HR from the Outside In (Hindi)


क्या आप भी उन एचआर प्रोफेशनल में से हैं जो सिर्फ रंगोली बनाने और एम्प्लोयी का बर्थडे केक काटने को ही असली काम समझते हैं। बधाई हो। मार्केट बदल रहा है और आपकी यह पुरानी कला आपको बहुत जल्द बेरोजगार बनाने वाली है। अगर आप अब भी आउटसाइड इन अप्रोच से अनजान हैं तो यकीन मानिए आप अपनी कंपनी के लिए एक बोझ से ज्यादा और कुछ नहीं हैं।

लेकिन फिक्र मत करिए। आज हम डेव उलरिच की मशहूर किताब से वो ३ सीक्रेट लेसन सीखेंगे जो आपको एक साधारण एडमिन से एक पावरफुल बिजनेस पार्टनर बना देंगे। चलिए देखते हैं कि मॉडर्न एचआर असल में काम कैसे करता है।


लेसन १ : आउटसाइड इन नजरिया - जब कस्टमर ही आपका असली बॉस है

आजकल के कई एचआर को लगता है कि उनकी दुनिया बस ऑफिस की चारदीवारी और बायोमेट्रिक मशीन तक ही सीमित है। सुबह नौ बजे ऑफिस आए और शाम को एम्प्लोयी की अटेंडेंस चेक करके निकल गए। अगर आप भी यही सोचते हैं तो यकीन मानिए आप एक एचआर नहीं बल्कि बस एक महंगे क्लर्क हैं। डेव उलरिच कहते हैं कि असली एचआर वो है जो ऑफिस के अंदर से बाहर नहीं बल्कि बाहर से अंदर की तरफ देखता है। इसे कहते हैं आउटसाइड इन अप्रोच। इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी एचआर स्ट्रेटेजी इस बात पर निर्भर होनी चाहिए कि बाहर मार्केट में क्या चल रहा है और आपके कस्टमर्स क्या चाहते हैं।

कल्पना करिए कि आप एक ऐसी कंपनी में एचआर हैं जो स्मार्टफोन बनाती है। अब मार्केट में डिमांड है एआई वाले कैमरों की लेकिन आपकी कंपनी अभी भी पुराने कीपैड वाले फोन पर अटकी हुई है। आप ऑफिस में बैठकर बेस्ट एम्प्लोयी ऑफ द मंथ का अवार्ड दे रहे हैं और फ्री समोसे खिलाकर टीम को मोटिवेट करने की कोशिश कर रहे हैं। क्या इससे कंपनी बच जाएगी। बिल्कुल नहीं। अगर बाहर कस्टमर आपका प्रोडक्ट रिजेक्ट कर रहा है तो आपके अंदर के मोटिवेशन का कोई मतलब नहीं रह जाता। एक समझदार एचआर वो है जो पहले कस्टमर की जरूरत को समझे और फिर ऐसी टीम तैयार करे जो उस जरूरत को पूरा कर सके।

यहाँ सारा खेल वैल्यू क्रिएट करने का है। मान लीजिए आपकी कंपनी का सेल्स ग्राफ नीचे जा रहा है क्योंकि कॉम्पिटिटर ने कोई नई टेक्नोलॉजी अपना ली है। अब एक टिपिकल एचआर क्या करेगा। वो शायद एक और फालतू की मीटिंग रखेगा या दिवाली बोनस की घोषणा कर देगा। लेकिन एक आउटसाइड इन एचआर सीधे बिजनेस हेड के पास जाएगा और पूछेगा कि हमें किस तरह के नए टैलेंट की जरूरत है ताकि हम मार्केट में फिर से नंबर वन बन सकें। वो केवल एम्प्लोयी की फाइलें नहीं देखता बल्कि कंपनी की बैलेंस शीट और मार्केट शेयर पर भी नजर रखता है।

बहुत से एचआर प्रोफेशनल अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं। उन्हें लगता है कि रूल्स और रेगुलेशन बनाना ही उनका सबसे बड़ा धर्म है। आपने देखा होगा कि कुछ एचआर को लीव एप्लीकेशन रिजेक्ट करने में एक अलग ही लेवल का आनंद मिलता है। जैसे वो कोई बहुत बड़ा उपकार कर रहे हों। लेकिन भाई साहब यह समझिए कि अगर आपकी कड़क पॉलिसी की वजह से आपके बेस्ट टैलेंट कंपनी छोड़कर जा रहे हैं और उसका असर आपके क्लाइंट सर्विस पर पड़ रहा है तो आप कंपनी का भला नहीं बल्कि नुकसान कर रहे हैं।

असली एचआर वो है जो यह जानता है कि उसका असली मालिक वो एम्प्लोयी या उसका मैनेजर नहीं है बल्कि वो इन्वेस्टर और कस्टमर है जो कंपनी में पैसा लगा रहा है। जब आप बाहर के माहौल को समझकर अंदर के लोगों को ट्रेन करते हैं तब आप एक असली स्ट्रेटेजिक पार्टनर बनते हैं। तो अगली बार जब आप कोई नई पॉलिसी बनाएं तो खुद से यह सवाल जरूर पूछें कि क्या इससे मेरे कस्टमर को कोई फायदा होगा। अगर जवाब ना है तो उस पॉलिसी को डस्टबिन में डाल देना ही बेहतर है।


लेसन २ : स्ट्रेटेजिक आर्किटेक्ट बनिए - सिर्फ दिवाली की लाइटें मत लगाइए

ज्यादातर कंपनियों में एचआर को एक ऐसे इंसान के रूप में देखा जाता है जिसका काम सिर्फ रंगोली कॉम्पिटिशन आर्गेनाइज करना या ऑफिस में नई कॉफी मशीन लगवाना है। एम्प्लोयी को लगता है कि एचआर मतलब वो शख्स जो साल में एक बार अप्रेजल के वक्त गायब हो जाता है। लेकिन डेव उलरिच कहते हैं कि अगर आपको भविष्य का एचआर लीडर बनना है तो आपको एक स्ट्रेटेजिक आर्किटेक्ट बनना होगा। एक आर्किटेक्ट का काम क्या होता है। वो बिल्डिंग का ढांचा तैयार करता है ताकि वो हर तूफान को झेल सके। ठीक वैसे ही एक एचआर को कंपनी का ऐसा स्ट्रक्चर बनाना चाहिए जो बिजनेस के लक्ष्यों को हासिल कर सके।

सोचिए कि आपकी कंपनी एक क्रिकेट टीम है। अब कप्तान यानी सीईओ चाहता है कि टीम आक्रामक खेले और वर्ल्ड कप जीते। लेकिन एचआर साहब क्या कर रहे हैं। वो ऐसे खिलाड़ियों को भर्ती कर रहे हैं जिन्हें सिर्फ डिफेंसिव खेलना आता है क्योंकि उनके पास 'डिग्री' अच्छी है। क्या ऐसी टीम कभी मैच जीत पाएगी। बिल्कुल नहीं। एक स्ट्रेटेजिक आर्किटेक्ट के रूप में आपका काम यह है कि आप बिजनेस की जरूरतों को समझें और फिर देखें कि क्या आपके पास वैसी टीम है। अगर बिजनेस को डिजिटल जाना है तो आपके पास कोडिंग के उस्ताद होने चाहिए ना कि वो लोग जो अभी भी फाइलें सजाने में माहिर हैं।

यहाँ थोड़ा कड़वा सच भी सुन लीजिए। कई एचआर प्रोफेशनल को तो यह भी पता नहीं होता कि उनकी कंपनी पैसा कैसे कमाती है। अगर आप उनसे पूछें कि पिछले क्वार्टर का रेवेन्यू क्या था या कंपनी का सबसे बड़ा कॉम्पिटिटर कौन है तो वो ऐसे बगलें झांकने लगते हैं जैसे उनसे किसी ने न्यूक्लियर फिजिक्स का सवाल पूछ लिया हो। भाई साहब अगर आपको धंधे की समझ नहीं है तो आप स्ट्रेटेजी क्या बनाएंगे। स्ट्रेटेजिक आर्किटेक्ट बनने के लिए आपको बिजनेस की भाषा सीखनी होगी। आपको डेटा समझना होगा। आपको यह समझना होगा कि एक एम्प्लोयी को दी जाने वाली ट्रेनिंग का कंपनी के मुनाफे पर क्या असर पड़ता है।

अक्सर देखा जाता है कि एचआर लोग ऐसी ट्रेनिंग वर्कशॉप रखते हैं जिनका बिजनेस से कोई लेना देना नहीं होता। मान लीजिए कंपनी घाटे में चल रही है और आप पूरी टीम को 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' की क्लास दे रहे हैं जहाँ उन्हें आँखें बंद करके लंबी सांसें लेना सिखाया जा रहा है। अरे भाई उनका स्ट्रेस तब कम होगा जब उनकी सेल बढ़ेगी और उन्हें इंसेंटिव मिलेगा। एक असली स्ट्रेटेजिक एचआर ऐसी वर्कशॉप रखेगा जहाँ टीम को नई सेल्स तकनीक सिखाई जाए। सरकाजम की बात तो यह है कि कुछ एचआर को लगता है कि मोटिवेशनल कोट्स वाले पोस्टर दीवार पर चिपका देने से कंपनी का कल्चर बदल जाएगा। कल्चर पोस्टर से नहीं बल्कि सही सिस्टम और सही लीडरशिप से बदलता है।

एक स्ट्रेटेजिक आर्किटेक्ट कंपनी के अंदर के टैलेंट को इस तरह अरेंज करता है कि हर इंसान अपनी सही जगह पर हो। वो सिर्फ खाली जगह भरने के लिए भर्ती नहीं करता बल्कि वो भविष्य की जरूरतों को देखकर पाइपलाइन तैयार करता है। वो यह देखता है कि आज अगर हमारी कंपनी का टॉप परफॉर्मर छोड़कर चला जाए तो क्या हमारे पास उसका बैकअप तैयार है। अगर आप सिर्फ आज की आग बुझाने में लगे हैं तो आप एक फायर फाइटर हैं आर्किटेक्ट नहीं। असली पावर तब आती है जब आप बिजनेस टेबल पर बैठकर यह बता सकें कि इस नई स्ट्रेटेजी को सफल बनाने के लिए हमें किस तरह के वर्कफोर्स की जरूरत पड़ेगी।


लेसन ३ : टेक्नोलॉजी प्रोपोनेंट - डेटा और एआई से दोस्ती करिए वरना इतिहास बन जाइए

आज के दौर में अगर कोई एचआर यह कहता है कि मुझे एक्सेल शीट समझ नहीं आती या मुझे डेटा से डर लगता है तो उसे तुरंत अपना इस्तीफा तैयार कर लेना चाहिए। डेव उलरिच का तीसरा सबसे बड़ा लेसन है टेक्नोलॉजी प्रोपोनेंट बनना। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको कोडिंग सीखनी है बल्कि इसका मतलब यह है कि आपको टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके एचआर के काम को स्मार्ट बनाना है। पुराने जमाने में एचआर का मतलब होता था फाइलों का ढेर और अलमारी में दबे हुए रिज्यूमे। लेकिन आज अगर आप सोशल मीडिया और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो आप पत्थर के जमाने के एचआर हैं।

जरा सोचिए आप एक पोजीशन के लिए भर्ती कर रहे हैं। एक पुराना एचआर अखबार में इश्तेहार देगा और फिर हजारों रद्दी रिज्यूमे का इंतजार करेगा। वहीं एक स्मार्ट एचआर एआई टूल्स और लिंक्डइन का इस्तेमाल करके कुछ ही मिनटों में सबसे सटीक कैंडिडेट ढूंढ निकालेगा। लेकिन कुछ लोगों को तो अभी भी लगता है कि एम्प्लोयी का मूड जानने के लिए फीडबैक फॉर्म भरवाना ही सबसे आधुनिक तरीका है। आप साल में एक बार फॉर्म भरवाते हैं तब तक तो आधा टैलेंट कंपनी छोड़कर कॉम्पिटिटर के पास जा चुका होता है। डेटा आपको पहले ही बता सकता है कि कौन सा एम्प्लोयी दुखी है और किसके छोड़कर जाने के चांस ज्यादा हैं।

यहाँ थोड़ा मजाक उन एचआर पर भी बनता है जो टेक्नोलॉजी के नाम पर सिर्फ ग्रुप में गुड मॉर्निंग मैसेज भेजते हैं। भाई साहब टेक्नोलॉजी का मतलब वाट्सएप ग्रुप नहीं है। टेक्नोलॉजी का मतलब है ऐसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करना जहाँ एम्प्लोयी अपनी परफॉरमेंस खुद देख सके और उसे अपनी ग्रोथ का रास्ता साफ दिखे। कई कंपनियों में आज भी छुट्टी मांगने के लिए तीन अलग अलग मैनेजर के चक्कर काटने पड़ते हैं और फिर एचआर साहब अपनी रजिस्टर में एंट्री करते हैं। यह सब देखकर तो एम्प्लोयी को यही लगता है कि वो किसी ऑफिस में नहीं बल्कि सरकारी तहसील में आ गया है।

ह्यूमन रिसोर्स में 'ह्यूमन' होना जरूरी है लेकिन उसे 'स्मार्ट' बनाने का काम टेक्नोलॉजी करती है। मान लीजिए आपकी कंपनी को पता लगाना है कि आपकी ट्रेनिंग प्रोग्राम कितनी असरदार रही। एक साधारण एचआर बस यह देखेगा कि कितने लोग वर्कशॉप में आए और कितने समोसे खाए गए। लेकिन एक टेक्नोलॉजी प्रोपोनेंट एचआर डेटा देखेगा कि ट्रेनिंग के बाद टीम की प्रोडक्टिविटी में कितने परसेंट का इजाफा हुआ। अगर आप डेटा की भाषा नहीं बोल सकते तो बोर्ड मीटिंग में आपकी बात को कोई गंभीरता से नहीं लेगा। वहां इमोशन्स नहीं बल्कि नंबर्स चलते हैं।

अंत में यह समझ लीजिए कि टेक्नोलॉजी आपको रिप्लेस करने नहीं बल्कि आपको सुपरपावर देने आई है। जो एचआर डेटा और डिजिटल टूल्स को अपना लेगा वो कंपनी का सबसे कीमती हिस्सा बन जाएगा। और जो अब भी रजिस्टर और पेन लेकर बैठा रहेगा उसे बहुत जल्द एआई रिप्लेस कर देगा। तो फैसला आपका है कि आप एक अपडेटेड लीडर बनना चाहते हैं या एक आउटडेटेड एडमिन।


दोस्तों, एचआर का काम अब सिर्फ लोगों को मैनेज करना नहीं है बल्कि बिजनेस को लीड करना है। डेव उलरिच के ये ३ लेसन आपको एक साधारण मैनेजर से एक पावरफुल बिजनेस पार्टनर बना सकते हैं। याद रखिए अगर आप बाहर की दुनिया को देखकर खुद को नहीं बदलेंगे तो दुनिया आपको पीछे छोड़ देगी।

तो क्या आप तैयार हैं अपने एचआर करियर को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने के लिए। नीचे कमेंट में बताएं कि आपको कौन सा लेसन सबसे ज्यादा पसंद आया और आप इसे अपनी कंपनी में कैसे लागू करेंगे। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जिन्हें अभी भी लगता है कि एचआर का काम सिर्फ रंगोली बनाना है।

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