Strategy Maps (Hindi)


अगर आपको लगता है कि आपकी कंपनी या बिजनेस सिर्फ बैंक बैलेंस से चलता है तो बधाई हो आप एक बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। बिना स्ट्रैटेजी मैप के बिजनेस चलाना वैसा ही है जैसे बिना गूगल मैप्स के मुंबई की ट्रैफिक में घुसना। आप भटकेंगे भी और टाइम भी वेस्ट करेंगे।

इस ब्लॉग में हम रोबर्ट कपलान और डेविड नॉर्टन की बुक स्ट्रैटेजी मैप्स से वो ३ बड़े लेसन सीखेंगे जो आपके बिजनेस और करियर की दिशा बदल देंगे। चलिए इन सीक्रेट्स को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : इनटेंजिबल एसेट्स ही असली खजाना हैं

क्या आपको भी लगता है कि आपकी कंपनी की असली वैल्यू सिर्फ उन मशीनों, कंप्यूटरों या ऑफिस की बिल्डिंग में है जो बैलेंस शीट पर चमकते हैं। अगर हाँ, तो आप अभी भी 1990 वाले दौर में जी रहे हैं। रोबर्ट कपलान और डेविड नॉर्टन हमें इस बुक में बहुत ही प्यार से समझाते हैं कि आज के जमाने में जो चीज़ें दिखती नहीं हैं, वही असल में नोट छापती हैं। इनटेंजिबल एसेट्स यानी वो टैलेंट, वो वर्क कल्चर और वो डेटा जिसे आप अक्सर इग्नोर कर देते हैं। सोचिए, एक रेस्टोरेंट है जिसके पास दुनिया की सबसे महँगी किचन है, लेकिन शेफ का मूड खराब है और वेटर को बात करने की तमीज़ नहीं है। क्या आप वहाँ दोबारा जाएंगे। बिल्कुल नहीं। यहाँ वो महँगी मशीनें धरी की धरी रह गईं क्योंकि 'ह्यूमन कैपिटल' यानी शेफ का हुनर गायब था।

ज्यादातर लोग अपने बिजनेस में सिर्फ मशीनों और पैसों का हिसाब रखते हैं। लेकिन स्ट्रैटेजी मैप्स कहता है कि अगर आपका स्टाफ खुश नहीं है या उन्हें नई टेक्नोलॉजी चलानी नहीं आती, तो आपकी ग्रोथ का इंजन सीज हो चुका है। लोग सोचते हैं कि ट्रेनिंग पर पैसा खर्च करना बर्बादी है। वो सोचते हैं कि एम्प्लॉई सीख कर भाग गया तो। लेकिन भाई साहब, जरा सोचिए कि अगर वो कुछ नहीं सीखा और आपकी कंपनी में ही टिका रहा, तो आपका क्या होगा। ये इनटेंजिबल एसेट्स ही वो बीज हैं जिनसे कल को पैसों का पेड़ उगेगा। अगर आपके पास बेहतरीन डेटाबेस है लेकिन उसे एनालाइज करने वाला दिमाग नहीं है, तो वो डेटा रद्दी के भाव भी नहीं बिकेगा।

हमें समझना होगा कि इंफॉर्मेशन कैपिटल और आर्गेनाइजेशनल कैपिटल कोई किताबी शब्द नहीं हैं। ये वो टूल्स हैं जो आपकी स्ट्रैटेजी को जमीन पर उतारते हैं। जब एक एम्प्लॉई को पता होता है कि उसका काम कंपनी के बड़े विजन में कैसे फिट होता है, तो वो सिर्फ ड्यूटी नहीं करता, वो परफॉर्म करता है। आप अपनी टीम को सिर्फ सैलरी देकर उनका वक्त खरीद सकते हैं, उनका जुनून नहीं। और वो जुनून ही इनटेंजिबल एसेट है।

अक्सर बॉस लोग अपनी तिजोरी की चाबी तो संभाल कर रखते हैं, लेकिन अपनी टीम के मोटिवेशन की चाबी कहीं खो देते हैं। आप लाखों का सॉफ्टवेयर ले आते हैं लेकिन उसे चलाने वाले को इज्जत देना भूल जाते हैं। ये वैसी ही बात है जैसे आपने एक चमचमाती फेरारी खरीदी हो लेकिन उसमें पेट्रोल की जगह केरोसिन डाल रहे हों। गाड़ी चलेगी नहीं, सिर्फ धुआं देगी। इसलिए अपनी कंपनी के न दिखने वाले एसेट्स को पहचानिए। उन्हें नर्चर करिए। क्योंकि जब आपकी टीम की नॉलेज बढ़ती है, तो आपके बैंक का बैलेंस अपने आप बढ़ने लगता है। यही वो पहला कदम है जो एक साधारण कंपनी को एक लेजेंडरी ब्रांड बनाता है।


लेसन २ : वैल्यू क्रिएशन का असली रोडमैप

बहुत से लोग बिजनेस को एक लॉटरी की तरह देखते हैं। उनको लगता है कि बस किस्मत चमकेगी और कस्टमर लाइन लगा देंगे। लेकिन असलियत में कस्टमर के दिल तक पहुंचने का रास्ता आपकी कंपनी के इंटरनल प्रोसेस से होकर गुजरता है। स्ट्रैटेजी मैप्स हमें सिखाता है कि कस्टमर को सिर्फ डिस्काउंट नहीं चाहिए। उसे चाहिए एक बेहतरीन एक्सपीरियंस। अब सोचिए कि आप एक ऑनलाइन स्टोर चलाते हैं। आपने वेबसाइट तो बड़ी चकाचक बना ली। लेकिन जब ऑर्डर आता है तो आपका गोदाम वाला लड़का सो रहा होता है। डिलीवरी में दस दिन लग जाते हैं। क्या वो कस्टमर दोबारा आएगा। बिल्कुल नहीं। यहाँ आपकी मार्केटिंग की मेहनत मिट्टी में मिल गई क्योंकि आपका इंटरनल प्रोसेस ही पंचर था।

एक स्ट्रैटेजी मैप आपको दिखाता है कि कैसे एक अच्छी ट्रेनिंग से आपका एम्प्लॉई बेहतर काम करता है। फिर उस बेहतर काम से आपकी सर्विस की क्वालिटी बढ़ती है। और जब क्वालिटी बढ़ती है, तो कस्टमर खुश होकर चार लोगों को और बताता है। ये एक चेन रिएक्शन है। लेकिन अक्सर लोग इस चैन को बीच में से काट देते हैं। वो सिर्फ प्रॉफिट पर नजर रखते हैं और ये भूल जाते हैं कि प्रॉफिट तो आखिरी रिजल्ट है। उससे पहले की जो मेहनत है, वो उन इंटरनल ऑपरेशन्स में छिपी है जिन्हें हम अक्सर बोरिंग समझकर छोड़ देते हैं।

अगर आपका प्रोडक्ट दुनिया में सबसे अच्छा है लेकिन आपकी सेल्स टीम को बात करना नहीं आता, तो आप रेस शुरू होने से पहले ही हार चुके हैं। इसे ऐसे समझिये जैसे आपने एक बहुत ही स्वादिष्ट बिरयानी बनाई हो लेकिन उसे प्लास्टिक की थैली में सर्व कर रहे हों। स्वाद अपनी जगह है, लेकिन प्रेजेंटेशन और प्रोसेस भी तो कुछ होता है। स्ट्रैटेजी मैप्स का दूसरा लेसन यही है कि आपको अपने ऑपरेशन्स को कस्टमर की नजर से देखना होगा। क्या आपकी कंपनी के अंदर का काम इतना स्मूथ है कि वो बाहर वैल्यू क्रिएट कर सके। अगर जवाब ना है, तो आप सिर्फ आग बुझाने का काम कर रहे हैं, बिजनेस बढ़ाने का नहीं।

ज्यादातर बिजनेसमैन को लगता है कि अगर वो दिन भर बिजी हैं, तो वो बहुत काम कर रहे हैं। भाई साहब, कोल्हू का बैल भी दिन भर बिजी रहता है, लेकिन वो पहुँचता कहीं नहीं है। आपको ये देखना होगा कि आपका कौन सा प्रोसेस कस्टमर के लिए वैल्यू बना रहा है। क्या आप इनोवेशन पर ध्यान दे रहे हैं या बस वही पुराना घिसा-पिटा माल बेच रहे हैं। जब आप अपने इंटरनल प्रोसेस को अपनी स्ट्रैटेजी के साथ एलाइन करते हैं, तो जादू होता है। तब आपको कस्टमर के पीछे नहीं भागना पड़ता, बल्कि कस्टमर खुद आपकी क्वालिटी और सर्विस का दीवाना हो जाता है। यही वो सीक्रेट सॉस है जो बड़े ब्रांड्स को छोटा होने से बचाता है।


लेसन ३ : एलाइनमेंट और एग्जीक्यूशन का जादू

क्या आपने कभी ऐसी नौका देखी है जिसमें दस लोग बैठे हों और हर कोई अलग-अलग दिशा में चप्पू चला रहा हो। ऐसी नौका कहीं पहुँचती नहीं है, बस गोल-गोल घूमती रहती है और अंत में डूब जाती है। यही हाल उन कंपनियों का होता है जहाँ बॉस को तो पता है कि कहाँ जाना है, लेकिन उसकी टीम को लगता है कि उन्हें बस शाम के 6 बजने का इंतज़ार करना है। स्ट्रैटेजी मैप्स का तीसरा और सबसे जरूरी लेसन है एलाइनमेंट। इसका मतलब है कि चपरासी से लेकर CEO तक, हर किसी को पता होना चाहिए कि असली गोल क्या है। वरना होता ये है कि मार्केटिंग टीम चाँद पर जाने की तैयारी कर रही होती है और सेल्स टीम अभी तक साइकिल के टायर में हवा भर रही होती है।

एग्जीक्यूशन की सबसे बड़ी बीमारी है 'कम्युनिकेशन गैप'। बड़े-बड़े ऑफिसेस में मीटिंग्स तो घंटों चलती हैं, लेकिन मीटिंग के बाद किसी को याद नहीं रहता कि करना क्या है। लोग भारी-भरकम शब्द बोलते हैं जैसे सिनर्जी और ऑप्टिमाइजेशन, लेकिन असल में किसी को ये नहीं पता होता कि उनके आज के एक काम से कंपनी का क्या फायदा होगा। अगर आपकी टीम को अपनी जिम्मेदारी का अंदाजा नहीं है, तो आपकी स्ट्रैटेजी सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है जिसे रद्दी वाला भी नहीं खरीदेगा। आप अपनी टीम को सिर्फ ये मत बताइए कि क्या करना है, उन्हें ये समझाइए कि वो ये काम क्यों कर रहे हैं। जब 'क्यों' साफ होता है, तो 'कैसे' अपने आप निकल आता है।

मान लीजिये आप एक सॉफ्टवेयर कंपनी चलाते हैं। कोडिंग करने वाले को लगता है कि उसका काम बस बग्स ठीक करना है। लेकिन अगर उसे ये पता चले कि उसके एक छोटे से सुधार से हज़ारों कस्टमर्स का टाइम बच रहा है, तो उसके काम करने का तरीका बदल जाएगा। यही एलाइनमेंट का असली जादू है। लोग अक्सर सोचते हैं कि स्ट्रैटेजी बनाना सबसे मुश्किल काम है। नहीं भाई साहब, स्ट्रैटेजी तो कोई भी बना लेगा, असली खेल तो उसे लागू करने में है। दुनिया उन लोगों से भरी पड़ी है जिनके पास बेहतरीन आइडियाज थे, लेकिन उनके पास एक एलाइंड टीम नहीं थी जो उस आईडिया को हकीकत बना सके।

जब पूरी आर्गेनाइजेशन एक सुर में गाती है, तभी संगीत पैदा होता है, वरना सिर्फ शोर मचता है। स्ट्रैटेजी मैप आपको वो सुर पकड़ना सिखाता है। ये आपको बताता है कि कैसे आपके लर्निंग एंड ग्रोथ के लेसन आपके इंटरनल प्रोसेस को मजबूत करते हैं, जिससे कस्टमर खुश होता है और अंत में आपकी फाइनेंशियल कंडीशन चमकने लगती है। ये सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। अगर एक भी कड़ी कमजोर हुई, तो पूरी जंजीर टूट जाएगी। इसलिए अपनी टीम के हर मेम्बर को अपनी स्ट्रैटेजी का हिस्सा बनाइये। उन्हें महसूस कराइए कि वो सिर्फ एक मशीन के पुर्जे नहीं हैं, बल्कि वो इस जीत के बराबर के हकदार हैं। जब इरादे नेक और टीम एक हो, तो कामयाबी को आपके पास आना ही पड़ता है।


दोस्तों, स्ट्रैटेजी बनाना सिर्फ दिमाग का खेल नहीं है, ये अपनी टीम और अपने रिसोर्सेज को सही दिशा देने का हुनर है। आज ही बैठिये और सोचिये कि क्या आपकी टीम को आपका विजन पता है। अगर नहीं, तो उनसे बात कीजिये और अपना खुद का स्ट्रैटेजी मैप तैयार कीजिये। अगर आपको ये लेसन काम के लगे, तो इस ब्लॉग को उन लोगों के साथ शेयर कीजिये जो बिजनेस में कुछ बड़ा करना चाहते हैं। कमेंट्स में बताइए कि आपकी कंपनी का सबसे बड़ा इनटेंजिबल एसेट क्या है। चलिए मिलकर ग्रोथ की नई कहानी लिखते हैं।

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