The Creative Curve (Hindi)


आप अभी भी यही मानते हैं कि क्रिएटिविटी ऊपर वाले की देन है? क्या जोक मारा है। आपके पास कोई कमाल का आइडिया नहीं आ रहा क्योंकि आप दिन भर फालतू मीम्स देख रहे हैं। सही समय पर सही आइडिया न आना आपकी किस्मत नहीं आपकी नालायकी है।

इस ब्लॉग में हम एलन गैनेट की बुक द क्रिएटिव कर्व से वह राज खोलेंगे जो आपको एक एवरेज इंसान से जीनियस बना सकते हैं। चलिए जानते हैं वह ३ पावरफुल लेसन्स जो आपकी सोच की दुनिया को पूरी तरह बदल देंगे।


लेसन १ : क्रिएटिविटी का मिथक और असलियत

हम में से ज्यादातर लोग इसी गलतफहमी में जी रहे हैं कि क्रिएटिविटी कोई जादुई बिजली है जो अचानक से किसी जीनियस के सर पर गिरती है। हमें लगता है कि मोजार्ट या आइंस्टीन जैसे लोग ऊपर से स्पेशल सॉफ्टवेयर अपडेट लेकर पैदा हुए थे। लेकिन सच तो यह है कि यह सिर्फ एक बहाना है ताकि हमें मेहनत न करनी पड़े। हम खुद को दिलासा देते हैं कि "भाई मैं तो क्रिएटिव हूं ही नहीं" और फिर वापस सोफे पर लेटकर फोन स्क्रॉल करने लगते हैं। एलन गैनेट कहते हैं कि यह जो 'यूरेका मोमेंट' वाला ड्रामा है न यह सिर्फ फिल्मों में अच्छा लगता है। हकीकत में क्रिएटिविटी कोई भगवान का दिया हुआ चमत्कार नहीं बल्कि एक ऐसी स्किल है जिसे जिम जाकर बॉडी बनाने की तरह डेवलप किया जा सकता है।

सोचिए आप अपने किसी दोस्त के घर जाते हैं और वह आपको एक बहुत ही गंदा सा खाना खिलाता है। आप उससे पूछते हैं कि भाई यह क्या बनाया है? और वह बड़े गर्व से कहता है कि मैंने बिना रेसिपी देखे अपनी क्रिएटिविटी इस्तेमाल की है। अब आप उसे जीनियस कहेंगे या बेवकूफ? जाहिर है कि उसने बिना बेसिक सीखे कुछ नया करने की कोशिश की और रायता फैला दिया। क्रिएटिविटी का मतलब यह नहीं है कि आप बिना किसी तैयारी के कुछ भी अतरंगी कर दें। असली क्रिएटिविटी तो डेटा और प्रैक्टिस का खेल है।

आजकल के इन्फ्लुएंसर्स को ही देख लीजिए। आपको लगता होगा कि उनका एक रील अचानक वायरल हो गया क्योंकि वह बहुत क्रिएटिव हैं। पर असल में उस पंद्रह सेकंड की रील के पीछे घंटों की रिसर्च और हजारों फेल हुए आइडियाज होते हैं। वह लोग जानते हैं कि ऑडियंस को क्या पसंद है और वह उसी हिसाब से अपने दिमाग को ट्रेन करते हैं। अगर आप सोचते हैं कि आप एक दिन सुबह उठेंगे और आपके दिमाग में कोई करोड़ों का बिजनेस आइडिया कौंध जाएगा तो आप शायद किसी पैरेलल यूनिवर्स में जी रहे हैं।

लेखक बताते हैं कि जिसे हम टैलेंट समझते हैं वह असल में 'डेलिब्रेट प्रैक्टिस' है। अगर आप दिन में दस घंटे कोडिंग करते हैं तो एक दिन आप कोडिंग के उस्ताद बन ही जाएंगे। इसमें कोई रॉकेट साइंस नहीं है। दिक्कत यह है कि हम प्रोसेस से प्यार करने के बजाय सीधे रिजल्ट चाहते हैं। हम चाहते हैं कि बिना रियाज किए हम अरिजीत सिंह बन जाएं। पर बिना सुरों की समझ के आप सिर्फ बाथरूम सिंगर ही रह जाएंगे। क्रिएटिविटी के लिए आपको अपने फील्ड के बेसिक रूल्स को घोलकर पीना पड़ता है। जब आप उन रूल्स को अच्छी तरह समझ जाते हैं तभी आप उन्हें तोड़कर कुछ नया बना पाते हैं।

इसलिए अगली बार जब आप किसी को कुछ कमाल का करते हुए देखें तो यह मत कहिएगा कि "किस्मत वाला है" या "क्रिएटिव है"। बल्कि यह देखिए कि उसने उस मुकाम तक पहुंचने के लिए कितनी बार फेलियर का स्वाद चखा है। क्रिएटिविटी का पहला नियम ही यही है कि पहले आप एक स्टूडेंट बनें और फिर एक क्रिएटर। बिना इनपुट के आउटपुट की उम्मीद करना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के गाड़ी को धक्का मारना। तो अपनी आलस वाली चादर उतारिए और समझना शुरू कीजिए कि यह पूरा खेल सिर्फ और सिर्फ आपकी मेहनत और सही दिशा में की गई प्रैक्टिस का है।


लेसन २ : द लॉ ऑफ कंजम्पशन

अगर आप सोचते हैं कि अंधेरे कमरे में बैठकर दीवार घूरने से आपको दुनिया का सबसे यूनिक आइडिया मिल जाएगा, तो मुबारक हो, आप अपनी जिंदगी का कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं। एलन गैनेट कहते हैं कि अगर आपको एक मास्टर शेफ बनना है, तो पहले आपको बहुत सारा लजीज खाना चखना होगा। बिना खाए आप स्वाद का अंदाजा नहीं लगा सकते। यही बात क्रिएटिविटी पर लागू होती है। इसे लेखक 'द लॉ ऑफ कंजम्पशन' कहते हैं। उनका मानना है कि एक सफल क्रिएटर बनने के लिए आपको अपने जागते हुए समय का कम से कम २० परसेंट हिस्सा सिर्फ और सिर्फ अपने फील्ड के कंटेंट को कंज्यूम करने में बिताना चाहिए।

अब आप कहेंगे, "भाई, मैं तो दिन भर इंस्टाग्राम पर रील देखता हूं, क्या मैं भी कंज्यूम कर रहा हूं?" नहीं, आप कचरा जमा कर रहे हैं। कंजम्पशन का मतलब यह नहीं है कि आप दिमाग बंद करके कुछ भी देखते रहें। इसका मतलब है कि आप जो देख रहे हैं, उसे टुकड़ों में तोड़कर समझें। मान लीजिए आप एक स्टैंडअप कॉमेडियन बनना चाहते हैं। तो आपको सिर्फ जोक्स पर हंसना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि किस लाइन पर तालियां बजी और क्यों? क्या वह बॉडी लैंग्वेज थी या शब्दों का चुनाव? जब आप अपने फील्ड का २० परसेंट हिस्सा इस तरह गहराई से देखते हैं, तो आपका दिमाग अनजाने में ही पैटर्न्स को पहचानने लगता है।

हमारा दिमाग एक सुपर कंप्यूटर की तरह है। अगर आप इसमें सड़ा हुआ डेटा डालेंगे, तो आउटपुट भी सड़ा हुआ ही निकलेगा। अगर आप चाहते हैं कि आपके दिमाग से 'आईफोन' जैसा आइडिया निकले, तो आपको दुनिया के बेहतरीन डिजाइन्स और टेक्नोलॉजी को अपनी आंखों के रास्ते दिमाग में उतारना होगा। जो लोग कहते हैं कि वह दूसरों का काम नहीं देखते क्योंकि वह ओरिजिनल रहना चाहते हैं, वह असल में अपनी नासमझी का ढिंढोरा पीट रहे होते हैं। बिना किसी बेस के जो 'ओरिजिनल' काम आप करेंगे, वह शायद इतना बेकार होगा कि उसे आपके अलावा कोई और देखना भी नहीं चाहेगा।

जरा सोचिए, उस इंसान के बारे में जो कहता है कि वह बिना कोई किताब पढ़े एक बेस्ट सेलर नोवेल लिखेगा। यह वैसा ही है जैसे कोई बिना पानी देखे स्विमिंग का गोल्ड मेडल जीतने का सपना देख रहा हो। एलन गैनेट ने पाया कि दुनिया के सबसे बड़े क्रिएटिव दिग्गज अपने काम से ज्यादा दूसरों के काम को स्टडी करने में समय बिताते हैं। वह देखते हैं कि मार्केट में क्या चल रहा है, लोगों को क्या पसंद आ रहा है और कौन सी चीज बार-बार हिट हो रही है। जब आपके पास डेटा का भंडार होता है, तभी आपका सबकॉन्शियस माइंड उन टुकड़ों को जोड़कर एक नया और धांसू आइडिया तैयार करता है।

इसलिए अगर आप एक ब्लॉगर, वीडियो क्रिएटर या बिजनेसमैन बनना चाहते हैं, तो आलस छोड़िए और पढ़ना-देखना शुरू कीजिए। लेकिन ध्यान रहे, यह कंजम्पशन एक्टिव होना चाहिए, पैसिव नहीं। आपको कंटेंट का पोस्टमार्टम करना सीखना होगा। जब आप इतना सारा बेहतरीन काम देख लेते हैं, तो आपका स्टैंडर्ड बढ़ जाता है। आपको पता चल जाता है कि 'एवरेज' काम क्या है और 'एक्सीलेंट' क्या। और यकीन मानिए, जिस दिन आपको इन दोनों के बीच का फर्क समझ आ गया, उस दिन आप खुद भी कुछ एवरेज बनाने से पहले दस बार सोचेंगे। क्रिएटिविटी कोई जादू नहीं है, यह तो बस बहुत सारे देखे हुए आइडियाज का एक नया और स्मार्ट मिक्सचर है।


लेसन ३ : द क्रिएटिव कर्व का सही बैलेंस

क्या आपने कभी गौर किया है कि कुछ गाने पहली बार सुनते ही अच्छे लगते हैं, लेकिन कुछ इतने अजीब होते हैं कि हम तुरंत चैनल बदल देते हैं? वहीं दूसरी तरफ कुछ चीजें इतनी पुरानी और घिसी-पिटी होती हैं कि उन्हें देखकर नींद आने लगती है। एलन गैनेट कहते हैं कि असली जादू 'क्रिएटिव कर्व' के बिल्कुल बीच में छिपा है। इसे आप 'फैमिलियरी' और 'नोवेल्टी' का बैलेंस कह सकते हैं। यानी आपका आइडिया लोगों को जाना-पहचाना भी लगना चाहिए और उसमें कुछ एकदम नया तड़का भी होना चाहिए। अगर आप कुछ ऐसा बना देंगे जो दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा, तो लोग उसे 'जीनियस' नहीं बल्कि 'पागलपन' कहेंगे।

मान लीजिए आप एक नया रेस्टोरेंट खोलते हैं और वहां लोगों को खाने में 'चॉकलेट समोसा' सर्व करते हैं। अब समोसा तो सबको पता है, पर उसके अंदर चॉकलेट का होना एक 'नोवेल्टी' है। लोग इसे ट्राई करेंगे क्योंकि यह उनके लिए फैमिलियर भी है और नया भी। लेकिन अगर आप समोसे की जगह पत्थर जैसा कुछ रख दें और कहें कि इसे सूंघने से पेट भर जाएगा, तो लोग वहां से ऐसे भागेंगे जैसे किसी ने भूत देख लिया हो। इंसान का दिमाग ऐसा ही है—हमें वह चीजें पसंद आती हैं जो हमें समझ आ सकें, पर साथ ही हमें बोरियत से भी नफरत है।

क्रिएटिव कर्व का मतलब है वह 'स्वीट स्पॉट' ढूंढना जहां आपका आइडिया ट्रेंड बन जाता है। अगर आप बहुत ज्यादा एडवांस हो गए, तो लोग आपको समझ नहीं पाएंगे। जैसे एप्पल ने जब अपना पहला स्मार्टफोन निकाला था, तो उन्होंने उसमें बटन हटाकर टच स्क्रीन दी, पर फोन का बेसिक काम वही रखा। उन्होंने सीधा टेलिपैथी वाली मशीन नहीं बेची क्योंकि लोग उसके लिए तैयार नहीं थे। आपको लोगों के कंफर्ट जोन के साथ थोड़ा सा खेलना पड़ता है, उसे पूरी तरह तबाह नहीं करना होता।

सफलता का असली राज यही है कि आप मार्केट की नब्ज पहचानें। आपको यह देखना होगा कि लोग किस चीज के आदी हो चुके हैं और अब उन्हें किस हल्के से बदलाव की जरूरत है। जो लोग बहुत बड़े 'क्रांतिकारी' बनने के चक्कर में ऐसी चीजें बनाते हैं जो किसी के पल्ले ही नहीं पड़तीं, वे अक्सर फ्लॉप हो जाते हैं। वहीं जो लोग वही पुराना घिसा-पिटा कंटेंट बनाते रहते हैं, वे भीड़ में खो जाते हैं। आपको तो बस वह एक छोटा सा ट्विस्ट ढूंढना है जो लोगों को यह कहने पर मजबूर कर दे कि "अरे, यह तो मैंने सोचा ही नहीं था, पर है यह बड़े काम की चीज।"

तो याद रखिए, क्रिएटिविटी का मतलब चांद-तारे तोड़कर लाना नहीं है। इसका मतलब है जो आपके पास है, उसी को एक नए नजरिए से पेश करना। जब आप फैमिलियरिटी और नोवेल्टी के उस पतले से धागे पर चलना सीख जाते हैं, तभी आप एक हिट आइडिया के मालिक बनते हैं। अब रुकना बंद कीजिए, अपने आस-पास की चीजों को देखिए और सोचिए कि आप उसमें कौन सा छोटा सा पर धमाका करने वाला बदलाव ला सकते हैं।


तो दोस्तों, अब बहाने बनाना बंद कीजिए कि आपके पास आइडियाज नहीं हैं। क्रिएटिविटी कोई लॉटरी नहीं है जो सिर्फ किस्मत वालों की लगती है, यह एक मेहनत से कमाई गई दौलत है। आज ही अपने फील्ड का २० परसेंट कंटेंट कंज्यूम करना शुरू करें और वह 'क्रिएटिव कर्व' खोजें जो आपको आपकी मंजिल तक ले जाए। अगर आपको यह लेसन्स पसंद आए और आप भी अपने अंदर के क्रिएटर को जगाना चाहते हैं, तो इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा "कुछ नया करेंगे" बोलकर सो जाता है। कमेंट्स में बताएं कि आप आज से कौन सा नया लेसन फॉलो करने वाले हैं।

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