क्या आप अभी भी अकेले कोने में बैठकर अपनी सक्सेस का इंतजार कर रहे हैं। सच तो यह है कि आपकी ग्रोथ रुकी हुई है क्योंकि आप नेटवर्किंग के नाम पर सिर्फ बिजनेस कार्ड्स कलेक्ट कर रहे हैं। इस बेवकूफी को छोड़िए वरना आप उन 29 परसेंट लोगों में कभी नहीं आ पाएंगे जो असली मलाई खा रहे हैं।
दि 29 परसेंट सोल्यूशन हमें सिखाती है कि नेटवर्किंग कोई रॉकेट साइंस नहीं बल्कि 52 हफ्तों का एक डिसिप्लिन है। चलिए जानते हैं वो 3 बड़े लेसन्स जो आपकी प्रोफेशनल लाइफ को पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : नेटवर्किंग एक खेती है शिकार नहीं
अक्सर लोग नेटवर्किंग को एक जंग की तरह देखते हैं जहाँ उन्हें बस शिकार करना होता है। आप किसी इवेंट में जाते हैं और वहां मौजूद हर इंसान पर अपना बिजनेस कार्ड ऐसे फेंकते हैं जैसे कोई चुनाव का पर्चा बांट रहे हों। आपको लगता है कि जितने ज्यादा कार्ड्स आपने बांटे उतनी ही बड़ी आपकी नेटवर्किंग हो गई। लेकिन सच तो यह है कि लोग आपके कार्ड से अपना चश्मा साफ करके उसे डस्टबिन में डाल देते हैं। इवान मिस्नर कहते हैं कि नेटवर्किंग हंटिंग नहीं बल्कि फार्मिंग है। मतलब यह कोई शिकार नहीं बल्कि खेती है।
खेती में आप आज बीज बोते हैं और महीनों तक उसे पानी देते हैं तब जाकर फल मिलता है। लेकिन आप चाहते हैं कि आज हेलो बोला और कल वो बंदा आपको करोड़ों का कॉन्ट्रैक्ट दे दे। भाई साहब इतना भरोसा तो लोग अपने पड़ोसी पर नहीं करते जिसने कल ही उनसे चीनी उधार मांगी थी। अगर आप किसी पार्टी में जाकर सीधे अपना प्रोडक्ट बेचने लगते हैं तो आप उस सेल्समैन की तरह लगते हैं जो बिना पूछे घर में घुस आता है। लोग आपसे दूर भागने लगते हैं। असल नेटवर्किंग का मतलब है सामने वाले के साथ एक गहरा रिश्ता बनाना। आपको यह देखना होता है कि आप उसकी लाइफ में क्या वैल्यू जोड़ सकते हैं।
मान लीजिए आपका कोई दोस्त है जो हमेशा बस आपसे मदद मांगता है लेकिन जब आपको जरूरत होती है तो उसका फोन साइलेंट पर चला जाता है। क्या आप उसे अपना नेटवर्क कहेंगे। बिल्कुल नहीं। आप उसे सिरदर्द कहेंगे। सक्सेसफुल नेटवर्किंग का पहला नियम यही है कि पहले आप बीज बोएं। लोगों की बिना किसी स्वार्थ के मदद करें। जब आप दूसरों के काम आते हैं तब आप उनके दिमाग में एक क्रेडिबिलिटी बनाते हैं।
मान लीजिए आप एक ग्राफिक डिजाइनर हैं और किसी इवेंट में एक स्टार्टअप फाउंडर से मिलते हैं। आप उसे अपनी सर्विस बेचने के बजाय बस यह सलाह देते हैं कि उसकी वेबसाइट का कलर कॉम्बिनेशन थोड़ा बेहतर हो सकता है। आप उसे एक फ्री टूल का नाम बता देते हैं। आपने यहाँ कुछ बेचा नहीं बल्कि उसकी मदद की। अब जब भी उसे किसी बड़े प्रोजेक्ट के लिए डिजाइनर चाहिए होगा तो उसे वो सेल्समैन याद नहीं आएगा जो कार्ड बांट रहा था बल्कि आप याद आएंगे जिसने उसकी प्रॉब्लम सॉल्व की थी।
यही वह 29 परसेंट वाला सीक्रेट है। दुनिया के टॉप 29 परसेंट लोग कभी भी अकेले तरक्की नहीं करते। वे अपने साथ एक ऐसी फौज लेकर चलते हैं जो उनके लिए दरवाजे खोलती है। लेकिन यह फौज तैयार करने के लिए आपको पसीना बहाना पड़ता है। आपको लोगों का हालचाल पूछना पड़ता है। आपको उनके बर्थडे पर केवल फेसबुक वाला ऑटोमेटेड मैसेज नहीं बल्कि एक असली कॉल करना पड़ता है। अगर आप सोचते हैं कि आप घर में दुबक कर बैठेंगे और कामयाबी आपके दरवाजे की घंटी बजाएगी तो शायद आप गलत पते पर रह रहे हैं। नेटवर्किंग का मतलब है बाहर निकलना और लोगों के दिलों में जगह बनाना। जब आप लोगों की लाइफ में इन्वेस्ट करते हैं तभी आपको बिजनेस में रिटर्न मिलता है। यह प्रोसेस स्लो है पर इसके रिजल्ट्स बहुत सॉलिड होते हैं।
लेसन २ : नेटवर्किंग में डिसिप्लिन ही असली किंग है
ज्यादातर लोग नेटवर्किंग को एक इत्तेफाक समझते हैं। उन्हें लगता है कि किसी दिन कोई फरिश्ता टकराएगा और उनकी किस्मत बदल देगा। लेकिन असलियत में नेटवर्किंग कोई लॉटरी नहीं बल्कि एक डिसिप्लिन है। इवान मिस्नर ने इस बुक में पूरे 52 हफ्तों का प्लान दिया है। इसका मतलब है कि आपको हर हफ्ते कुछ न कुछ ऐसा करना है जिससे आपका नेटवर्क मजबूत हो। अगर आप जिम जाते हैं और एक ही दिन में 10 घंटे एक्सरसाइज करते हैं तो बॉडी नहीं बनती बल्कि सिर्फ शरीर में दर्द होता है। बॉडी तब बनती है जब आप हर दिन आधा घंटा पसीना बहाते हैं। नेटवर्किंग का भी यही हाल है।
इमेजिन कीजिए एक ऐसे इंसान को जो साल में एक बार दिवाली पर अपने सारे क्लाइंट्स को मैसेज करता है। उसे लगता है कि उसने बहुत बड़ा तीर मार दिया। लेकिन बाकी के 364 दिन वो गायब रहता है। ऐसे इंसान को लोग सिर्फ एक मतलबखोर समझते हैं। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपको याद रखें तो आपको उनकी नजरों के सामने रहना होगा। और यहाँ मेरा मतलब यह नहीं है कि आप उनकी हर फोटो पर जबरदस्ती 'नाइस पिक' कमेंट करें। आपको एक सिस्टम बनाना होगा। जैसे हफ्ते में एक बार किसी पुराने कांटेक्ट को कॉल करना या महीने में एक बार किसी नए इंसान से कॉफी पर मिलना।
मान लीजिए आप एक रियल एस्टेट एजेंट हैं। आपने एक कस्टमर को घर दिखाया और उसने मना कर दिया। अब आपके पास दो रास्ते हैं। या तो आप उसे भूल जाएं या फिर आप उसे हर महीने एक काम की जानकारी भेजें। जैसे कि मार्केट में नए रेट्स क्या चल रहे हैं या होम लोन कैसे सस्ता मिल सकता है। जब तीन महीने बाद उसे सच में घर खरीदना होगा तो वो किसे याद करेगा। उस एजेंट को जो गायब हो गया या आपको जो लगातार उसकी हेल्प कर रहा था। डिसिप्लिन का मतलब यही है कि आप लोगों के दिमाग में अपनी जगह पक्की कर लें।
लोग अक्सर बहाना बनाते हैं कि मेरे पास टाइम नहीं है। भाई साहब आपके पास नेटफ्लिक्स पर पूरी सीरीज खत्म करने का टाइम है पर एक ईमेल लिखने का टाइम नहीं है। यह तो वही बात हो गई कि आप कह रहे हैं कि मुझे प्यास बहुत लगी है पर मैं कुआं नहीं खोद सकता। दि 29 परसेंट सोल्यूशन हमें सिखाती है कि सक्सेसफुल लोग अपने कैलेंडर में नेटवर्किंग के लिए अलग से टाइम निकालते हैं। वे इसे कोई फालतू काम नहीं बल्कि अपने बिजनेस का सबसे जरूरी हिस्सा मानते हैं।
अगर आप आज किसी से मिलते हैं और फिर उसे फॉलो अप करना भूल जाते हैं तो आपने अपना टाइम और पैसा दोनों बर्बाद किया है। फॉलो अप करना नेटवर्किंग की जान है। बिना फॉलो अप के नेटवर्किंग वैसी ही है जैसे बिना सिम कार्ड के आईफोन। दिखने में बहुत बढ़िया पर किसी काम का नहीं। जब आप डिसिप्लिन के साथ लोगों से जुड़ते हैं तो आप एक भरोसे का पुल बनाते हैं। और बिजनेस की दुनिया में भरोसा ही वो करंसी है जो कभी फेल नहीं होती। इसलिए आज से ही अपनी लिस्ट बनाइये और उन लोगों से बात करना शुरू कीजिये जिनसे आपने महीनों से बात नहीं की है। याद रखिये कि एक छोटा सा हेलो भी लाखों का बिजनेस दिला सकता है बशर्ते आप उसे सही समय पर और सही तरीके से कहें।
लेसन ३ : रेफरल्स की ताकत और क्रेडिबिलिटी का खेल
क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग बिना किसी एडवरटाइजमेंट के भी हमेशा बिजी क्यों रहते हैं। उनके पास काम की कमी क्यों नहीं होती। इसका जवाब है रेफरल्स। जब आपका नेटवर्क आपके लिए मार्केटिंग करने लगे तो समझ जाइये कि आपने गेम जीत लिया है। इवान मिस्नर इसे 'विजिबिलिटी से क्रेडिबिलिटी और फिर प्रॉफिटेबिलिटी' का सफर कहते हैं। लेकिन समस्या यह है कि आप चाहते हैं कि लोग आपको रेफरल दें पर आपने खुद कभी किसी की मदद नहीं की। यह तो वही बात हो गई कि आप बैंक में बिना पैसे जमा किए चेक बाउंस होने की शिकायत कर रहे हैं।
रेफरल कमाना एक आर्ट है। आपको लोगों को यह यकीन दिलाना पड़ता है कि आप अपने काम के पक्के हैं। मान लीजिए आप एक डॉक्टर हैं। अगर कोई पेशेंट आपकी तारीफ चार लोगों से करता है तो वो चार लोग बिना किसी शक के आपके पास आएंगे। लेकिन अगर आप खुद अपनी तारीफ का ढिंढोरा पीटेंगे तो लोग कहेंगे कि ये तो अपनी दुकान चला रहा है। दूसरों के शब्द आपके शब्दों से हजार गुना ज्यादा ताकतवर होते हैं। लेकिन ये शब्द तभी निकलते हैं जब आप लोगों को 'गिवर्स गेन' की फिलॉसफी से देखते हैं। यानी पहले आप दूसरों को बिजनेस दें तब जाकर दुनिया आपको बिजनेस देगी।
मान लीजिए आपका एक दोस्त है जो बहुत अच्छा खाना बनाता है पर उसकी मार्केटिंग जीरो है। आप अपने ऑफिस की पार्टी का आर्डर उसे दिलवा देते हैं। अब आपने क्या किया। आपने अपने दोस्त की मदद की और ऑफिस वालों को अच्छा खाना खिलवाया। अब जब भी आपके दोस्त को किसी वेब डिजाइनर की जरूरत होगी तो क्या वो किसी अनजान को ढूंढेगा। बिल्कुल नहीं। वो सबसे पहले आपको फोन करेगा। आपने यहाँ एक ऐसा लूप बना दिया जहाँ हर कोई एक दूसरे की ग्रोथ में मदद कर रहा है। लेकिन अगर आप कंजूसों की तरह सिर्फ अपना फायदा सोचेंगे तो आपका नेटवर्क एक सूखे रेगिस्तान जैसा हो जाएगा।
दुनिया के सबसे अमीर लोग नेटवर्क बनाते हैं और बाकी सब काम ढूंढते हैं। यह लाइन आपने कहीं न कहीं सुनी होगी पर इसे अमल में लाना ही असली चैलेंज है। आपको अपनी 'रेफरल पार्टनर' की एक टीम बनानी होगी। ये वो लोग हैं जो आपके फील्ड से जुड़े हैं पर आपके कॉम्पिटिटर नहीं हैं। जैसे एक शादी के फोटोग्राफर के लिए एक कैटरर या मेकअप आर्टिस्ट बेस्ट रेफरल पार्टनर हो सकते हैं। जब आप एक दूसरे को बिजनेस रेफर करते हैं तो आप अकेले काम नहीं कर रहे होते बल्कि आपकी एक पूरी सेल्स टीम मार्केट में घूम रही होती है।
नेटवर्किंग कोई शॉर्टकट नहीं है, यह उन लोगों का खेल है जो धीरज रखना जानते हैं। अगर आप आज किसी की मदद करते हैं तो हो सकता है उसका फल आपको एक साल बाद मिले। लेकिन जब वो फल मिलेगा तो वो आपकी उम्मीद से कहीं ज्यादा मीठा होगा। 29 परसेंट सोल्यूशन का असली मतलब यही है कि आप उस भीड़ से अलग हो जाएं जो सिर्फ अपने बारे में सोचती है। जब आप दूसरों की सक्सेस में अपना हाथ बढ़ाते हैं तो आपकी सक्सेस अपने आप पक्की हो जाती है। अब वक्त है अपना फोन उठाने का और उस इंसान को कॉल करने का जिसे आपने बहुत समय से कोई वैल्यू नहीं दी है।
नेटवर्किंग कोई ऐसी चीज नहीं है जो आप कभी कभी करते हैं। यह एक लाइफस्टाइल है। अगर आप आज भी अकेले भाग रहे हैं तो शायद आप बहुत जल्दी थक जाएंगे। लेकिन अगर आपके पास एक मजबूत नेटवर्क है तो आप पहाड़ भी चढ़ सकते हैं। इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद क्या आप आज किसी एक इंसान की मदद करने के लिए तैयार हैं। कमेंट्स में बताएं कि आपका सबसे बड़ा नेटवर्किंग चैलेंज क्या है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा अकेला ही काम करना पसंद करता है। याद रखिये कि जुड़ने में ही जीत है।
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