आप अभी भी घंटों तक ऑफिस में घिस रहे हैं और सोच रहे हैं कि आपका बिजनेस ग्रो क्यों नहीं कर रहा है। शायद आप उन महान लोगों में से हैं जो सिर्फ हवा में महल बनाते हैं और ग्राउंड पर जीरो हैं। बिना एक्जीक्यूशन के आपकी सारी प्लानिंग कचरा है और आप चुपचाप अपनी सक्सेस को कॉम्पिटिटर्स की थाली में सजाकर दे रहे हैं।
क्या आप भी अपनी शानदार स्ट्रेटेजी को असलियत में बदलने में फेल हो रहे हैं। रॉबर्ट कपलान और डेविड नॉर्टन की बुक द एक्जीक्यूशन प्रीमियम आपको वह सीक्रेट बताएगी जिससे आपका काम और विजन एक हो जाएंगे। चलिए जानते हैं इसके ३ पावरफुल लेसन्स।
लेसन १ : स्ट्रेटेजी और ऑपरेशंस का असली रिश्ता
ज्यादातर कंपनियों में पता है क्या होता है। बॉस लोग एसी वाले कमरे में बैठकर बड़ी बड़ी बातें करते हैं और भारी भरकम पीपीटी बनाते हैं। लेकिन ग्राउंड पर काम करने वाला बंदा अपनी अलग ही दुनिया में खोया रहता है। उसे पता ही नहीं होता कि उसकी मेहनत कंपनी को कहाँ ले जा रही है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप जिम जाने का पूरा डाइट चार्ट बना लें लेकिन किचन में सिर्फ समोसे तल रहे हों। प्लानिंग और काम के बीच का यह गैप ही आपके बिजनेस की बर्बादी का सबसे बड़ा कारण बनता है।
रॉबर्ट कपलान और डेविड नॉर्टन कहते हैं कि अगर आपको मार्केट में टिके रहना है तो अपनी स्ट्रेटेजी को ऑपरेशंस के साथ फेविकोल की तरह चिपकाना होगा। इसे कहते हैं स्ट्रेटेजी टू ऑपरेशंस लिंक। मान लीजिए आप एक नई ई-कॉमर्स कंपनी शुरू करते हैं। आपने विजन बनाया कि हम सबसे तेज डिलीवरी करेंगे। यह आपकी स्ट्रेटेजी है। लेकिन आपके गोदाम का मैनेजर आज भी पुराने रजिस्टर में एंट्री कर रहा है और डिलीवरी बॉय को एड्रेस ही नहीं मिल रहा। यह आपके ऑपरेशंस हैं। अब आप ही बताइए क्या आपकी स्ट्रेटेजी कभी काम आएगी। बिल्कुल नहीं। आप बस सोशल मीडिया पर विजनरी दिखने की कोशिश करेंगे जबकि असलियत में आपके कस्टमर आपको गालियां दे रहे होंगे।
असली खेल तब शुरू होता है जब आपकी कंपनी का हर छोटा काम आपके बड़े गोल की तरफ इशारा करे। अगर आपका गोल कस्टमर को खुश करना है तो आपके रिसेप्शनिस्ट की मुस्कान से लेकर आपके प्रोडक्ट की पैकेजिंग तक सब कुछ उस गोल से जुड़ा होना चाहिए। लोग अक्सर सोचते हैं कि स्ट्रेटेजी बनाना सिर्फ बड़े साहबों का काम है। पर भाई साहब अगर आपका सेल्समैन ही यह नहीं जानता कि कंपनी क्यों खास है तो वह ग्राहक को क्या बेचेगा। वह सिर्फ डिस्काउंट देगा और आपकी प्रॉफिट की लंका लगा देगा।
इस बुक में बताया गया है कि एक मजबूत सिस्टम होना चाहिए जो आपके विजन को डेली टास्क में बदल दे। बिना किसी सिस्टम के आप सिर्फ एक बिना लगाम के घोड़े की तरह दौड़ रहे हैं। आप बहुत मेहनत कर रहे हैं पर पहुँच कहीं नहीं रहे। लोग अक्सर खुद को बहुत बिजी दिखाते हैं। ऑफिस में बारह घंटे रुकेंगे और कहेंगे कि बहुत काम है। पर भाई वह काम किस काम का जो कंपनी को आगे ही न बढ़ाए। यह तो वही बात हुई कि आप दीवार को धक्का मार रहे हैं और सोच रहे हैं कि आप बहुत बड़े एथलीट बन जाएंगे।
एक्जीक्यूशन प्रीमियम का मतलब ही यही है कि आप प्लानिंग और काम के बीच की खाई को पाट दें। जब आपकी स्ट्रेटेजी और ऑपरेशंस एक साथ नाचने लगेंगे तब जाकर आपको वह फायदा मिलेगा जो दूसरों के पास नहीं है। मार्केट में सब लोग सिर्फ प्लान बना रहे हैं पर जो इसे सही से लागू कर लेता है वही असली बाजी मारता है। बाकी सब तो सिर्फ मीटिंग्स में समोसे खाते रह जाते हैं और साल के अंत में सोचते हैं कि प्रॉफिट कहाँ गया।
लेसन २ : फीडबैक लूप और परफॉरमेंस का पोस्टमार्टम
ज्यादातर लोग बिजनेस को किसी पुरानी कार की तरह चलाते हैं। जब तक धुआं न निकले या इंजन से अजीब आवाजें न आएं तब तक उन्हें लगता है कि सब कुछ ठीक चल रहा है। कपलान और नॉर्टन कहते हैं कि यह एटीट्यूड आपको सीधा गड्ढे में ले जाएगा। अगर आप अपनी प्रोग्रेस को माप नहीं रहे हैं तो आप असल में प्रोग्रेस कर ही नहीं रहे हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप बिना स्कोरबोर्ड देखे क्रिकेट खेल रहे हों। आपको लग रहा है कि आप छक्के मार रहे हैं पर क्या पता आप अपनी ही टीम के विकेट गिरा रहे हों।
असली समझदारी इसमें है कि आप एक ऐसा सिस्टम बनाएं जिसे फीडबैक लूप कहते हैं। इसका मतलब है कि जो प्लान आपने बनाया वह जमीन पर कैसा काम कर रहा है उसका डेटा आपके पास हर हफ्ते होना चाहिए। लोग डेटा से इतना डरते हैं जैसे बचपन में मैथ के रिजल्ट से डरते थे। पर भाई साहब अगर आप अपनी गलतियां नहीं देखेंगे तो उन्हें सुधारेंगे कैसे। आप बस आँखें बंद करके यह दुआ करते रहेंगे कि इस महीने सेल बढ़ जाए। पर बिजनेस दुआओं से नहीं बल्कि सही डेटा और उस पर लिए गए एक्शन से चलता है।
मान लीजिए आपने सोचा कि आप अपनी सर्विस की क्वालिटी बढ़ाएंगे। अब आपने महीने के अंत में देखा कि आपके पुराने कस्टमर तो भाग रहे हैं। अगर आप यह डेटा नहीं देखेंगे तो आप अगले महीने भी वही पुरानी गलतियां दोहराएंगे। आप अपनी टीम को डांटेंगे और वो आपको झूठे बहाने देंगे। आखिर में नतीजा वही सिफर रहेगा। यहाँ काम आता है बैलेंस स्कोरकार्ड का तरीका। यह आपको सिर्फ यह नहीं बताता कि कितना पैसा कमाया बल्कि यह भी बताता है कि कस्टमर कितना खुश है और आपकी टीम कितनी नई चीजें सीख रही है।
कुछ मैनेजर्स को लगता है कि एक बार मीटिंग कर ली और सबको टारगेट दे दिया तो बस काम खत्म। अब वो सीधे साल के अंत में पूछेंगे कि क्या हुआ। यह तो वही बात हुई कि आपने खाना गैस पर चढ़ा दिया और फिर भूल गए। जब जलने की बदबू आएगी तभी आप वापस किचन में जाएंगे। तब तक तो बहुत देर हो चुकी होगी। इस बुक का दूसरा लेसन हमें सिखाता है कि हमें अपने ऑपरेशंस का पोस्टमार्टम करते रहना चाहिए। क्या हमारा प्लान फेल हो रहा है या मार्केट बदल गया है।
अगर मार्केट बदल गया है और आप अभी भी अपने पुराने प्लान पर चिपके हुए हैं तो आप किसी पुराने जमाने के टाइपराइटर बेचने वाले की तरह बन जाएंगे। जिद्दी होना अच्छी बात है पर अपने प्लान को लेकर अंधे हो जाना बेवकूफी है। आपको हर थोड़े दिन में रुककर यह पूछना चाहिए कि क्या हम सही रास्ते पर हैं। अगर डेटा कहता है कि रास्ता गलत है तो तुरंत मोड़ काटिए। इसमें कोई शर्म की बात नहीं है। शर्म तो इसमें है कि आप फेल हो रहे हैं और आपको पता भी नहीं है।
जब आप लगातार फीडबैक लेते हैं तो आपकी टीम को भी पता होता है कि उनकी हर हरकत पर नजर रखी जा रही है। इसका मतलब यह नहीं कि आप उनके सिर पर डंडा लेकर खड़े हो जाएं। इसका मतलब यह है कि आप उन्हें रास्ता दिखा रहे हैं। जब सबको अपना स्कोर पता होता है तो लोग जीतने के लिए ज्यादा मेहनत करते हैं। वरना वो बस ऑफिस आएंगे और आपकी मुफ्त की कॉफी पीकर घर चले जाएंगे।
लेसन ३ : हर एम्प्लॉई को विजन का पार्टनर बनाना
क्या आपने कभी किसी ऐसी शादी में शिरकत की है जहाँ हलवाई को पता ही नहीं कि मेन्यू क्या है और बाराती कब आने वाले हैं। वह बस अपनी धुन में आलू छील रहा है जबकि मेहमान पनीर मांग रहे हैं। ज्यादातर कंपनियों का हाल भी कुछ ऐसा ही होता है। ऊपर बैठे लीडर्स को लगता है कि वो बहुत महान विजनरी हैं पर नीचे काम करने वाले एम्प्लॉई को यह तक नहीं पता कि उसकी डेली की मेहनत कंपनी के किस काम आ रही है। वह बस महीने की आखिरी तारीख और सैलरी का इंतजार करता है। अगर आपकी टीम का हर सदस्य आपके विजन से नहीं जुड़ा है तो आप एक ऐसी नाव चला रहे हैं जहाँ हर कोई अलग दिशा में चप्पू चला रहा है।
रॉबर्ट कपलान और डेविड नॉर्टन कहते हैं कि असली एक्जीक्यूशन प्रीमियम तब मिलता है जब आपकी स्ट्रेटेजी ऑफिस की दीवारों पर लगे सुंदर चार्ट्स से निकलकर आपके एम्प्लॉई के दिमाग में बैठ जाए। इसे कहते हैं स्ट्रैटेजिक अलाइनमेंट। जब तक एक चपरासी को यह गर्व महसूस नहीं होगा कि उसके ऑफिस साफ रखने से क्लाइंट पर अच्छा इम्प्रेशन पड़ता है और उससे कंपनी की डील पक्की होती है तब तक आप सिर्फ एक भीड़ चला रहे हैं टीम नहीं। लोग अक्सर सोचते हैं कि पैसा फेंक दो और काम करवा लो। पर भाई साहब पैसा सिर्फ हाथ चला सकता है दिमाग और दिल नहीं।
इमेजिन कीजिए कि आप एक टेक कंपनी चला रहे हैं और आपका विजन है दुनिया का सबसे यूजर फ्रेंडली ऐप बनाना। लेकिन आपका कोडर सिर्फ इसलिए कोड लिख रहा है क्योंकि उसे अपनी शिफ्ट खत्म करनी है। उसे फर्क नहीं पड़ता कि बटन कहाँ है या यूजर को गुस्सा आ रहा है। यह आपकी लीडरशिप की सबसे बड़ी हार है। आपको अपनी बड़ी स्ट्रेटेजी को छोटे छोटे और आसान टुकड़ों में तोड़कर हर लेवल तक पहुँचाना होगा। जब एम्प्लॉई को अपनी प्रोग्रेस और कंपनी की जीत एक ही नजर आने लगती है तब जादू होता है।
ज्यादातर कंपनियां अपनी स्ट्रेटेजी को किसी टॉप सीक्रेट सरकारी फाइल की तरह छुपाकर रखती हैं जैसे कि एम्प्लॉई को पता चल गया तो वो उसे चुरा लेंगे। पर हकीकत यह है कि जब तक उन्हें पता नहीं होगा कि लड़ाई किस बात की है तब तक वो लड़ेंगे कैसे। आपको उनसे बात करनी होगी। उन्हें बताना होगा कि हम यहाँ क्यों हैं और हम कहाँ जा रहे हैं। और हाँ इसमें वो भारी भरकम बिजनेस की अंग्रेजी मत झाड़िए। उन्हें सिंपल भाषा में समझाइए कि उनकी छोटी सी कोशिश कैसे कंपनी के बड़े सपने का हिस्सा है।
दुनिया की सबसे बेहतरीन स्ट्रेटेजी भी तब तक जीरो है जब तक उसे लागू करने वाले लोग मोटिवेटेड न हों। एक्जीक्यूशन कोई रोबोटिक प्रोसेस नहीं है बल्कि यह इंसानों का खेल है। अगर आप इंसानों को अपनी प्लानिंग का हिस्सा नहीं बनाएंगे तो वो आपकी प्लानिंग को मिट्टी में मिलाने में देर नहीं लगाएंगे। इसलिए अपनी टीम को सिर्फ नौकर मत समझिए बल्कि उन्हें अपनी जीत का पार्टनर बनाइए। जब सब एक ही सुर में गाएंगे तभी संगीत बनेगा वरना सिर्फ शोर मचता रहेगा।
तो क्या आप अब भी सिर्फ प्लानिंग के सपने देख रहे हैं या अपनी टीम के साथ मिलकर मैदान में उतरने को तैयार हैं। याद रखिए प्लानिंग आपको सिर्फ स्टार्ट लाइन तक लाती है लेकिन एक्जीक्यूशन ही आपको फिनिश लाइन पार करवाता है। आज ही अपने सिस्टम को बदलिए इससे पहले कि आपका कॉम्पिटिटर आपको बदलकर रख दे।
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