The Heart of Change (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो ऑफिस में बड़े बदलाव के नाम पर केवल भारी भरकम एक्सेल शीट्स और बोरिंग पीपीटी बनाकर खुद को और अपनी टीम को टॉर्चर कर रहे हैं? अगर हाँ तो मुबारक हो आप अपनी कंपनी को डुबाने की पूरी तैयारी में हैं। डेटा और ग्राफ से लोगों का दिमाग बदल सकता है पर उनका दिल नहीं और बिना दिल जीते कोई बदलाव सफल नहीं होता।

आज हम जॉन कोटर की फेमस बुक द हार्ट ऑफ चेंज से वो ३ कीमती लेसन सीखेंगे जो आपको एक असली लीडर बनाएंगे। ये आर्टिकल आपको सिखाएगा कि कैसे लोगों के इमोशन्स को टच करके आप बड़े से बड़ा बदलाव ला सकते हैं।


Lesson : देखना-महसूस करना-बदलना यानी सी-फील-चेंज का जादू

ज्यादातर मैनेजर्स को लगता है कि अगर वो अपनी टीम को ५०० पन्नों की रिपोर्ट और १००० ग्राफ दिखाएंगे तो लोग रातों-रात बदल जाएंगे। भाई साहब आप किसी को यह बताकर कि सिगरेट पीना सेहत के लिए खराब है उसकी आदत नहीं छुड़ा सकते। उसे तब समझ आता है जब वो किसी हॉस्पिटल के वार्ड में खुद को लेटा हुआ इमेजिन करता है। जॉन कोटर यही कहते हैं कि एनालिसिस-थिंक-चेंज का पुराना फॉर्मूला अब कबाड़ हो चुका है। असली गेम तो सी-फील-चेंज का है। लोग तब बदलते हैं जब वो कुछ ऐसा देखते हैं जो सीधे उनके दिल पर वार करता है। जब तक इमोशन्स को धक्का नहीं लगेगा तब तक कोई अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं होगा।

एक बार एक कंपनी में बहुत ज्यादा फिजूलखर्ची हो रही थी। लोग सामान का ऑर्डर बिना सोचे समझे दे रहे थे। मैनेजमेंट ने घंटों लेक्चर दिए और ईमेल भेजे पर किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। फिर एक स्मार्ट बंदे ने क्या किया? उसने पूरे साल में खरीदे गए ४०० अलग-अलग टाइप के ग्लव्स यानी दस्ताने इकट्ठे किए और उन्हें बोर्डरूम की टेबल पर एक बड़ा ढेर बनाकर रख दिया। हर दस्ताने पर उसकी कीमत का टैग लगा था। जब अधिकारियों ने वो कचरे का पहाड़ देखा तो उन्हें अपनी बेवकूफी पर शर्म आई। उन्होंने उसे देखा फिर उसे महसूस किया और तब जाकर सिस्टम बदला।

यही लाइफ का असली सच है। अगर आप अपनी टीम को सिर्फ नंबर्स दिखाएंगे तो वो सो जाएंगे। लेकिन अगर आप उन्हें वो दर्द दिखाएंगे जो कस्टमर झेल रहा है तो वो खुद भागकर काम करेंगे। हम इंसानों की बनावट ही ऐसी है कि हमें फीलिंग्स समझ आती हैं लॉजिक नहीं। अगर लॉजिक से दुनिया चलती तो शायद जिम जाने वाले लोग इतने कम नहीं होते। तो अगली बार जब आप किसी को बदलने की कोशिश करें तो उसे ज्ञान मत बांटिए बल्कि उसे कुछ ऐसा दिखाइए कि उसकी रूह कांप जाए या फिर वो खुशी से झूम उठे। जब दिल धड़कता है तभी पैर आगे बढ़ते हैं।


Lesson : अर्जेंसी की ऐसी आग लगाओ कि कोई सो न पाए

क्या आपने कभी गौर किया है कि एग्जाम से एक रात पहले हम जितना पढ़ लेते हैं उतना पूरे साल नहीं पढ़ते? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उस वक्त हमारे पीछे फेल होने का डर और अर्जेंसी की आग लगी होती है। जॉन कोटर कहते हैं कि किसी भी कंपनी या टीम में बदलाव लाने का सबसे पहला कदम यही है कि आप लोगों के अंदर एक बेचैनी पैदा करें। अगर आपकी टीम को लगता है कि सब कुछ बढ़िया चल रहा है और कंपनी बहुत प्रॉफिट में है तो वो अपनी कंफर्ट जोन से बाहर क्यों आएंगे? लोग तब तक अपने पुराने और घिसे-पिटे तरीकों को नहीं छोड़ते जब तक उन्हें यह न लगे कि उनकी नाव में छेद हो चुका है।

यहाँ दिक्कत यह आती है कि कुछ लीडर्स को लगता है कि बस चिल्लाने या डराने से अर्जेंसी पैदा हो जाएगी। यह आपकी सबसे बड़ी गलतफहमी है। डराने से लोग छिपते हैं बदलते नहीं। आपको उन्हें हकीकत का वो आईना दिखाना होगा जिसे देखकर वो अपनी जगह से हिलने पर मजबूर हो जाएं। मान लीजिए आपकी सर्विस बहुत खराब है और आप टीम से कह रहे हैं कि क्लाइंट्स को अच्छा ट्रीट करो। वो आपकी बात एक कान से सुनेंगे और दूसरे से निकाल देंगे। लेकिन अगर आप एक दुखी कस्टमर का वीडियो कॉल पर रोना उन्हें सुना दें या दिखा दें कि कैसे उनके आलस की वजह से किसी की मेहनत बर्बाद हो रही है तो उन्हें वो अर्जेंसी खुद महसूस होगी।

आजकल के कॉर्पोरेट वर्ल्ड में लोग सिर्फ मीटिंग्स में सिर हिलाते हैं पर असल में वो अंदर से सो रहे होते हैं। उन्हें जगाने के लिए आपको कोई बड़ा शॉक देना पड़ेगा। जैसे एक बार एक मैनेजर ने अपनी पूरी सेल्स टीम को एक ऐसी जगह मीटिंग के लिए बुलाया जो बहुत ही खस्ता हाल थी। उन्होंने कहा कि अगर हम नहीं बदले तो अगले छह महीने में हमारा ऑफिस ऐसा ही दिखेगा। उस माहौल ने वो काम कर दिखाया जो १० ईमेल नहीं कर पाए थे। याद रखिए अगर आप बदलाव चाहते हैं तो शांति से बैठना छोड़ दीजिए। माहौल में ऐसी गर्मी पैदा कीजिए कि लोगों को लगे कि अगर वो नहीं बदले तो वो पीछे छूट जाएंगे। बिना अर्जेंसी के हर बदलाव सिर्फ एक इच्छा बनकर रह जाता है जो कभी पूरी नहीं होती।


Lesson : छोटी जीत का जश्न मनाओ वरना लोग दम तोड़ देंगे

बड़े बदलाव का रास्ता बहुत लंबा और थका देने वाला होता है। अगर आप अपनी टीम से कहें कि हमें माउंट एवरेस्ट चढ़ना है और रास्ते में कहीं रुकना नहीं है तो आधे लोग तो बेस कैंप पर ही हिम्मत हार जाएंगे। जॉन कोटर कहते हैं कि बड़े विजन की बात करना अच्छी बात है पर लोगों को जिंदा रखने के लिए छोटी जीत यानी शॉर्ट टर्म विन्स की बहुत जरूरत होती है। इंसान को जब तक यह महसूस नहीं होता कि वो आगे बढ़ रहा है तब तक उसका मोटिवेशन बना नहीं रहता। अगर आप चाहते हैं कि लोग साल भर आपके पीछे चलें तो उन्हें हर हफ्ते एक छोटी ट्रॉफी दिखानी पड़ेगी। वरना लोग थक जाएंगे और फिर वही पुराने बहाने शुरू हो जाएंगे।

मान लीजिए आप अपनी कंपनी का सॉफ्टवेयर बदल रहे हैं जो बहुत मुश्किल काम है। अब अगर आप एक साल बाद होने वाले लॉन्च का इंतजार करेंगे तो तब तक आपकी आधी टीम नौकरी छोड़ चुकी होगी या डिप्रेशन में चली जाएगी। स्मार्ट लीडर क्या करता है? वो पहले महीने में ही एक छोटे से फीचर को ठीक करता है और उसका पूरा ढिंढोरा पीटता है। वो टीम को लंच पर ले जाता है और कहता है कि देखो हमने पहला पड़ाव पार कर लिया है। यह छोटी जीत लोगों के अंदर यह भरोसा पैदा करती है कि हां हम यह कर सकते हैं। यह वैसा ही है जैसे जिम जाने के पहले हफ्ते में जब आपके बाइसेप्स का साइज रत्ती भर भी बढ़ता है तो आप अगले दिन और जोश से वर्कआउट करते हैं।

बिना सेलिब्रेशन के काम करना वैसा ही है जैसे बिना नमक के खाना खाना। आप कितना भी पौष्टिक खा लें पर मजा नहीं आएगा। अगर आप अपनी टीम को लगातार काम में झोंकते रहेंगे और उन्हें यह अहसास नहीं दिलाएंगे कि उन्होंने कुछ हासिल किया है तो वो सिर्फ मशीन बनकर रह जाएंगे। याद रखिए बड़ी जीत छोटे-छोटे सफलो के जोड़ से ही बनती है। तो अगली बार जब आपकी टीम कोई छोटा सा टारगेट भी पूरा करे तो उसे इग्नोर मत कीजिए। उन्हें शाबाशी दीजिए और दिखाइए कि यह छोटा कदम उस बड़े बदलाव का हिस्सा है। जब लोग खुद को जीतता हुआ देखते हैं तो वो नामुमकिन को भी मुमकिन बना देते हैं।


बदलाव कोई सजा नहीं है बल्कि एक सफर है जिसे दिल से तय करना पड़ता है। डेटा और लॉजिक को अपनी जगह रहने दीजिए पर अगर आपको असल में लीडर बनना है तो लोगों की फीलिंग्स से जुड़ना सीखिए। उन्हें वो दिखाइए जो वो देखना नहीं चाहते और उन्हें वो महसूस कराइए जो उन्हें हिलने पर मजबूर कर दे। और हां हर छोटी जीत पर अपनी टीम की पीठ थपथपाना मत भूलिएगा क्योंकि उसी छोटी मुस्कान में बड़े बदलाव का राज छिपा है।

तो क्या आप आज से ही अपनी टीम या अपनी लाइफ में कोई छोटा बदलाव लाने के लिए तैयार हैं? नीचे कमेंट में बताइए कि आप सबसे पहले कौन सी छोटी जीत हासिल करना चाहते हैं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो सिर्फ ग्राफ और चार्ट के भरोसे दुनिया बदलना चाहते हैं।

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