The 1-Page Marketing Plan (Hindi)


अगर आपको लगता है कि रेंडम फेसबुक एड्स चलाकर आप अंबानी बन जाएंगे तो मुबारक हो आप अपनी मेहनत की कमाई नाली में बहा रहे हैं। बिना मार्केटिंग प्लान के बिजनेस करना वैसा ही है जैसे बिना मैप के जंगल में खजाना ढूंढना। सच तो यह है कि आपका कंपटीशन आपसे ज्यादा पैसे कमा रहा है क्योंकि उनके पास प्लान है और आपके पास सिर्फ उम्मीद।

लेकिन फिक्र मत करिए। आज हम एलन डिब की बुक द १ पेज मार्केटिंग प्लान से वो सीक्रेट्स समझेंगे जो आपके बिजनेस को जीरो से हीरो बना देंगे। चलिए इन ३ पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : द बिफोर फेज - अपने असली टारगेट को पहचानो और सही जाल बिछाओ

ज्यादातर लोग बिजनेस शुरू करते ही हर किसी को अपना सामान बेचने निकल पड़ते हैं। उन्हें लगता है कि पूरी दुनिया ही उनकी कस्टमर है। भाई साहब अगर आप सबको खुश करने की कोशिश करेंगे तो आप किसी को भी खुश नहीं कर पाएंगे। मार्केटिंग का सबसे पहला और कड़वा सच यही है कि आपका प्रोडक्ट सबके लिए नहीं है। एलन डिब कहते हैं कि आपको अपने मार्केट का एक छोटा सा टुकड़ा चुनना होगा जिसे निश कहते हैं। इसे ऐसे समझिए कि आप एक गहरे समंदर में कांटा डालकर बैठे हैं और सोच रहे हैं कि कोई भी मछली फंस जाए। लेकिन समझदार शिकारी पहले यह देखता है कि उसे कौन सी मछली चाहिए और उस मछली को कौन सा चारा पसंद है। अगर आप शाकाहारी इंसान को मटन बिरयानी बेचने की कोशिश करेंगे तो वो आपको गालियां ही देगा चाहे आपकी बिरयानी कितनी ही लाजवाब क्यों न हो।

मान लीजिए कि आप एक जिम खोलते हैं। अब अगर आप शहर के हर इंसान को पंपलेट बाटेंगे तो आधे लोग तो उसे समोसे रखने के काम में लेंगे। लेकिन अगर आप सिर्फ उन लोगों को टारगेट करें जिनका वजन १०० किलो से ऊपर है और जो घुटनों के दर्द से परेशान हैं तो आपका मैसेज उनके दिल पर जाकर लगेगा। इसे कहते हैं टारगेट मार्केट चुनना। जब आप अपनी निश चुन लेते हैं तो आप एक साधारण डॉक्टर नहीं बल्कि एक स्पेशलिस्ट सर्जन बन जाते हैं। और आपको तो पता ही है कि दुनिया में जनरल डॉक्टर से ज्यादा फीस एक स्पेशलिस्ट की होती है।

अगला कदम है अपना मैसेज तैयार करना। आपका मैसेज ऐसा होना चाहिए कि कस्टमर को लगे कि आप उसकी आत्मा की आवाज सुन रहे हैं। लोग फीचर्स नहीं खरीदते लोग फायदे खरीदते हैं। उन्हें यह मत बताइए कि आपके साबुन में नीम और तुलसी है। उन्हें यह बताइए कि इसे लगाने के बाद उनकी शक्ल चांद जैसी चमकेगी और लोग उन्हें मुड़ मुड़कर देखेंगे। अगर आपका मैसेज बोरिंग है तो लोग उसे ऐसे इग्नोर करेंगे जैसे आप यूट्यूब पर आने वाले एड्स को करते हैं। आपको एक ऐसा ऑफर बनाना होगा जिसे ठुकराना कस्टमर के लिए बेवकूफी लगे। याद रखिए कि लोग लॉजिक से नहीं बल्कि इमोशन से चीजें खरीदते हैं।

सोचिए उस लड़के के बारे में जो अपनी क्रश को इम्प्रेस करना चाहता है। वो पूरे कॉलेज की लड़कियों को गुलाब नहीं बांटता। वो सिर्फ अपनी क्रश की पसंद और नापसंद पर रिसर्च करता है। उसे पता होता है कि उसे चॉकलेट पसंद है या किताबें। वो सही वक्त पर सही बात बोलता है और गेम जीत जाता है। यही मार्केटिंग है। अगर आप बिना सोचे समझे सबको मैसेज भेज रहे हैं तो आप मार्केटिंग नहीं कर रहे बल्कि आप सिर्फ शोर मचा रहे हैं। और शोर मचाने वालों को लोग अक्सर पागल समझते हैं। इसलिए पहले रुकिए और सोचिए कि आपका असली कस्टमर कौन है और उसकी सबसे बड़ी तकलीफ क्या है। जब आप उसकी तकलीफ का इलाज बन जाते हैं तो पैसा अपने आप आपके पीछे भागता है। यह पहला कदम आपके बिजनेस की नीव है। अगर नीव कमजोर हुई तो आपकी मार्केटिंग की बिल्डिंग पहली बारिश में ही ढह जाएगी।


लेसन २ : द ड्यूरिंग फेज - लीड्स को पालना सीखो और जबरदस्ती पीछा मत करो

जब आपने सही कस्टमर चुन लिया है तो अब बारी आती है उन्हें अपने जाल में फंसाने की। लेकिन ठहरिए। यहाँ जाल का मतलब यह नहीं कि आप उनके पीछे पड़ जाएं। इंडिया में मार्केटिंग का मतलब लोग यह समझते हैं कि किसी को भी फोन मिलाओ और बोलो कि सर क्या आप पर्सनल लोन लेना चाहेंगे। भाई साहब उसे लोन नहीं चाहिए उसे शांति चाहिए। एलन डिब कहते हैं कि आपको लीड कैप्चर करनी चाहिए न कि डायरेक्ट सेल की भीख मांगनी चाहिए। इसे आप डेटिंग की तरह समझिए। क्या आप किसी अजनबी से पहली बार मिलते ही उसे शादी के लिए प्रपोज कर देते हैं। अगर आप ऐसा करेंगे तो आपको शादी का लड्डू नहीं बल्कि पुलिस के डंडे मिलेंगे। मार्केटिंग में भी जब आप किसी को पहली बार अपना एड दिखाते हैं और सीधा सेल करने की कोशिश करते हैं तो कस्टमर वहां से नौ दो ग्यारह हो जाता है।

आपका काम है कस्टमर का नाम और नंबर या ईमेल हासिल करना। इसके लिए आपको उन्हें कुछ फ्री में देना होगा जिसे हम लीड मैग्नेट कहते हैं। जैसे कोई फ्री ई-बुक या कोई काम की वीडियो। जब एक बार उनका डेटा आपके पास आ गया तो अब शुरू होता है नर्चरिंग का असली खेल। आपको उनके साथ रिश्ता बनाना है। उन्हें बार-बार याद दिलाना है कि आप उनकी लाइफ की प्रॉब्लम सॉल्व कर सकते हैं। लेकिन यह काम बड़ी खूबसूरती से करना होगा। अगर आप हर आधे घंटे में उन्हें मैसेज करेंगे तो वो आपको ब्लॉक कर देंगे। आपको उनके लिए एक ऐसी वैल्यू क्रिएट करनी है कि वो खुद आपके अगले मैसेज का इंतजार करें। लोग उन पर भरोसा करते हैं जो उन्हें कुछ सिखाते हैं या उनकी मदद करते हैं।

मान लीजिए आपका कोई ऑनलाइन कोर्स है। अब आप सीधा १० हजार का कोर्स बेचेंगे तो कोई नहीं खरीदेगा। लेकिन अगर आप पहले ५ दिन की फ्री वर्कशॉप देते हैं तो लोग खुशी-खुशी आएंगे। उन ५ दिनों में आप उन्हें अपनी नॉलेज से इम्प्रेस करते हैं। आप उन्हें दिखाते हैं कि आप हवा में बातें नहीं कर रहे बल्कि आपको अपना काम आता है। जब ५ दिन पूरे होते हैं तो कस्टमर खुद आकर पूछता है कि सर आगे सीखने के लिए क्या करना होगा। यहाँ आपने उसे बेचा नहीं बल्कि उसने आपसे खरीदा है। यही एक प्रोफेशनल और एक नौसिखिए मार्केटर में फर्क होता है। नौसिखिया कस्टमर के पीछे भागता है और प्रोफेशनल कस्टमर को अपने पीछे भगाता है।

सर्कस के शेर और जंगली शेर में बड़ा अंतर होता है। सर्कस का शेर डंडे के डर से काम करता है लेकिन जंगली शेर अपनी मर्जी से शिकार करता है। आपको अपने कस्टमर को डराना या मजबूर नहीं करना है। आपको उनके लिए एक ऐसा एनवायरनमेंट बनाना है जहाँ उन्हें लगे कि आपसे जुड़ना उनके फायदे का सौदा है। इस फेज में आपका पूरा ध्यान ट्रस्ट बनाने पर होना चाहिए। याद रखिए कि लोग अपना बटुआ सिर्फ उन्हीं के सामने खोलते हैं जिन्हें वो पसंद करते हैं और जिन पर वो भरोसा करते हैं। अगर आप इस फेज में फेल हो गए तो आपकी सारी मेहनत बेकार चली जाएगी। इसलिए सेल्समैन मत बनिए बल्कि एक एडवाइजर बनिए। जब आप लोगों की लाइफ में वैल्यू ऐड करते हैं तो वो आपको अपना पैसा देने में हिचकिचाते नहीं हैं।


लेसन ३ : द आफ्टर फेज - कस्टमर को अपना दीवाना बनाओ और उन्हें सेल्समेन में बदलो

अधिकतर दुकानदार सेल होते ही कस्टमर को ऐसे भूल जाते हैं जैसे ब्रेकअप के बाद लोग अपनी एक्स को भूल जाते हैं। यह आपकी सबसे बड़ी बेवकूफी है। एलन डिब कहते हैं कि असली पैसा पहली सेल में नहीं बल्कि उसके बाद वाली सेल्स में है। एक नए कस्टमर को ढूंढना पुराने कस्टमर को दोबारा बेचने से ६ गुना ज्यादा महंगा पड़ता है। अगर आपने एक बार मेहनत करके किसी का भरोसा जीत लिया है तो अब उसे छोड़िए मत। उसे वर्ल्ड क्लास एक्सपीरियंस दीजिए। उसे ऐसा महसूस कराइए कि वो सिर्फ एक कस्टमर नहीं है बल्कि आपके परिवार का हिस्सा है। जब आप लोगों को उनकी उम्मीद से ज्यादा देते हैं तो वो आपके फैन बन जाते हैं। और एक फैन सिर्फ आपका सामान नहीं खरीदता बल्कि वो १० और लोगों को पकड़कर आपके पास लाता है।

सोचिए आप किसी रेस्टोरेंट में जाते हैं और वहां का वेटर आपको आपके नाम से बुलाता है और आपकी पसंद की ड्रिंक बिना मांगे ले आता है। आपको कैसा लगेगा। आप वहां बार-बार जाएंगे चाहे वो शहर के दूसरे कोने में ही क्यों न हो। मार्केटिंग में इसे ही मैजिक कहते हैं। आपको अपने बिजनेस में ऐसे सिस्टम बनाने होंगे जिससे कस्टमर का लाइफटाइम वैल्यू बढ़ सके। इसका मतलब है कि वो आपसे बार-बार खरीदे और महंगी चीजें खरीदे। अगर आप सिर्फ एक बार बेचकर खुश हैं तो आप बिजनेस नहीं कर रहे बल्कि आप सिर्फ मजदूरी कर रहे हैं। आपको अपने कस्टमर्स के लिए एक ऐसी कम्युनिटी बनानी होगी जहाँ उन्हें लगे कि आपसे जुड़ने के बाद उनकी इज्जत समाज में बढ़ गई है।

मान लीजिए आपने किसी को एक लैपटॉप बेचा। अब सेल खत्म नहीं हुई बल्कि यहाँ से शुरू हुई है। १० दिन बाद उसे फोन करके पूछिए कि सर लैपटॉप कैसा चल रहा है। क्या आपको कोई दिक्कत तो नहीं आ रही। एक महीने बाद उसे एंटी-वायरस या लैपटॉप बैग का ऑफर दीजिए। इसे अप-सेलिंग और क्रॉस-सेलिंग कहते हैं। अगर आप उसे सही समय पर सही चीज ऑफर करेंगे तो वो खुशी-खुशी खरीदेगा क्योंकि उसे आप पर भरोसा है। और सबसे बड़ी बात जब उसका कोई दोस्त लैपटॉप लेने की सोचेगा तो उसके दिमाग में सबसे पहला नाम आपका ही आएगा। वो खुद खड़ा होकर आपकी मार्केटिंग करेगा और वो भी एकदम फ्री में। इसे कहते हैं वर्ड ऑफ़ माउथ मार्केटिंग।

असली सफलता तब मिलती है जब आपके कस्टमर आपके ब्रांड एम्बेसडर बन जाते हैं। आपको उनके फीडबैक को गंभीरता से लेना होगा और अपनी सर्विस को लगातार बेहतर बनाना होगा। याद रखिए कि एक दुखी कस्टमर आपकी साख को मिट्टी में मिला सकता है लेकिन एक खुश कस्टमर आपके बिजनेस को आसमान पर पहुंचा सकता है। मार्केटिंग कोई एक दिन का काम नहीं है बल्कि यह एक ऐसा रिश्ता है जो सालों साल चलता है। तो आज ही अपनी स्ट्रेटजी बदलिए। सिर्फ सेल क्लोज मत करिए बल्कि एक लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप की शुरुआत करिए। जब आपका फोकस पैसे से हटकर लोगों की खुशी पर जाता है तो पैसा झख मारकर आपके पीछे आता है।


मार्केटिंग का मतलब सिर्फ शोर मचाना नहीं बल्कि सही इंसान की सही मदद करना है। क्या आप भी अपने बिजनेस को लेकर सीरियस हैं। अगर हां तो आज ही अपना १ पेज मार्केटिंग प्लान बनाना शुरू करें। कमेंट में बताएं कि आपको इन ३ लेसन में से सबसे अच्छा कौन सा लगा। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो बिजनेस तो करना चाहता है लेकिन मार्केटिंग से डरता है। चलिए साथ मिलकर ग्रो करते हैं।

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