The Business Model Innovation Factory (Hindi)


अगर आप भी उसी घिसे पिटे बिजनेस मॉडल को पकड़ कर बैठे हैं तो मुबारक हो। आप बहुत जल्द अपने कॉम्पिटिटर्स के लिए रास्ता साफ करने वाले हैं। मार्केट बदल रहा है और आप अपनी पुरानी कामयाबी के नशे में सो रहे हैं। क्या आप भी नोकिया की तरह गायब होना चाहते हैं।

आज के समय में सिर्फ मेहनत करना काफी नहीं है। अगर आपका बिजनेस मॉडल समय के साथ नहीं बदला तो आपकी मेहनत मिट्टी में मिल जाएगी। चलिए साउल कापलान की इस किताब से समझते हैं कि कैसे हम अपने काम करने के तरीके को पूरी तरह बदलकर हमेशा टॉप पर रह सकते हैं।


लेसन १ : बिजनेस मॉडल की अपनी एक अलग लैब बनाओ

दोस्तो, अगर आप आज भी वही पुराने ढर्रे पर अपना बिजनेस चला रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप एक ऐसी गाड़ी चला रहे हैं जिसका इंजन दस साल पुराना है। साउल कापलान अपनी किताब में सबसे पहले यही समझाते हैं कि आपके पास एक बिजनेस मॉडल इनोवेशन फैक्ट्री होनी चाहिए। अब आप कहेंगे कि भाई ये फैक्ट्री क्या होती है। क्या मुझे कोई नई जमीन खरीदनी पड़ेगी। बिल्कुल नहीं। इसका मतलब है एक ऐसा माइंडसेट और एक ऐसी जगह जहाँ आप नए आइडियाज के साथ एक्सपेरिमेंट कर सकें।

जरा सोचिए उस दुकान वाले के बारे में जो आज भी वही पुरानी डायरी लेकर बैठा है और हिसाब किताब कर रहा है। जबकि पड़ोस वाला लड़का एक ऐप बनाकर होम डिलीवरी दे रहा है। पुरानी दुकान वाले अंकल को लगता है कि उनका तजुर्बा उन्हें बचा लेगा। लेकिन सच तो ये है कि कस्टमर को आपके तजुर्बे से ज्यादा अपनी सुविधा से मतलब है। अगर आप अपने बिजनेस के अंदर ही एक छोटी सी लैब नहीं बनाएंगे जहाँ आप रोज कुछ नया टेस्ट कर सकें तो आप बहुत पीछे रह जाएंगे। लोग अक्सर डरते हैं कि अगर नया कुछ ट्राई किया और फेल हो गए तो क्या होगा। अरे भाई फेल होना तो प्रोसेस का हिस्सा है। एडिसन भी तो बल्ब बनाने से पहले हजार बार फेल हुआ था। उसने ये नहीं कहा कि मोमबत्ती ही बेस्ट है।

ज्यादातर इंडियन स्टार्टअप्स और बिजनेसेस इसी चक्कर में डूब जाते हैं क्योंकि वो अपनी मौजूदा कामयाबी से चिपक कर बैठ जाते हैं। उन्हें लगता है कि जो आज चल रहा है वो हमेशा चलेगा। ये तो वही बात हुई कि आप अपनी पहली वाली गर्लफ्रेंड के नाम का टैटू बनवा लें और सोचें कि शादी भी उसी से होगी। दुनिया इतनी सीधी नहीं है दोस्त। मार्केट बहुत बेरहम है। यहाँ जो बदलता नहीं है वो खत्म हो जाता है। इसलिए अपनी टीम के साथ बैठिए और हर हफ्ते एक नया आइडिया डिस्कस कीजिए। चाहे वो आइडिया कितना भी फालतू क्यों न लगे उसे टेस्ट जरूर कीजिए।

इन्नोवेशन का मतलब सिर्फ नया फोन लॉन्च करना नहीं होता। इसका मतलब ये भी हो सकता है कि आप अपने कस्टमर से बात करने का तरीका बदल दें या अपनी डिलीवरी की स्पीड बढ़ा दें। जब आप छोटी छोटी चीजों को टेस्ट करते हैं तभी आपको वो बड़ा आइडिया मिलता है जो आपके बिजनेस की काया पलट देता है। बिना एक्सपेरिमेंट के आप सिर्फ एक ऑपरेटर हैं न कि एक इनोवेटर। और आज की दुनिया में ऑपरेटर की सैलरी कम होती है और इनोवेटर की वैल्यू करोड़ों में होती है।

क्या आप तैयार हैं अपनी खुद की एक इनोवेशन फैक्ट्री सेटअप करने के लिए। ये मत सोचिए कि आपके पास बजट कम है। आइडियाज के लिए बजट की नहीं बल्कि एक खुले दिमाग की जरूरत होती है। जब आप अपनी पुरानी सोच की जंजीरें तोड़ेंगे तभी आपको असली तरक्की का रास्ता दिखेगा। याद रखिए कि आपका आज का सक्सेसफुल मॉडल ही आपके कल के फेलियर का कारण बन सकता है। इसलिए उसे समय रहते अपडेट करते रहिए।


लेसन २ : पुराने सक्सेसफुल मॉडल को आग लगाना सीखो

दोस्तो, सबसे बड़ी मुश्किल तब आती है जब हमारा बिजनेस अच्छा चल रहा होता है। आप कहेंगे कि भाई ये क्या अजीब बात है। अगर पैसा आ रहा है तो दिक्कत क्या है। दिक्कत यही है कि जब पैसा आता है तो हम अंधे हो जाते हैं। हम अपने उसी पुराने मॉडल से प्यार करने लगते हैं जिसने हमें आज यहाँ तक पहुँचाया है। साउल कापलान कहते हैं कि अपने पुराने मॉडल को छोड़ने की हिम्मत जुटाना ही असली लीडरशिप है। यह सुनने में ऐसा लगता है जैसे कोई आपसे कहे कि अपने पुराने और वफादार स्कूटर को छोड़कर नई इलेक्ट्रिक बाइक ले लो। आपको दुख तो होगा पर पुरानी गाड़ी की स्पीड अब इस जमाने के हिसाब से काफी नहीं है।

जरा कोडेक कंपनी के बारे में सोचिए। वो फोटो फिल्म बेचने के राजा थे। डिजिटल कैमरा उन्होंने ही बनाया था लेकिन उन्हें डर लगा कि अगर डिजिटल कैमरा आ गया तो उनकी फिल्म कौन खरीदेगा। अपनी पुरानी कामयाबी को बचाने के चक्कर में उन्होंने भविष्य ही खो दिया। आज कोडेक कहाँ है। उनके कैमरे सिर्फ म्यूजियम में ही मिलते हैं। अगर आप भी अपने पुराने बिजनेस मॉडल को सीने से लगाकर बैठे रहेंगे तो आपका हाल भी कोडेक जैसा ही होगा। यहाँ इमोशनल होने से काम नहीं चलता। मार्केट आपकी भावनाओं की कद्र नहीं करता। उसे सिर्फ इस बात से मतलब है कि आप आज उसकी क्या समस्या हल कर रहे हैं।

इंसानी फितरत है कि हम अपनी कंफर्ट जोन से बाहर नहीं आना चाहते। हम सोचते हैं कि जब तक सब सही चल रहा है तब तक कुछ नया क्यों करना। लेकिन याद रखिए कि कुआँ तब नहीं खोदना चाहिए जब प्यास लगे बल्कि तब खोदना चाहिए जब आपके पास पानी की कोई कमी न हो। जब आपका बिजनेस पीक पर हो तभी आपको अगले बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। लोग आपको पागल कहेंगे। वो कहेंगे कि जो चल रहा है उसे क्यों बिगाड़ रहे हो। पर आपको पता होना चाहिए कि आज का बिगड़ना ही कल का संवरना है। पुरानी ईंटें गिराए बिना नई और मजबूत इमारत खड़ी नहीं की जा सकती।

हमारे यहाँ अक्सर कहा जाता है कि पुराना चावल ही अच्छा होता है। लेकिन बिजनेस में पुराना चावल अक्सर खराब हो जाता है। अगर आप आज के दौर में भी वही घिसे पिटे तरीके अपना रहे हैं तो आप अपनी हार की स्क्रिप्ट खुद लिख रहे हैं। अपनी पुरानी सफलताओं के मेडल को लॉकर में रख दीजिए और मैदान में एक नए खिलाड़ी की तरह उतरिए। जो इंसान अपनी पुरानी पहचान छोड़ने को तैयार नहीं होता वो कभी नई ऊंचाइयां नहीं छू सकता। यह वैसा ही है जैसे आप अपनी बचपन की छोटी टी शर्ट में घुसने की कोशिश करें। वो टी शर्ट अच्छी थी पर अब आपका साइज बढ़ गया है। वैसे ही मार्केट का साइज और जरूरतें भी बढ़ गई हैं।

अपनी टीम के साथ बैठकर ये सवाल पूछिए कि अगर आज हम ये बिजनेस फिर से शुरू करते तो क्या हम वही पुराने तरीके अपनाते। अगर जवाब नहीं है तो समझ लीजिए कि बदलाव का वक्त आ गया है। डरिए मत क्योंकि डर के आगे जीत है और पुराने मॉडल के आगे नया साम्राज्य है। जो अपनी पुरानी खाल नहीं उतारता वो सांप भी मर जाता है। बिजनेस का भी यही नियम है। पुराना छोड़िए तभी नया पकड़ पाएंगे।


लेसन ३ : सिर्फ प्रोडक्ट मत बेचो, कस्टमर की लाइफ का हिस्सा बनो

दोस्तो, बहुत से लोग सोचते हैं कि एक अच्छा प्रोडक्ट बना लिया तो दुनिया उनके कदमों में होगी। भाई ये गलतफहमी जितनी जल्दी निकाल दोगे उतना ही अच्छा है। साउल कापलान हमें समझाते हैं कि लोग प्रोडक्ट नहीं खरीदते, वो अपनी समस्या का हल खरीदते हैं। अगर आप केवल चीज बेचने पर ध्यान देंगे तो आप एक सेल्समैन बनकर रह जाएंगे। लेकिन अगर आप कस्टमर की बदलती आदतों को समझेंगे तो आप एक ब्रांड बन जाएंगे। जरा सोचिए, पहले हम टैक्सी के लिए सड़क पर खड़े होकर हाथ हिलाते थे। फिर ऊबर और ओला आए। उन्होंने क्या बेचा। कोई नई कार। बिल्कुल नहीं। उन्होंने हमें सुविधा बेची। उन्होंने समझा कि लोग अपनी उंगलियों पर कंट्रोल चाहते हैं।

अक्सर बिजनेसमैन को लगता है कि उनका कस्टमर वफादार है। भाई वफादारी सिर्फ फिल्मों में अच्छी लगती है। असल जिंदगी में कस्टमर उसी के पास जाता है जो उसका काम आसान बना दे। अगर आप अपनी दुकान या ऑफिस में बैठकर ये सोच रहे हैं कि लोग खुद चलकर आपके पास आएंगे तो आप गलतफहमी के शिकार हैं। अब जमाना आपके कस्टमर तक पहुँचने का है। अगर आप उनकी लाइफस्टाइल में फिट नहीं बैठते तो आप उनके लिए बेमतलब हैं। यह वैसा ही है जैसे आप किसी ऐसे इंसान को रेडियो गिफ्ट करें जो दिन भर यूट्यूब और नेटफ्लिक्स पर रहता है। आपका रेडियो कितना भी शानदार क्यों न हो, उसके लिए वो सिर्फ एक कबाड़ है।

आपको अपनी ईगो साइड में रखकर कस्टमर के जूते में पैर डालकर देखना होगा। क्या आपका बिजनेस मॉडल आज की भागदौड़ भरी जिंदगी के हिसाब से सही है। क्या आप उनका समय बचा रहे हैं या बढ़ा रहे हैं। आज के दौर में समय ही सबसे बड़ी करेंसी है। अगर आपका प्रोसेस बहुत लंबा और थकाऊ है तो यकीन मानिए कस्टमर आपके पास दोबारा नहीं आएगा। उसे इससे कोई मतलब नहीं है कि आप कितने सालों से मार्केट में हैं। उसे बस ये चाहिए कि उसका काम चुटकी बजाते ही हो जाए। साउल कापलान कहते हैं कि जब आप कस्टमर के अनुभव को अपनी प्रायोरिटी बनाते हैं तब आप बिजनेस मॉडल को सच में इनोवेट करते हैं।

पुराने जमाने के बिजनेसमैन सोचते थे कि डिस्काउंट दे दो तो कस्टमर रुक जाएगा। पर आज का कस्टमर स्मार्ट है। उसे डिस्काउंट से ज्यादा इज्जत और आसानी चाहिए। अगर आप उसे ये महसूस करा सकें कि आप सच में उसकी केयर करते हैं तो वो आपको कभी नहीं छोड़ेगा। इसके लिए आपको अपना पूरा नजरिया बदलना होगा। प्रोडक्ट बेचना एक वन टाइम डील है पर रिलेशन बनाना एक लाइफटाइम बिजनेस है। अपने आसपास देखिए, जो भी कंपनियां आज राज कर रही हैं उन्होंने लोगों की आदतों को बदला है। उन्होंने अपनी फैक्ट्री में सिर्फ माल नहीं बनाया बल्कि एक नया अनुभव तैयार किया है।

इसलिए अपनी टेबल से उठिए और अपने कस्टमर से बात कीजिए। उनसे पूछिए कि उन्हें क्या परेशान कर रहा है। कभी कभी सबसे बड़ा इनोवेशन एक छोटे से फीडबैक से आता है। अगर आप सुनने को तैयार नहीं हैं तो आप बदलने को भी तैयार नहीं हैं। और जो बदलता नहीं है उसे वक्त बदल देता है। अपनी काबिलियत पर भरोसा रखिए लेकिन अपनी सोच को लचीला बनाइए। जब आप कस्टमर की धड़कन को पहचान लेंगे तभी आपका बिजनेस लंबी रेस का घोड़ा बनेगा।


दोस्तो, द बिजनेस मॉडल इनोवेशन फैक्ट्री हमें सिर्फ एक ही बात सिखाती है कि बदलाव ही स्थिर है। अगर आप कल की जीत के भरोसे आज सो रहे हैं तो आप कल हारने की तैयारी कर रहे हैं। अपनी लैब बनाइए, पुराने मॉडल्स को छोड़ने का कलेजा रखिए और हमेशा कस्टमर की जरूरत को सबसे ऊपर रखिए। याद रखिए कि दुनिया बदल रही है और आपको भी बदलना ही होगा।

तो क्या आप आज ही अपने पुराने और थके हुए बिजनेस मॉडल को चुनौती देने के लिए तैयार हैं। कमेंट में बताइए कि आप अपने काम में कौन सा एक छोटा बदलाव आज से ही शुरू करेंगे। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो अपनी पुरानी दुकान या स्टार्टअप को लेकर बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंट है। शायद आपकी एक शेयरिंग उसका भविष्य बचा ले।

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