एक समय पर सिर्फ एक ही चीज को अपना पूरा ब्रह्मांड मान लेते थे। उनका कहना था कि फोकस का मतलब उन चीजों को 'हां' कहना नहीं है जिन्हें आप चुनते हैं बल्कि उन सौ बेहतरीन आइडियाज को 'ना' कहना है जो आपका ध्यान भटका सकते हैं।
एप्पल के माउस को ही देख लीजिए। उस वक्त बाजार में माउस ऐसे आते थे जिनमें तीन चार बटन होते थे जैसे कोई स्पेसशिप का कंट्रोल पैनल हो। जॉब्स ने कहा मुझे सिर्फ एक बटन चाहिए। इंजीनियर सर पकड़ कर बैठ गए कि भाई यह कैसे होगा। पर जॉब्स अड़े रहे। नतीजा क्या हुआ। एक ऐसा प्रोडक्ट जो एक छोटा बच्चा भी बिना किसी ट्रेनिंग के चला सकता है।
अक्सर हम अपनी लाइफ में भी यही गलती करते हैं। हम सोचते हैं कि अगर हमारे पास बहुत सारे ऑप्शंस होंगे तो हम ज्यादा सफल होंगे। लेकिन असलियत में ऑप्शंस का बोझ हमें आगे बढ़ने से रोकता है। अगर आप एक स्टूडेंट हैं तो आप दस कोर्स एक साथ करने की कोशिश करते हैं और मास्टर किसी में नहीं बन पाते। अगर आप एक बिजनेसमैन हैं तो आप हर बहती गंगा में हाथ धोना चाहते हैं। जॉब्स आपको यह सिखाते हैं कि अपनी लाइफ से उस एक्स्ट्रा शोर को हटाओ। जो जरूरी नहीं है उसे डिलीट करो। जब आपकी लाइफ सिंपल होगी तभी आपका दिमाग उस एक चीज पर लेजर जैसा फोकस कर पाएगा जो आपको इतिहास के पन्नों में दर्ज कराएगी।
सादगी का मतलब कंजूसी नहीं है बल्कि इसका मतलब है क्लैरिटी। जॉब्स के घर में फर्नीचर तक नहीं होता था क्योंकि उन्हें कोई भी चीज इतनी परफेक्ट नहीं लगती थी कि वह उनके घर में जगह बना सके। अब इसका मतलब यह नहीं कि आप भी अपने घर का सोफा बाहर फेंक दें। इसका मतलब यह है कि आप अपनी एनर्जी केवल वहां लगाएं जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। याद रखिए जब आप हर जगह होने की कोशिश करते हैं तो आप कहीं नहीं पहुंच पाते। स्टीव जॉब्स ने एप्पल को दुनिया की सबसे कीमती कंपनी इसलिए बनाया क्योंकि उन्होंने 'कम' में 'ज्यादा' देखा।
लेसन २ : परफेक्शन के लिए पागलपन
स्टीव जॉब्स का दूसरा सबसे बड़ा लेसन है क्वालिटी के प्रति उनका अटूट जुनून। हम में से ज्यादातर लोग 'चलता है' वाले एटीट्यूड के साथ जीते हैं। अगर ऑफिस की फाइल में कोई छोटी सी गलती रह गई तो हम सोचते हैं कि अरे कौन सा किसी को पता चलने वाला है। लेकिन जॉब्स के लिए यह सोच एक पाप के बराबर थी। उनके पिता ने उन्हें सिखाया था कि अगर आप एक अलमारी बना रहे हैं तो उसकी पीछे की दीवार भी उतनी ही अच्छी होनी चाहिए जितनी कि सामने की। भले ही उसे कोई न देखे लेकिन आपको तो पता है कि वहां क्या है।
यही पागलपन जॉब्स ने एप्पल के हर प्रोडक्ट में डाला। जब ओरिजिनल मैक कंप्यूटर बन रहा था तो उन्होंने सर्किट बोर्ड के अंदरूनी हिस्से को देखा और इंजीनियरों पर भड़क गए। इंजीनियर ने कहा कि स्टीव यह बोर्ड तो कंप्यूटर के अंदर बंद रहेगा इसे कोई ग्राहक कभी नहीं देखेगा। इस पर जॉब्स का जवाब था कि एक सच्चा कलाकार अपनी पेंटिंग के पीछे भी फिनिशिंग उतनी ही जबरदस्त रखता है जितनी सामने। उन्हें हर बारीक चीज में परफेक्शन चाहिए था क्योंकि वह मानते थे कि काम आपकी पहचान होता है।
जरा अपनी लाइफ को देखिए। क्या आप अपना काम बस खत्म करने के लिए करते हैं या उसे बेस्ट बनाने के लिए। हम अक्सर सोचते हैं कि अगर बॉस नहीं देख रहा या क्लाइंट को समझ नहीं आ रहा तो हम थोड़ी बहुत मिलावट या लापरवाही कर सकते हैं। लेकिन यही वो जगह है जहाँ एक आम इंसान और स्टीव जॉब्स के बीच का फासला शुरू होता है। जॉब्स को पता था कि अगर आप अंदर से खोखले हैं तो बाहर की चमक ज्यादा दिन नहीं टिकेगी।
उनके परफेक्शन का आलम यह था कि आईफोन के लॉन्च से ठीक पहले उन्होंने स्क्रीन का मटेरियल बदलवा दिया क्योंकि उन्हें डर था कि चाबियों से उस पर स्क्रैच पड़ जाएंगे। पूरी टीम की रातों की नींद उड़ गई पर जॉब्स को फर्क नहीं पड़ा। उन्हें पता था कि एक घटिया एक्सपीरियंस यूजर का भरोसा तोड़ सकता है। वह कहते थे कि डिजाइन सिर्फ यह नहीं है कि चीज दिखती कैसी है बल्कि डिजाइन यह है कि चीज काम कैसे करती है।
इस लेवल का परफेक्शन लाने के लिए आपको थोड़ा सा सनकी होना पड़ता है। लोग आपको पागल कहेंगे आपको खडूस कहेंगे और शायद आपका साथ छोड़ देंगे। लेकिन अंत में जो चीज आप बनाएंगे वह एक लेजेंड होगी। आज दुनिया में करोड़ों फोंस हैं पर एप्पल का एक अलग ही रुतबा है क्योंकि उन्होंने उन छोटी छोटी चीजों पर ध्यान दिया जिन्हें बाकी कंपनियां बेकार समझकर छोड़ देती थीं।
सफलता का असली मंत्र यही है कि आप जो भी करें उसे दुनिया का सबसे बेहतरीन काम बनाने की कोशिश करें। चाहे आप झाड़ू लगा रहे हों या कोई बड़ा सॉफ्टवेयर बना रहे हों आपकी छाप उस पर ऐसी होनी चाहिए कि देखने वाला दंग रह जाए। परफेक्शन कोई मंजिल नहीं है बल्कि यह एक सफर है जो हर दिन खुद को बेहतर बनाने से शुरू होता है। जब आप अपनी क्वालिटी से समझौता करना बंद कर देते हैं तो दुनिया आपके कदमों में झुकने लगती है।
लेसन ३ : रियलिटी डिस्टॉर्शन फील्ड
स्टीव जॉब्स का तीसरा और सबसे रहस्यमयी लेसन है रियलिटी डिस्टॉर्शन फील्ड। यह सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है पर यह असल में उनकी वो जादुई शक्ति थी जिससे वह लोगों से वो काम करवा लेते थे जो नामुमकिन लगते थे। उनके साथ काम करने वाले लोग कहते थे कि जब जॉब्स आपके सामने होते थे तो वह अपनी बातों और यकीन से हकीकत को ही बदल देते थे। वह आपको यह मनवा देते थे कि आप दो साल का काम दो महीने में कर सकते हैं।
हकीकत में हम सब अपनी सीमाओं के कैदी हैं। हम कहते हैं कि मुझसे यह नहीं होगा क्योंकि मेरे पास पैसे नहीं हैं या मेरे पास उतनी अच्छी डिग्री नहीं है। हम खुद को एक पिंजरे में बंद कर लेते हैं जिसे हम हकीकत कहते हैं। लेकिन जॉब्स का मानना था कि दुनिया की हर चीज उन लोगों ने बनाई है जो आपसे ज्यादा स्मार्ट नहीं थे। तो फिर आप इसे क्यों नहीं बदल सकते। जब पहली बार आईफोन का ग्लास बनाने की बात आई तो कोर्निंग कंपनी के मालिक ने कहा कि हमारे पास ऐसी टेक्नोलॉजी ही नहीं है और इसमें सालों लगेंगे। जॉब्स ने उनकी आंखों में आंखें डालकर कहा कि आप यह कर सकते हैं और मुझे यह छह महीने में चाहिए। और जानते हैं क्या हुआ। उन्होंने उसे बना दिया।
यही होता है जब आप अपनी हार मानने से इनकार कर देते हैं। हमारे आसपास के लोग अक्सर हमें बताते हैं कि अपनी औकात में रहो और ज्यादा बड़े सपने मत देखो। वह हमें अपनी 'रियलिटी' में खींचना चाहते हैं क्योंकि वह खुद कुछ बड़ा करने से डरते हैं। जॉब्स सिखाते हैं कि अगर आप सच में कुछ बदलना चाहते हैं तो आपको पहले यह मानना होगा कि नियम आपके लिए नहीं बने हैं।
सोचिए अगर आप एक छोटा सा स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं और सब कह रहे हैं कि मार्केट खराब है। क्या आप उनकी बात मानकर घर बैठ जाएंगे या अपनी जिद पर अड़े रहेंगे। जॉब्स की जिद ही थी जिसने म्यूजिक इंडस्ट्री को आईट्यून्स से बदला और फोन की दुनिया को आईफोन से। उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता था कि दुनिया क्या कहती है। वह बस अपनी धुन के पक्के थे।
इसका मतलब यह नहीं कि आप हवा में महल बनाएं। इसका मतलब यह है कि आप अपनी काबिलियत पर इतना भरोसा करें कि सामने वाली दीवार भी आपके लिए रास्ता छोड़ दे। जब आप अपनी सोच को बड़ा करते हैं तो पूरी कायनात आपकी मदद के लिए मजबूर हो जाती है। जॉब्स का कहना था कि जो लोग इतने पागल होते हैं कि उन्हें लगता है कि वे दुनिया बदल सकते हैं अक्सर वही लोग दुनिया बदलते हैं।
स्टीव जॉब्स की कहानी सिर्फ एक अमीर आदमी की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे इंसान की दास्तान है जिसने अपनी गलतियों से सीखा और हार को कभी अपना अंत नहीं माना। चाहे वह अपनी ही कंपनी से निकाला जाना हो या अपनी बीमारी से लड़ना उन्होंने हर पल को पूरी शिद्दत से जिया। उनके यह ३ लेसन्स सादगी परफेक्शन और खुद पर यकीन हमें याद दिलाते हैं कि हम यहाँ सिर्फ वक्त काटने नहीं आए हैं बल्कि ब्रह्मांड में अपनी एक अलग पहचान बनाने आए हैं।
आज ही अपनी लाइफ का वो एक फालतू काम चुनिए जिसे आप कल से बंद कर देंगे। अपनी क्वालिटी को एक लेवल ऊपर ले जाइए और खुद से कहिए कि आप वो कर सकते हैं जो दुनिया को नामुमकिन लगता है। क्योंकि कल कभी नहीं आता जो है बस आज और अभी है।
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