क्या आप अभी भी वही घिसे पिटे तरीके यूज कर रहे है और फिर रोते है कि कोई आपकी बात नहीं सुनता। बधाई हो आप अकेलेपन के मास्टर बन रहे है और अपनी लाइफ के बेस्ट मौके गवा रहे है। आपकी इन्सल्ट हो रही है और आप चुपचाप देख रहे है।
पर टेंशन मत लीजिए क्योंकि आज हम द आर्ट ऑफ पीपल बुक से कुछ ऐसे सीक्रेट्स जानेंगे जो आपकी पूरी पर्सनैलिटी बदल देंगे। यह आर्टिकल आपको एक आम इंसान से सबका चहेता बनने का पूरा रास्ता दिखाएगा। चलिए शुरू करते है शानदार तीन लेसन।
लेसन १ : लोगो को सुनने की जादुई शक्ति और आपकी चुप्पी का राज
क्या आपको लगता है कि बहुत ज्यादा बोलने से या अपनी तारीफों के पुल बांधने से लोग आपसे इम्प्रेस हो जाएंगे। अगर हाँ तो आप शायद किसी गलतफहमी के शिकार है और यह गलती आपको लाइफ में बहुत महंगी पड़ रही है। अधिकतर लोग बस यही सोचते है कि वह अपनी बात कितनी जल्दी सामने वाले के कान में ठूस दे। डेव करपेन कहते है कि असली पावर बोलने में नहीं बल्कि सामने वाले को सुनने में है। सोचिए आप किसी पार्टी में गए और वहां कोई बंदा बस अपनी नई कार और अपने प्रमोशन की बातें किए जा रहा है। क्या आप उसके पास दोबारा जाना चाहेंगे। बिलकुल नहीं। आपको लगेगा कि यह इंसान सिर्फ खुद में खोया हुआ है।
सुनना एक ऐसी कला है जिसे हम भूल चुके है। हम बस अपनी बारी का इंतज़ार करते है कि कब सामने वाला चुप हो और हम अपना ज्ञान पेलना शुरू करे। लेकिन जो इंसान चुप रहकर सामने वाले की बात को गहराई से समझता है वह असल में कंट्रोल अपने हाथ में रखता है। जब आप किसी को सुनते है तो आप उन्हें इम्पोर्टेंस दे रहे होते है। और यकीन मानिए इस दुनिया में हर इंसान बस यही चाहता है कि उसे कोई समझे और उसकी बात सुने। यह एक साइकोलॉजिकल भूख है जिसे आप अपनी चुप्पी से शांत कर सकते है।
मान लीजिए आपका कोई दोस्त अपनी लाइफ की परेशानियों के बारे में बता रहा है। बजाए इसके कि आप उसे बीच में टोककर यह कहे कि अरे यह तो कुछ भी नहीं मेरे साथ तो इससे भी बुरा हुआ था आप बस उसे बोलने दीजिए। जब आप अपनी एडवाइस देने की खुजली को कंट्रोल करते है तो सामने वाला आपके करीब महसूस करता है। यहाँ ह्यूमर की बात यह है कि लोग आपको दुनिया का सबसे बेहतरीन बात करने वाला इंसान मान लेंगे जबकि आपने पुरे वक्त में शायद दस शब्द भी नहीं बोले होंगे। यह सुनने का जादू है जो आपको एक मैग्नेटिक पर्सनैलिटी बना देता है।
प्रोफेशनल लाइफ में भी यही नियम काम करता है। अगर आप अपने क्लाइंट या बॉस की बात को ध्यान से सुनते है तो आपको वह बारीकियाँ पता चल जाती है जो बाकी लोग मिस कर देते है। आप उनकी जरूरतों को समझते है और फिर जब आप बोलते है तो आपकी बात में वजन होता है। जो लोग बिना सुने जवाब देते है वह अक्सर गलतियाँ करते है और बाद में पछताते है। सुनना आपके लिए एक इनफार्मेशन गैदरिंग टूल की तरह काम करता है जिससे आप सामने वाले की कमजोरी और ताकत दोनों जान सकते है।
अक्सर देखा गया है कि जो लोग बहुत ज्यादा बकबक करते है वह अपनी वैल्यू खुद ही कम कर लेते है। लोग उन्हें सीरियसली लेना बंद कर देते है। लेकिन वह इंसान जो नाप तौल कर बोलता है और पहले पूरी बात समझता है उसकी एक आवाज पर सब शांत हो जाते है। आपको बस अपनी ईगो को थोडा साइड में रखना है और सामने वाले को यह महसूस कराना है कि इस वक्त दुनिया में उनकी बात से ज्यादा जरूरी आपके लिए कुछ भी नहीं है। यह सुनने की कला आपको वो सब कुछ दिला सकती है जो आप चिल्लाकर भी हासिल नहीं कर सकते।
जैसे एक अच्छा शिकारी पहले अपने शिकार की आहट सुनता है वैसे ही एक स्मार्ट इंसान पहले लोगो के जज्बात सुनता है। जब आप सुनने के मास्टर बन जाते है तो आप लोगो के दिमाग में एक अलग जगह बना लेते है। लोग आपके साथ सेफ और वैल्यूड फील करते है। यही वह पहला स्टेप है जो आपको एक आम भीड़ से उठाकर लीडर की कैटेगरी में खड़ा कर देता है। और सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें आपका एक पैसा भी खर्च नहीं होता बस थोडा पेशेंस चाहिए होता है।
लेसन २ : असली और सच्चे कनेक्शन बनाना और बनावटीपन का अंत
क्या आपको लगता है कि ऑफिस में सूट पहनकर और चेहरे पर एक नकली प्लास्टिक वाली स्माइल चिपकाकर आप लोगो का दिल जीत लेंगे। अगर आप ऐसा सोचते है तो शायद आप अपनी ही दुनिया में जी रहे है। असलियत तो यह है कि लोग आपके परफेक्शन से नहीं बल्कि आपकी कमियों से जुड़ते है। डेव करपेन कहते है कि आज की दुनिया में हर कोई परफेक्ट दिखने की रेस में भाग रहा है। लेकिन इस भागदौड़ में हम यह भूल जाते है कि इंसान रोबोट से नहीं बल्कि दूसरे इंसान से बात करना चाहता है। जब आप अपनी कमजोरियों को छुपाने की कोशिश करते है तो आप लोगो के सामने एक दीवार खड़ी कर देते है।
असली कनेक्शन तब बनता है जब आप अपना मुखौटा उतारकर साइड में रख देते है। सोचिए आप किसी ऐसे इंसान से मिल रहे है जो यह दिखा रहा है कि उसकी लाइफ में सब कुछ बढ़िया है और उसने कभी कोई गलती नहीं की। क्या आपको उस पर भरोसा होगा। शायद नहीं। आपको लगेगा कि यह बंदा कुछ न कुछ छुपा रहा है। वहीं दूसरी तरफ अगर कोई आपसे अपनी छोटी सी नाकामी शेयर करता है तो आपको तुरंत उसके प्रति अपनापन महसूस होता है। यहाँ मजे की बात यह है कि हम सबको लगता है कि हमारी कमियां हमे कमजोर बनाती है जबकि असल में वही कमियां हमे लोगो के लिए भरोसेमंद बनाती है।
मान लीजिए आप एक टीम मीटिंग में है और आपने कोई बड़ी गलती कर दी है। अब आपके पास दो रास्ते है। पहला यह कि आप बहाने बनाए और दूसरों पर उंगली उठाए। दूसरा यह कि आप ईमानदारी से कहे कि हाँ मुझसे गलती हुई है और मैं इसे ठीक करूँगा। जब आप अपनी गलती मानते है तो आप लोगो की नजरों में गिरते नहीं है बल्कि आपका सम्मान और बढ़ जाता है। लोग देखते है कि आपके अंदर सच बोलने की हिम्मत है। बनावटी लोग हमेशा डर में जीते है कि कहीं उनका सच सामने न आ जाए लेकिन एक सच्चा इंसान हमेशा रिलैक्स्ड रहता है।
सोशल मीडिया के जमाने में तो यह और भी जरूरी हो गया है। हम बस अपनी जीत की फोटो डालते है पर अपनी स्ट्रगल को छुपा लेते है। लेकिन क्या आपने नोटिस किया है कि लोग उन कहानियों को ज्यादा पसंद करते है जहाँ कोई गिरकर संभला हो। जब आप अपनी असली कहानी लोगो को सुनाते है तो आप उनके दिल के दरवाजे खोल देते है। लोगो को यह मत दिखाइए कि आप कितने महान है बल्कि यह दिखाइए कि आप भी उनकी तरह एक इंसान है जो हर रोज सीख रहा है। यह सादगी ही आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है।
प्रोफेशनल नेटवर्क बनाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। यह सिर्फ इस बारे में है कि आप कितने रियल है। जब आप किसी से मिलते है तो सिर्फ यह मत सोचिए कि यह इंसान मेरे किस काम आ सकता है। इसके बजाय यह सोचिए कि मैं इस इंसान के साथ एक गहरा रिश्ता कैसे बना सकता हूँ। बनावटी रिश्ते बहुत जल्दी टूट जाते है लेकिन जो रिश्ते सच्चाई की बुनियाद पर टिके होते है वह सालों तक चलते है। लोगो को इम्प्रेस करने की कोशिश छोड़ दीजिए और बस खुद को एक्सप्रेस करना शुरू कीजिए।
सच्चा होना कोई कमजोरी नहीं बल्कि एक सुपरपावर है। जब आप अपनी असली पहचान के साथ दुनिया के सामने आते है तो आपको उन लोगो की भीड़ से अलग पहचान मिलती है जो बस दूसरों की कॉपी करने में लगे है। लोग आपकी ईमानदारी की कद्र करेंगे और आपसे जुड़ना चाहेंगे। याद रखिए कि लोग शायद यह भूल जाए कि आपने उनसे क्या कहा था पर वह यह कभी नहीं भूलेंगे कि आपने उन्हें कैसा फील कराया था। और सच्चाई से बढ़कर अच्छा फील कराने वाली कोई दूसरी चीज नहीं है।
लेसन ३ : आभार व्यक्त करने का असर और एक छोटे से थैंक यू की पावर
क्या आपको लगता है कि लोगो से काम निकलवाने के लिए आपको बहुत चालाक या टेढ़ा होना पड़ेगा। अगर आप भी इसी पुराने स्कूल की सोच में फंसे है तो यकीन मानिए आप अपनी लाइफ को खुद ही मुश्किल बना रहे है। इस दुनिया में सबसे पावरफुल चीज कोई महंगी गिफ्ट या बड़ी डील नहीं है बल्कि एक छोटा सा शब्द है और वह है थैंक यू। डेव करपेन बताते है कि आभार व्यक्त करना या ग्रैटिट्यूड दिखाना एक ऐसी स्किल है जो रातों रात आपके दुश्मन को भी दोस्त बना सकती है। लेकिन हम लोग इतने कंजूस है कि किसी को क्रेडिट देने या शुक्रिया कहने में हमारी जान निकलती है। हमे लगता है कि अगर हमने किसी की तारीफ कर दी तो शायद हम छोटे हो जाएंगे।
असल में शुक्रिया कहना किसी पर एहसान करना नहीं है बल्कि यह आपके खुद के करैक्टर को दिखाता है। सोचिए उस वेटर के बारे में जिसने आपको पानी पिलाया या उस कलीग के बारे में जिसने आपकी एक छोटी सी मदद की। क्या आपने उन्हें दिल से थैंक यू बोला। अधिकतर लोग बस सिर हिलाकर आगे बढ़ जाते है जैसे कि सामने वाला उनका नौकर हो। यहाँ मजे की बात यह है कि जब आप किसी को उसकी मेहनत के लिए थैंक यू बोलते है तो सामने वाले के दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है और वह अगली बार आपकी मदद करने के लिए और भी ज्यादा एक्साइटेड रहता है। यह एक फ्री का इन्वेस्टमेंट है जो आपको लाइफटाइम रिटर्न देता है।
डेव करपेन तो यहाँ तक कहते है कि आपको हाथ से लिखे हुए थैंक यू नोट्स भेजने चाहिए। अब आप कहेंगे कि भाई इस डिजिटल जमाने में कागज और पेन कौन उठाएगा। यही तो पॉइंट है। जब सब लोग व्हाट्सएप और ईमेल के पीछे भाग रहे है तब आपका एक छोटा सा हाथ से लिखा नोट सामने वाले को यह महसूस कराता है कि वह आपके लिए कितना खास है। यह दिखाता है कि आपने उनके लिए अपना कीमती वक्त निकाला है। प्रोफेशनल लाइफ में यह एक ऐसी चीज है जो आपको भीड़ से अलग खड़ा कर देती है। लोग आपकी स्किल्स भूल सकते है पर आपकी तमीज और आपका दिया हुआ सम्मान कभी नहीं भूलते।
आभार व्यक्त करने का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि जब कोई बड़ा काम हो तभी शुक्रिया बोले। लाइफ की छोटी छोटी चीजों के लिए भी थैंक यू कहना शुरू कीजिए। जब आप आभार व्यक्त करते है तो आप नेगेटिविटी को अपने से दूर रखते है। आप शिकायत करने वाले इंसान से एक खुशमिजाज इंसान बन जाते है। और दुनिया का यह कड़वा सच है कि कोई भी इंसान किसी रोने वाले या हमेशा कंप्लेंट करने वाले के साथ नहीं रहना चाहता। हर कोई उस इंसान के करीब रहना चाहता है जो पॉजिटिव हो और दूसरों की कद्र करना जानता हो।
कभी कभी तो उन लोगो को भी थैंक यू बोल दीजिए जिन्होंने आपको रिजेक्ट किया या आपको नीचा दिखाया क्योंकि उनकी वजह से ही आपने कुछ नया सीखा। जब आप इस लेवल पर पहुंच जाते है जहाँ आप अपनी हार के लिए भी शुक्रगुजार होते है तब आपको हराना नामुमकिन हो जाता है। आभार व्यक्त करना एक ऐसी चाबी है जो लोगो के दिल के सबसे मजबूत ताले भी खोल देती है। आपको बस अपनी ईगो को थोडा कम करना है और अपनी जुबान पर थोडी मिठास लानी है। यह कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है पर इसका असर किसी जादू से कम नहीं होता।
आखिर में याद रखिए कि लोग आपकी डिग्री या आपके बैंक बैलेंस से उतने इम्प्रेस नहीं होते जितने आपके व्यवहार से होते है। एक छोटा सा थैंक यू आपके लिए बंद दरवाजे खोल सकता है और आपको वो सब कुछ दिला सकता है जिसके पीछे आप सालों से भाग रहे है। तो आज से ही शुक्रिया कहने की आदत डालिए और देखिए कैसे लोग आपकी तरफ खिंचे चले आते है।
तो दोस्तों, द आर्ट ऑफ पीपल हमे सिखाती है कि लोगो को जीतना कोई जंग नहीं बल्कि एक आर्ट है जिसे कोई भी सीख सकता है। सुनना शुरू कीजिए असली बनिए और हर छोटी चीज के लिए शुक्रिया कहिए। आज ही नीचे कमेंट में उस इंसान को टैग कीजिए या उसका नाम लिखिए जिसके आप शुक्रगुजार है। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो अपनी बातों से लोगो को पकाते है ताकि वह भी कुछ सीख सके। याद रखिए आपकी एक छोटी सी शेयरिंग किसी की पर्सनैलिटी बदल सकती है।
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