अगर आपको लगता है कि सिर्फ एक शानदार आइडिया आपको करोड़पति बना देगा तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का प्लान खुद लिख रहे हैं। दुनिया आइडियाज से भरी पड़ी है पर आपकी औकात और बैंक बैलेंस इसलिए नहीं बढ़ रहा क्योंकि आपको एग्जीक्यूशन का ए भी नहीं पता। शायद आपको फेल होने का इतना शौक है कि आप अभी भी उसी घिसे पिटे तरीके से काम कर रहे हैं जो कभी काम नहीं आने वाला।
चिंता मत कीजिये क्योंकि आज हम विजय गोविन्दराजन की किताब द अदर साइड ऑफ इनोवेशन से वो सीक्रेट्स निकालेंगे जो आपके फ्लॉप आइडियाज को भी सक्सेसफुल बना देंगे। इस आर्टिकल में हम उन ३ बड़े लेसन्स के बारे में बात करेंगे जो आपके काम करने के नजरिये को पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : डेडिकेटेड टीम की पावर और पुरानी आदतों का कचरा
ज्यादातर लोग बिजनेस या स्टार्टअप की दुनिया में एक बहुत बड़ी गलती करते हैं। वो सोचते हैं कि जो टीम रोज का काम संभाल रही है वही टीम दुनिया बदल देने वाला नया प्रोडक्ट भी बना लेगी। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अपने घर के काम करने वाले हेल्पर से उम्मीद करें कि वो संडे को रॉकेट साइंस पढ़कर मंगल ग्रह पर बस्ती बसा देगा। भाई साहब ऐसा नहीं होता है। लेखक कहते हैं कि अगर आपको कुछ नया करना है तो आपको एक डेडिकेटेड टीम बनानी पड़ेगी।
सोचिये आपने एक नई कॉफी शॉप खोलने का प्लान बनाया। अब आप अपनी पुरानी टीम के वेटर को बुलाकर कहते हैं कि भाई तू कल से नया मेन्यू भी डिसाइड कर और मार्केट की रिसर्च भी कर। बेचारा वेटर क्या करेगा। वो ऑर्डर लेगा या कस्टमर की साइकोलॉजी समझेगा। नतीजा यह होगा कि न तो कॉफी बिकेगी और न ही कोई नया इनोवेशन होगा। आपकी पुरानी टीम जिसे लेखक परफॉरमेंस इंजन कहते हैं उसका काम है एफिशिएंसी। यानी जो काम जैसा चल रहा है उसे वैसा ही मक्खन की तरह चलाते रहना। लेकिन इनोवेशन का काम है अनिश्चितता से लड़ना।
जब आप एक डेडिकेटेड टीम बनाते हैं तो आप उन्हें एक अलग माहौल देते हैं। वहां कोई यह नहीं कहता कि पिछले महीने की सेल कितनी कम थी। वहां सिर्फ इस पर बात होती है कि नया क्या सीखा। अगर आप अपनी पुरानी टीम पर ही नया बोझ डालेंगे तो वो इनोवेशन का गला घोंट देंगे क्योंकि उन्हें अपना रूटीन प्यारा होता है। इनोवेशन करने के लिए आपको ऐसे पागल लोगों की जरूरत है जो सिर्फ उसी नए प्रोजेक्ट के लिए जिएं और मरें।
अगर आप एक मैनेजर हैं और अपनी उसी घिसी पिटी टीम से चमत्कार की उम्मीद कर रहे हैं तो आप एक बहुत बड़े भ्रम में जी रहे हैं। आपको अपनी टीम को दो हिस्सों में बांटना ही होगा। एक वो जो आज का पैसा लाएंगे और दूसरे वो जो कल का रास्ता बनाएंगे। बिना डेडिकेटेड टीम के आपका आइडिया सिर्फ एक कागज का टुकड़ा बनकर रह जाएगा जिसे अगले दिन कबाड़ी वाला ले जाएगा।
लेसन २ : परफॉरमेंस इंजन और इनोवेशन टीम के बीच का 'ब्रोमांस'
अगर आपको लगता है कि एक अलग टीम बना देने से आपका काम खत्म हो गया तो आप अभी भी नींद में हैं। असली सर्कस तो अब शुरू होता है। लेखक कहते हैं कि आपकी पुरानी टीम यानी परफॉरमेंस इंजन और आपकी नई इनोवेशन टीम के बीच एक ऐसी पार्टनरशिप होनी चाहिए जैसी एक खडूस ससुर और एक मॉडर्न दामाद के बीच होती है। दोनों एक दूसरे को पसंद नहीं करते पर घर चलाने के लिए साथ रहना मजबूरी है।
परफॉरमेंस इंजन का काम है डिसिप्लिन और रूल्स को फॉलो करना। वहीं इनोवेशन टीम का काम है रूल्स को तोड़ना और एक्सपेरिमेंट करना। अब जरा सोचिये जब आप अपनी कंपनी के पुराने अकाउंटेंट को नए स्टार्टअप प्रोजेक्ट के लिए बजट मांगने के लिए भेजते हैं तो वो ऐसे चेहरा बनाता है जैसे आपने उसकी किडनी मांग ली हो। वो कहेगा कि भाई साहब जब पिछला काम ही ठीक से नहीं चल रहा तो इस नए ड्रामे पर पैसा क्यों बर्बाद करना। यही वो जगह है जहाँ पार्टनरशिप की कमी आपके इनोवेशन का कत्ल कर देती है।
मान लीजिये एक बहुत बड़ी मिठाई की दुकान है जो सालो से लड्डू बेच रही है। अब मालिक का बेटा आता है और कहता है कि हमें शुगर फ्री चॉकलेट पेस्ट्री बेचनी चाहिए। उसने एक अलग शेफ भी रख लिया। अब पुराने कारीगर जो तीस साल से चाशनी में डूबे हुए हैं वो उस नए शेफ को ऐसे देखते हैं जैसे वो किसी दूसरे ग्रह से आया हो। वो उसे ओवन का इस्तेमाल नहीं करने देंगे और न ही उसे फ्रिज में जगह देंगे। अगर मालिक ने इन दोनों के बीच सुलह नहीं कराई तो पेस्ट्री कभी नहीं बनेगी और दुकान सिर्फ लड्डू के भरोसे रह जाएगी।
सच्चाई यह है कि इनोवेशन टीम को परफॉरमेंस इंजन के रिसोर्सेज की जरूरत होती है। उनके पास पैसा है उनके पास नाम है और उनके पास डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क है। बिना पुरानी टीम के सपोर्ट के नई टीम सिर्फ हवा में महल बनाएगी। आपको एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहाँ पुरानी टीम को यह न लगे कि नई टीम उनके पेट पर लात मार रही है और नई टीम को यह न लगे कि पुराने लोग उनकी उड़ान रोक रहे हैं। अगर इन दोनों के बीच का यह बैलेंस बिगड़ा तो समझो आपका इन्वेस्टमेंट गया पानी में।
लेसन ३ : डेटा का असली खेल और एक्सपेरिमेंटल लर्निंग
दुनिया के आधे से ज्यादा बिजनेस प्लान्स इसलिए कचरे के डिब्बे में जाते हैं क्योंकि लोग भविष्य को ऐसे प्रेडिक्ट करते हैं जैसे वो कोई महान ज्योतिषी हों। लेखक कहते हैं कि इनोवेशन की दुनिया में 'प्लानिंग' से ज्यादा 'लर्निंग' की वैल्यू है। अगर आप सोचते हैं कि आपने डे वन पर जो एक्सेल शीट बनाई है वो आखिरी दिन तक सच साबित होगी तो सच मानिए आपकी मासूमियत पर मुझे रोना आ रहा है।
इनोवेशन कोई रेस नहीं है जहाँ आपको बस भागना है। यह एक भूलभुलैया है जहाँ आपको हर मोड़ पर टकराकर सीखना पड़ता है। मान लीजिये आपने एक नया फिटनेस ऐप बनाया। आपने सोचा था कि लोग सुबह ५ बजे उठकर योगा करेंगे। लेकिन असलियत में लोग रात को १२ बजे पिज्जा खाते हुए ऐप पर डाइट चार्ट देख रहे हैं। अब अगर आप अपने पुराने प्लान पर अड़े रहे तो आप डूब जाएंगे। लेकिन अगर आप इस डेटा से सीखेंगे और अपना प्लान बदलेंगे तो आप गेम जीत जाएंगे।
हकीकत तो यह है कि इनोवेशन टीम का रिपोर्ट कार्ड इस आधार पर नहीं बनना चाहिए कि उन्होंने कितना पैसा कमाया बल्कि इस आधार पर बनना चाहिए कि उन्होंने कितनी जल्दी और कितनी कम लागत में यह सीखा कि क्या काम नहीं कर रहा है। लोग अक्सर अपनी गलतियों को छुपाते हैं जैसे शादी में कोई दूर का बदतमीज रिश्तेदार। लेकिन इनोवेशन में आपको अपनी गलतियों को गले लगाना होगा। लेखक इसे 'अनुशासित प्रयोग' कहते हैं।
सोचिये एक नया रेस्टोरेंट खुला जिसने दावा किया कि वो बिना नमक का खाना खिलाएंगे क्योंकि यह हेल्दी है। एक हफ्ते बाद कोई कस्टमर नहीं आया। अब अगर मैनेजर यह कहे कि लोग ही बेवकूफ हैं जिन्हें हेल्थ की फिक्र नहीं है तो वो गधा है। लेकिन अगर वो तुरंत समझ जाए कि भाई साहब इंडिया में स्वाद के बिना पत्ता भी नहीं हिलता और वो अपने मेन्यू में मसाले ऐड कर दे तो वो बच जाएगा। इसे ही कहते हैं एक्सपेरिमेंटल लर्निंग। इनोवेशन में आपका ईगो आपका सबसे बड़ा दुश्मन है। जितना जल्दी आप यह मान लेंगे कि आपको कुछ नहीं पता उतना ही जल्दी आप कुछ बड़ा बना पाएंगे।
तो दोस्तों, द अदर साइड ऑफ इनोवेशन हमें सिर्फ एक ही बात सिखाती है कि आइडिया तो सिर्फ शुरुआत है असली जंग तो उसे जमीन पर उतारने में है। अगर आप भी किसी नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं तो अपनी टीम को बांटिये पार्टनरशिप बनाइये और हर गलती से कुछ नया सीखिए।
अब आपकी बारी है। क्या आप भी किसी ऐसे आइडिया पर काम कर रहे हैं जिसे आप डर की वजह से शुरू नहीं कर पा रहे। कमेंट में बताइये कि आपको इन ३ लेसन्स में से सबसे ज्यादा काम का कौन सा लगा। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो सिर्फ बड़ी बड़ी बातें करता है पर काम कुछ नहीं करता। याद रखिये सिर्फ सोचने से कुछ नहीं होगा करना तो पड़ेगा।
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