The Innovator's Method (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो बिना सोचे समझे अपना सारा पैसा और कीमती समय किसी ऐसे आइडिया पर बर्बाद कर देते हैं जिसकी मार्केट को जरूरत ही नहीं है। वाह भाई क्या गजब का टैलेंट है। आपकी इसी जिद्द की वजह से आपका बिजनेस और बैंक बैलेंस दोनों ही आईसीयू में लेटे हुए हैं और आप अभी भी पुराने घिसे पिटे तरीकों से सक्सेस की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

अगर आप भी अपनी मेहनत की कमाई को आग लगाना बंद करना चाहते हैं और स्मार्ट तरीके से आगे बढ़ना चाहते हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है। आज हम द इनोवेटर्स मेथड किताब से वह ३ लेसन सीखेंगे जो आपके काम करने के नजरिए को पूरी तरह बदलकर रख देंगे।


लेसन १ : गेस वर्क छोड़ो और साइंटिस्ट बनो

ज्यादातर लोग बिजनेस शुरू करते वक्त खुद को किसी फिल्म का हीरो समझते हैं। उन्हें लगता है कि बस एक रात सपना आया और अगले दिन करोड़ों का आईडिया तैयार हो गया। लेकिन असलियत में वह आईडिया सिर्फ उनके दिमाग की उपज होती है जिसका हकीकत से कोई लेना देना नहीं होता। लोग बिना किसी रिसर्च के अपनी जमा पूंजी एक ऐसे प्रोडक्ट पर लगा देते हैं जिसे कोई खरीदना ही नहीं चाहता। यह तो वही बात हुई कि आपने बिना तैरना सीखे समंदर में छलांग लगा दी और अब भगवान से दुआ कर रहे हैं कि वह आपको बचा ले। भाई साहब भगवान भी उन्हीं की मदद करते हैं जो पहले अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करते हैं।

द इनोवेटर्स मेथड हमें सिखाता है कि अनिश्चितता यानी अनसर्टेनिटी को कैसे हैंडल करना है। जब आप कुछ नया कर रहे होते हैं तो आप एक मैनेजर नहीं बल्कि एक साइंटिस्ट होते हैं। एक मैनेजर का काम होता है बनी बनाई चीजों को चलाना लेकिन एक इनोवेटर का काम होता है नई चीजों को खोजना। अगर आप किसी बड़ी कंपनी में हैं या अपना छोटा सा स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं तो सबसे बड़ी गलती यह होती है कि आप मान लेते हैं कि आपको सब पता है। आपको लगता है कि कस्टमर को क्या चाहिए यह आपको ऑफिस में बैठकर ही समझ आ जाएगा। सच तो यह है कि आपको कुछ नहीं पता।

मान लीजिए आपने सोचा कि आप एक ऐसा ऐप बनाएंगे जो लोगों के घर आकर उनके पालतू कुत्तों को नहलाएगा। आपने बढ़िया ऑफिस लिया और लाखों रुपए मार्केटिंग में फूंक दिए। लेकिन बाद में पता चला कि लोग तो अपने कुत्तों को खुद नहलाना पसंद करते हैं क्योंकि इससे उनका लगाव बढ़ता है। अब बैठिए अपने उस ऐप के साथ और लगाइए उसे अगरबत्ती। अगर आपने पहले ही छोटे लेवल पर टेस्ट किया होता तो आपका इतना नुकसान नहीं होता।

किताब कहती है कि आपको अपने आइडियाज को सिर्फ एक गेस यानी अंदाजा मानना चाहिए। जब तक मार्केट उसे सही साबित न कर दे तब तक वह सिर्फ एक कोरा कागज है। आपको छोटे छोटे एक्सपेरिमेंट करने चाहिए जिनसे यह पता चले कि लोग वाकई उस चीज के लिए पैसे देने को तैयार हैं या नहीं। बिजनेस करना कोई जुआ नहीं है जहाँ आप अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यह एक सोची समझी प्रोसेस है जहाँ आप डेटा और फीडबैक के आधार पर फैसले लेते हैं।

अगर आप अपने अहंकार को साइड में रखकर मार्केट की सुनेंगे तो ही आप सर्वाइव कर पाएंगे। वरना इतिहास ऐसे ब्रैंड्स से भरा पड़ा है जिन्होंने खुद को बहुत स्मार्ट समझा और आज उनका नामो-निशान तक नहीं है। आपको यह समझना होगा कि फेल होना बुरा नहीं है लेकिन गलत आईडिया पर डटे रहना और उसमें पैसा बर्बाद करना सबसे बड़ी बेवकूफी है। इसलिए अगली बार जब आपके दिमाग में कोई तूफानी आईडिया आए तो सीधे दुकान खोलने के बजाय पहले दो चार लोगों से पूछ लीजिए कि क्या उन्हें उसकी जरूरत भी है।


लेसन २ : सोल्यूशन के प्यार में मत पड़ो बल्कि प्रॉब्लम से शादी कर लो

अक्सर नए एंटरप्रेन्योर की सबसे बड़ी बीमारी यह होती है कि उन्हें अपने सोल्यूशन से बहुत ज्यादा प्यार हो जाता है। उन्हें लगता है कि उनकी बनाई हुई वेबसाइट या उनका बनाया हुआ प्रोडक्ट दुनिया का आठवां अजूबा है। आप अपने आईडिया के साथ ऐसे चिपके रहते हैं जैसे कोई आशिक अपनी महबूबा के साथ। लेकिन भाई साहब बिजनेस की दुनिया बड़ी बेरहम है। अगर आप अपने प्रोडक्ट के प्यार में अंधे हो गए तो आप वह असली समस्या देखना भूल जाएंगे जिसे हल करना सबसे ज्यादा जरूरी था। लोग अपना सारा समय और पैसा फीचर्स जोड़ने में लगा देते हैं जबकि असलियत में कस्टमर को उन फीचर्स की कोई परवाह ही नहीं होती।

मान लीजिए आपने एक ऐसी मशीन बनाई जो एक मिनट में दस तरह की सब्जियां काट सकती है। आपने उस मशीन को सजाने और उसमें लाइट लगाने में लाखों खर्च कर दिए। लेकिन जब आप मार्केट में गए तो पता चला कि लोगों की असली प्रॉब्लम सब्जियां काटना नहीं बल्कि सब्जियां धोना थी। अब आपकी वह चमचमाती मशीन किस काम की। आपने एक बहुत शानदार सोल्यूशन तो बना लिया लेकिन वह किसी समस्या का समाधान नहीं कर रहा था। आप उस डॉक्टर की तरह बन गए जो मरीज को दवाई तो दे रहा है पर यह नहीं जानता कि बीमारी क्या है।

द इनोवेटर्स मेथड हमें साफ बताता है कि हमें सोल्यूशन से पहले प्रॉब्लम को गहराई से समझना होगा। इसे किताब में प्रॉब्लम पेन कहा गया है। क्या आपकी समस्या वाकई इतनी बड़ी है कि लोग उसे हल करने के लिए अपनी जेब से पैसे निकालेंगे। ज्यादातर लोग विटामिन बेच रहे होते हैं जबकि दुनिया को पेनकिलर की जरूरत होती है। विटामिन अच्छी चीज है लेकिन लोग उसके लिए तड़पते नहीं हैं। लेकिन अगर किसी के दांत में दर्द है तो वह आधी रात को भी पेनकिलर के लिए पैसे देने को तैयार हो जाएगा। आपको अपने बिजनेस के लिए वही दांत का दर्द ढूंढना है।

कस्टमर के पास जाइए और उनसे बात कीजिए। पर ध्यान रहे कि उनसे यह मत पूछिए कि क्या आपको मेरा आईडिया पसंद आया। लोग आपके मुंह पर झूठ बोल देंगे ताकि आपका दिल न टूटे। उनसे उनके जीवन की दिक्कतों के बारे में पूछिए। जब आप उनकी बातों को ध्यान से सुनेंगे तो आपको असली खजाना मिलेगा। आपको समझ आएगा कि वह कहाँ परेशान हो रहे हैं और कहाँ उनका पैसा या समय बर्बाद हो रहा है। जब आप प्रॉब्लम के एक्सपर्ट बन जाते हैं तो सोल्यूशन अपने आप निकलकर आता है।

अगर आप केवल अपने आईडिया को बेस्ट साबित करने में लगे रहेंगे तो आप कभी ग्रो नहीं कर पाएंगे। एक असली इनोवेटर वह है जो अपने आईडिया को कचरे के डिब्बे में फेंकने की हिम्मत रखता है अगर उसे पता चले कि वह किसी काम का नहीं है। रिजिड मत बनिए बल्कि पानी की तरह बनिए जो बर्तन के हिसाब से अपना आकार बदल लेता है। जब आप प्रॉब्लम को अपना जीवनसाथी बना लेते हैं तो आपका सोल्यूशन हर दिन बेहतर होता जाता है क्योंकि वह हकीकत पर टिका होता है न कि आपकी कल्पनाओं पर।


लेसन ३ : बड़ी छलांग नहीं बल्कि छोटे कदम उठाओ

जब लोग अपना बिजनेस प्लान बनाते हैं तो सीधा करोड़ों की सेल्स और दुनिया जीतने की बातें करते हैं। अरे भाई अभी तो आपने दुकान का शटर भी नहीं खोला और आप अंबानी बनने के सपने देख रहे हैं। यह वही बात हुई कि अभी आपने जिम में पहला दिन कदम रखा है और आप सीधे १०० किलो का वजन उठाने की कोशिश कर रहे हैं। नतीजा क्या होगा। आपकी पीठ टूटेगी और आप अगले दिन से जिम जाना छोड़ देंगे। बिजनेस में भी यही होता है। लोग परफेक्ट प्रोडक्ट बनाने के चक्कर में सालों लगा देते हैं और जब वह मार्केट में आता है तो वह पूरी तरह फ्लॉप हो जाता है।

द इनोवेटर्स मेथड का सबसे बड़ा मंत्र है रैपिड प्रोटोटाइपिंग। इसका मतलब है कि आप अपना पूरा और असली प्रोडक्ट बनाने से पहले उसका एक बहुत ही सस्ता और कामचलाऊ मॉडल बनाएं। इसे MVP यानी मिनिमम वायेबल प्रोडक्ट कहते हैं। अगर आप एक रेस्टोरेंट खोलना चाहते हैं तो सीधा ५० लाख का इंटीरियर कराने के बजाय पहले अपने घर के खाने का एक छोटा सा स्टाल लगाकर देखिए। क्या लोग आपके हाथ का स्वाद पसंद कर रहे हैं। क्या वह दोबारा आ रहे हैं। अगर वह आपके छोटे से स्टाल पर लाइन लगाकर खड़े हैं तब जाकर बैंक से लोन लेने की सोचिए।

आजकल के जमाने में लोग दिखावे के पीछे ज्यादा भागते हैं। उन्हें लगता है कि जब तक ऑफिस में बढ़िया कॉफी मशीन और फैंसी कुर्सियां नहीं होंगी तब तक स्टार्टअप शुरू नहीं होगा। लेकिन असली स्टार्टअप तो गैराज और छोटे कमरों से शुरू होते हैं जहाँ फोकस सिर्फ और सिर्फ कस्टमर के फीडबैक पर होता है। आप जितना जल्दी अपना प्रोटोटाइप लोगों के सामने रखेंगे उतना ही जल्दी आपको अपनी गलतियों का पता चलेगा। और यकीन मानिए अपनी गलती को शुरुआत में पकड़ लेना सबसे बड़ी समझदारी है।

अगर आप फेल होना ही चाहते हैं तो जल्दी और कम खर्चे में फेल होइए। ताकि आपके पास दोबारा उठने का हौसला और पैसा दोनों बचे रहें। लोग सालों तक कमरे में बंद होकर कोडिंग करते रहते हैं या प्रोडक्ट डिजाइन करते रहते हैं और उन्हें लगता है कि जब वह इसे लॉन्च करेंगे तो इंटरनेट फट जाएगा। लेकिन असलियत में सिर्फ उनका बजट फटता है। आपको मार्केट के साथ मिलकर अपना प्रोडक्ट बनाना चाहिए। हर एक कदम पर कस्टमर से पूछिए कि क्या यह सही है। क्या यह आपकी मुश्किल आसान कर रहा है।

इनोवेशन कोई जादू नहीं है और न ही यह सिर्फ जीनियस लोगों के लिए है। यह एक प्रोसेस है जिसे कोई भी सीख सकता है। बस आपको अपनी ईगो को साइड में रखकर सीखने की भूख रखनी होगी। जब आप छोटे कदम उठाते हैं तो आपके गिरने का डर कम होता है और संभलने का मौका ज्यादा मिलता है। याद रखिए कि रोम एक दिन में नहीं बना था लेकिन उन्होंने हर दिन एक एक ईंट सही जगह पर रखी थी। आपको भी वही करना है।


तो दोस्तों, द इनोवेटर्स मेथड हमें यही सिखाता है कि सफलता कोई तुक्का नहीं है बल्कि एक साइंस है। अगर आप अनिश्चितता को मैनेज करना सीख गए अपनी प्रॉब्लम को समझ गए और छोटे छोटे कदमों से आगे बढ़ना शुरू कर दिया तो आपको कोई नहीं रोक सकता। अब समय है कि आप अपनी उन पुरानी फाइलों को बाहर निकालें जिन्हें आप परफेक्ट बनाने के चक्कर में दबाए बैठे हैं। आज ही अपना छोटा सा टेस्ट शुरू करें।

क्या आप अभी भी परफेक्ट वक्त का इंतजार कर रहे हैं या फिर आज ही अपना पहला छोटा एक्सपेरिमेंट शुरू करने वाले हैं। कमेंट में हमें जरूर बताएं कि आप किस समस्या का समाधान ढूंढ रहे हैं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो बड़े बड़े सपने तो देखते हैं लेकिन शुरुआत करने से डरते हैं। याद रखिए आपकी एक छोटी सी शुरुआत आपकी पूरी जिंदगी बदल सकती है।

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