The Age of Speed (Hindi)


अगर आप आज भी पुराने जमाने के कछुए की तरह धीरे चलकर रेस जीतने का सपना देख रहे हैं तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की ओर बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। दुनिया रॉकेट की स्पीड से आगे निकल रही है और आप अभी भी कल करेंगे वाले मोड में सो रहे हैं। इस भागती हुई लाइफ में अगर आप पीछे छूट गए तो लोग आपको भूलने में एक सेकंड भी नहीं लगाएंगे।

विंस पोसेंटे की बुक द एज ऑफ स्पीड हमें सिखाती है कि इस सुपर फास्ट दुनिया में सिर्फ सर्वाइव नहीं बल्कि टॉप पर कैसे पहुंचना है। चलिए जानते हैं वह ३ लाइफ चेंजिंग लेसन जो आपकी प्रोडक्टिविटी को कई गुना बढ़ा देंगे।


लेसन १ : स्पीड से डरना छोड़ो और इसे अपनी सुपरपावर बनाओ

क्या आपको भी लगता है कि दुनिया बहुत ज्यादा तेज हो गई है और आपको बस एक शांत हिमालय की गुफा में जाकर बैठ जाना चाहिए। अगर हाँ तो यकीन मानिए आप अकेले नहीं हैं लेकिन आप गलत जरूर हैं। विंस पोसेंटे अपनी किताब द एज ऑफ स्पीड में सबसे पहले हमारे इसी डर पर हमला करते हैं। हममें से ज्यादातर लोग स्पीड को अपना दुश्मन मानते हैं। हमें लगता है कि अगर हम बहुत तेज भागेंगे तो हम थक जाएंगे या फिर हमसे गलतियां होंगी। लेकिन सच तो यह है कि आज के दौर में धीरे चलना ही सबसे बड़ी गलती है।

सोचिए आप एक हाईवे पर गाड़ी चला रहे हैं जहाँ हर कोई १०० की स्पीड पर है और आप वहां ३० की स्पीड पर अपनी पुरानी साइकिल चला रहे हैं। आपको क्या लगता है कि आप सुरक्षित हैं। बिल्कुल नहीं। बल्कि आप वहां सबसे ज्यादा खतरे में हैं क्योंकि पीछे से आती हुई कोई भी तेज कार आपको उड़ा कर चली जाएगी। लाइफ का भी यही हाल है। लोग कहते हैं कि स्लो एंड स्टडी विंस द रेस। लेकिन भाई साहब वह कछुए और खरगोश का जमाना अब चला गया। आज के जमाने में वह कछुआ रेस शुरू होने से पहले ही किसी के पैर के नीचे दब चुका होता। आज की दुनिया में वही जीतता है जो तेज है और साथ ही साथ सही दिशा में है।

विंस कहते हैं कि स्पीड कोई बोझ नहीं है बल्कि यह एक चॉइस है। जब आप स्पीड को अपना लेते हैं तो आपके काम करने का तरीका बदल जाता है। आप चीजों को टालना बंद कर देते हैं। मान लीजिए आपके पास ऑफिस का एक ढेर सारा काम पेंडिंग है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। या तो आप रोते हुए उसे धीरे धीरे पूरा करें और पूरा हफ्ता खराब कर दें या फिर आप अपनी पूरी एनर्जी झोंक दें और उस काम को एक दिन में खत्म करके अगले चार दिन ऐश करें। ज्यादातर लोग पहले वाले रास्ते को चुनते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि धीरे काम करना मतलब क्वालिटी काम करना है। यह सरासर एक मिथ है।

स्पीड का मतलब हड़बड़ी में काम बिगाड़ना नहीं है। इसका मतलब है अपनी एफिशिएंसी को बढ़ाना। जब आप तेज काम करते हैं तो आपका दिमाग ज्यादा एक्टिव रहता है। आलस आपके पास भटकता भी नहीं है। असल में हम स्पीड से नहीं डरते हम उस कंट्रोल को खोने से डरते हैं जो तेज चलते वक्त हमारे हाथ से निकल सकता है। लेकिन असली खिलाड़ी वही है जो तेज रफ्तार में भी अपनी स्टियरिंग पर पकड़ मजबूत रखता है। अगर आप आज के इस मोर फास्टर नाउ वाले वर्ल्ड में अपनी जगह बनाना चाहते हैं तो आपको अपनी मेंटालिटी बदलनी होगी। आपको यह मानना होगा कि स्पीड आपकी दुश्मन नहीं बल्कि आपकी सबसे बड़ी दोस्त है। जो लोग इस बदलाव को नहीं समझेंगे वह इतिहास के पन्नों में वैसे ही खो जाएंगे जैसे नोकिया या कोडक खो गए। तो अपनी कमर कस लीजिए और इस रफ्तार का मजा लेना सीखिए।


लेसन २ : शोर के बीच क्लैरिटी की ताकत को पहचानो

जब लाइफ की गाड़ी २०० की स्पीड पर दौड़ रही हो तो सबसे बड़ी समस्या यह नहीं होती कि रास्ता कैसा है बल्कि समस्या यह होती है कि आपको सामने का शीशा साफ दिख रहा है या नहीं। विंस पोसेंटे कहते हैं कि इस भागती हुई दुनिया में ज्यादातर लोग इसलिए फेल नहीं होते कि वह धीरे हैं बल्कि इसलिए फेल होते हैं क्योंकि वह कंफ्यूज हैं। जब सब कुछ बहुत तेज चलता है तो हमारे दिमाग पर सूचनाओं का इतना बड़ा हमला होता है कि हम समझ ही नहीं पाते कि आखिर करना क्या है। इसे कहते हैं स्पीड का कोहरा।

कल्पना कीजिए आप एक सुपरमार्केट में खड़े हैं और वहां सेल लगी है। हर तरफ लोग चिल्ला रहे हैं और सामान लूट रहे हैं। अब अगर आप वहां बिना लिस्ट के गए हैं तो आप पक्का कुछ ऐसा कूड़ा खरीद कर घर लाएंगे जिसकी आपको जरूरत ही नहीं थी। यही हमारे करियर और लाइफ के साथ हो रहा है। हम हर तरफ भाग रहे हैं क्योंकि हमें लगता है कि जो तेज भाग रहा है वही जीत रहा है। लेकिन भाई अगर आप गलत दिशा में पूरी ताकत से भाग रहे हैं तो आप अपनी मंजिल से और भी ज्यादा दूर होते जा रहे हैं। बिना क्लैरिटी के स्पीड सिर्फ बर्बादी का दूसरा नाम है।

विंस यहाँ एक बहुत ही जबरदस्त बात कहते हैं कि जैसे जैसे दुनिया तेज होगी आपको उतना ही ज्यादा अपने फोकस को धार देनी होगी। लोग आजकल मल्टीटास्किंग के पीछे पागल हैं। उनको लगता है कि एक साथ १० काम करना मतलब बहुत बड़ा तीर मारना है। लेकिन सच तो यह है कि मल्टीटास्किंग एक स्कैम है। जब आप एक साथ फोन पर बात करते हैं खाना खाते हैं और ईमेल टाइप करते हैं तो आप किसी भी काम को उसकी पूरी पोटेंशियल के साथ नहीं कर रहे होते। आप बस अपनी एनर्जी को छोटे छोटे टुकड़ों में बांट रहे होते हैं। असली जादू तब होता है जब आप तेज तो चलते हैं लेकिन आपका पूरा ध्यान सिर्फ एक चीज पर होता है।

इसे एक लेजर लाइट की तरह समझिए। एक नॉर्मल बल्ब पूरे कमरे को रोशन करता है लेकिन वह किसी चीज को काट नहीं सकता। वहीँ एक लेजर लाइट अपनी सारी एनर्जी एक छोटे से पॉइंट पर फोकस करती है और लोहे की चादर को भी चीर देती है। आपको भी अपनी लाइफ में वही लेजर फोकस लाना होगा। जब दुनिया नोटिफिकेशन के जाल में फंसी हो और लोग रील स्क्रॉल करने में अपनी जिंदगी स्वाइप कर रहे हों तब आपको अपनी प्रायोरिटी पता होनी चाहिए। क्लैरिटी का मतलब यह नहीं है कि आपको सब कुछ पता हो बल्कि इसका मतलब यह है कि आपको यह पता हो कि अभी क्या नहीं करना है।

अक्सर लोग डरते हैं कि अगर वह एक चीज पर फोकस करेंगे तो बाकी चीजें छूट जाएंगी। हाँ बिल्कुल छूटेंगी और यही तो पॉइंट है। कचरा छूटेगा तभी तो कीमती चीज हाथ आएगी। इस फास्ट लाइफ में सक्सेसफुल होने का सीक्रेट यह नहीं है कि आप सब कुछ करें बल्कि यह है कि आप सही चीज को सबसे पहले और सबसे तेज करें। जब आपके पास यह क्लैरिटी होती है तो स्पीड आपको डराती नहीं है बल्कि आपको रोमांच देती है। जैसे एक प्रोफेशनल रेसर को पता होता है कि किस मोड़ पर गाड़ी कितनी घुमानी है वैसे ही आपको अपनी लाइफ के मोड़ पता होने चाहिए। अगर आप धुंध में गाड़ी भगाएंगे तो एक्सीडेंट पक्का है। इसलिए अपनी नजरें साफ रखिए और फिर देखिए कि आप कैसे भीड़ को पीछे छोड़कर आगे निकलते हैं।


लेसन ३ : एजिलिटी अपनाओ और गिरकर संभलना सीखो

अगर आप सोचते हैं कि आपने स्पीड पकड़ ली और फोकस सेट कर लिया तो अब लाइफ मक्खन की तरह चलेगी तो भाई साहब आप किसी और ही ग्रह पर रह रहे हैं। विंस पोसेंटे हमें बहुत साफ शब्दों में समझाते हैं कि इस तेज दुनिया का एक ही नियम है और वह है बदलाव। यहाँ सब कुछ इतनी जल्दी बदलता है कि जब तक आप अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए पार्टी प्लान करते हैं तब तक मार्केट की हवा ही बदल चुकी होती है। इसीलिए यहाँ सिर्फ तेज होना काफी नहीं है आपको लचीला यानी एजिल होना पड़ेगा।

मान लीजिए आप एक बहुत ही शानदार पत्थर का बुत हैं जो बहुत मजबूत है और अपनी जगह से हिलता नहीं है। एक तेज आंधी आती है और आपको अपनी जगह से उखाड़ कर फेंक देती है क्योंकि आप मुड़ नहीं सकते थे। वहीं एक छोटी सी घास का तिनका है जो हवा के साथ झुक जाता है और जैसे ही आंधी जाती है वह फिर से खड़ा हो जाता है। लाइफ में भी यही होता है। जो लोग यह कहते हैं कि मैं तो ऐसे ही काम करता हूं या मेरा तो यही तरीका है वह अक्सर समय की मार झेल नहीं पाते। आपको अपनी ईगो को साइड में रखकर सिचुएशन के हिसाब से खुद को ढालना सीखना होगा।

विंस यहाँ एक और बहुत ही मजेदार बात बताते हैं। वह कहते हैं कि इस फास्ट लाइफ में गलतियां होना पक्का है। जब आप तेज भागेंगे तो आप गिरेंगे भी और शायद आपकी नाक पर चोट भी आएगी। लेकिन हार वह नहीं है जो गिर गया बल्कि हार वह है जो गिरने के बाद वहीँ बैठकर अपनी किस्मत को कोसने लगा। जो लोग सफल होते हैं वह भी गिरते हैं बस वह गिरकर संभलने में और वापस भागने में कम समय लगाते हैं। इसी को एजिलिटी कहते हैं। अगर आपका कोई आईडिया फेल हो गया या किसी प्रोजेक्ट में नुकसान हो गया तो उसके बारे में हफ़्तों तक शोक मत मनाइए। अपनी गलती से लेसन लीजिये और तुरंत अगले कदम की ओर बढ़ जाइए।

आजकल के स्टार्टअप कल्चर में एक बहुत मशहूर लाइन है फेल फास्ट। इसका मतलब यह नहीं है कि जानबूझकर फेल हो जाओ बल्कि इसका मतलब यह है कि अगर फेल होना ही है तो जल्दी हो जाओ ताकि आपके पास संभलने और फिर से कोशिश करने का वक्त बचा रहे। जब आप एजिलिटी के साथ स्पीड को मिला देते हैं तो आप एक ऐसे खिलाड़ी बन जाते हैं जिसे हराना नामुमकिन है। आप दुनिया को यह दिखाते हैं कि चाहे कितनी भी बड़ी रुकावट क्यों न आए आप रास्ता बदलना जानते हैं लेकिन मंजिल नहीं।

अंत में बस इतना समझ लीजिए कि यह दुनिया किसी का इंतजार नहीं करती। समय की यह नदी बहुत तेजी से बह रही है। आप इसमें डूबना चाहते हैं या इसके ऊपर सर्फिंग करना चाहते हैं यह पूरी तरह आपके हाथ में है। द एज ऑफ स्पीड हमें यही याद दिलाती है कि रफ्तार से डरो मत इसे अपनी ताकत बनाओ। अपनी नजरें लक्ष्य पर टिकाए रखो और जब भी जरूरत पड़े खुद को बदलने की हिम्मत रखो। अगर आपने यह तीन लेसन अपनी लाइफ में उतार लिए तो यकीन मानिए आप उस मुकाम पर होंगे जहाँ लोग आपसे पूछेंगे कि भाई आखिर आपकी सफलता का राज क्या है।


तो दोस्तों, क्या आप तैयार हैं इस नए जमाने की रफ़्तार से हाथ मिलाने के लिए। याद रखिये समय कभी वापस नहीं आता और जो लम्हा आपने अभी खोया है वह हमेशा के लिए चला गया है। नीचे कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताएं कि इन ३ लेसन्स में से आपको सबसे ज्यादा कौन सा पसंद आया और आज से ही आप अपनी लाइफ की स्पीड बढ़ाने के लिए क्या एक छोटा सा कदम उठाने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा कल पर काम टालता रहता है। चलिए साथ मिलकर इस तेज दुनिया में अपनी पहचान बनाते हैं।

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