क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि बिजनेस बस किस्मत का खेल है? सच तो यह है कि आपकी असफलता कोई एक्सीडेंट नहीं है। आप जानबूझकर उन बिजनेस रूल्स को तोड़ रहे हैं जो अंबानी और टाटा जैसे लोग चुपचाप फॉलो करते हैं। अपनी ईगो छोड़िए और इन कानूनों को समझिए वरना गरीबी में सड़ने का शौक तो आपको है ही। चलिए देखते हैं ब्रायन ट्रेसी के वो ३ नियम जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं।
Lesson : लॉ ऑफ कॉज एंड इफेक्ट (कारण और प्रभाव का नियम)
दुनिया में कुछ भी तुक्के से नहीं होता। अगर आप सोचते हैं कि शर्मा जी का लड़का करोड़पति बन गया क्योंकि उसकी किस्मत चमक गई, तो आप अपनी नाकामी को एक मीठी गोली खिला रहे हैं। ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि बिजनेस और लाइफ में हर रिजल्ट के पीछे एक ठोस कारण होता है। इसे आसान भाषा में समझिए, अगर आप आम का पेड़ लगाएंगे तो आम ही मिलेगा, बबूल लगाकर आप सेब की उम्मीद नहीं कर सकते। लेकिन हमारे यहाँ तो लोग बबूल के कांटे बोते हैं और फिर भगवान से शिकायत करते हैं कि उनकी लाइफ में मिठास क्यों नहीं है।
मान लीजिए आपका एक दोस्त है जिसने नया स्टार्टअप शुरू किया। उसने दिन रात मेहनत की, मार्केट रिसर्च की और कस्टमर की प्रॉब्लम समझी। आज उसकी कंपनी रॉकेट की तरह उड़ रही है। अब आप उसे देखकर कहेंगे कि भाई तेरी तो निकल पड़ी। भाई उसकी निकल नहीं पड़ी, उसने उस इंजन में तेल डाला था जो आपने अपनी आलस वाली नींद में खर्च कर दिया। यह नियम कहता है कि अगर आप वही इनपुट देंगे जो सफल लोग देते हैं, तो आउटपुट भी वही मिलेगा। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस एक सीधा सा हिसाब है।
कुछ लोग होते हैं जो हर सोमवार को एक नया बिजनेस आईडिया सोचते हैं, मंगलवार को उसका लोगो बनवाते हैं और बुधवार को हार मान लेते हैं क्योंकि करोड़ों की फंडिंग नहीं मिली। फिर वो बैठकर यूट्यूब पर मोटिवेशनल वीडियो देखते हैं और सोचते हैं कि जोश आ गया तो पैसा भी आ ही जाएगा। भाई साहब, जोश से सिर्फ चिल्लाया जा सकता है, पैसे कमाने के लिए तो उस नियम को फॉलो करना पड़ेगा जो सफल लोगों ने किया है। अगर आप चाहते हैं कि आपके बैंक अकाउंट में जीरो बढ़ते जाएं, तो आपको अपनी वैल्यू बढ़ानी होगी।
असली जिंदगी का एक उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए आप एक रेस्टोरेंट खोलते हैं। आप खाना घटिया देते हैं, वेटर बदतमीज हैं और साफ सफाई का तो नामोनिशान नहीं है। अब आप बैठकर ये सोचें कि मेरा बिजनेस क्यों नहीं चल रहा, शायद मेरी कुंडली में राहु बैठा है। तो दोस्त, राहु आपकी कुंडली में नहीं, आपकी किचन में बैठा है। लॉ ऑफ कॉज एंड इफेक्ट कहता है कि अच्छा खाना और अच्छी सर्विस वह कारण है जिसका प्रभाव है बहुत सारा पैसा और खुश ग्राहक। अगर आप कारण ही खराब रखेंगे तो प्रभाव तो बुरा होगा ही।
सफल लोग इस नियम को अपनी ताकत बना लेते हैं। वो देखते हैं कि उनके फील्ड के टॉप १० परसेंट लोग क्या कर रहे हैं। वो कैसे बात करते हैं, वो कैसे अपना टाइम मैनेज करते हैं और वो किस तरह की स्किल्स पर काम करते हैं। वो बस उन कारणों को अपनी लाइफ में कॉपी करते हैं और जादू की तरह उनके रिजल्ट्स भी बदलने लगते हैं। अगर आप अभी भी अपनी किस्मत को कोस रहे हैं, तो समझ जाइए कि आप इस नियम के खिलाफ जा रहे हैं। और याद रखिए, नियम तोड़ने पर जुर्माना नहीं लगता, सीधा आपका करियर तबाह होता है।
यह पहला नियम हमें यह सिखाता है कि सफलता कोई जादू नहीं बल्कि एक साइंस है। अगर आप आज अपनी लाइफ से खुश नहीं हैं, तो उन कारणों को बदलिए जो आपने बीते कल में पैदा किए थे। जब तक आप बीज नहीं बदलेंगे, फसल वही पुरानी और सड़ी हुई ही कटेगी। अब आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ कारण बदलने से क्या होगा, असली खेल तो तब शुरू होता है जब आप लोगों को वैल्यू देते हैं। और यही हमें अगले नियम की ओर ले जाता है।
Lesson : लॉ ऑफ सर्विस (सेवा का नियम)
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि बिजनेस का मतलब सिर्फ लोगों की जेब काटना है? अगर हाँ, तो मुबारक हो, आपकी दुकान जल्द ही बंद होने वाली है। ब्रायन ट्रेसी का लॉ ऑफ सर्विस कहता है कि आपकी कमाई सीधे इस बात पर निर्भर करती है कि आप दूसरों की कितनी सेवा करते हैं। अब सेवा का मतलब यह नहीं कि आप सड़क पर बैठकर सबको मुफ्त में शरबत पिलाएं। बिजनेस की दुनिया में सेवा का मतलब है वैल्यू देना। आपके पास जितना पैसा आज है, वह इस बात का सबूत है कि आपने समाज को कितनी वैल्यू दी है। अगर आपका बैंक बैलेंस जीरो है, तो बुरा मत मानिए, लेकिन आपकी वैल्यू भी मार्केट में फिलहाल जीरो ही है।
इसे एक मजेदार मिसाल से समझते हैं। मान लीजिए मोहल्ले में दो परचून की दुकानें हैं। एक का मालिक खन्ना जी हैं, जो हमेशा गुस्से में रहते हैं। आप उनसे चीनी मांगो तो वो ऐसे देखते हैं जैसे आपने उनकी किडनी मांग ली हो। दूसरी तरफ गुप्ता जी हैं, जो मुस्कुराकर बात करते हैं और अगर आप दो किलो राशन लें तो एक चॉकलेट फ्री दे देते हैं। अब आप खुद सोचिए, आप किसके पास जाएंगे? जाहिर है गुप्ता जी के पास। खन्ना जी को लगता है कि वो सामान बेच रहे हैं, लेकिन गुप्ता जी असल में सेवा बेच रहे हैं। वो आपकी प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हैं, आपका दिन अच्छा बना रहे हैं। और महीने के आखिर में गुप्ता जी की तिजोरी नोटों से भरी होती है जबकि खन्ना जी मक्खियां मारते हैं।
जरा सोचिए, फेसबुक या व्हाट्सएप हमें फ्री में सर्विस देते हैं, लेकिन वो दुनिया की सबसे अमीर कंपनियों में से हैं। क्यों? क्योंकि वो करोड़ों लोगों की लाइफ आसान बना रहे हैं। वो सेवा दे रहे हैं। और हमारे यहाँ कुछ लोग सोचते हैं कि बस एक घटिया सा कोर्स बना लो, उसे बढ़ा चढ़ाकर बेच दो और रातों रात अमीर बन जाओ। भाई साहब, स्कैम और बिजनेस में फर्क होता है। स्कैम एक बार चलता है, बिजनेस सालों साल। अगर आप अपने कस्टमर को राजा की तरह ट्रीट नहीं कर सकते, तो आप खुद कभी महल नहीं बना पाएंगे।
कुछ लोग कहते हैं कि पैसा हाथ की मैल है। भाई, अगर मैल है तो धो क्यों नहीं लेते? असल में ये वो लोग हैं जिन्होंने कभी किसी की लाइफ में रत्ती भर की वैल्यू ऐड नहीं की। जब आप किसी की समस्या सुलझाते हैं, तो वो खुशी खुशी आपको पैसे देता है। डॉक्टर को आप फीस क्यों देते हैं? क्योंकि वो आपका दर्द दूर करता है। प्लम्बर को पैसे क्यों देते हैं? क्योंकि वो आपके घर का नल ठीक करता है। अगर आप चाहते हैं कि लोग आप पर नोटों की बारिश करें, तो पहले ये पूछना बंद कीजिए कि मुझे क्या मिलेगा। इसके बजाय ये पूछिए कि मैं दूसरों के लिए क्या कर सकता हूं।
एक और रियल लाइफ एग्जांपल देखते हैं। मान लीजिए आप एक ऑनलाइन शॉपिंग एप से कुछ मंगाते हैं और वो खराब निकलता है। आप कस्टमर केयर को फोन करते हैं। अगर वो तुरंत पैसे वापस कर दें या सामान बदल दें, तो आप उनके फैन बन जाएंगे। आप दस और लोगों को बताएंगे कि भाई ये कंपनी बढ़िया है। यही है सेवा का जादू। लेकिन अगर वो आपको दस दिन तक चक्कर कटवाएं, तो आप सोशल मीडिया पर उनकी लंका लगा देंगे। फिर वो कंपनी चाहे करोड़ों का विज्ञापन दे दे, कोई उनके पास नहीं जाएगा।
ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि आपको हमेशा अपनी सर्विस को बेहतर बनाने के तरीके ढूंढते रहना चाहिए। क्या आप अपने काम को और तेज कर सकते हैं? क्या आप उसे और सस्ता कर सकते हैं? क्या आप उसे और ज्यादा असरदार बना सकते हैं? अगर आप हर दिन बस १० परसेंट बेहतर सर्विस देने की सोचें, तो एक साल में आप अपने कॉम्पिटिशन से कोसों आगे निकल जाएंगे। याद रखिए, मार्केट में भीड़ बहुत है, लेकिन अच्छी सर्विस देने वालों की कमी हमेशा रहती है। अगर आप उस कमी को पूरा कर दें, तो कामयाबी आपके पीछे भागेगी।
यह नियम हमें यह सिखाता है कि पैसा एक बाय-प्रोडक्ट है। असली गोल तो लोगों की लाइफ में बदलाव लाना होना चाहिए। लेकिन सिर्फ सेवा से काम नहीं चलेगा, आपको उस काम में मास्टर भी होना पड़ेगा। और यही बात हमें हमारे तीसरे और सबसे जरूरी नियम की तरफ ले जाती है।
Lesson : लॉ ऑफ स्पेशलाइजेशन (विशेषज्ञता का नियम)
क्या आप भी उन टैलेंटेड लोगों में से हैं जो सुबह ग्राफिक डिजाइनर बनते हैं, दोपहर को कोडिंग करते हैं और शाम को प्रॉपर्टी डीलिंग की बातें करते हैं? अगर हाँ, तो बधाई हो, आप "जैक्स ऑफ ऑल ट्रेड्स बट मास्टर ऑफ नन" की कैटेगरी में टॉप कर रहे हैं। ब्रायन ट्रेसी का लॉ ऑफ स्पेशलाइजेशन कहता है कि मार्केट हमेशा उस बंदे को सबसे ज्यादा पैसा देता है जो किसी एक काम में दुनिया का बेस्ट होता है। अगर आप हर चीज में थोड़े-थोड़े अच्छे हैं, तो आपकी सैलरी या इनकम भी बस थोड़ी-थोड़ी ही होगी। एवरेज लोगों की भीड़ बहुत बड़ी है दोस्त, असली मलाई तो वो एक्सपर्ट्स खा जाते हैं जो अपनी फील्ड के चीते होते हैं।
इसे एक मजेदार और कड़वे सच वाले उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपके पेट में जोरों का दर्द है। आप एक जनरल डॉक्टर के पास जाते हैं जो सर्दी, जुकाम और खुजली सबका इलाज करता है। वो आपसे ५०० रुपये फीस लेगा। लेकिन अगर वही डॉक्टर कहे कि भाई मामला गंभीर है, आपको पेट के स्पेशलिस्ट के पास जाना होगा, तो वो स्पेशलिस्ट आपसे ५००० रुपये सिर्फ बात करने के ले लेगा। क्यों? क्योंकि उसने अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ पेट के सिस्टम को समझने में लगा दी है। जनरल डॉक्टर भीड़ का हिस्सा है, लेकिन स्पेशलिस्ट एक ब्रांड है। अब आप खुद से पूछिए, क्या आप बिजनेस की दुनिया के वो डॉक्टर हैं जो बस सिरदर्द की गोली बांट रहे हैं, या आप वो सर्जन हैं जिसके बिना काम ही नहीं चल सकता?
हमारे यहाँ लोग सोचते हैं कि जितना ज्यादा काम करेंगे, उतना ज्यादा पैसा आएगा। भाई साहब, अगर गधा मेहनत से ही अमीर होना होता, तो धोबी का गधा आज बुगाटी में घूम रहा होता। असली खेल मेहनत का नहीं, सही दिशा में की गई मेहनत का है। अगर आप एक ही गड्ढे को १००० फीट गहरा खोदेंगे तो पानी निकलेगा, लेकिन अगर आप एक-एक फुट के १००० गड्ढे खोदेंगे तो सिर्फ धूल ही उड़ेगी। और हमारे महान एंटरप्रेन्योर्स यही करते हैं। आज ई-कॉमर्स, कल क्रिप्टो, परसों यूट्यूब। भाई, एक जगह तो टिक जाओ वरना उम्र निकल जाएगी और आप सिर्फ "स्ट्रगलिंग" का टैग लेकर घूमते रहेंगे।
असली जिंदगी का एक और मिसाल देखते हैं। सचिन तेंदुलकर को ही ले लीजिए। अगर वो सोचते कि भाई मैं बैटिंग भी करूंगा, बॉलिंग भी करूंगा, विकेटकीपिंग भी करूंगा और साथ में हॉकी भी खेलूंगा, तो क्या वो भगवान कहलाते? उन्होंने सिर्फ बैटिंग चुनी और उसे इतना निखारा कि दुनिया उनके कदमों में झुक गई। यही है स्पेशलाइजेशन की ताकत। जब आप एक ही चीज पर फोकस करते हैं, तो आपकी वैल्यू आसमान छूने लगती है। लोग आपके पास खुद चलकर आते हैं और आप अपनी शर्तों पर काम करते हैं।
ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि आपको खुद से एक सवाल पूछना चाहिए: वह कौन सी एक स्किल है, जिसे अगर मैं मास्टर कर लूं, तो मेरी इनकम डबल या ट्रिपल हो सकती है? उस स्किल को पकड़िए और उसमें इतने माहिर बन जाइए कि आपके कॉम्पिटिटर को आपसे डर लगने लगे। शुरुआत में शायद आपको लगेगा कि आप बाकी मौके छोड़ रहे हैं, लेकिन असल में आप अपनी कामयाबी का रास्ता साफ कर रहे हैं। मार्केट में आपकी पहचान आपके काम से होनी चाहिए, आपके "मल्टी-टास्किंग" के शौक से नहीं।
अंत में बस इतना समझ लीजिए कि बिजनेस और लाइफ एक फिल्म की तरह है। यहाँ साइड एक्टर्स बहुत होते हैं, लेकिन लोग टिकट सिर्फ हीरो को देखने के लिए खरीदते हैं। अगर आप स्पेशलिस्ट नहीं हैं, तो आप बस बैकग्राउंड में नाचने वाले डांसर बनकर रह जाएंगे। अपनी फील्ड चुनिए, उसमें अपनी जान लगा दीजिए और फिर देखिए कैसे दुनिया आपके नाम का डंका बजाती है।
तो दोस्तों, ब्रायन ट्रेसी के ये ३ नियम सिर्फ किताबी बातें नहीं हैं, ये वो कड़वे सच हैं जो आपके बैंक बैलेंस को बढ़ा सकते हैं। अगर आप अभी भी वही पुराने बहाने बना रहे हैं, तो समझ जाइए कि आप अपनी असफलता के खुद जिम्मेदार हैं। उठिए, अपनी एक स्किल चुनिए, लोगों की सेवा करना शुरू कीजिए और हर एक्शन का सही कारण बनिए।
आपको इन ३ नियमों में से कौन सा नियम सबसे ज्यादा चुभा? नीचे कमेंट्स में बताइए और इस आर्टिकल को उस दोस्त को शेयर कीजिए जो हर हफ्ते नया बिजनेस आईडिया लेकर आता है। देखते हैं उसकी आंखें कब खुलती हैं!
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