The Google Story (Hindi)


क्या आप अभी भी वही घिसी पिटी पुरानी बिजनेस ट्रिक्स इस्तेमाल कर रहे हैं। शायद इसीलिए आपका स्टार्टअप या करियर उस कछुए की तरह है जो कभी रेस नहीं जीतता। गूगल की ये सीक्रेट स्ट्रेटेजी न जानकर आप अपनी तरक्की के दरवाजे खुद बंद कर रहे हैं। हंसिए मत क्योंकि अज्ञानता कोई गर्व की बात नहीं है।

आज हम दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन की असली कहानी यानी द गूगल स्टोरी की गहराई में उतरेंगे। लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन के वे तीन लेसन जानेंगे जिन्होंने इंटरनेट की दुनिया पर राज करना सिखाया।


लेसन १ : डेटा की ताकत और यूजर का भरोसा

क्या आपको याद है वह जमाना जब इंटरनेट पर कुछ ढूंढना किसी भूसे के ढेर में सुई ढूंढने जैसा था। लोग याहू और एम एस एन जैसे पोर्टल्स पर जाते थे जहाँ इतने सारे विज्ञापन होते थे कि असली जानकारी कहीं खो जाती थी। लेकिन फिर दो लड़के आए लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन। उन्होंने दुनिया को बताया कि असली राजा विज्ञापन नहीं बल्कि डेटा और यूजर का एक्सपीरियंस है।

अक्सर हम लाइफ में क्या करते हैं। जैसे ही कोई नया काम शुरू किया नहीं कि हमारी नजर सीधे बैंक अकाउंट पर टिक जाती है। हम सोचते हैं कि बस आज दुकान खोली है और कल से नोटों की बारिश शुरू हो जाए। गूगल ने इसके ठीक उल्टा किया। उन्होंने सालों तक पैसे कमाने के बारे में सोचा ही नहीं। उनका पूरा फोकस इस बात पर था कि कैसे एक यूजर को वह जानकारी दी जाए जिसकी उसे तलाश है।

इमेजिन कीजिये आप किसी रेस्टोरेंट में जाते हैं। वेटर आपके पास आता है और मेन्यू दिखाने से पहले ही कहता है कि सर हमारे पास एक बहुत महंगा परफ्यूम है क्या आप उसे खरीदना चाहेंगे। आप कहेंगे भाई पहले मुझे खाना तो खिला दे। गूगल ने यही समझा कि अगर सर्च इंजन पर बेकार के ऐड दिखेंगे तो लोग भाग जाएंगे। उन्होंने एक बिलकुल साफ सुथरा सफेद पेज बनाया। उस वक्त के बड़े बड़े पंडित कहते थे कि यह लोग पागल हैं। बिना ऐड के पैसा कहाँ से आएगा। लेकिन गूगल वालों को पता था कि अगर एक बार लोगों को आपकी सर्विस की लत लग गई तो पैसा तो आपके पीछे झक मारकर आएगा।

आजकल के इन्फ्लुएंसर और स्टार्टअप वाले भाई साहब को देखिये। काम शुरू करने से पहले आईफोन और महंगी गाड़ी की ई एम आई सेट कर लेते हैं। कंटेंट चाहे कचरा हो लेकिन मार्केटिंग पर करोड़ों खर्च कर देते हैं। गूगल की कहानी हमें सिखाती है कि अगर आपकी क्वालिटी में दम है तो आपको शोर मचाने की जरूरत नहीं है। लोग खुद आपको ढूंढते हुए आएंगे।

जब आप दूसरों की लाइफ में वैल्यू ऐड करते हैं तो आप सिर्फ एक सर्विस नहीं बल्कि एक भरोसा बेच रहे होते हैं। गूगल ने बैकलिंक्स की ताकत को समझा। उन्होंने एक ऐसा एल्गोरिदम बनाया जो इंटरनेट की पूरी दुनिया को एक धागे में पिरो देता था। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे मोहल्ले में किसकी इज्जत ज्यादा है यह इस बात से तय होता है कि कितने बड़े लोग उसके बारे में बात कर रहे हैं।

अगर आप अपने करियर या बिजनेस में सफल होना चाहते हैं तो पहले अपनी स्किल्स को इतना धारदार बनाइये कि लोग आपके नाम की मिसाल दें। जब तक आप लोगों की प्रॉब्लम सॉल्व नहीं करेंगे तब तक आप सिर्फ एक भीड़ का हिस्सा बने रहेंगे। गूगल ने प्रॉब्लम सॉल्व की और आज वह एक वर्ब बन चुका है। हम यह नहीं कहते कि इंटरनेट पर ढूंढो हम कहते हैं कि गूगल कर लो। यही होती है असली कामयाबी।


लेसन २ : 20 परसेंट टाइम और इनोवेशन का जादू

क्या आपको लगता है कि ऑफिस में 9 से 5 तक कोल्हू के बैल की तरह जुते रहने से आप दुनिया बदल देंगे। अगर हाँ तो बधाई हो आप एक बहुत बड़ी गलतफहमी के शिकार हैं। गूगल ने दुनिया को एक बहुत ही अजीब लेकिन जादुई कॉन्सेप्ट दिया जिसे वे 20 परसेंट टाइम कहते हैं। इसका मतलब है कि उनके एम्प्लॉई अपने वर्किंग टाइम का एक बड़ा हिस्सा उन चीजों पर लगा सकते हैं जो उनके दिल के करीब हैं और जो उनके ऑफिशियल काम का हिस्सा नहीं हैं।

जरा सोचिये अगर आपका बॉस आपसे आकर कहे कि जाओ आज जो तुम्हारा मन करे वो करो तो शायद आप सो जाएंगे या नेटफ्लिक्स देखेंगे। लेकिन गूगल ने अपने यहाँ ऐसे जुनूनी लोगों को रखा जो खाली समय में भी कुछ बड़ा सोचते थे। आज आप जो जीमेल इस्तेमाल करते हैं या गूगल मैप्स पर रास्ता ढूंढते हैं वह इसी फ्री टाइम की देन है। यह लेसन हमें सिखाता है कि क्रिएटिविटी कभी भी दबाव में पैदा नहीं होती। वह तो आजादी की कोख से जन्म लेती है।

अक्सर हमारे समाज में क्या होता है। अगर कोई बच्चा पढ़ाई के अलावा कुछ और कर रहा हो तो ताऊ जी आकर कहेंगे कि बेटा इन सब चीजों से घर नहीं चलता। लेकिन गूगल की कहानी कहती है कि वही फालतू चीजें एक दिन आपका सबसे बड़ा एसेट बन सकती हैं। अगर लैरी और सर्गेई ने अपने एम्प्लॉई को सिर्फ कोडिंग करने वाला रोबोट बना दिया होता तो आज शायद गूगल सिर्फ एक सर्च बॉक्स बनकर रह जाता।

हमें अपनी लाइफ में भी यह नियम लागू करना चाहिए। अगर आप दिन भर सिर्फ वही काम कर रहे हैं जो आपकी दाल रोटी चलाता है तो आप कभी भी एक्स्ट्राऑर्डिनरी नहीं बन पाएंगे। अपने दिन का कुछ हिस्सा उस हॉबी या उस आईडिया को दीजिये जिसे लोग पागलपन कहते हैं। हो सकता है आपका वही पागलपन कल की सबसे बड़ी खोज बन जाए।

यहाँ एक और बात समझने वाली है और वह है फेल होने की हिम्मत। गूगल ने लैब्स नाम का एक प्लेटफॉर्म बनाया जहाँ वे अजीबोगरीब एक्सपेरिमेंट करते थे। उनमें से कई बुरी तरह पिट गए। लेकिन क्या गूगल ने रोना धोना शुरू किया। बिलकुल नहीं। उन्होंने उन मलबों से हीरे निकाले। हमारे यहाँ तो अगर एक एग्जाम खराब हो जाए तो पूरा खानदान ऐसे मातम मनाता है जैसे प्रॉपर्टी छिन गई हो।

सफलता का असली राज यही है कि आप खुद को और अपनी टीम को रिस्क लेने की आजादी दें। जब आप डर को अपने केबिन से बाहर निकाल देते हैं तभी इनोवेशन अंदर आता है। गूगल की वर्क कल्चर किसी फाइव स्टार होटल जैसी नहीं है बल्कि वह एक ऐसी जगह है जहाँ आईडिया को इज्जत मिलती है। चाहे वह आईडिया एक जूनियर इंजीनियर का हो या किसी बड़े मैनेजर का।

अगर आप भी अपनी लाइफ में कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो अपनी दिनचर्या में थोड़ा सा स्पेस छोड़िये। मशीन मत बनिए क्योंकि मशीनें सिर्फ काम करती हैं और इंसान इतिहास रचते हैं। गूगल ने इतिहास रचा क्योंकि उन्होंने अपने लोगों को इंसान समझा और उन्हें उड़ने के लिए आसमान दिया।


लेसन ३ : फेलियर से दोस्ती और बड़े विजन का खेल

क्या आपको लगता है कि गूगल ने जो भी छुआ वह सोना बन गया। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो शायद आप गूगल प्लस या गूगल ग्लास के बारे में भूल गए हैं। सच तो यह है कि गूगल ने जितने हिट्स दिए हैं उससे कहीं ज्यादा बार वे फेल हुए हैं। लेकिन उनकी खासियत यह नहीं थी कि वे फेल नहीं हुए बल्कि यह थी कि उन्होंने कभी भी फेलियर को पर्सनली नहीं लिया।

हमारे यहाँ अगर कोई नया बिजनेस शुरू करे और वह न चले तो पड़ोसी और रिश्तेदार ऐसे देखते हैं जैसे उसने कोई जुर्म कर दिया हो। लोग कहेंगे कि हमने तो पहले ही कहा था कि यह तुम्हारे बस की बात नहीं है। लेकिन लैरी और सर्गेई का विजन कुछ और ही था। उनका मानना था कि अगर आप फेल नहीं हो रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप कुछ खास नया ट्राई ही नहीं कर रहे हैं।

गूगल की कहानी का सबसे बड़ा लेसन यही है कि हमेशा बड़ा सोचो। जब उन्होंने शुरुआत की थी तो उनका मकसद सिर्फ एक अच्छी वेबसाइट बनाना नहीं था। उनका विजन था पूरी दुनिया की जानकारी को व्यवस्थित करना। अब सोचिये एक गैराज में बैठे दो लड़के पूरी दुनिया का डेटा कंट्रोल करने की बात कर रहे हैं। सुनने में यह किसी जोक जैसा लगता है। लेकिन आज वह जोक एक हकीकत है।

अक्सर हम अपनी लाइफ के गोल बहुत छोटे रखते हैं। हम सोचते हैं कि बस एक सुरक्षित नौकरी मिल जाए या एक छोटी सी दुकान चल जाए। हम अपनी बाउंड्री खुद तय कर लेते हैं। लेकिन गूगल ने कभी अपनी बाउंड्री तय नहीं की। उन्होंने सर्च इंजन से शुरू किया और आज वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्राइवरलेस कारों तक पहुँच गए हैं।

यहाँ एक और मजे की बात है। जब याहू ने गूगल को खरीदने से मना कर दिया था तो लैरी और सर्गेई उदास होकर घर नहीं बैठे। उन्होंने इसे एक मौके की तरह देखा। उन्होंने खुद को इतना बड़ा बनाया कि एक दिन याहू को ही उनसे मदद मांगनी पड़ी। यह होती है असली सैटिस्फैक्शन। अपने काम से जवाब देना सीखिए न कि अपनी बातों से।

लाइफ में जब भी आप कुछ नया करेंगे तो लोग आप पर हंसेंगे। गूगल पर भी दुनिया हंसी थी जब उन्होंने अपनी ईमेल सर्विस जीमेल शुरू की थी क्योंकि उस वक्त कोई सोच भी नहीं सकता था कि कोई फ्री में इतनी स्टोरेज देगा। लेकिन उन्होंने सबकी बोलती बंद कर दी।

तो दोस्तों द गूगल स्टोरी हमें सिखाती है कि रास्ता चाहे कितना भी कठिन हो और लोग चाहे कितना भी आपको डराएं आपको अपने विजन पर टिके रहना है। फेलियर को एक लेसन की तरह लीजिये और आगे बढ़ते रहिये। क्योंकि जो रुक गया वह खत्म हो गया और जो चलता रहा वही गूगल जैसा साम्राज्य खड़ा कर पाया।

अपनी लाइफ का सर्च इंजन खुद बनिए, अपनी कमियों को फिल्टर कीजिये और अपनी खूबियों को दुनिया के सामने लाइए। आज से ही अपने बड़े विजन पर काम शुरू कीजिये क्योंकि कल कभी नहीं आता।


अगर इस कहानी ने आपके अंदर की सोई हुई आग को थोड़ा भी सुलगाया है तो देर मत कीजिये। आज ही कमेंट्स में लिखिये कि वह कौन सा एक बड़ा आईडिया है जिस पर आप काम करना चाहते हैं लेकिन डर की वजह से रुके हुए हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो फेल होने के डर से नया कदम नहीं उठा पा रहा है। याद रखिये आपकी एक शेयरिंग किसी की लाइफ बदल सकती है।

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