आप आज भी पुराने घिसे पिटे आइडियाज से बिजनेस चलाने की कोशिश कर रहे हैं और फिर हैरान होते हैं कि बैंक बैलेंस क्यों नहीं बढ़ रहा। सच तो यह है कि आपकी कॉम्पिटिशन आपको कच्चा चबाने के लिए तैयार बैठी है क्योंकि आप इनोवेशन के नाम पर बस सो रहे हैं। अगर आपको लगता है कि बिना कुछ नया किए आप मार्केट के राजा बने रहेंगे तो भाई आप किसी बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। इस किताब के लेसन आपकी उस नींद को उड़ाने वाले हैं जो आपकी तरक्की के बीच में दीवार बनकर खड़ी है।
आज के इस आर्टिकल में हम द गेम चेंजर किताब के उन सीक्रेट्स को खोलेंगे जो आपके बिजनेस के रेवेन्यू और प्रॉफिट को रॉकेट की तरह ऊपर ले जा सकते हैं। चलिए इन 3 पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : कस्टमर ही असली बॉस है
ज्यादातर बिजनेस मालिक अपनी ऑफिस की कुर्सी पर बैठकर खुद को भगवान समझने लगते हैं। उनको लगता है कि जो प्रोडक्ट उन्होंने बनाया है वही दुनिया का सबसे बेहतरीन आविष्कार है। लेकिन भाई साहब असलियत यह है कि आपका प्रोडक्ट कितना भी चमकता हुआ क्यों न हो अगर वह कस्टमर की किसी प्रॉब्लम को सॉल्व नहीं कर रहा तो वह रद्दी से ज्यादा कुछ नहीं है। ए।जी। लाफले कहते हैं कि कस्टमर ही वह असली बॉस है जो तय करता है कि आपकी कंपनी अगले महीने सैलरी बांटेगी या ताला लटकाएगी। लोग अक्सर अपनी ईगो में इतने डूबे रहते हैं कि वे यह पूछना ही भूल जाते हैं कि आखिर वह इंसान जो पैसे खर्च कर रहा है उसे चाहिए क्या। आप अपनी लैब में बैठकर नई टेक्नोलॉजी के सपने देखते रहिए और उधर आपका कस्टमर पड़ोस वाली दुकान से कुछ और खरीदकर निकल जाएगा।
सोचिए आप एक शानदार रेस्टोरेंट खोलते हैं जहाँ की डेकोरेशन और लाइटिंग देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी फिल्म का सेट हो। आपने वहां दुनिया भर के महंगे शेफ रख लिए जो ऐसी डिशेज बनाते हैं जिनका नाम लेने के लिए भी डिक्शनरी की जरूरत पड़े। लेकिन क्या आपने यह चेक किया कि आपके एरिया के लोगों को शायद सिंपल और बढ़िया मसाला डोसा चाहिए था। आप उन्हें इटालियन पास्ता खिलाने पर तुले हैं और वे बाहर खड़े होकर गोलगप्पे खा रहे हैं। यही वह जगह है जहाँ आप मात खा जाते हैं। इनोवेशन का मतलब केवल यह नहीं कि आप कुछ ऐसा बना दें जो पहले कभी न बना हो। असली इनोवेशन तो वह है जो आपके कस्टमर की लाइफ को थोड़ा आसान बना दे।
प्रोक्टर एंड गैंबल में लाफले ने यही किया। उन्होंने अपने मैनेजर्स को ऑफिस से बाहर निकालकर लोगों के घरों में भेजा। उन्होंने देखा कि लोग कपड़े कैसे धोते हैं या फर्श कैसे साफ करते हैं। जब आप किसी को संघर्ष करते देखते हैं तभी आपको समझ आता है कि वहां एक बिजनेस अपॉर्चुनिटी छुपी है। अगर आप बस अपनी मीटिंग्स में ग्राफ और चार्ट्स देखते रहेंगे तो आप बस अपनी किस्मत पर जुआ खेल रहे हैं। कस्टमर की अनकही जरूरतों को पकड़ना ही सबसे बड़ा हुनर है। वह कभी खुद आकर नहीं बोलेगा कि मुझे ऐसा कुछ चाहिए। आपको उसकी आदतों को देखना होगा।
क्या आप जानते हैं कि मार्केट में आधी से ज्यादा चीजें फेल क्यों होती हैं। क्योंकि उन्हें बनाने वालों को लगता था कि वे बहुत स्मार्ट हैं। वे अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं और जब मार्केट में उतरते हैं तो कस्टमर उन्हें भाव तक नहीं देता। यह वैसा ही है जैसे आप किसी को शादी का प्रपोजल दें और उसे पता ही न हो कि आप कौन हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका रेवेन्यू बढ़े तो पहले अपनी कुर्सी छोड़िए और मार्केट में जाकर धूल फांकिए। कस्टमर की नजर से दुनिया को देखना सीखिए। जब आप उनकी छोटी छोटी परेशानियों को दूर करने लगेंगे तो वे खुद चलकर आपके पास आएंगे और आपको पैसे भी खुशी खुशी देंगे।
इन्नोवेशन कोई रॉकेट साइंस नहीं है जिसे सिर्फ बड़े साइंटिस्ट ही कर सकें। यह एक माइंडसेट है जहाँ आप हर वक्त यह सोचते हैं कि मैं अपने बॉस यानी अपने कस्टमर को और ज्यादा खुश कैसे कर सकता हूँ। अगर आप यह नहीं कर रहे तो समझ लीजिए कि आप अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट खुद लिख रहे हैं।
लेसन २ : इनोवेशन कोई जादू नहीं एक सिस्टम है
कई लोगों को लगता है कि इनोवेशन का मतलब है कि अचानक रात को सोते समय आपके दिमाग की बत्ती जलेगी और आप अगले दिन करोड़पति बन जाएंगे। अगर आप भी इसी इंतजार में बैठे हैं कि कोई जादुई आईडिया आसमान से टपकेगा तो भाई साहब आप बस अपना टाइम बर्बाद कर रहे हैं। ए।जी। लाफले और राम चरण बहुत साफ शब्दों में कहते हैं कि इनोवेशन कोई इत्तेफाक नहीं है बल्कि यह एक अनुशासन है। यह वैसा ही है जैसे आप जिम जाते हैं। आप एक दिन में बॉडी नहीं बना सकते चाहे आप चौबीस घंटे वहां कसरत करें। लेकिन अगर आप रोज थोड़ा थोड़ा पसीना बहाते हैं तो एक दिन रिजल्ट जरूर दिखता है। बिजनेस में भी यही नियम लागू होता है। आपको इनोवेशन को अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बनाना होगा।
सोचिए एक ऐसी कंपनी की जहाँ बॉस साल में एक बार मीटिंग बुलाता है और सबको बोलता है कि चलो भाई कुछ नया सोचो। अब बेचारे कर्मचारी जो पूरे साल बस फाइलों में दबे थे वे अचानक से क्या नया सोच लेंगे। यह तो वही बात हुई कि आप साल भर सोफे पर लेटे रहे और अचानक एक दिन मैराथन दौड़ने निकल गए। जाहिर है कि आपका दिल जवाब दे देगा। असल में सफल कंपनियां वह होती हैं जहाँ नया सोचना कोई इवेंट नहीं बल्कि एक प्रोसेस होता है। वहां हर छोटे बड़े एम्प्लॉई को यह पता होता है कि अगर उसके पास कोई छोटा सा भी आईडिया है जिससे कंपनी का एक रुपया भी बच सके या कस्टमर का एक सेकंड भी बच सके तो वह उसे बता सकता है।
ज्यादातर बिजनेस में दिक्कत यह है कि वहां का माहौल जेल जैसा होता है। अगर किसी ने कुछ नया करने की कोशिश की और वह फेल हो गया तो उसे ऐसे देखा जाता है जैसे उसने कोई बहुत बड़ा जुर्म कर दिया हो। अब आप ही बताइए कि अगर हारने का डर इतना ज्यादा होगा तो कोई रिस्क क्यों लेगा। लोग बस वही करेंगे जो पिछले दस साल से होता आ रहा है। और यहीं से आपके बिजनेस की उल्टी गिनती शुरू हो जाती है। आपको एक ऐसा सिस्टम बनाना होगा जहाँ नए आइडियाज को सिर्फ सुना न जाए बल्कि उन पर काम भी किया जाए। आपको फेलियर को एक लेसन की तरह देखना होगा न कि किसी सजा की तरह।
जब प्रोक्टर एंड गैंडल में यह सिस्टम लागू किया गया तो उन्होंने यह फिक्स कर दिया कि उनके रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा नए प्रोडक्ट्स से ही आना चाहिए। जब आप खुद पर ऐसी पाबंदी लगाते हैं तो आपका दिमाग अपने आप नए रास्ते ढूंढने लगता है। यह वैसा ही है जैसे एंड एग्जाम के एक रात पहले आपका दिमाग सुपर कंप्यूटर बन जाता है क्योंकि आपके पास कोई और रास्ता नहीं होता। बिजनेस में भी आपको वही अर्जेंसी पैदा करनी होगी। अगर आप हर दिन यह नहीं सोच रहे कि कल से बेहतर कैसे किया जाए तो आप बस अपनी जगह पर खड़े होकर भाग रहे हैं।
इनोवेशन का सिस्टम बनाने का मतलब है कि आपके पास एक डेटा होना चाहिए। आपको पता होना चाहिए कि मार्केट में क्या चल रहा है और आपकी टीम क्या नया कर रही है। यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप बस अपनी किस्मत पर छोड़ सकें। याद रखिए जो बिजनेस सिस्टम से नहीं चलते वे बहुत जल्दी इतिहास बन जाते हैं। आपको अपने बिजनेस में एक ऐसी मशीन फिट करनी होगी जो लगातार नए आइडियाज को प्रोसेस करे और उन्हें मुनाफे में बदले। वरना आप बस वही पुरानी घिसी पिटी फिल्में दिखाते रहेंगे जिसे देखने अब कोई नहीं आता।
लेसन ३ : ओपन इनोवेशन और बाहर की दुनिया से जुड़ना
क्या आपको लगता है कि दुनिया के सारे अकलमंद लोग सिर्फ आपकी कंपनी में ही काम करते हैं। अगर हाँ तो भाई साहब आप बहुत बड़े भ्रम में जी रहे हैं। ए।जी। लाफले और राम चरण कहते हैं कि असली ग्रोथ तब आती है जब आप अपनी खिड़कियाँ खोलते हैं और बाहर की ताजी हवा को अंदर आने देते हैं। इसे कहते हैं ओपन इनोवेशन। पुराने जमाने में लोग अपनी खोज को तिजोरी में बंद करके रखते थे जैसे कोई खानदानी खजाना हो। लेकिन आज के दौर में अगर आप अकेले सब कुछ करने की कोशिश करेंगे तो आप बस कछुए की चाल चलते रह जाएंगे और दुनिया आपसे कोसों आगे निकल जाएगी।
सोचिए आप एक हलवाई हैं और आप अपनी मिठाई की रेसिपी किसी को नहीं बताते। लेकिन वहीं पड़ोस वाला हलवाई दूसरे शेफ से नई टेक्निक सीख रहा है और सोशल मीडिया के जरिए नए फ्लेवर्स का पता लगा रहा है। अब आप अपनी वही पुरानी चीनी वाली चाशनी में डूबे रहेंगे जबकि वह मार्केट में शुगर फ्री और नए जमाने के फ्यूजन डेजर्ट बेचकर निकल जाएगा। यही फर्क है एक बंद दिमाग और एक खुले दिमाग वाले बिजनेस में। लाफले ने पी एंड जी में यह नियम बनाया कि उनके आधे से ज्यादा नए आइडियाज बाहर से आने चाहिए। उन्होंने यूनिवर्सिटीज और छोटे स्टार्टअप्स के साथ हाथ मिलाया। उन्होंने समझा कि जो काम उनकी टीम सालों में नहीं कर पा रही थी वह बाहर का कोई टैलेंट शायद चंद हफ्तों में कर दे।
लोग अक्सर डरते हैं कि अगर हमने किसी और की मदद ली तो हमारा नाम खराब हो जाएगा या हमारा सीक्रेट चोरी हो जाएगा। लेकिन सच तो यह है कि ईगो पालने से घर नहीं चलता। आपको यह देखना होगा कि आपके कस्टमर को बेस्ट वैल्यू कैसे मिले। अगर वह वैल्यू बाहर से आ रही है तो उसे गले लगाने में कोई बुराई नहीं है। यह वैसा ही है जैसे आप अपने घर की पेंटिंग खुद करने बैठ जाएं जबकि एक प्रोफेशनल पेंटर उसे आधे समय में और ज्यादा फिनिशिंग के साथ कर सकता है। आप अपना कीमती समय बचाकर कुछ और बड़ा सोच सकते हैं।
ओपन इनोवेशन का मतलब है कि आप ईगो को साइड में रखकर कोलाबोरेशन पर ध्यान दें। आज के इंटरनेट के युग में तो यह और भी आसान हो गया है। आप फीडबैक ले सकते हैं और दूसरे सेक्टर के लोगों से सीख सकते हैं। कभी कभी एक साबुन बनाने वाली कंपनी को एक कार बनाने वाली कंपनी के पेंट करने के तरीके से आईडिया मिल जाता है। जब आप अलग अलग फील्ड्स को जोड़ते हैं तभी कुछ सच में 'गेम चेंजिंग' निकलकर आता है। अगर आप बस अपनी ही इंडस्ट्री के लोगों को देखते रहेंगे तो आप बस उनकी कॉपी ही कर पाएंगे। कुछ ओरिजिनल करने के लिए आपको बाउंड्री के पार देखना होगा।
बिजनेस कोई जंग नहीं है जिसे आपको अकेले जीतना है। यह एक खेल है जहाँ आप जितनी अच्छी टीम बनाएंगे और जितने ज्यादा लोगों के साथ मिलकर खेलेंगे उतना ही लंबा टिकेंगे। अगर आप अपनी कंपनी की चारदीवारी के अंदर ही अपनी पीठ थपथपाते रहेंगे तो एक दिन आप खुद को अकेले ही पाएंगे। असली लीडर वह नहीं जो सब कुछ जानता हो बल्कि वह है जो जानता है कि सही आईडिया कहाँ से पकड़ना है। तो अपनी आँखें और कान खुले रखिए क्योंकि अगला बड़ा आईडिया शायद आपके ऑफिस के बाहर वाली चाय की दुकान पर चर्चा कर रहा हो।
द गेम चेंजर हमें सिखाती है कि इनोवेशन कोई लग्जरी नहीं बल्कि जरूरत है। अगर आप कस्टमर को बॉस नहीं मानते और सिस्टम बनाकर काम नहीं करते तो आप बस भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाएंगे। आज ही अपनी स्ट्रेटेजी बदलें और कुछ ऐसा करें जो सच में गेम बदल दे। आपको यह आर्टिकल कैसा लगा और आप अपने काम में क्या नया करने वाले हैं नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं। इस ज्ञान को सिर्फ अपने तक न रखें और इसे उन लोगों के साथ शेयर करें जिन्हें अपनी लाइफ में एक बड़े बदलाव की जरूरत है।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#BusinessGrowth #InnovationStrategy #SuccessTips #BookSummary #Entrepreneurship
_