क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो खुद को बॉस समझकर सबको उँगलियों पर नचाना चाहते हैं। मुबारक हो। आप बहुत जल्द अपनी टीम और बिज़नेस दोनों खोने वाले हैं। अगर आप अभी भी रिचर्ड ब्रैनसन जैसे लीडरशिप सीक्रेट्स को इग्नोर कर रहे हैं तो सच में आप अपनी बरबादी का जश्न मना रहे हैं।
रिचर्ड ब्रैनसन की किताब द वर्जिन वे हमें सिखाती है कि असली लीडरशिप कुर्सी पर बैठने में नहीं बल्कि लोगों के दिल में जगह बनाने में है। चलिए आज हम इस किताब के तीन सबसे पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : बोलने से ज्यादा सुनने की कला ही आपको असली लीडर बनाती है
रिचर्ड ब्रैनसन कहते हैं कि भगवान ने हमें दो कान और एक मुँह इसीलिए दिया है ताकि हम बोलें कम और सुनें ज्यादा। लेकिन हमारे यहाँ तो मामला ही उल्टा है। जैसे ही किसी को थोड़ा सा प्रमोशन मिलता है या वो अपनी छोटी सी कंपनी शुरू करता है तो उसे लगता है कि अब तो बस मुझे ही बोलना है और बाकी सबको सुनना है। वो ऑफिस में ऐसे घुसता है जैसे कोई महाराजा अपनी प्रजा को उपदेश देने आया हो। अगर आप भी मीटिंग्स में सिर्फ अपनी आवाज सुनने के शौकीन हैं तो यकीन मानिए आपकी टीम आपसे नफरत करती है। आप बस एक टॉकिंग मशीन बनकर रह गए हैं जो किसी के आइडियाज की कदर नहीं करता। ब्रैनसन भाई साहब हमेशा अपनी जेब में एक छोटी सी नोटबुक और पेन रखते हैं। वो जहाँ भी जाते हैं लोगों की बातें सुनते हैं और उन्हें नोट करते हैं। चाहे वो उनका एम्प्लॉई हो या कोई अनजान पैसेंजर।
सोचिए आप एक रेस्टोरेंट के मालिक हैं। आप अपनी टीम को डांट रहे हैं कि सेल्स कम क्यों है। वहीं आपका वेटर आपको बताना चाहता है कि कस्टमर्स को खाने का स्वाद पसंद नहीं आ रहा। लेकिन आप हैं कि उसे बोलने का मौका ही नहीं दे रहे। आप बस चिल्ला रहे हैं कि तुम सब निकम्मे हो। अब होगा ये कि वेटर चुप हो जाएगा और आपका बिजनेस डूब जाएगा। ब्रैनसन कहते हैं कि जब आप सुनते हैं तो आप सीखते हैं। जब आप बोलते हैं तो आप वही दोहराते हैं जो आप पहले से जानते हैं। लीडरशिप का मतलब ये नहीं है कि आपके पास हर सवाल का जवाब हो। लीडरशिप का मतलब ये है कि आप सही सवाल पूछें और दूसरों के जवाबों को ध्यान से सुनें।
हमारे देश में अक्सर लोग समझते हैं कि ज्यादा चिल्लाने वाला ही बड़ा लीडर होता है। जबकि सच तो ये है कि शांत रहकर दूसरों के विचारों को समझने वाला इंसान ही असली गेम चेंजर होता है। अगर आप अपनी टीम की छोटी-छोटी बातों को नहीं सुनेंगे तो वो आपको बड़ी प्रॉब्लम्स के बारे में कभी नहीं बताएंगे। वो बस आपकी 'जी हजूरी' करेंगे और पीठ पीछे आपकी बुराई करेंगे। ब्रैनसन ने अपनी पूरी लाइफ में यही किया है। उन्होंने वर्जिन ग्रुप की इतनी सारी कंपनियां सिर्फ इसलिए खड़ी कर दीं क्योंकि उन्होंने लोगों की शिकायतों और उनके सुझावों को ध्यान से सुना। तो अगली बार जब आप किसी के साथ बैठें तो अपना मुँह बंद रखें और अपने कानों को पूरी तरह खोल लें। विश्वास करिए ये छोटा सा बदलाव आपको एक डिक्टेटर से एक महान लीडर बना देगा।
लेसन २ : अगर काम में मजा नहीं है, तो समझो आपका बिजनेस खत्म है
रिचर्ड ब्रैनसन का मानना है कि 'फन' यानी मौज-मस्ती कोई फालतू चीज नहीं है, बल्कि यह बिजनेस की सबसे बड़ी जरूरत है। हमारे यहाँ इंडिया में तो ऑफिस का मतलब ही यह माना जाता है कि जहाँ सब एक दूसरे को कसाई की नजर से देखें। सुबह नौ बजे जब लोग ऑफिस घुसते हैं, तो उनके चेहरे ऐसे लटके होते हैं जैसे वो किसी की तेरहवीं पर आए हों। मैनेजर ऐसे घूमता है जैसे उसे मुस्कुराने पर कोई टैक्स देना पड़ेगा। ब्रैनसन कहते हैं कि अगर आपके एम्प्लॉइज को काम करने में मजा नहीं आ रहा, तो आप कभी भी एक वर्ल्ड क्लास ब्रांड नहीं बना सकते। जब लोग खुश होते हैं, तब वो अपना बेस्ट देते हैं। लेकिन आप हैं कि उन्हें रोबोट की तरह ट्रीट करते हैं।
जरा सोचिए, आप एक ऐसी कंपनी चला रहे हैं जहाँ हर कोई बस घड़ी देख रहा है कि कब पांच बजें और वो इस जेल से बाहर निकलें। आप अपनी टीम को डराकर काम तो करवा सकते हैं, लेकिन उनकी क्रिएटिविटी नहीं खरीद सकते। ब्रैनसन भाई साहब खुद कभी टाई नहीं पहनते और न ही अपनी टीम को सूट-बूट के लिए मजबूर करते हैं। वो कहते हैं कि इंसान के कपड़े नहीं, उसका काम मायने रखता है। एक बार उन्होंने एक एयरलाइन के मैनेजर की टाई ही काट दी थी क्योंकि उन्हें लगा कि वो बहुत ज्यादा फॉर्मल और बोरिंग लग रहा है। अब आप अपने बॉस की टाई मत काट देना, वरना अगले दिन आपका रिज्यूमे हाथ में होगा। लेकिन पॉइंट ये है कि काम का माहौल ऐसा होना चाहिए जहाँ लोग हंस सकें और खुलकर अपनी बात कह सकें।
जब लोग ऑफिस में खुलकर हंसते हैं और एक दूसरे के साथ मस्ती करते हैं, तो टीम के बीच एक ऐसा बॉन्ड बनता है जिसे कोई भी कॉम्पिटिटर नहीं तोड़ सकता। ब्रैनसन अक्सर कहते हैं कि अगर आप अपने एम्प्लॉइज का ख्याल रखेंगे, तो वो आपके कस्टमर्स का ख्याल रखेंगे। यह एकदम सिंपल सी बात है। लेकिन हमारे यहाँ बॉस को लगता है कि जितना ज्यादा प्रेशर होगा, उतना ज्यादा काम होगा। असल में प्रेशर से सिर्फ बीपी बढ़ता है, बिजनेस नहीं। अगर आप चाहते हैं कि आपकी टीम संडे की शाम को मंडे के डर से न कांपे, तो आपको अपने वर्क कल्चर में थोड़ा सा ह्यूमर और आजादी लानी ही पड़ेगी। जब काम खेल जैसा लगने लगता है, तो सफलता अपने आप पीछे भागने लगती है।
लेसन ३ : डेलीगेट करना सीखिए और अपनी टीम पर भरोसा जताइए
रिचर्ड ब्रैनसन का एक बहुत ही सिंपल मंत्र है। अगर आप खुद को हर जगह फिट करने की कोशिश करेंगे, तो आप कहीं के नहीं रहेंगे। हमारे यहाँ कई ऐसे धुरंधर 'सोलोप्रेन्योर्स' हैं जिन्हें लगता है कि बिना उनके साइन के ऑफिस का पत्ता भी नहीं हिलना चाहिए। वो खुद ही अकाउंट्स देखेंगे, खुद ही मार्केटिंग करेंगे और मौका मिले तो झाड़ू भी खुद ही लगा लेंगे। ब्रैनसन कहते हैं कि यह लीडरशिप नहीं, बल्कि खुद को धीरे-धीरे खत्म करना है। एक असली लीडर वो है जो अपने से ज्यादा स्मार्ट लोगों को ढूंढता है और उन्हें काम सौंपकर खुद पीछे हट जाता है। अगर आप अपनी टीम पर भरोसा नहीं कर सकते, तो आपने उन्हें हायर ही क्यों किया। क्या सिर्फ अपनी ईगो को सहलाने के लिए।
कल्पना कीजिए कि आपने एक बहुत बड़ी एडवर्टाइजिंग एजेंसी शुरू की है। अब आप अपने ग्राफिक डिजाइनर के सिर पर खड़े होकर बता रहे हैं कि 'भाई, ये लाल वाला रंग थोड़ा और लाल कर दो'। या अपने राइटर को सिखा रहे हैं कि कोमा कहाँ लगाना है। यकीन मानिए, वो इंसान काम छोड़ने का बहाना ढूंढने लगेगा। ब्रैनसन ने वर्जिन ग्रुप की सैकड़ों कंपनियां खड़ी की हैं, लेकिन वो हर कंपनी के डे-टू-डे काम में टांग नहीं अड़ाते। वो सही लीडर्स चुनते हैं और उन्हें गलती करने की आजादी देते हैं। जब आप लोगों को जिम्मेदारी देते हैं, तो वो जिम्मेदारी से काम करना सीखते हैं। लेकिन अगर आप हर छोटी चीज पर टोका-टाकी करेंगे, तो आपकी टीम कभी बड़ी सोच नहीं पाएगी। वो बस आपके आदेश का इंतजार करने वाले कठपुतली बन जाएंगे।
ब्रैनसन कहते हैं कि गलतियां करना बिजनेस का हिस्सा है। अगर आपकी टीम से कोई गलती होती है, तो उन्हें सूली पर चढ़ाने के बजाय यह देखिए कि उन्होंने उससे क्या सीखा। जब आप डेलीगेट करते हैं, तो आपके पास बड़े विजन पर काम करने का समय बचता है। एक लीडर का काम जहाज का इंजन चलाना नहीं, बल्कि यह तय करना है कि जहाज किस दिशा में जा रहा है। अगर आप इंजन के पास ही बैठे रहेंगे, तो सामने आने वाले पहाड़ को कभी नहीं देख पाएंगे। इसलिए, अपनी टीम को सशक्त बनाइए। उन्हें फैसले लेने दीजिए। हो सकता है वो आपसे अलग तरीके से काम करें, और शायद वो तरीका आपके तरीके से ज्यादा बेहतर हो। जिस दिन आप अपनी ईगो छोड़कर दूसरों की काबिलियत पर दांव लगाना सीख जाएंगे, उस दिन आप एक साधारण मैनेजर से एक महान विजनरी लीडर बन जाएंगे।
तो दोस्तों, क्या आप भी रिचर्ड ब्रैनसन की तरह एक बिंदास और कामयाब लीडर बनना चाहते हैं। आज ही अपने काम करने के तरीके को बदलिए। अपनी टीम को सुनना शुरू कीजिए, ऑफिस के माहौल को खुशनुमा बनाइए और लोगों पर भरोसा करना सीखिए। अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया, तो इसे अपने उस बॉस या दोस्त के साथ शेयर कीजिए जिसे आज इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। कमेंट में बताइए कि इन ३ लेसन्स में से आपको सबसे अच्छा कौन सा लगा।
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