The Art of the Start (Hindi)


अभी भी वही पुराना घिसा पिटा बिजनेस प्लान बना रहे हो। मुबारक हो आप फेल होने की रेस में सबसे आगे हैं। जबकि दुनिया रॉकेट की स्पीड से आगे निकल रही है आप अभी भी ऑफिस के सोफे का कलर चुन रहे हैं। बिना इस किताब के लेसन समझे स्टार्टअप शुरू करना मतलब बिना पैराशूट के प्लेन से कूदना है।

आज हम गाय कावासाकी की मास्टरपीस द आर्ट ऑफ द स्टार्ट के उन सीक्रेट्स को खोलेंगे जो आपके आइडिया को एक फेल स्टार्टअप से एक ब्रांड में बदल देंगे। चलिए इन 3 लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : मेक मीनिंग नोट मनी

अक्सर जब कोई नया बिजनेस शुरू करने की सोचता है तो उसके दिमाग में सबसे पहले क्या आता है। पैसा। बहुत सारा पैसा। चमकदार गाड़ियां और महँगे सूट। लेकिन गाय कावासाकी कहते हैं कि अगर आपका स्टार्टअप सिर्फ नोट छापने की मशीन बनने के लिए पैदा हुआ है तो यकीन मानिए उसकी मौत पक्की है। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है क्योंकि आखिर हम बिजनेस करते ही पैसे के लिए हैं। लेकिन असलियत यह है कि दुनिया के सबसे बड़े ब्रांड्स ने पहले दुनिया को बदलने की सोची फिर पैसा अपने आप उनके पीछे भागकर आया।

मान लीजिए आप एक रेस्टोरेंट खोलते हैं। अगर आपका मकसद सिर्फ गल्ले पर बैठकर पैसे गिनना है तो आप घटिया क्वालिटी का तेल इस्तेमाल करेंगे और कस्टमर को लूटने की कोशिश करेंगे। कुछ दिन तो जेब भरेगी लेकिन फिर आपका रेस्टोरेंट भूतों का डेरा बन जाएगा। वहीं अगर आपका मकसद है कि आपके शहर के लोगों को घर जैसा साफ़ और स्वादिष्ट खाना मिले तो आप क्वालिटी पर ध्यान देंगे। लोग आपको दुआएं भी देंगे और पैसा भी। यही है मेक मीनिंग। यानी आप लोगों की लाइफ में क्या वैल्यू ऐड कर रहे हैं।

आजकल के कई सो कॉल्ड इंटरप्रेन्योर को देखिए। उनके पास कोई विजन नहीं होता बस एक फैंसी ऑफिस और बिजनेस कार्ड होता है। वे सोचते हैं कि ऑफिस में टेबल टेनिस का टेबल रख लेने से वे गूगल बन जाएंगे। लेकिन गूगल इसलिए बड़ा नहीं बना क्योंकि उनके ऑफिस में झूले थे बल्कि इसलिए बना क्योंकि उन्होंने दुनिया की जानकारी को एक जगह समेटने का बीड़ा उठाया था। अगर आप सिर्फ पैसा कमाना चाहते हैं तो शायद आप एक अच्छी दुकान चला लें लेकिन आप एक लेजेंडरी कंपनी कभी नहीं बना पाएंगे।

मीनिंग का मतलब है किसी समस्या को जड़ से खत्म करना। जैसे एयरबीएनबी ने लोगों की रहने की समस्या को सुलझाया। उबर ने टैक्सी मिलने की झंझट को खत्म किया। उन्होंने पहले यह नहीं सोचा कि हम एक ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बनेंगे। उन्होंने बस यह देखा कि आम इंसान को तकलीफ कहाँ हो रही है। अगर आप भी कुछ शुरू कर रहे हैं तो खुद से यह सवाल पूछिए कि क्या मेरे होने से किसी की लाइफ थोड़ी आसान हो रही है। अगर जवाब हाँ है तो आप सही रास्ते पर हैं।

ज्यादातर लोग स्टार्टअप की दुनिया में इसलिए आते हैं क्योंकि उन्हें बॉस की चिकचिक पसंद नहीं होती। वे सोचते हैं कि खुद का मालिक बनकर वे चैन की नींद सोएंगे। लेकिन भाई साहब असलियत यह है कि शुरू में आपका कोई बॉस नहीं होता बल्कि आपके कस्टमर आपके सबसे खतरनाक बॉस बन जाते हैं। अगर आप मीनिंग क्रिएट नहीं कर रहे तो वे आपको एक मिनट में रिप्लेस कर देंगे। इसलिए नोटों के पीछे भागना बंद करिए और समाज में एक छोटा सा बदलाव लाने की कोशिश करिए। जब आप दूसरों की लाइफ में उजाला करेंगे तो आपकी तिजोरी अपने आप चमकने लगेगी।

अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे अपने इसी क्रांतिकारी आइडिया को दुनिया के सामने पेश करना है ताकि लोग आपको इग्नोर न कर पाएं।


लेसन २ : पोजीशनिंग और पिचिंग की कला

अगर आपके पास दुनिया का सबसे बेस्ट आइडिया है लेकिन आप उसे एक छोटे बच्चे को नहीं समझा सकते तो समझ लीजिए आपका आइडिया कचरा है। गाय कावासाकी कहते हैं कि ज्यादातर लोग अपनी पिचिंग के दौरान इतने भारी भरकम शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जैसे वे नासा के लिए रॉकेट बना रहे हों। भाई साहब अगर सामने वाले को समझ ही नहीं आया कि आप करते क्या हैं तो वह आपको पैसे क्यों देगा। अपनी पोजीशनिंग को इतना सिंपल रखिए कि आपकी दादी भी समझ जाएं कि उनका पोता आखिर क्या काम करता है।

मान लीजिए आप एक नई तरह की कोल्ड ड्रिंक बेच रहे हैं। अब एक तरीका तो यह है कि आप कहें कि हम एक ऐसा कार्बोनेटेड बेवरेज बना रहे हैं जो एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है और आपके मेटाबॉलिज्म को एनहांस करता है। यह सुनकर सामने वाला सो जाएगा। दूसरा तरीका यह है कि आप कहें कि हम दुनिया की सबसे ठंडी और रिफ्रेशिंग ड्रिंक बना रहे हैं जो पीते ही आपको हिमालय की वादियों का अहसास कराएगी। अब बताइए लोग किसे खरीदेंगे। इसे ही कहते हैं सिंपल पोजीशनिंग। अपनी खिचड़ी में इतने मसाले मत डालिए कि असली स्वाद ही गायब हो जाए।

पिचिंग के मामले में गाय कावासाकी का एक बहुत फेमस रूल है जिसे 10 20 30 रूल कहते हैं। यानी आपकी प्रेजेंटेशन में सिर्फ 10 स्लाइड होनी चाहिए वह 20 मिनट के अंदर खत्म हो जानी चाहिए और फॉन्ट का साइज कम से कम 30 होना चाहिए। लेकिन हमारे देसी भाई क्या करते हैं। वे 50 स्लाइड्स की एक पूरी किताब लेकर पहुँच जाते हैं और छोटे छोटे फॉन्ट में पूरी कहानी लिख देते हैं जिसे पढ़ने के लिए दूरबीन की जरूरत पड़े। याद रखिए इन्वेस्टर या कस्टमर आपके पास सोने नहीं आया है उसे बस यह जानना है कि आप उसकी लाइफ की कौन सी प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हैं।

आजकल के स्टार्टअप फाउंडर्स को लगता है कि पिचिंग का मतलब है झूठ बोलना या बढ़ा चढ़ाकर बातें करना। वे खुद को अगला स्टीव जॉब्स समझने लगते हैं और ऐसी बातें करते हैं जिनका हकीकत से कोई लेना देना नहीं होता। अगर आप अपनी पिच में यह कह रहे हैं कि अगले एक साल में आप पूरी दुनिया पर कब्जा कर लेंगे तो सामने वाला समझ जाएगा कि आप चने के झाड़ पर चढ़ रहे हैं। ईमानदारी से अपनी बात रखिए। अपनी कमियों को छुपाइए मत बल्कि उन्हें सुधारने का प्लान बताइए।

पिचिंग का मतलब सिर्फ बोलना नहीं बल्कि सामने वाले को महसूस कराना है। अगर आपका प्रोडक्ट वाकई दमदार है तो उसे चलाकर दिखाइए। लंबी चौड़ी बातें करने से बेहतर है कि आप उसे एक डेमो दें। जब लोग अपनी आँखों से कुछ जादू होते देखते हैं तो उन्हें यकीन होता है। अपनी कहानी को एक फिल्म की तरह पेश करिए जहाँ एक विलन है यानी प्रॉब्लम और आप हैं वो हीरो जो उस विलन को खत्म करेगा। अगर आपकी कहानी में दम होगा तो लोग खुद आपके साथ जुड़ना चाहेंगे।

अगले लेसन में हम बात करेंगे उस चीज की जिससे सबसे ज्यादा डर लगता है यानी पैसा। बूटस्ट्रैपिंग कैसे की जाती है और कम रिसोर्सेज में बड़ा अंपायर कैसे खड़ा होता है इसे हम विस्तार से समझेंगे।


लेसन ३ : द आर्ट ऑफ बूटस्ट्रैपिंग

ज्यादातर नए बिजनेस वाले सोचते हैं कि जब तक उनके पास किसी बड़े इन्वेस्टर का चेक नहीं आएगा तब तक वे शुरुआत ही नहीं कर सकते। उन्हें लगता है कि एक आलीशान ऑफिस होना चाहिए जिसमें लेदर की कुर्सियां हों और एक कॉफी मशीन हो जो हर पांच मिनट में एस्प्रेसो निकाले। लेकिन गाय कावासाकी कहते हैं कि अगर आप शुरू में ही रईस बनने का नाटक करेंगे तो बहुत जल्द सड़क पर आ जाएंगे। बूटस्ट्रैपिंग का मतलब है अपने खुद के दम पर और कम से कम खर्च में बिजनेस को खड़ा करना। यह एक ऐसी कला है जो आपको असली इंटरप्रेन्योर बनाती है।

मान लीजिए आपको एक टेक कंपनी शुरू करनी है। अब आप पहले दिन ही किसी पॉश इलाके में ऑफिस लेकर वहां एसी लगवा लेते हैं और दस लोगों की टीम हायर कर लेते हैं। अभी आपके पास एक भी कस्टमर नहीं है लेकिन खर्चा लाखों में है। इसे कहते हैं सुसाइड करना। वहीं एक बूटस्ट्रैपर क्या करेगा। वह अपने गैराज या बेडरूम से शुरुआत करेगा। वह खुद ही कोडिंग करेगा खुद ही सेल्स कॉल करेगा और चाय पीकर काम चलाएगा। जब तक पहला कस्टमर पैसा नहीं देता वह एक रुपया भी फालतू खर्च नहीं करेगा। याद रखिए गूगल और एप्पल जैसे दिग्गज भी गैराज से ही निकले थे न कि किसी सेवन स्टार होटल से।

आजकल के फाउंडर्स को फंडिंग की ऐसी लत लग गई है जैसे कोई नशा हो। वे बिजनेस बनाने से ज्यादा इस बात पर ध्यान देते हैं कि अगला राउंड कब मिलेगा। गाय कावासाकी की सलाह बहुत साफ है कि कैश का इस्तेमाल ऐसे करो जैसे वह आपका खून हो। उसे फालतू चीजों में मत बहाओ। जब आप अपने पैसे से बिजनेस चलाते हैं तो आप हर एक रुपए की कीमत समझते हैं। आप उन चीजों पर पैसा लगाते हैं जो आपको पैसा वापस लाकर देंगी न कि उन चीजों पर जो सिर्फ देखने में अच्छी लगती हैं। फैंसी ऑफिस से कस्टमर नहीं आता सर्विस से आता है।

बूटस्ट्रैपिंग का मतलब कंजूसी नहीं बल्कि समझदारी है। इसका मतलब है कि आप टीम में सिर्फ उन लोगों को रखें जो मल्टी टैलेंटेड हों। अगर कोई बंदा सिर्फ एक ही काम जानता है तो बूटस्ट्रैपिंग के दिनों में वह आपके लिए बोझ बन सकता है। आपको ऐसे जुनूनी लोग चाहिए जो जरूरत पड़ने पर झाड़ू भी लगा सकें और कोडिंग भी कर सकें। जब रिसोर्सेज कम होते हैं तो इंसान का दिमाग ज्यादा तेज चलता है। अभाव ही आविष्कार की जननी है। जब जेब में पैसा कम होता है तब आप सबसे ज्यादा क्रिएटिव होते हैं।

तो दोस्तों, द आर्ट ऑफ द स्टार्ट का सबसे बड़ा सच यही है कि शुरू करने के लिए आपको बहुत बड़े तामझाम की जरूरत नहीं है। आपके पास बस एक मजबूत विजन एक अच्छी पिच और जमीन से जुड़े रहने की हिम्मत होनी चाहिए। अगर आप मीनिंग क्रिएट कर रहे हैं और फिजूलखर्ची से बच रहे हैं तो दुनिया की कोई ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती। इंतज़ार मत करिए कि कल जब सब कुछ परफेक्ट होगा तब शुरू करूँगा। आज ही अपना पहला कदम उठाइए क्योंकि परफेक्शन शुरुआत के बाद आता है शुरुआत से पहले नहीं।


अगर आप भी किसी बड़े आइडिया पर काम कर रहे हैं या अपनी लाइफ में कुछ नया शुरू करना चाहते हैं तो याद रखिए सबसे मुश्किल काम है बस शुरुआत करना। कमेंट्स में हमें जरूर बताएं कि आप कौन सा बिजनेस या प्रोजेक्ट शुरू करने वाले हैं और इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो सिर्फ प्लान बनाता है पर एक्शन नहीं लेता। चलिए मिलकर कुछ बड़ा करते हैं।

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