क्या आप अभी भी 1990 वाली मार्केटिंग कर रहे हैं और फिर रोते हैं कि सेल्स नहीं आ रही। भाई साहब आपका कस्टमर अब बिजी है और आप उसे बोरिंग कचरा बेच रहे हैं। अगर आपको लगता है कि सिर्फ डिस्काउंट से काम चल जाएगा तो आप अपनी बर्बादी का इंतजार कर रहे हैं।
एड्रियन ऑट की किताब द 24 ऑवर कस्टमर हमें बताती है कि आज के समय में असली पैसा कस्टमर की जेब में नहीं बल्कि उसके पास बचे हुए चंद मिनटों में छिपा है। चलिए समझते हैं इसके 3 बड़े लेसन।
लेसन १ : टाइम वैल्यू ट्रेड ऑफ
आज के दौर में अगर आप किसी से उसका हाल पूछो तो जवाब मिलता है कि भाई बहुत बिजी हूँ। ऐसा लगता है जैसे हर कोई दुनिया बचाने निकला है। असलियत तो यह है कि आज का कस्टमर पैसे से ज्यादा अपने समय को लेकर कंजूस हो गया है। एड्रियन ऑट इसे टाइम वैल्यू ट्रेड ऑफ कहते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि कस्टमर आपका प्रोडक्ट तब नहीं खरीदता जब उसे डिस्काउंट मिलता है बल्कि वह तब खरीदता है जब उसे लगता है कि आपका प्रोडक्ट उसके कीमती समय की सही कीमत वसूल करवा रहा है।
सोचिए आप एक बहुत बड़े शोरूम में गए जहाँ 50 परसेंट सेल लगी है। आप खुश होकर अंदर घुसे लेकिन वहां इतनी भीड़ है कि ट्रायल रूम की लाइन देखकर आपके पसीने छूट गए। अब आप वहां से बिना कुछ लिए भाग खड़े होंगे। क्यों। क्योंकि आपके लिए वह 50 परसेंट की बचत उन दो घंटों की बर्बादी के सामने कुछ भी नहीं है। यही वह पॉइंट है जहाँ बड़े बड़े ब्रांड्स मात खा जाते हैं। वे समझते हैं कि इंडियन कस्टमर सिर्फ सस्ते के पीछे भागता है। भाई साहब जमाना बदल गया है। अब लोग उस ऐप को डिलीट करने में दो सेकंड नहीं लगाते जो लोड होने में तीन सेकंड लेती है।
अगर आपका बिजनेस कस्टमर का समय खा रहा है तो आप एक विलेन हैं। एक ऐसा विलेन जिसे कोई पसंद नहीं करता। आपको एक ऐसा मसीहा बनना होगा जो कस्टमर को उसका समय वापस दिलाए। मान लीजिए आप एक ऑनलाइन ग्रोसरी स्टोर चलाते हैं। अगर आप कस्टमर को यह वादा करते हैं कि आपको दुकान तक जाने और पार्किंग ढूंढने की जरूरत नहीं है हम 10 मिनट में सामान पहुंचा देंगे तो आप सामान नहीं बेच रहे हैं। आप उसे उसकी जिंदगी का वह आधा घंटा बेच रहे हैं जो वह अपने बच्चों के साथ बिता सकता है।
यही वह असली जादू है जिसे हमें समझना होगा। आज की इस भागदौड़ भरी इकोनॉमी में लोग उन चीजों के लिए ज्यादा पैसे देने को तैयार हैं जो उनका काम आसान और तेज कर दें। अगर आप एक सर्विस दे रहे हैं और आपकी प्रोसेस बहुत लंबी है तो यकीन मानिए आपका कॉम्पिटिटर जो शायद आपसे महंगा है वह आपसे आगे निकल जाएगा क्योंकि उसने कस्टमर के समय की इज्जत की है।
कुछ लोग आज भी पुराने खयालात के हैं। वे सोचते हैं कि कस्टमर को जितनी देर अपनी दुकान पर रोक कर रखेंगे वह उतना ज्यादा खरीदेगा। अरे सर वह आपकी दुकान पर शॉपिंग करने आया है आपके साथ फेरे लेने नहीं आया। उसे जल्दी फ्री कीजिये ताकि वह अपनी बची हुई जिंदगी जी सके। अगर आप उसकी लाइफ में वैल्यू ऐड नहीं कर सकते तो कम से कम उसका टाइम वेस्ट तो मत कीजिये।
आज का कस्टमर एक ऐसे जज की तरह है जिसके पास बहुत सारे केसेस हैं। वह आपको सिर्फ कुछ सेकंड देता है अपनी बात रखने के लिए। अगर आपने उन सेकंड्स में उसे यह यकीन नहीं दिलाया कि आप उसका काम आसान कर देंगे तो वह आपको सीधा रिजेक्ट कर देगा। इसलिए अपने प्रोडक्ट या सर्विस को इस तरह डिजाइन कीजिये कि वह कस्टमर के समय को कम न करे बल्कि उसकी क्वालिटी को बढ़ा दे। जब आप समय बचाना सीख जाते हैं तब आप असली पैसा कमाना शुरू करते हैं।
लेसन २ : टाइम मैग्नेट्स और टाइम स्लाइसिंग
पिछले लेसन में हमने देखा कि टाइम ही पैसा है। लेकिन अब सवाल यह है कि उस टाइम को अपनी मुट्ठी में कैसे किया जाए। एड्रियन ऑट यहाँ टाइम मैग्नेट्स का कांसेप्ट लाते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आप बस दो मिनट के लिए इंस्टाग्राम रील देखने बैठते हैं और कब दो घंटे बीत जाते हैं आपको पता भी नहीं चलता। मुबारक हो। आप एक टाइम मैग्नेट के चंगुल में फंस चुके हैं। एक सफल बिजनेस वही है जो कस्टमर के दिन के उन छोटे छोटे टुकड़ों को पकड़ ले जिन्हें लेखक टाइम स्लाइसिंग कहते हैं।
सोचिये आप मेट्रो में सफर कर रहे हैं या किसी डॉक्टर के क्लिनिक के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। आपके पास पांच या दस मिनट का फालतू समय है। उस वक्त आप कोई भारी भरकम किताब नहीं पढ़ेंगे और न ही कोई लंबी फिल्म देखेंगे। आप अपना फोन निकालेंगे और वह काम करेंगे जो उन पांच मिनटों में फिट हो जाए। अगर आपका बिजनेस उन पांच मिनटों के लिए कोई मजेदार या जरूरी चीज ऑफर नहीं कर रहा है तो आप रेस से बाहर हैं।
आजकल के स्टार्टअप्स को लगता है कि उन्हें कस्टमर का पूरा दिन चाहिए। अरे सर कस्टमर के पास खुद के लिए टाइम नहीं है वह आपको पूरा दिन क्यों देगा। आपको तो बस उसके वह छोटे छोटे पल चाहिए जो वह बोरियत में बिताता है। इसे ऐसे समझिये जैसे आप किसी शादी में गए हों। वहां लोग मेन कोर्स से ज्यादा स्टार्टर्स यानी गोलगप्पे और पनीर टिक्का पर टूट पड़ते हैं। क्यों। क्योंकि उन्हें खाने में मेहनत कम लगती है और मजा तुरंत आता है। आपका प्रोडक्ट भी वही गोलगप्पा होना चाहिए जो कस्टमर के छोटे से ब्रेक में फिट हो जाए और उसे चटपटा अहसास दे।
कुछ महान बिजनेस मालिक ऐसे ऐप्स बनाते हैं जो ओपन होने में ही इतना समय लेते हैं कि जितनी देर में ऐप खुले उतनी देर में तो बंदा चाय पीकर वापस आ जाए। ऐसे लोग शायद यह सोचते हैं कि कस्टमर उनके ब्रांड के लोगो को निहारने के लिए ही पैदा हुआ है। सर जाग जाइये। अगर आपका प्रोडक्ट टाइम स्लाइसिंग नहीं कर पा रहा है तो वह कस्टमर के लिए एक बोझ है।
असली खिलाड़ी वह है जो यह समझता है कि कब कस्टमर थका हुआ है और कब वह कुछ नया सीखना चाहता है। जब कोई जिम में पसीना बहा रहा होता है तब वह ऑडियो बुक सुन सकता है। जब कोई ऑफिस से घर जा रहा होता है तब वह शॉर्ट न्यूज पढ़ सकता है। आपको बस यह देखना है कि आपकी सर्विस कस्टमर के रूटीन के किस खाली छेद में फिट बैठती है। अगर आप उस खाली जगह को भर देते हैं तो आप कस्टमर के दिमाग पर राज करते हैं।
याद रखिये आज की दुनिया में अटेंशन स्पैन एक सोने की खदान की तरह है। हर कोई उसे खोदना चाहता है। लेकिन आप उसे तभी खोद पाएंगे जब आपके पास सही औजार होंगे। टाइम मैग्नेट बनने के लिए आपको कस्टमर को मजबूर नहीं करना है बल्कि उसे लुभाना है। उसे यह अहसास दिलाना है कि आपके साथ बिताया गया हर छोटा पल उसे कुछ न कुछ दे रहा है। चाहे वह मनोरंजन हो या जानकारी। जब आप कस्टमर के समय के छोटे छोटे टुकड़ों को इज्जत देने लगते हैं तो वह बदले में आपको अपना वफादार बना लेता है।
लेसन ३ : आदतों का ऑटोपायलट
अब तक हमने समय बचाने और समय चुराने की बात की। लेकिन सबसे बड़ा खेल तब शुरू होता है जब आपको कस्टमर को बार-बार बुलाना न पड़े। बल्कि वह खुद खिंचा चला आए। एड्रियन ऑट इसे आदतों का ऑटोपायलट कहते हैं। इसका मतलब है कस्टमर के डेली रूटीन में इस कदर घुस जाना कि आपका प्रोडक्ट इस्तेमाल करना उसके लिए सांस लेने जैसा नेचुरल हो जाए। उसे सोचना न पड़े कि उसे क्या करना है। उसका हाथ अपने आप आपके ऐप या प्रोडक्ट की तरफ बढ़ना चाहिए।
सुबह उठते ही आपको ब्रश करना है यह सोचने के लिए क्या आपको किसी मोटिवेशनल स्पीकर की जरूरत पड़ती है। नहीं न। वह आपकी आदत बन चुका है। अब जरा उन ब्रांड्स को देखिये जो आपकी जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। सुबह उठते ही व्हाट्सएप चेक करना या कुछ भी भूलने पर गूगल करना। ये कंपनियाँ कोई सामान नहीं बेच रही हैं। इन्होंने आपकी आदतों पर कब्जा कर लिया है। अगर आपका बिजनेस अभी भी हर बार सेल करने के लिए कस्टमर को बड़े-बड़े डिस्काउंट के लालच दे रहा है तो समझ लीजिये आप अभी भी स्ट्रगल कर रहे हैं।
कुछ महान मार्केटिंग गुरु सोचते हैं कि वे रोज कस्टमर को नोटिफिकेशन भेजकर उसे परेशान करेंगे और वह उनका सामान खरीद लेगा। सर जी इसे मार्केटिंग नहीं इसे ऑनलाइन छेड़खानी कहते हैं। लोग आपके नोटिफिकेशन से प्यार नहीं करते बल्कि उससे चिढ़कर आपकी ऐप को अनइंस्टॉल कर देते हैं। असली टैलेंट इसमें है कि आप कस्टमर की लाइफ की किसी प्रॉब्लम का हिस्सा बन जाएं और फिर उसका परमानेंट सलूशन बन जाएं।
जब कोई इंसान किसी खास सिचुएशन में होता है तो उसका दिमाग शॉर्टकट ढूंढता है। जैसे ही भूख लगी तो दिमाग में जो पहला नाम आया वही असली विनर है। आपको अपने ब्रांड को उस 'पहले नाम' वाली जगह पर पहुँचाना है। इसके लिए आपको कस्टमर के बिहेवियर को समझना होगा। वह कब सोता है। कब जागता है। उसे कब चिड़चिड़ाहट होती है और कब वह खुश होता है। जब आप उसके इमोशन्स और टाइमिंग को मैच कर लेते हैं तब आप सेल्स की दुनिया के राजा बन जाते हैं।
आज के इस हमेशा कनेक्टेड रहने वाले युग में लोग उन चीजों को ज्यादा पसंद करते हैं जो उनका दिमाग इस्तेमाल करना कम कर दें। लोग थक चुके हैं फैसले ले लेकर। उन्हें एक ऐसा भरोसा चाहिए जहाँ उन्हें पता हो कि यहाँ मेरा काम बिना किसी सिरदर्द के हो जाएगा। अगर आप वह भरोसा और वह आसानी दे सकते हैं तो मुबारक हो। आपने कस्टमर के दिमाग में अपना परमानेंट घर बना लिया है। अब आपको विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि आपकी पब्लिसिटी अब कस्टमर की आदत खुद करेगी।
तो दोस्तों, द 24 ऑवर कस्टमर हमें सिखाती है कि आज की इकोनॉमी में जीत उसकी नहीं है जिसके पास सबसे अच्छा प्रोडक्ट है बल्कि उसकी है जो कस्टमर के समय और आदतों को सबसे बेहतर समझता है। अगर आप एक बिजनेसमैन हैं या बनने की सोच रहे हैं तो याद रखिये। कस्टमर का समय चुराना बंद कीजिये और उसके समय की वैल्यू बढ़ाना शुरू कीजिये।
क्या आप आज भी पुराने तरीकों से लोगों का टाइम वेस्ट कर रहे हैं या आप उनके लिए एक टाइम मैग्नेट बनने को तैयार हैं। नीचे कमेंट्स में बताइये कि इस आर्टिकल का कौन सा लेसन आपकी लाइफ या बिजनेस को बदल सकता है। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जो कहते हैं कि उनके पास टाइम नहीं है। शायद उन्हें समझ आ जाए कि उनका टाइम आखिर जा कहाँ रहा है।
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