क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो भारी भरकम एमबीए की डिग्री लेकर और फैंसी ऑफिस खोलकर खुद को अगला अंबानी समझ रहे हैं। अगर हां तो मुबारक हो आप बहुत जल्द सड़क पर आने वाले हैं। असली बिजनेस किताबी थ्योरी से नहीं बल्कि उस स्ट्रीट स्मार्ट नैक से चलता है जो आपके पास शायद है ही नहीं।
लेकिन फिक्र मत कीजिए। आज हम नॉर्म ब्रॉडस्की की किताब द नैक से वो कड़वे सच और प्रैक्टिकल तरीके सीखेंगे जो आपको एक असली और मुनाफे वाला बिजनेसमैन बनने में मदद करेंगे। चलिए शुरू करते हैं इन ३ बड़े लेसन्स के साथ।
लेसन १ : सेल्स और रेवेन्यू के चक्कर में प्रॉफिट को मत भूल जाना
अक्सर नए नए जोश में आए एंटरप्रेन्योर्स को लगता है कि अगर उनका बैंक बैलेंस बढ़ रहा है और सेल्स के आंकड़े ऊपर जा रहे हैं तो वो बिजनेस के राजा बन चुके हैं। लेकिन सच तो यह है कि बिना प्रॉफिट के सेल्स सिर्फ एक ईगो बूस्टर है जो आपको बहुत जल्द कंगाल कर सकता है। मान लीजिए आपने एक बहुत ही कूल दिखने वाला चश्मा बेचना शुरू किया। आपने मार्केटिंग पर लाखों खर्च किए और हर दिन हजारों ऑर्डर भी आने लगे। आप अपने दोस्तों को पार्टी दे रहे हैं और खुद को मार्क जुकरबर्ग समझ रहे हैं। लेकिन महीने के अंत में जब आप हिसाब करते हैं तो पता चलता है कि चश्मा बनाने और भेजने का खर्चा उसकी कीमत से भी ज्यादा था। मुबारक हो आपने अपनी जेब से पैसे देकर लोगों को चश्मा पहनाया है।
स्ट्रीट स्मार्ट बिजनेसमैन सबसे पहले अपना ग्रॉस मार्जिन देखता है। वो यह नहीं देखता कि उसने कितने करोड़ का माल बेचा बल्कि यह देखता है कि टैक्स और सारे खर्चे काटने के बाद उसकी जेब में असल में कितना पैसा बचा। अगर आपकी दुकान के बाहर लाइन लगी है लेकिन हर कस्टमर पर आप नुकसान झेल रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं बल्कि चैरिटी कर रहे हैं। और चैरिटी करने के लिए भी पहले पैसा कमाना पड़ता है जो आप कर नहीं पा रहे हैं। नॉर्म ब्रॉडस्की कहते हैं कि असली जादू सेल्स में नहीं बल्कि नंबर्स के खेल में छिपा है।
हमारे पड़ोस के शर्मा जी को ही देख लीजिए। उन्होंने बड़ी धूम धाम से एक मोबाइल एक्सेसरीज की दुकान खोली। उन्होंने सोचा कि अगर वो मार्केट से सस्ता सामान बेचेंगे तो पूरी भीड़ उनकी तरफ खिंची चली आएगी। भीड़ तो आई लेकिन साथ में नुकसान का पहाड़ भी लाई। जब तक शर्मा जी को समझ आया कि उनकी बिजली का बिल और दुकान का किराया भी सेल्स से नहीं निकल रहा है तब तक उनका शटर गिरने की नौबत आ गई थी। वहीं दूसरी तरफ एक समझदार दुकानदार थोड़े कम कस्टमर रखता है लेकिन हर डील में अपना मुनाफा पक्का करता है।
असली एंटरप्रेन्योर बनने का मतलब यह नहीं है कि आप दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी खड़ा करने का सपना देखें। बल्कि इसका मतलब यह है कि आप एक ऐसी कंपनी बनाएं जो खुद का खर्चा उठा सके और आपको अमीर बना सके। अगर आप सिर्फ रेवेन्यू के पीछे भागेंगे तो आप उस चूहे की तरह हैं जो पहिए पर दौड़ रहा है। बहुत मेहनत कर रहा है लेकिन पहुँच कहीं नहीं रहा है। इसलिए अगली बार जब आप कोई नई डील साइन करें या कोई नया प्रोडक्ट लॉन्च करें तो अपनी कैलकुलेटर निकालें और देखें कि उसमें आपका क्या फायदा है। अगर फायदा नहीं है तो उस डील को टाटा बाय बाय कहने की हिम्मत रखें। याद रखिए बिजनेस में इज्जत बैंक बैलेंस से आती है खोखली वाहवाही से नहीं।
लेसन २ : कस्टमर की चिकनी चुपड़ी बातों में न आएं और अपनी वैल्यू पहचानें
जब आप बिजनेस की दुनिया में नए होते हैं तो आपको लगता है कि हर आने वाला कस्टमर भगवान का रूप है। लेकिन हकीकत में कुछ कस्टमर आपके बिजनेस के लिए उस बिन बुलाए मेहमान की तरह होते हैं जो सारा खाना भी खा जाते हैं और जाते जाते नमक कम होने की शिकायत भी करते हैं। स्ट्रीट स्मार्ट बनने का दूसरा लेसन यही है कि आपको हर किसी को खुश करने की जरूरत नहीं है। अगर आप सबको खुश करने निकलेंगे तो अंत में आप खुद दुखी होकर घर बैठेंगे।
जरा सोचिए आपके पास एक क्लाइंट आता है जो कहता है कि आपका काम तो बहुत बढ़िया है लेकिन बजट थोड़ा कम है। वो आपको बड़े बड़े सपने दिखाएगा कि अगर आपने इस बार कम पैसों में काम कर दिया तो वो अगले महीने आपको करोड़ों का प्रोजेक्ट देगा। ये वही बात है जैसे कोई लड़का किसी लड़की से कहे कि अभी तुम ऑटो का किराया दे दो शादी के बाद मैं तुम्हें प्राइवेट जेट में घुमाऊंगा। हम सबको पता है कि न वो जेट आने वाला है और न ही वो करोड़ों का प्रोजेक्ट। अगर आप अपनी सर्विस या प्रोडक्ट की वैल्यू खुद नहीं करेंगे तो मार्केट आपको कौड़ियों के दाम पर खरीदेगा।
नॉर्म ब्रॉडस्की कहते हैं कि एक अच्छा बिजनेसमैन वो नहीं है जो हर ऑर्डर पकड़ ले बल्कि वो है जिसे पता हो कि कब मना करना है। अगर कोई कस्टमर आपसे बहुत ज्यादा डिस्काउंट मांग रहा है या बहुत ज्यादा नखरे दिखा रहा है तो समझ जाइए कि वो आपका आइडियल कस्टमर नहीं है। ऐसे लोग आपका सबसे ज्यादा वक्त और एनर्जी बर्बाद करते हैं और मुनाफे के नाम पर सिर्फ सिरदर्द देते हैं। मान लीजिए आप एक ग्राफिक डिजाइनर हैं और एक क्लाइंट आपसे दस बार लोगो चेंज करवाता है और अंत में कहता है कि मजा नहीं आया। ऐसे में आपका जो टाइम खराब हुआ उसकी भरपाई कौन करेगा।
असली समझदारी इस बात में है कि आप अपने लिए एक स्टैंडर्ड सेट करें। हमारे एक दोस्त ने कैटरिंग का बिजनेस शुरू किया था। शुरुआत में उन्होंने हर छोटे बड़े ऑर्डर को हां कहना शुरू कर दिया। नतीजा ये हुआ कि वो दिन रात पागलों की तरह काम कर रहे थे लेकिन जेब खाली थी। फिर उन्होंने एक नियम बनाया कि वो एक तय रकम से कम का ऑर्डर नहीं लेंगे और अपनी क्वालिटी पर कोई समझौता नहीं करेंगे। शुरू में कुछ लोग नाराज हुए लेकिन धीरे धीरे उनके पास सिर्फ वही लोग आए जो क्वालिटी की कद्र करते थे।
बिजनेस में सर्वाइवल का मतलब ये नहीं है कि आप गिरगिट की तरह हर किसी के हिसाब से अपना रंग बदलें। बल्कि इसका मतलब ये है कि आप अपनी एक अलग पहचान बनाएं। जब आप ना कहना सीख जाते हैं तो मार्केट में आपकी इज्जत बढ़ जाती है। लोग समझ जाते हैं कि ये बंदा सस्ता नहीं बल्कि अच्छा काम करता है। याद रखिए मार्केट में सस्ते माल की कमी नहीं है लेकिन भरोसेमंद और वैल्यू देने वाले लोग बहुत कम हैं। तो क्या आप वो भरोसेमंद खिलाड़ी बनने के लिए तैयार हैं या फिर बस भीड़ का हिस्सा बनकर रहना चाहते हैं।
लेसन ३ : मुश्किलों में पैनिक नहीं बल्कि प्लान की जरूरत होती है
बिजनेस करना कोई मखमल की सेज नहीं है। यहाँ हर दूसरे दिन कोई न कोई ऐसी मुसीबत आएगी जो आपको रात की नींद और दिन का चैन छीन लेगी। कभी आपका सबसे भरोसेमंद एम्प्लॉई नौकरी छोड़ देगा तो कभी कोई बड़ा क्लाइंट पैसे देने में नखरे करेगा। ऐसे समय में एक आम इंसान घबरा जाता है और हाथ पैर फूलने लगते हैं। लेकिन एक स्ट्रीट स्मार्ट एंटरप्रेन्योर जानता है कि रोने धोने से बिल नहीं भरते। जब जहाज में छेद हो जाए तो पानी निकालने पर ध्यान दिया जाता है न कि यह चिल्लाने पर कि छेद किसने किया।
कल्पना कीजिए कि आपने एक शानदार रेस्टोरेंट खोला है। सब कुछ बढ़िया चल रहा है लेकिन अचानक शहर में लॉकडाउन लग जाता है या आपके एरिया की बिजली काट दी जाती है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला ये कि आप सिर पकड़कर बैठ जाएं और अपनी किस्मत को कोसें। दूसरा रास्ता ये है कि आप तुरंत अपना दिमाग चलाएं और देखें कि इस सिचुएशन में भी क्या किया जा सकता है। क्या आप होम डिलीवरी शुरू कर सकते हैं। क्या आप कोई ऐसा मेनू बना सकते हैं जिसमें कम बिजली की जरूरत हो। जो इंसान बुरे वक्त में अपना दिमाग ठंडा रखता है वही असल में लंबी रेस का घोड़ा होता है।
नॉर्म ब्रॉडस्की अपनी किताब द नैक में बताते हैं कि जब उनके बिजनेस पर बड़ी मुसीबत आई थी तो उन्होंने पैनिक बटन दबाने के बजाय शांत बैठकर हर छोटी चीज का हिसाब लगाया। उन्होंने उन गलतियों को पहचाना जो वो अब तक करते आ रहे थे। याद रखिए हार तब नहीं होती जब आप गिरते हैं बल्कि हार तब होती है जब आप उठने से मना कर देते हैं। बिजनेस में फेल होना कोई पाप नहीं है लेकिन फेलियर से कुछ न सीखना बहुत बड़ी बेवकूफी है।
हमारे एक और परिचित हैं जिन्होंने अपना छोटा सा गारमेंट स्टोर खोला था। अचानक पास में एक बड़ा मॉल खुल गया। सबने कहा कि अब इनका धंधा चौपट हो जाएगा। उन्होंने घबराने के बजाय अपनी स्ट्रेंथ पर काम किया। उन्होंने मॉल के उलट अपने कस्टमर्स को पर्सनल टच देना शुरू किया। वो हर कस्टमर को नाम से बुलाते थे और उनकी पसंद का ध्यान रखते थे। नतीजा ये हुआ कि लोग मॉल की चकाचौंध छोड़कर उनकी छोटी दुकान पर वापस आने लगे क्योंकि मॉल में डिस्काउंट तो था पर वो अपनापन नहीं था।
मुसीबतें आपके बिजनेस का अंत नहीं बल्कि एक नया मोड़ होती हैं। अगर आप डटकर खड़े रहेंगे तो रास्ता अपने आप मिल जाएगा। जब भी कोई समस्या आए तो खुद से पूछिए कि क्या यह सच में इतनी बड़ी है या मैं इसे अपनी घबराहट से बड़ा बना रहा हूँ। एक सच्चा लीडर वही है जो तूफान में भी अपनी टीम को शांत रख सके और सही दिशा दिखा सके। अगर आपमें यह नैक है तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती।
तो दोस्तों, बिजनेस की दुनिया में कदम रखना हिम्मत का काम है और उसे चलाते रहना अक्ल का काम है। चाहे नंबर्स का खेल हो कस्टमर को ना कहना हो या मुश्किलों का सामना करना हो आपकी स्ट्रीट स्मार्टनेस ही आपका सबसे बड़ा हथियार है। आज ही अपने अंदर के उस चालाक और समझदार बिजनेसमैन को जगाइए और अपनी सफलता की कहानी लिखना शुरू कीजिए।
क्या आप भी अपनी लाइफ में किसी बिजनेस आईडिया पर काम कर रहे हैं या सिर्फ ख्याली पुलाव पका रहे हैं। नीचे कमेंट में हमें बताएं कि कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा पसंद आया और आप इसे अपने काम में कैसे इस्तेमाल करेंगे। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो एमबीए की डिग्री के भरोसे बैठा है ताकि उसे भी असली दुनिया की समझ मिल सके।
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